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शीतला माता अष्टमी  – Shitala Mata ki Katha Shitala Mata ki Katha – चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली सप्तमी तिथि को शीतला सप्तमी और अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी के नाम से जाना जाता है। शीतला अष्टमी हिन्दुओं का एक बड़ा त्योहार है। इस दिन महिलाएं व्रत और पूजन कर अपने परिवार

बसंत पंचमी – Basant Panchami in Hindi Basant Panchami in Hindi- आज हम जानेंगे बसंत पंचमी (Story of Basant Panchami) क्यों मनाई जाती है उसकी पूजा विधि (Basant Panchami Saraswati Puja) महत्व (Importance of Basant Panchami) और मंत्र (Basant Panchami Mantra) के बारे में. माघ शुक्लपक्ष पंचमी के दिन बसंत पंचमी (Basant Panchami) या सरस्वती

मंगलवार की कथा – Mangalvar Vrat Katha Mangalvar Vrat – एक समय की बात है एक ब्राह्मण दंपत्ति की कोई संतान नहीं थी जिस कारण वह बेहद दुखी थे। एक समय ब्राह्मण वन में हनुमान जी की पूजा के लिए गया। वहां उसने पूजा के साथ महावीर जी से एक पुत्र की कामना की। घर

क्यों खाया पांडवों ने अपने मृत पिता के शरीर का मांस – Story of the Mahabharata Story of Mahabharata in Hindi – पौराणिक इतिहास में कई ऐसे क़िस्से हैं जो हमे रोमांचित करते हैं। यही नहीं, इनसे जुड़ी घटनाएँ हमें प्रेरित भी करती हैं। किन्तु ऐसी कई कथाएँ हैं जिससे हम अनभिज्ञ हैं। आज हम

भगवान राम की बड़ी बहन का रहस्य Shri Ram Sister’s Shanta – महर्षि वाल्मीकि ने संस्कृत महाकाव्य रामायण की रचना की थी, जिसमें उन्होंने प्रभु श्री राम के जीवनकाल एवं उनके पराक्रम का वर्णन किया है। रामायण हिंदू धर्म के लोगों का एक बहुत ही महत्वपूर्ण ग्रन्थ है जिसकी कथा हम सभी ने कई बार

महाभारत काल के विपुलस्वान मुनि और उनके पुत्रों की अमर कथा द्वापर युग की बात है मंदनपाल नाम का एक पक्षी था । उसके चार पुत्र थे, जो बड़े बुद्धिमान थे । उनमें द्रोण सबसे छोटा था । वह बड़ा धर्मात्मा और वेद – वेदांग में पारंगत था । उसने कंधर की अनुमति से उसकी

वट सावित्री व्रत – Vat Savitri Vrat  Vat Savitri Vrat – आज हम आपको वट सावित्री व्रत की कथा (Vat Savitri Vrat Katha) पूजा विधि (Vat Savitri Pooja Vidhi) के साथ उसके महत्व की जानकारी देंगे. वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat) एक ऐसा व्रत जिसमें हिंदू धर्म में आस्था रखने वाली स्त्रियां अपने पति

शिक्षाप्रद कहानी : ईश्वर का न्याय Hindi Inspirational Story : एक रोज रास्ते में एक महात्मा अपने शिष्य के साथ भ्रमण पर निकले. गुरुजी को ज्यादा इधर-उधर की बातें करना पसंद नहीं था, कम बोलना और शांतिपूर्वक अपना कर्म करना ही गुरू को प्रिय था. परन्तु शिष्य बहुत चपल था, उसे हमेशा इधर-उधर की बातें

कैसे ली शनिदेव ने पांडवो के ज्ञान की परीक्षा पाण्डवों का अज्ञातवाश समाप्त होने में कुछ समय शेष रह गया था। पाँचो पाण्डव एवं द्रौपदी जंगल मे छूपने का स्थान ढूंढ रहे थे, उधर शनिदेव की आकाश मंडल से पाण्डवों पर नजर पड़ी शनिदेव के मन में विचार आया कि इन सब में बुद्धिमान कौन