तुलसी स्तोत्र – Tulsi Stotra
श्री तुलसी स्तोत्रम् | Shri Tulsi Stotram तुलसी स्तोत्र (Tulsi Stotra) महर्षि पुंडरिक द्वारा रची गई सुंदर रचना है। इसमें मां तुलसी का महत्व और महिमा वर्णित की गई है। तुलसी पूजन के […]
श्री तुलसी स्तोत्रम् | Shri Tulsi Stotram तुलसी स्तोत्र (Tulsi Stotra) महर्षि पुंडरिक द्वारा रची गई सुंदर रचना है। इसमें मां तुलसी का महत्व और महिमा वर्णित की गई है। तुलसी पूजन के […]
माँ कालरात्रि के मंत्र, स्त्रोत और कवच पाठ नवरात्रि के सातवें दिन होती है माँ कालरात्रि की पूजा (Kalratri Mantra & Strotam Japa) इनके शरीर का रंग काला है। सिर
माँ सिद्धिदात्री के उपासना मंत्र, ध्यान मंत्र, स्तोत्र और कवच माँ सिद्धिदात्री उपासना मंत्र सिद्धगंधर्वयक्षाद्यैरसुरैररमरैरपि। सेव्यमाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।। माँ सिद्धिदात्री ध्यान वन्दे वांछितमनरोरार्थेचन्द्रार्घकृतशेखराम्। कमलस्थिताचतुर्भुजासिद्धि यशस्वनीम्॥ स्वर्णावर्णानिर्वाणचक्रस्थितानवम् दुर्गा त्रिनेत्राम।
मां महागौरी के मंत्र, स्त्रोत और कवच पाठ Mp3 Download श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।। या देवी सर्वभूतेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। माता महागौरी का ध्यान
Katyayani Mantra Stotra – माँ कात्यायनी मंत्र, श्लोक, स्त्रोत Katyayani Mantra : मां दुर्गा अपने छठे स्वरूप में कात्यायनी (Katyayani Devi) के नाम से जानी जाती है। महर्षि कात्यायन के
माँ स्कन्दमाता के मंत्र, ध्यान मंत्र, उपासना मंत्र, स्तोत्र और कवच माँ स्कन्दमाता उपासना मंत्र – Skanda Mata Mantra सिंहासानगता नितयं पदमाश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी।। माँ स्कन्दमाता ध्यान
देव्यपराध क्षमापन स्तोत्र – Devi Apradh Kshamapan Stotra कलियुग में कुछ चीजें ऐसी हैं जो बहुत प्रसिद्ध और प्रामाणिक हैं। प्रामाणिक इस कारण से हैं क्यूंकि इस युग में भी
सूर्य उपासना – Surya Upasana – सूर्य पूजा : आदिकाल से ही भगवान सूर्य की पूजा होती चली आ रही है। सूर्य समस्त लोकों में ऊर्जा के केन्द्र माने गए
राहु कवच स्तोत्र – Rahu Kavach Path अगर आपकी कुंडली में राहु की स्थिति अच्छी ना हो और राहु की महादशा का भोग कर रहे हैं अथवा राहु नीच राशि
रुद्री पाठ – Rudri Path रुद्री पाठ हिंदी में – इसे शुक्लयजुर्वेदीय रुद्राष्टाध्यायी (Rudri Paath) भी कहते हैं। रुद्राष्टाध्यायी दो शब्द रुद्र अर्थात् शिव और अष्टाध्यायी अर्थात् आठ अध्यायों वाला,