धार्मिक यात्रा

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर,राजस्थान – जानिए कथा, दर्शन समय और मेहंदीपुर बालाजी के नियम

mehandipur-balaji-temple

मेहंदीपुर बालाजी – Mehandipur Balaji

राजस्थान के सवाई माधोपुर और जयपुर की  सीमा रेखा पर स्थित मेंहदीपुर कस्बे में बालाजी का एक अतिप्रसिद्ध मन्दिर है जिसे श्री मेंहदीपुर बालाजी मन्दिर (Mehandipur Balaji Temple) के नाम से जाना जाता है । दो पहाडिय़ों के बीच की घाटी में स्थित होने के कारण इसे घाटा मेहंदीपुर (Ghata Mehandipur) भी कहते हैं। जनश्रुति है कि यह मंदिर करीब 1 हजार साल पुराना है। यहां पर एक बहुत विशाल चट्टान में हनुमान जी की आकृति स्वयं ही उभर आई थी। इसे ही श्री हनुमान जी का स्वरूप माना जाता है। इस मंदिर में बजरंग बली की बालरूप मूर्ति किसी कलाकार ने नहीं बनाई, बल्कि वह स्वयंभू है।

इस मूर्ति के सीने के बाई ओर एक अत्यन्त सूक्ष्म छिद्र है, जिससे पवित्र जल की धारा निरन्तर बह रही है। यह जल बाला जी के चरणों तले स्थित एक कुण्ड में एकत्रित होता रहता है, जिसे भक्तजन चरणामृत के रूप में अपने साथ ले जाते हैं।

बालाजी के बाल रूप की होती है पूजा – Mehandipur Balaji Temple 

mehandipur-balaji-photo

mehandipur-balaji-photo

मेंहदीपुर बालाजी (Mehandipur Balaji) का नाम भक्तों में शक्ति और सामर्थ्य के प्रतीक के रूप में विख्यात है। हनुमान जी के बाल रूप की यहां अर्चना -उपासना की जाती है। बाला जी के दरबार में भूत -प्रेतादि बाधा से ग्रस्त व्यक्तियों का उपचार बिना किसी औषधि, मंत्र-यंत्रादि के चमत्कारिक ढंग से होता है। यहां आकर प्रसाद के रूप में अर्जी करते ही रोगी व्यक्ति का उपचार आरम्भ हो जाता है। यह चमत्कार यहां सहज ही देखा जा सकता है।

इनके चरणों में छोटी सी कुण्डी है, जिसका जल कभी समाप्त नहीं होता। यह मंदिर तथा यहाँ के हनुमान जी का विग्रह काफी शक्तिशाली एवं चमत्कारिक माना जाता है तथा इसी वजह से यह स्थान न केवल राजस्थान में बल्कि पूरे देश में विख्यात है। कहा जाता है कि मुगल साम्राज्य में इस मंदिर को तोडऩे के अनेक प्रयास हुए परंतु चमत्कारी रूप से यह मंदिर को कोई नुकसान नहीं हुआ।

भूत-प्रेत बाधाओं का अचूक निवारण – Mehandipur Balaji Rajasthan (Myths)

इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है कि यहां ऊपरी बाधाओं के निवारण के लिए आने वालों का तांता लगा रहता है। मंदिर की सीमा में प्रवेश करते ही ऊपरी हवा से पीडि़त व्यक्ति स्वयं ही झूमने लगते हैं और लोहे की सांकलों से स्वयं को ही मारने लगते हैं। मार से तंग आकर भूत प्रेतादि स्वत: ही बालाजी के चरणों में आत्मसमर्पण कर देते हैं।

बाला जी महाराज के अलावा यहां श्री प्रेतराज सरकार और श्री कोतवाल कप्तान भैरव की मूर्तियां भी हैं। प्रेतराज सरकार यहां दण्डाधिकारी पद पर आसीन हैं, वहीं भैरव जी कोतवाल के पद पर। बाला जी मंदिर में प्रेतराज सरकार दण्डाधिकारी पद पर आसीन हैं। प्रेतराज सरकार के विग्रह पर भी चोला चढ़ाया जाता है। प्रेतराज सरकार को दुष्ट आत्माओं को दण्ड देने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। उनकी आरती, चालीसा, कीर्तन, भजन भक्ति-भाव से किए जाते हैं।

मेहंदीपुर बालाजी कहाँ स्थित है  – Mehandipur Balaji Location

मंदिर राजस्थान के हिंडौन शहर के पास करौली जिले के टोडाभीम गाँव में स्थित है। गाँव दो जिलों- करौली और दौसा की सीमा पर स्थित है।मंदिर जयपुर शहर से 66 किमी दूर है, बालाजी मंदिर की दूरी हिंदौन सिटी रेलवे स्टेशन से लगभग 45 किमी और दौसा से 38 किमी है और बांदीकुई रेलवे स्टेशन के बहुत करीब है। हनुमान मंदिर जयपुर से केवल 3 किमी की दूरी पर स्थित है।

मेहंदीपुर बालाजी की कथा – Mehandipur Balaji Story

मेहंदीपुर में यहाँ घोर जंगल था। घनी झाड़ियाँ थी, शेर-चीता, बघेरा आदि जंगल में जंगली जानवर पड़े रहते थे। चोर-डाकूऒ का इस गांव में डर था। जो बाबा महंत जी महाराज के जो पूर्वज थे, उनको स्वप्न दिखाई दिया और स्वप्न की अवस्था में वे उठ कर चल दिए उन्हें ये पता नही था कि वे कहाँ जा रहे हैं। स्वप्न की अवस्था में उन्होंने अनोखी लीला देखी एक ऒर से हज़ारों दीपक जलते आ रहे हैं। हाथी घोड़ो की आवाजें आ रही हैं। एक बहुत बड़ी फौज चली आ रही है उस फौज ने श्री बालाजी महाराज जी, श्री भैरो बाबा, श्री प्रेतराज सरकार, को प्रणाम किया और जिस रास्ते से फौज आयी उसी रास्ते से फौज चली गई।

और गोसाई महाराज वहाँ पर खड़े होकर सब कुछ देख रहे थे। उन्हें कुछ डर सा लगा और वो अपने गांव की तरफ चल दिये घर जाकर वो सोने की कोशिश करने लगे परन्तु उन्हे नींद नही आई बार-बार उसी स्वप्न के बारे में विचार करने लगे। जैसे ही उन्हें नींद आई। वो ही तीन मूर्तियाँ दिखाई दी, विशाल मंदिर दिखाई दिया और उनके कानों में वही आवाज आने लगी और कोई उनसे कह रहा बेटा उठो मेरी सेवा और पूजा का भार ग्रहण करो। मैं अपनी लीलाओं का विस्तार करूँगा। और कलयुग में अपनी शक्तियाँ दिखाऊॅंगा। यह कौन कह रहा था रात में कोई दिखाई नही दिया।

गोसाई जी महाराज इस बार भी उन्होंने इस बात का ध्यान नही दिया अंत में श्री बालाजी महाराज ने दर्शन दिए और कहा कि बेटा मेरी पूजा करो दूसरे दिन गोसाई जी महाराज उठे मूर्तियों के पास पहुंचे उन्होंने देखा कि चारों ओर से घण्टा, घडियाल और नगाड़ों की आवाज़ आ रही है किंतु कुछ दिखाई नही दिया इसके बाद गोसाई महाराज नीचे आए और अपने पास लोगों को इकट्ठा किया अपने सपने के बारे में बताया जो लोग सज्जन थे उन्होने मिल कर एक छोटी सी तिवारी बना दी लोगों ने भोग की व्यवस्था करा दी बालाजी महाराज ने उन लोगों को बहुत चमत्कार दिखाए। जो दुष्ट लोग थे उनकी समझ में कुछ नही आया।

श्री बाला जी महाराज की प्रतिमा/ विग्रह जहाँ से निकली थी, लोगों ने उन्हे देखकर सोचा कि वह कोई कला है। तो वह मूर्ति फिर से लुप्त हो गई फिर लोगों ने श्री बाला जी महाराज से क्षमा मांगी तो वो मूर्तियाँ दिखाई देने लगी। श्री बाला जी महाराज की मूर्ति के चरणों में एक कुंड है। जिसका जल कभी ख़त्म नही होता है। रहस्य यह है कि श्री बालाजी महाराज के ह्रदय के पास के छिद्र से एक बारिक जलधारा लगातार बहती है। उसी जल से भक्तों को छींटे लगते हैं।

जोकि चोला चढ़ जाने पर भी जलधारा बन्द नही होती है। इस तरह तीनों देवताओं की स्थापना हुई , श्री बाला जी महाराज जी की, प्रेतराज सरकार की, भैरो बाबा की और जो समाधि वाले बाबा हैं उनकी स्थापना बाद में हुई। श्री बालाजी महाराज ने गोसाई जी महाराज को साक्षात दर्शन दिए थे। उस समय किसी राजा का राज्य चल रहा था। समाधि वाले बाबा ने ही राजा को अपने स्वपन की बात बताई। राजा को यकीन नही आया। राजा ने मूर्ति को देखकर कहा ये कोई कला है। इससे बाबा की मूर्ति अन्दर चली गयी। तो राजा ने खुदाई करवायी तब भी मूर्ति का कोई पता नही चला। तब राजा ने हार मानकर बाबा से क्षमा मांगी और कहा हे श्री बाला जी महाराज हम अज्ञानी हैं मूर्ख हैं हम आपकी शक्ति को नही पहचान पाये हमें अपना बच्चा समझ कर क्षमा कर दो।

तब बालाजी महाराज की मूर्तियाँ बाहर आई। मूर्तियाँ बाहर आने के बाद राजा ने गोसाई जी महाराज की बातों पर यकीन किया, और गोसाई जी महाराज को पूजा का भार ग्रहण करने की आज्ञा दी। राजा ने श्री बाला जी महाराज जी का एक विशाल मन्दिर बनवाया। गोसाई जी महाराज ने श्री बाला जी महाराज जी की बहुत वर्ष तक पूजा की, जब गोसाई जी महाराज वृद्धा अवस्था में आये तो उन्होंने श्री बालाजी महाराज की आज्ञा से समाधि ले ली। उन्होंने श्री बाला जी महाराज से प्रार्थना की, कि श्री बाला जी महाराज मेरी एक इच्छा है कि आपकी सेवा और पूजा का भार मेरा ही वंश करे। तब से आज तक गोसाई जी महाराज का परिवार ही पूजा का भार सम्भाल रहे हैं। यहाँ पर लगभग 1000 वर्ष पहले बाला जी प्रकट हुए थे। बालाजी में अब से पहले 11 महंत जी सेवा कर चुके हैं। इस तरह से बालाजी की स्थापना हुई।

मेहंदीपुर बालाजी दर्शन – Mehandipur Balaji Darshan

बालाजी महाराज के मन्दिर में प्रातः और सायं लगभग चार चार घंटे पूजा होती है । पूजा में भजन आरतियों और चालीसों का गायन होता है। इस समय भक्तगण जहां पंक्तिबद्ध हो देवताओं को प्रसाद अर्पित करते हैं वहीं भूत प्रेत से ग्रस्त रोगी चीखते चिल्लाते उलट पलट होते अपना दण्ड भुगतते हैं ।

मेहंदीपुर बालाजी दर्शन का समय – Mehandipur Balaji Darshan Time

ग्रीष्मकाल : सुबह 5:00 बजे से शाम 8:00 बजे तक

सर्दियों में : सुबह 6:30 बजे से शाम 7:30 बजे तक

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर दर्शन – Mehandipur Balaji Temple Timings

आरती का समय : ग्रीष्म कालीन – Mehandipur Balaji Aarti Time

श्री राम दरवार – Shri Ram Darbar
ग्रीष्म कालीन: सुबह 6:00 से 6:15
ग्रीष्म कालीन: शाम 7:00 से 7:15
श्री बाला जी दरवार – Balaji Darbar
ग्रीष्म कालीन: सुबह 6:15 से 6:45
ग्रीष्म कालीन: शाम 7:15 से 7:45

आरती का समय : शीत कालीन – Mehandipur Balaji Aarti Time

श्री राम दरवार – Shri Ram Darbar
शीत कालीन: सुबह 6:10 से 6:25
शीत कालीन: शाम 6:20 से 6:35
श्री बाला जी दरवार – Balaji Darbar
शीत कालीन: सुबह 6:25 से 6:55
शीत कालीन: शाम 6:35 से 7:05

मेहंदीपुर बालाजी के नियम – Tips For Travellers of Mehandipur Balaji 

श्री बालाजी महाराज जी के दर्शन हेतु जाने वाले यात्रियों एवं श्रध्दालुओ को निम्नलिखित नियमो का पालन अवश्य करना चाहिए—

  • सवेरे तथा शाम के समय सभी यात्रियो को श्री बालाजी महाराज जी के सम्मुख उपस्थित होना चाहिए तथा ध्यान्पूर्वक भक्तिभाव से हरि कीर्तन व भजन सुनने और गाने चाहिएँ |
  • समस्त श्राध्दालुओ को वहाँ रहते हुए दूसरे यात्रियो व श्रध्द्लुओ के साथ स्नेह्पूर्ण व सहानुभूति का व्यावहार रखना चाहिए |
  • आरती के बाद सभी श्रध्दलुओ को श्री महन्त जी तथा अन्य भक्तो के साथ मिलकर दैनिक प्रार्थना वन्दना करनी चाहिए
  • यहाँ आकर धैर्यपूर्वक रहना चाहिए तथा व्यर्थ का वार्तालाप नही करना चाहिए और श्रध्दापूर्वक प्रसाद ग्रहण करना चाहिए |
  • जिन रोगियो को मार पडती हुई हो उनके लिए आस – पास की जगह खाली छोड देनी चाहिए तथा समस्त उपस्थित भक्तो को जयकारो व भजनो के अलावा कोई भी वर्तालाप नही करना चाहिए |
  • सभी श्रध्दालुओ को श्री महन्त जी के साथ – साथ श्री प्रेतराज सरकार जी के दरबार मे जाना चहिए और श्री महन्त जी के आदेश का पालन करना चाहिए और पूजा में व्यवधान नही डालना चाहिए |
  • आरती समाप्त होने पर श्रध्दालुओ को द्यान्पूर्वक शुध्द मन से श्री बालाजी की स्तुति प्रेम पूर्वक गानी चाहिए |
  • श्रध्दालुओ को अपने हाथ से कोई भी पूजन सामग्री छूनी नही चाहिए तथा अ हि भोग लगाए और न ही चोला चढाए |
  • जो भी प्रशाद या अन्य वस्तु चढानी हो तो मंदिर के पुजारी को दे देनी चाहिए |
  • रोगी यदि स्त्री है तो उसके साथ किसी पुरुष का होना आवश्यक है |
  • अकेली स्त्री का मंदिर या धर्मशाला मे रहना वर्जित है |
  • श्रध्दालुओ को चाहिए कि वे जब तक वहाँ रहे पूर्णतः ब्रह्मचर्य का पालन करे तथा माँस, मदिरा,प्याज आदि का सेवन न करे |
  • किसी भी स्त्री को अपने हाथ से किसी भी देवता की प्रतिमा को नही छुना चाहिएँ |

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर राजस्थान,  कैसे पहुंचे ? – How To Reach Mehandipur Balaji, Rajasthan

हवाई जहाज के माध्यम से – Mehandipur Balaji By Air

यदि आप हवाई जहाज के माद्यम से आना चाहते है तो आप जयपुर या दिल्ली तक आ सकते है हवाई जहाज से । वहां से श्री मेंहन्दीपुर धाम आएं । जयपुर एवं दिल्ली से डायरेक्ट बस सेवा एवं प्राइवेट टेक्सी आसनी से मिल जाती है । जयपुर से बाला जी धाम तकरीवन 100 किमी है जबकि दिल्ली से 260 किमी है ।

ट्रैन के माध्यम से: Mehandipur Balaji Nearest Railway Station

यदि आप ट्रैन से आना चाहते है तो आप बांदीकुई स्टेशन से श्री मेहंदीपुर धाम आ सकते है सबसे पास यही रेलवे स्टेशन है । बांदीकुई से 40 किमी की दुरी पे मेहंदीपुर धाम का रास्ता है और वहां से २४ घंटे कोई न कोई सुबिधाजनक वहां मिल जाता है श्री मेहंदीपुर धाम तक पहुचने के लिए । दिल्ली से रोजाना 8-10 ट्रैन चलती है बांदीकुई तक पहुचने के लिए । आप जयपुर , कानपूर , बरेली , आगरा , मथुरा , लखनऊ , चंडीगढ़ , एवं कुछ अन्य मुख्या शहर से डायरेक्ट ट्रैन चलती है बांदीकुई तक के लिए। आपको इंडियन रेलवे की वेबसाइट पे डेस्टिनेशन में “BKI” कोड डालना होता है और आप बांदीकुई तक की ट्रैन देख सकते है ऑनलाइन.

बस के माध्यम से – Mehandipur Balaji By Bus

यदि आप बस से आना चाहते है तो, इस समय श्री मेहंदीपुर धाम के लिए चारो तरफ से बस की सेवा उपलब्ध है । आप मथुरा , जयपुर , हिंडौन , करौली , दिल्ली , नॉएडा , गुडगाँव , रेवाड़ी , अलवर , अलीगढ , बरेली , एवं अन्य सिटी से डायरेक्ट बस सेवा है । बस आपको श्री मेहंदीपुर धाम से 2 KM पहले श्री बाला जी मोड़ पे छोड़ देती है और श्री बाला जी मोड़ से 24 घंटे जीप सेवा उपलब्ध रहती है |

About the author

Team Bhaktisatsang

भक्ति सत्संग वेबसाइट ईश्वरीय भक्ति में ओतप्रोत रहने वाले उन सभी मनुष्यो के लिए एक आध्यात्मिक यात्रा है, जिन्हे अपने निज जीवन में सदैव ईश्वर और ईश्वरत्व का एहसास रहा है और महाज्ञानियो द्वारा बतलाये गए सत के पथ पर चलने हेतु तत्पर है | यहाँ पधारने के लिए आप सभी महानुभावो को कोटि कोटि प्रणाम

क्या आपको हमारी पोस्ट पसंद आयी ?