Author name: Team Bhaktisatsang

भक्ति सत्संग वेबसाइट ईश्वरीय भक्ति में ओतप्रोत रहने वाले उन सभी मनुष्यो के लिए एक आध्यात्मिक यात्रा है, जिन्हे अपने निज जीवन में सदैव ईश्वर और ईश्वरत्व का एहसास रहा है और महाज्ञानियो द्वारा बतलाये गए सत के पथ पर चलने हेतु तत्पर है | यहाँ पधारने के लिए आप सभी महानुभावो को कोटि कोटि प्रणाम

मानसिक और शारीरिक क्लेश कारक तलाक और पुनर्विवाह के ज्योतिषीय उपाय

Punar Vivaah and Divorce Solutions – तलाक और पुनर्विवाह के ज्योतिषीय उपाय आजकल के ज़माने में वैवाहिक जीवन का सफल हो पाना बेहद मुश्किल हो गया है। आजकल पति-पत्नी छोटी-छोटी […]

श्री कृष्णा द्वारा वर्णित ध्यान विधि और भक्ति योग की महिमा

श्रीमद भागवत – एकादश स्कन्ध – चौदहवाँ अध्याय उद्धव जी ने पुछा – श्रीकृष्ण ! ब्रम्हवादी परमात्मा आत्मकल्याण के लिए अनेको साधन बतलाते हे । उनमे  दृष्टि के अनुसार सभी श्रेष्ठ

जानिए त्राटक द्वारा आज्ञाचक्र ध्‍यान साधना विधि और सावधानिया

आज्ञाचक्र ध्‍यान साधना | Aagya Chakra Dhyan Sadhna जिसे हम ध्‍यान कहते है वो आज्ञा चक्र ध्‍यान (trataka meditation) ही है मगर इसको सीधे ही करना लगभग असम्‍भव है उसके लिये

श्रीमद भगवद गीता अध्याय – 2 ( सांख्य योग )

सांख्ययोग – Sankhya Yog अर्जुन की कायरता के विषय में श्री कृष्णार्जुन-संवाद: संजय उवाचतं तथा कृपयाविष्टमश्रुपूर्णाकुलेक्षणम्‌ । विषीदन्तमिदं वाक्यमुवाच मधुसूदनः ॥  भावार्थ :  संजय बोले- उस प्रकार करुणा से व्याप्त

श्रीमद भगवद गीता अध्याय – 1 (अर्जुनविषाद योग )

– अर्जुनविषाद योग : Arjun Vishad Yog दोनों सेनाओं के प्रधान-प्रधान शूरवीरों की गणना और सामर्थ्य का कथन: धृतराष्ट्र उवाच धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः । मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत संजय ॥ 

बृहस्पति के अशुभ होने पर वैवाहिक जीवन और भाग्य पर पड़ता है प्रतिकूल प्रभाव, जानिए उपाय

बृहस्पति / गुरु गृह शांति के उपाय बृहस्पति/गुरू एक राशि में 13 मास तक निवास करते हैं और सूर्य, चन्द्र और मंगल इनके मित्र है, जबकि बुध, शुक्र इनके शत्रु

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