पौराणिक कथाएं

पवनपुत्र मकरध्वज की कथा

पवनपुत्र मकरध्वज की कथा : Pawan putra makardhvaj पवनपुत्र हनुमान बाल-ब्रह्मचारी थे। लेकिन मकरध्वज को उनकापुत्र कहा जाता है। यह कथा उसी मकरध्वज की है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार, लंका […]

कहानी पाटलिपुत्र की

कहानी पाटलिपुत्र की : Story Of patliputra बहुत समय पहले हरिद्वार के कनखल क्षेत्र में एक दक्षिण भारतीयब्राह्मण रहता था| उसके तीन बेटे थे| युवा होने पर ब्राह्मण ने उन्हेंविद्या

भक्त और भगवान

भक्त और भगवान | Bhakt and Bhagwan तीनों लोकों में राधा की स्तुति से देवर्षि नारद खीझ गए थे। उनकी शिकायत थीकि वह तो कृष्ण से अथाह प्रेम करते हैं

एकदंत कैसे कहलाए गणेशजी

एकदंत कैसे कहलाए गणेशजी | Ekdant Ganesh महाभारत विश्व का सबसे बड़ा महाकाव्य है। इसमें एक लाख से ज्यादा श्लोक हैं। महर्षि वेद व्यास के मुताबिक यह केवल राजा-रानियों की

कुबेर का अहंकार

कुबेर का अहंकार | Kuber Ka Ahamkar यह एक पौराणिक कथा है। कुबेर तीनों लोकों में सबसे धनी थे एकदिन उन्होंने सोचा कि हमारे पास इतनी संपत्ति है, लेकिन कम

गंगा जन्म की कथा – 2

गंगा जन्म की कथा  – 2 | Ganga Janam Katha “जब महाराज सगर को बहुत दिनों तक अपने पुत्रों कीसूचना नहीं मिली तो उन्होंने अपने तेजस्वी पौत्रअंशुमान को अपने पुत्रों

गंगा जन्म की कथा – 1

  गंगा जन्म की कथा – 1 | Ganga Janam Katha ऋषि विश्वामित्र ने इस प्रकार कथा सुनाना आरम्भ किया, “पर्वतराज हिमालय की अत्यंत रूपवती, लावण्यमयी एवं सर्वगुण सम्पन्न दो

कुंती का त्याग

कुंती का त्याग | Kunti Ka Tyag पाण्डव अपनी मां कुंती के साथ इधर से उधर भ्रमण कर रहे थे| वे ब्राह्मणों कावेश धारण किए हुए थे| भिक्षा मांगकर खाते थे और रात में वृक्ष के नीचे सो जायाकरते थे| भाग्य और समय की यह कैसी अद्भुत लीला है| जो पांडव हस्तिनापुरराज्य के भागीदार हैं और जो सारे जगत को अपनी मुट्ठी में करने में समर्थ हैं, उन्हीं को आज भिक्षा पर जीवन-यापन करना पड़ रहा है| दोपहर के बाद का समय था| पांडव अपनी मां कुंती के साथ वन के मार्ग से आगे बढ़ते जा रहे थे| सहसा

महाकालेश्वर की कथा

महाकालेश्वर की कथा | Mahakaleshwar Khata उज्जयिनी में राजा चंद्रसेन का राज था। वह भगवान शिव का परम भक्त था।शिवगणों में मुख्य मणिभद्र नामक गण उसका मित्र था। एक बार मणिभद्र नेराजा चंद्रसेन को एक अत्यंत तेजोमय ‘चिंतामणि’ प्रदान की। चंद्रसेन ने इसे गले में धारण किया तो उसका प्रभामंडल तो जगमगा ही उठा, साथ ही दूरस्थ देशों में उसकी यश-कीर्ति बढ़ने लगी।

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