Author name: Team Bhaktisatsang

भक्ति सत्संग वेबसाइट ईश्वरीय भक्ति में ओतप्रोत रहने वाले उन सभी मनुष्यो के लिए एक आध्यात्मिक यात्रा है, जिन्हे अपने निज जीवन में सदैव ईश्वर और ईश्वरत्व का एहसास रहा है और महाज्ञानियो द्वारा बतलाये गए सत के पथ पर चलने हेतु तत्पर है | यहाँ पधारने के लिए आप सभी महानुभावो को कोटि कोटि प्रणाम

नीलम रत्न – शनि गृह को बलवान करने और भाग्य चमकाने का सर्वोत्तम उपाय

नीलम रत्न – Neelam Ratna  शनि ग्रह राशि रत्‍न नीलम (Neelam Ratna) जिसे अंग्रेजी में ‘Blue Sapphire Stone‘ कहते हैं वास्‍तव में उसी श्रेणी का रत्‍न है जिसमें माणिक रत्‍न आता […]

मोती रत्न – चन्द्रमा को बल और मानसिक शांति का सर्वोत्तम उपाय

मोती रत्न – चन्द्रमा को बल और मानसिक शांति का सर्वोत्तम उपाय वैदिक ज्योतिष के अनुसार चन्द्रमा का प्रत्येक कुंडली में विशेष महत्व है तथा किसी कुंडली में चन्द्रमा का

माणिक्य रत्न – सूर्य को बल और उसका प्रतिनिधित्व करने वाला अनमोल रत्न

माणिक्य रत्न – सूर्य को बल और उसका प्रतिनिधित्व करने वाला अनमोल रत्न आज के परिवेश में आमतौर पर हर व्यक्ति रत्नों (Gems) के चमत्कारी प्रभावों का लाभ उठा कर

जाने हाथ मे बने चिन्ह – स्टार, आइलैंड, क्रॉस का रहस्य

हाथ मे बने चिन्ह – स्टार, आइलैंड, क्रॉस का रहस्य इस दुनियां में जो व्यक्ति जन्म लेता है उनका भाग्य ईश्वर जन्म के साथ ही निर्धारित कर देता है। ईश्वर

चिंतपूर्णी माता का मंदिर – 51 शक्ति पीठो मे से एक जहा माता सती के चरण गिरे थे

चिंतपूर्णी माता – Chintpurni Mata नौ देवियों में से पांच देवियो के मंदिर हिमाचल प्रदेश में ही स्थित हैं। इनमें माता चिंतपूर्णी के बारे में कहा जाता है कि वे

कर्मयोग (karma yoga) – भगवत गीता, श्री राम शर्मा आचार्य और सद गुरु के अनुसार

कर्मयोग | karma yoga “अनासक्त भाव से कर्म करना”। कर्म के सही स्वरूप का ज्ञान। कर्मयोग दो शब्दों से मिलकर बना है – ‘कर्म’ तथा ‘योग’ । कर्मयोग के सन्दर्भ

मुण्डकोपनिषद – मस्तिक्ष को अत्यधिक शक्ति देने वाला

मुण्डकोपनिषद – Mundakopnishad Pdf मदकू द्वीप मुण्डकोपनिषद के रचयिता ऋषि माण्डूक्य की तप स्थली रही है। यही पर उन्होंने इसकी रचना करी थी, मुण्डकोपनिषद अथर्ववेद की शौनकीय शाखा से सम्बन्धित

जीवन में तरक्की के लिए अपशकुनों को पहचाने, करे लाल किताब के सरल उपाय

लाल किताब अनुसार शकुन – अपशकुन टोटके  शकुन-अपशकुन की अवधारणा हमारे भारतवर्ष में प्राचीन समय से ही रही है। आज के वैज्ञानिक युग में आदमी चांद, मंगल और शुक्र ग्रह पर

Kundalini Shakti – कुण्डलिनी शक्ति का भेद और जाग्रत करने के बीज मन्त्र

Kundalini Shakti – कुण्डलिनी शक्ति  कुण्डलिनी योग (Kundalin Yoga) के अंतर्गत कुण्डलिनी शक्ति (Kundalini Shakti) का शक्तिपात विधान से कुण्डलिनी चक्र (Kundalini Chakra) जागरण का वर्णन अनेक ग्रंथों में मिलता

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