धार्मिक यात्रा

51 शक्ति पीठो मे से एक माता – जहा माता सती के चरण गिरे थे

चिंतपूर्णी माता – Chintpurni Mata

नौ देवियों में से पांच देवियो के मंदिर हिमाचल प्रदेश में ही स्थित हैं। इनमें माता चिंतपूर्णी के बारे में कहा जाता है कि वे मन की हर तरह की चिंता को दूर कर सुख प्रदान करती हैं। वे पहाड़ों की नौ देवियों और देश के 51 शक्तिपीठों में से एक हैं। चिंतपूर्णी देवी का मंदिर हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में स्थित है।

चिंतपूर्णी माता – Chintpurni Mata Temple

TEMPLE-mata_chintpurniयह स्थान हिंदुओं के प्रमुख धार्मिक स्थलो में से एक है। यह 51 शक्ति पीठो मे से एक है। यहां पर माता सती के चरण गिर थे। इस स्थान पर प्रकृति का सुंदर नजारा देखने को मिल जाता है। यात्रा मार्ग में काफी सारे मनमोहक दृश्य यात्रियो का मन मोह लेते है और उनपर एक अमिट छाप छोड़ देते है। यहां पर आकर माता के भक्तों को आध्यात्मिक आंनद की प्राप्ति होती है। चिंतपूर्णी माता अर्थात चिंता को पूर्ण करनेवाली देवी चिंतपूर्णी देवी का यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना में स्थित है | वे पहाड़ों की नौ देवियों में से एक हैं।

चिंतपूर्णी माता मंदिर का इतिहास – Chintpurni Mata History In Hindi

चिंतपूर्णी मंदिर का इतिहास एक प्रसिद्ध कथा के साथ संबंधित है। यहां पर शिव तांडव के दौरान माता सती के चरण गिर थे। इसलिए भक्तों में माता चरणों का स्पर्श करने को लेकर अगाध श्रद्धा है। चिंतपूर्णी देवी का मंदिर हिमाचल प्रदेश के सोला सिग्ही श्रेणी की पहाड़ी पर छपरोह गांव में स्थित है। अब ये स्थान चिंतपूर्णी के नाम से ही जाना जाता है। कहा जाता है चिंतपूर्णी देवी की खोज भक्त माई दास ने की थी। माई दास पटियाला रियासत के अठरनामी गांव के निवासी थे। वे मां के अनन्य भक्त थे। उनकी चिंता का निवारण माता ने सपने में आकर किया था। मंदिर के पास भक्त माईदास का ढूंढा हुआ सरोवर भी है जिसके जल से वे माता की नियमित पूजा किया करते थे। अभी भी भक्त इस सुंदर तालाब से जल लेकर माता की पूजा करते हैं। तालाब तक जाने के लिए 200 सीढ़ियां उतरनी पड़ती है। मां के मंदिर का मुख्य प्रसाद हलवा है।

माता के यहाँ पिंडी रूप में पूजा होती है यहाँ पर सती के चरण गिरे थे कहते है की चिंतपूर्णी देवी का एक बार दर्शन मात्र करने से समस्त चिन्ताओ से मुक्ति मिलती है इसे छिन्नमस्तिका देवी भी कहते है श्री मार्कंडेय पुराण के अनुसार जब माँ चंडी ने राक्षसों का संहार करके विजय प्राप्त की तो माता की सहायक योगिनियाँ अजया और विजया की रुधिर पिपासा को शांत करने के लिए अपना मस्तक काटकर, अपने रक्त से उनकी प्यास बुझाई इसलिए माता का नाम छिन्नमस्तिका देवी पड़ गया प्राचीन ग्रंथो के अनुसार छिन्नमस्तिका देवी के निवास के लिए मुख्य लक्षण यह माना गया है की वह स्थान चारों और से शिव मंदिरों से घिरा रहेगा और यह लक्षण चिंतपूर्णी में शत प्रतिशत सत्य प्रतीत होता है क्योकि चिंतपूर्णी मंदिर के पूर्व में कालेश्वर महादेव,पश्चिम में नर्हारा महादेव,उत्तर में मुच्कुंड महादेव और दक्षिण में शिववाड़ी है मंदिर के प्रांगन में पेड़ के तने पर नाल बाँधकर अपनी मनोकामना देवी से मांगते है |

चिंतपूर्णी मंदिर, ऊना में समुद्र स्तर से ऊपर 940 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह एक महत्‍वपूर्ण और पवित्र शक्तिपीठ है जो हिंदू धर्म की देवी को समर्पित है। मंदिर से हिल स्‍टेशन भारवेन की दूरी मात्र 3 किमी. है। इस मंदिर को सारस्वत पंडित माई दास द्वारा स्‍थापित किया गया था। मंदिर का मुख्‍य आकर्षण एक गर्भ ग्रह और गर्भग्रह अंतरतम है जहां देवी की प्रतिमा स्‍थापित है। इस पत्‍थर के मंदिर में उत्‍तर दिशा में कई प्रवेश द्वार है। यहां आकर श्रद्धालु कई देवी- देवताओं की प्रतिमा के दर्शन कर सकते हैं। यहां स्थित देवी की मूर्ति को पिंडी के नाम से जाना जाता है जो सफेद संगमरमर की बनी हुई है।

चिंतपूर्णी मंदिर का समय – Chintpurni Temple Timings

Opening and Closing Time
Winter : 5:30 AM- 9:30 PM
Summer : 4:00 AM- 10:00 PM

चिंतपूर्णी माता की आरती – Chintpurni Mata Aarti

Morning Aarti -6:00 AM
Evening Aarti – 8:00 PM
मंदिर आरती के समय थोड़ी देर के लिए बंद हो जाता है।

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मंदिर के पश्चिमी भाग में हनुमान जी का मंदिर है। मंदिर परिसर में एक बरगद का वृक्ष है जहां बच्‍चों का मुंड़न संस्‍कार किया जाता है। हर साल यहां तीन बार चिंतपूर्णी मेला लगता है जिन्‍हे हिंदू महीने के अनुसार, चैत्र, सावन और अषाढ़ में लगाया जाता है। नवरात्र के दौरान यहां के माहौल में हलचल रहती है और नौ दिन तक श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं।

नवरात्र में विशाल मेला – Navratri Special

चिंतपूर्णी मंदिर में चैत्र और शरद नवरात्र के समय विशाल मेला लगता है। तब यहां लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर के आसपास आधा किलोमीटर लंबा सुंदर बाजार है। चिंतपूर्णी में पंजाब के अलग-अलग शहरों के लोगों ने रहने के लिए कई धर्मशालाओं का भी निर्माण कराया है।चिंतपूर्णी मंदिर में चैत्र और शरद नवरात्र के समय विशाल मेला लगता है। तब यहां लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर के आसपास आधा किलोमीटर लंबा सुंदर बाजार है। चिंतपूर्णी में पंजाब के अलग-अलग शहरों के लोगों ने रहने के लिए कई धर्मशालाओं का भी निर्माण कराया है।

चिंतपूर्णी मंदिर कैसे पहुंचे – How To Reach Chintpurni Mata

यह मंदिर ऊना जिले के हिल स्टेशन भरवाई से मात्र तीन किलोमीटर की दूरी पर है। यहां पहुंचने के लिए पंजाब के होशियारपुर शहर से बसें मिल जाती हैं। यह पुनीत स्थल पंजाब के होशियारपुर रेलवे स्टेशन से कोई 50किलोमीटर की दूरी पर है। वैसे यहां पठानकोट जोगिंदर नगर रेल मार्ग से भी पहुंचा जा सकता है

वैसे यहां तक पहुंचने के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन ज्वालामुखी रोड है जो यहां से21 किलोमीटर की दूरी पर है। मंदिर के पास अतिथियों के रहने के लिए कई आवास बने हुए है।यहां धर्मशालाएं और कुछ गेस्ट हाउस बने हैं। आप पंजाब के शहर होशियारपुर या जालंधर से एक दिन में चिंतपूर्णी जाकर लौट भी सकते हैं। पंजाब और हिमाचल के कई जिलों से श्रद्धालु माता चिंतपूर्णी के लिए साइकिल अथवा बाइक से यात्रा भी निकालते हैं। चिंतपूर्णी के मार्ग पर कई साकिल जत्थों को मंदिर की ओर जाते हुए देखा जा सकता है।

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