Author name: Team Bhaktisatsang

भक्ति सत्संग वेबसाइट ईश्वरीय भक्ति में ओतप्रोत रहने वाले उन सभी मनुष्यो के लिए एक आध्यात्मिक यात्रा है, जिन्हे अपने निज जीवन में सदैव ईश्वर और ईश्वरत्व का एहसास रहा है और महाज्ञानियो द्वारा बतलाये गए सत के पथ पर चलने हेतु तत्पर है | यहाँ पधारने के लिए आप सभी महानुभावो को कोटि कोटि प्रणाम

ऋणमोचक मंगल स्तोत्र

ऋणमोचक मंगल स्तोत्र मङ्गलो भूमिपुत्रश्च ऋणहर्ता धनप्रदः । स्थिरासनो महाकयः सर्वकर्मविरोधकः ॥1।। लोहितो लोहिताक्षश्च सामगानां कृपाकरः । धरात्मजः कुजो भौमो भूतिदो भूमिनन्दनः॥2।। अङ्गारको यमश्चैव सर्वरोगापहारकः । व्रुष्टेः कर्ताऽपहर्ता च सर्वकामफलप्रदः॥3।। […]

अथ ऋग्वेदोक्तं देवीसूक्तं मंत्र

अथ ऋग्वेदोक्तं देवीसूक्तं मंत्र  ॐ अहं रुद्रेभिर्वसुभिश्चराम्यहमादित्यैरुत विश्वदेवैः । अहं मित्रावरुणोभा बिभर्म्यहमि॓न्द्राग्नी अहमश्विनोभा ॥1॥ अहं सोममाहनसं बिभर्म्यहं त्वष्टारमु॒त पूषणं भगम् । अहं दधामि द्रविणं हविष्मते सुप्राव्ये ये॑ ‍ यजमानाय सुन्वते

राम मानस के सिद्ध मंत्र

मानस के सिद्ध मंत्र : १॰ विपत्ति-नाश के लिये “राजिव नयन धरें धनु सायक। भगत बिपति भंजन सुखदायक।।” २॰ संकट-नाश के लिये “जौं प्रभु दीन दयालु कहावा। आरति हरन बेद

भुवनेश्वरी ध्यानम् मंत्र

  भुवनेश्वरी ध्यानम् मंत्र उद्यद्दिनद्युतिमिन्दुकिरीटां तुङ्गकुचां नयनत्रययुक्ताम् । स्मेरमुखीं वरदाङ्कुशपाशां_ ऽभीतिकरां प्रभजे भुवनेशीम् ॥१॥ सिन्दूरारुणविग्रहां त्रिनयनां माणिक्यमौलिस्फुरत् । तारानायकशेखरां स्मितमुखीमापीनवक्षोरुहाम् ॥ पाणिभ्यामलिपूर्णरत्नचषकं संविभ्रतीं शाश्वतीं । सौम्यां रत्नघटस्थमध्यचरणां द्यायेत्परामम्बिकाम् ॥२॥

मत्स्य पुराण – Matsya Puran

मत्स्य पुराण हिंदी में – Matsya Puran in Hindi मत्स्य पुराण (Matsya Purana) अष्टादश पुराणों (18 Puran) में से एक मुख्य पुराण है। इसमें 14 हजार श्लोक एवं 291 अध्याय

राम सहस्त्रनाम स्त्रोतम – Ram sahastranaam Stotram

श्रीराम सहस्रनामस्तोत्र – Ram Sahastranaam Stotram श्रीराघवं दशरथात्मजमप्रमेयंसीतापतिं रघुकुलान्वयरत्नदीपम् आजानुबाहुमरविन्ददलायताक्षंरामं निशाचरविनाशकरं नमामि वैदेहीसहितं सुरद्रुमतले हैमे महामण्डपेमध्ये पुष्पकमासने मणिमये वीरासने सुस्थितम् अग्रे वाचयति प्रभञ्जनसुते तत्त्ं मुनिभ्यः परंव्याख्यान्तं भरतादिभिः परिवृतं रामं भजे

शनि अष्टोत्तरशतनाम

शनि अष्टोत्तरशतनामावलिः शनि बीज मन्त्र ॐ प्राँ प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः ॥ ॐ शनैश्चराय नमः ॥ ॐ शान्ताय नमः ॥ ॐ सर्वाभीष्टप्रदायिने नमः ॥ ॐ शरण्याय नमः ॥ ॐ

HANUMAN-SAHASSTRANAM

हनुमान सहस्त्रनाम स्त्रोत- Hanuman Sahasranamam

हनुमान सहस्त्र नामावली – Hanuman Sahasranamam हनुमत्सहस्त्रनाम (Hanuman Sahasranama) का वर्णन ‘बृहज्ज्योतिषार्णव ’ में किया गया है । सर्वप्रथम श्री रामचंद्रजी ने हनुमान सहस्त्रनाम (Lord Hanuman 1008 Names) से हनुमानजी

अग्नि पुराण – Agni Puran

अग्नि पुराण – Agni Puran In Hindi अग्नि पुराण ज्ञान का विशाल भण्डार है। स्वयं अग्निदेव ने इसे महर्षि वसिष्ठ को सुनाते हुए कहा था – आग्नेये हि पुराणेऽस्मिन् सर्वा विद्या: प्रदर्शिता:

108 उपनिषद के नाम और 11 मुख्य उपनिषद

108 उपनिषद के नाम – 11 मुख्य उपनिषद हिन्दू धर्म के अनुसार कुल मिलाकर 108 उपनिषद् वर्णित है, यह सारे उपनिषद वास्तविक रूप से हिन्दू धर्म की दार्शनिक अवधारणा एवं विचारो

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