Author name: Team Bhaktisatsang

भक्ति सत्संग वेबसाइट ईश्वरीय भक्ति में ओतप्रोत रहने वाले उन सभी मनुष्यो के लिए एक आध्यात्मिक यात्रा है, जिन्हे अपने निज जीवन में सदैव ईश्वर और ईश्वरत्व का एहसास रहा है और महाज्ञानियो द्वारा बतलाये गए सत के पथ पर चलने हेतु तत्पर है | यहाँ पधारने के लिए आप सभी महानुभावो को कोटि कोटि प्रणाम

क्षेत्र क्षेत्रजना विभाग योग – Kshetra Kshetrajan Vibhag Yoga – अध्याय -13

गीता अध्याय -13 क्षेत्र क्षेत्रजना विभाग योग – Kshetra Kshetrajan Vibhag Yoga ज्ञानसहित क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ का विषय –  श्रीभगवानुवाच इदं शरीरं कौन्तेय क्षेत्रमित्यभिधीयते। एतद्यो वेत्ति तं प्राहुः क्षेत्रज्ञ इति तद्विदः॥  भावार्थ […]

भक्ति योग – Bhakti Yoga – गीता अध्याय -12

भक्ति योग – Bhakti Yoga  भक्ति योग गीता के अनुसार – गीता अध्याय 12 – Bhagavad Gita Bhakti Yoga साकार और निराकार के उपासकों की उत्तमता का निर्णय और भगवत्प्राप्ति

विश्वरूप दर्शन योग – Vishwa Roop Darshan Yoga – गीता अध्याय -11

गीता अध्याय -11 विश्वरूप दर्शन योग – Vishwa Roop Darshan Yoga अर्जुन उवाच मदनुग्रहाय परमं गुह्यमध्यात्मसञ्ज्ञितम्‌ । यत्त्वयोक्तं वचस्तेन मोहोऽयं विगतो मम ॥  भावार्थ : अर्जुन बोले- मुझ पर अनुग्रह करने

विभूति योग – Vibhuti Yoga – गीता अध्याय -10

गीता अध्याय -10 विभूति योग – Vibhuti Yoga श्रीभगवानुवाच भूय एव महाबाहो श्रृणु मे परमं वचः । यत्तेऽहं प्रीयमाणाय वक्ष्यामि हितकाम्यया ॥  भावार्थ : श्री भगवान्‌ बोले- हे महाबाहो! फिर भी

राजविद्या राजगुह्य योग – Rajvidya Rajgruha Yoga – गीता अध्याय -9

गीता अध्याय -9 राजविद्या राजगुह्य योग – Rajvidya Rajgruha Yoga श्रीभगवानुवाच इदं तु ते गुह्यतमं प्रवक्ष्याम्यनसूयवे । ज्ञानं विज्ञानसहितं यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात्‌ ॥  भावार्थ : श्री भगवान बोले- तुझ दोषदृष्टिरहित भक्त के

गीता अध्याय -8

गीता अध्याय -8 अक्षरब्रह्मयोग – अर्जुन उवाच किं तद्ब्रह्म किमध्यात्मं किं पुरुषोत्तम । अधिभूतं च किं प्रोक्तमधिदैवं किमुच्यते ॥  भावार्थ : अर्जुन ने कहा- हे पुरुषोत्तम! वह ब्रह्म क्या है? अध्यात्म

ज्ञान विज्ञान योग – Gyan Vigyan Yoga – गीता अध्याय -7

गीता अध्याय -7 ज्ञान विज्ञान योग – Gyan Vigyan Yoga श्रीभगवानुवाच मय्यासक्तमनाः पार्थ योगं युञ्जन्मदाश्रयः । असंशयं समग्रं मां यथा ज्ञास्यसि तच्छृणु ॥  भावार्थ : श्री भगवान बोले- हे पार्थ! अनन्य

आत्मसंयमयोग – Atmasanyam Yoga – गीता अध्याय -6

गीता अध्याय -6 आत्मसंयमयोग – Atmasanyam Yoga कर्मयोग का विषय और योगारूढ़ पुरुष के लक्षण: श्रीभगवानुवाच अनाश्रितः कर्मफलं कार्यं कर्म करोति यः । स सन्न्यासी च योगी च न निरग्निर्न

कर्म संन्यास योग – Karma Sanyas Yoga – गीता अध्याय -5

गीता अध्याय -5 कर्म संन्यास योग – Karma Sanyas Yoga सांख्ययोग और कर्मयोग का निर्णय: अर्जुन उवाच सन्न्यासं कर्मणां कृष्ण पुनर्योगं च शंससि । यच्छ्रेय एतयोरेकं तन्मे ब्रूहि सुनिश्चितम्‌ ॥ 

तुलसीदास जी – Tulsidas Ji Ka Jeevan Parichay

तुलसीदासजी – Tulsidas Ji Ka Jeevan Parichay प्रयाग के पास बाँदा जिले में राणापुर नामक एक ग्राम है। वहाँ आत्माराम दुबे नाम के एक प्रतिष्ठित सरयूपारीण ब्राह्मण रहते थे। उनकी

Scroll to Top