Author name: Team Bhaktisatsang

भक्ति सत्संग वेबसाइट ईश्वरीय भक्ति में ओतप्रोत रहने वाले उन सभी मनुष्यो के लिए एक आध्यात्मिक यात्रा है, जिन्हे अपने निज जीवन में सदैव ईश्वर और ईश्वरत्व का एहसास रहा है और महाज्ञानियो द्वारा बतलाये गए सत के पथ पर चलने हेतु तत्पर है | यहाँ पधारने के लिए आप सभी महानुभावो को कोटि कोटि प्रणाम

भगवान शिव के 19 अवतार

भगवान शिव के अवतार – Avatar of Lord Shiva Lord Shiva Avatar – शिव महापुराण में भगवान शिव के अनेक अवतारों का वर्णन मिलता है, लेकिन बहुत ही कम लोग इन […]

श्वेताश्वतरोपनिषद – जगत का मूल कारण और उत्पत्ति को दर्शाता उपनिषद

कृष्ण यजुर्वेद शाखा के इस उपनिषद में छह अध्याय हैं। इनमें जगत का मूल कारण, ॐकार-साधना, परमात्मतत्त्व से साक्षात्कार, ध्यानयोग, योग-साधना, जगत की उत्पत्ति, संचालन और विलय का कारण, विद्या-अविद्या,

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अत्यंत सरल ध्यान योग (मैडिटेशन) विधि – ध्यान लगाने की विधि

मैडिटेशन- ध्यान योग – Meditation in Hindi  मेडिटेशन (dhyan yog) का लक्ष्य एकाग्रता और मन की शान्ति को प्राप्त करना है, और इस प्रकार अंततः ध्यान योग अर्थात मैडिटेशन (mindfulness) का

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जाने ह्रदय रेखा का रहस्य – Heart Line In Palmistry

Heart Line Palmistry – ह्रदय रेखा  Hriday Rekha – ह्रदय रेखा द्वारा विपरीत लिंगों के बीच आकर्षण, प्रेम, रोमांटिक जीवन की प्रकृति, जीवन साथी कैसा होगा, प्रेम का बने रहना इत्यादि

सामवेदोपनिषद – साम के भेदों और ॐ की उत्पत्ति का वर्णन करता उपनिषद

सामवेद के उपनिषद छान्दोग्योपनिषद  यह अत्यंत प्राचीन उपनिषद है। तलवकार शाखा के छान्दोग्य ब्रह्मण के अंतिम ८ अध्याय इस उपनिषद के रूप में प्रसिद्द है। यह विशालकाय प्राचीन गद्यात्मक उपनिषद

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जानिए नक्षत्रो के अद्भुत संस्कार को

जानिए नक्षत्रो के अद्भुत संस्कार को नक्षत्र का सिद्धांत भारतीय वैदिक ज्योतिष में पाया जाता है। यह पद्धति संसार की अन्य प्रचलित ज्योतिष पद्धतियों से अधिक सटीक व अचूक मानी

भगवान शंकर के अवतार आदि शंकराचार्य

भगवान शंकर के अवतार आदि शंकराचार्य पूरा नाम – आदि शंकराचार्य जन्म– 788 ई. जन्म भूमि– कालडी़ ग्राम, केरल मृत्यु– 820 ई. मृत्यु स्थान– केदारनाथ, उत्तराखण्ड गुरु– गोविन्द योगी कर्म भूमि- भारत कर्म-क्षेत्र- दार्शनिक, संत, संस्कृत साहित्यकार मुख्य

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कैसे करे भोजन द्वारा ग्रहो को अपने पक्ष में

कैसे करे भोजन द्वारा ग्रहो को अपने पक्ष में हम अपने आहार द्वारा भी ग्रहों को बल दे सकते हैं जैसे :- सूर्य अगर मजबूत हो तो हमें मान सम्मान, सुख समृध्धि मिलती  है|  १ पिता का संग और सहयोग मिलता है|१ अगरसूर्य कमजोर हो तो मुंह में थूक ज्यादा बनेगा, पिता से नहीं बनेगी, सरकार से परेशानी रहेगी|  सूर्य को बल देने के लिए चौकर वालेआटे कि रोटी खाएं , फल अधिक खाएं निहार मुंहगुड़ खाकर ऊपर से पानी पियें|  १ ग्वारठाका  सेवन करें| चन्द्र: माँ से दूरी बन जाये, जातक वहमी हो जाये, हाथपैर शिथिल पड़ जाएँ| चेहरे पर दागधब्बे पड़  जाएँ, मन में उमंग ख़ुशी न रहे तो समझेंचंदरमा खराब है| चंद्रमा को ठीक करने के लिए दूध में हरी इलायची डालकर पियें१ खीर खाएं,केवडा डालकरचांदी के गिलास में पानी, दूध पियें लीची|

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जानिए राशियों से जुड़े नौकरी और व्यवसाय

जानिए राशियों से जुड़े नौकरी और व्यवसाय 1.मेष पुलिस अथवा सेना की नौकरी, इंजीनियरिंग, फौजदारी का वकील, सर्जन, ड्राइविंग, घड़ी का कार्य, रेडियो व टी.वी. का निर्माण या मरम्मत, विद्युत

सदगुरु ओशो – एक वैचारिक क्रांति

ओशो का परिचय देना आकाश को मुट्ठी में बांधने जैसा असंभव काम है… और किस ओशो का परिचय दिया जाए- मृण्मय दीपक का अथवा चिन्मय ज्योति का? चैतन्य की वह

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