महाभारत के पात्रो के अनसुने रहस्य – Secrets Of the Mahabharata

महाभारत के अनसुने रहस्य – Secrets Of the Mahabharata 

mahabharat facts – अगर आपने गौर किया हो तो महाभारत के सभी पात्रो का जन्म बड़ा ही विचित्र था कोई भी सरल तरीके से नहीं जन्मा था, इसका हर एक पात्र अपने आप में आकर्षक और रहस्यों से भरा है। महाभारत से जुड़े कई ऐसे तथ्य हैं जो अब भी बहुत कम लोगों को मालूम हैं। तो आज हम आपको महाभारत से जुड़े ऐसे ही कुछ अनसुने रहस्य बताने जा रहे हैं, उम्मीद है आपको पसंद आएंगे

श्री कृष्णा और अर्जुन का पुनर्जन्म

श्रीकृष्ण और अर्जुन अपने पूर्वजन्म में नर और नारायण रूप में थे, और उन्होंने नर और नारायण रूप में दंभोद्भवा नामक असुर का वध करने के लिए जन्म लिया था। दरअसल कर्ण ही पूर्वजन्म में दंभोद्भवा नामक असुर थे। कर्ण का वध करने के लिए ही कृष्ण और अर्जुन को वापस पुनर्जन्म लेना पड़ा था।

श्री कृष्णा की एक और बहन

श्रीकृष्ण की बहन सुभद्रा थी यह तथ्य तो सभी जानते हैं। दिलचस्प ये है कि उनकी एक और बहन थी जिसका नाम एकांगा था। वह नंदबाबा और यशोदा की पुत्री थीं।

द्रोणाचार्य एक टेस्ट ट्यूब बेबी

द्रोणाचार्य को भारत का पहले टेस्ट ट्यूब बेबी माना जा सकता है. यह कहानी भी काफी रोचक है. द्रोणाचार्य के पिता महर्षि भारद्वाज थे और उनकी माता एक अप्सरा थीं. एक शाम भारद्वाज गंगा नहाने गए तभी उन्हें वहां एक अप्सरा नहाती हुई दिखाई दी. उसकी सुंदरता को देख ऋषि मंत्र मुग्ध हो गए और उनके शरीर से शुक्राणु निकला जिसे ऋषि ने एक मिट्टी के बर्तन में जमा करके अंधेरे में रख दिया. इसी से द्रोणाचार्य का जन्म हुआ.

दुर्योधन का परिवार

दुर्योधन ने काम्बोज के  राजा चंद्रवर्मा की पुत्री भानुमति से विवाह किया था। भानुपति बहुत ही सुंदर, बुद्धिमान और ताकतवर थी। वह श्रीकृष्ण की अनन्य भक्त थी। इन दोनों का एक पुत्र भी था जिसका नाम लक्ष्मण था और जो महाभारत युद्ध में वीर गति को प्राप्त हुआ

धृतराष्ट्र क्यों अधर्मी हुवे

धृतराष्ट्र पूर्वजन्म में एक दुष्ट राजा थे। एक बार एक झील किनारे सूंदर हंस को बैठा देख उन्हें हंस की आंख पाने की इच्छा जाग उठी। उन्होंने अपने सैनिकों को आदेश दिया कि हंस की आंख निकाल लो और उसके बच्चों का मार दो। इस क्रूरता के कारण धृतराष्ट्र अंधे हुए और उनके 100 पुत्र युद्ध में मारे गए।

भीष्म पितामह को श्राप

भीष्म पितामह पूर्वजन्म में आठ वसुओं में से एक वसु थे। पत्नी की जिद्द में आकर इन्होंने ऋषि वशिष्ठ की गाय चुरा ली और वह बहुत नुकसान किया । इससे क्रोधित होकर ऋषि ने इन्हें पृथ्वी पर मनुष्य रूप में  जन्म लेकर दीर्घकाल तक जीवित रहकर कष्ट भोगने का शाप दे दिया।

अभिमन्यु का पिछला जन्म

वही अभिमन्यु अपने पूर्व जन्म में राक्षस कालयवन था जिसका वध श्री कृष्ण ने किया था और उसकी आत्मा को अपने अंगवस्त्र में बांध वे द्वारिका आ गए और वो वस्त्र अलमारी में रख दिया । एक बार सुभद्रा जो उस समय गर्भवती थी ने भूल से वह वस्त्र खोल दिया तो उसकी आत्मा सुभद्रा के गर्भ में समां गयी । बाद में उसने अभिमन्यु के रूप में जन्म लिया।

अर्जुन की २ बार मृत्यु

जैसा की हमने अपने पहले वीडियो में बताया की महाभारत युद्ध के बाद स्वर्ग जाने के मार्ग में अर्जुन की मृत्यु हुई। लेकिन इससे काफी पहले परन्तु महाभारत युद्ध के बाद एक युद्ध में अर्जुन और चित्रांगदा के ही पुत्र,  बभ्रुवाहन ने अपने पिता अर्जुन को मार गिराया था । परन्तु उसके बाद अर्जुन की तीसरी पत्नी उलूपी ने अर्जुन को जीवनदान  दिया।

एकलव्य कहा गायब हुवे

आपने महाभारत में एकलव्य, रुक्मणि हरण के बाद कही नजर नहीं आते, दरअसल रुकमणी हरण के समय एकलव्य राजा जरासंध की और से लड़ते हुवे अपने पिता के प्राण बचाने हेतु श्री कृष्णा द्वारा वीर गति को प्राप्त हुवे और इनकी इस वीरता को देख श्री कृष्णा के वरदान स्वरुप अगले जन्म में वे राजा द्रुपद पुत्र और द्रोपदी के भाई धृष्टद्युम्न बन के जन्मे जिन्होंने द्रोणाचार्य को यमलोक को रास्ता दिखाया था

द्रौपदी के पांच पतियों का रहस्य

द्रौपदी अपने पूर्व जन्म में ऋषि कन्या थी। अपने पाप कर्मों के फलस्वरूप उसे कोई अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार नहीं कर रहा था। तब इन्होंने शिवजी की घोर तपस्या की। तपस्या से प्रसन्न होकर शिवजी प्रकट हुवे और द्रौपदी को वर मांगने को कहा तो उसने कहा मुझे सर्वगुण सम्पन पति चाहिए तो शिव ने तथास्तु  कहा और बोलै की एक व्यक्ति में इतने गुण नहीं हो सकते, तुम भारतवंशी पांच पांडव की पत्नी बनोगी

बर्बरीक एक महान योद्धा

बर्बरीक घटोत्कच के पुत्र और कृष्ण के शिष्य थे. बर्बरीक अजय थे क्योंकी उनके पास कामाख्या देवी से प्राप्त हुए तीन तीर थे, जिनसे वह कोई भी युध् अकेले ही जीत सकते थे। पर अपने माँ को दिए वचनो के अनुसार वह सिर्फ कमज़ोर पक्ष के लिये ही लड़ने पर विवश थे । चूँकि कौरवो की हार तय थी तो यह भी दिख रहा था की कौरवो को हारते देख बर्बरीक उनकी और से लड़ेगा और उसके तिरो से पांडवों की हार निश्चित है,  इस दुविधा से बाहर आने के लिये श्री कृष्णा ने गुरु दक्षिणा मैं बर्बरीक से उसका सर मांग लिया।

परन्तु बर्बरीक की अंत तक युद्ध देखने की इच्छा के कारण श्री कृष्णा ने उनके दान किये शीश को अमृत से सींचकर महाभारत युद्ध मैदान में सबसे ऊँची पहाड़ी पर रख दिया ताकि वे  युद्ध देख सकें। उस समय श्री कृष्णा ने बर्बरीक को यह भी वरदान दिया की आज से तुम यही मेरे नाम से पूजे जाओगे, और आज हम बर्बरीक को खाटू श्याम के नाम से भी जानते है

शिशुपाल का पुनर्जन्म और कृष्णा

कृष्णा की दूसरी भुवा के लड़के शिशुपाल के बारे में तो अपने सुना ही होगा जिसको श्री कृष्णा ने १०० अपराध माफ़ करने का वचन दिया था दरअसल वह पूर्वजन्म में रावण था। इससे भी पूर्वजन्म में प्रह्लाद का पिता राजा हिरण्यकश्यप था।

कौरवो के जन्म का राज

महर्षि वेदव्यास ने गांधारी की सेवा से प्रसन्न होकर गांधारी को सौ पुत्र होने का वरदान दिया। परन्तु दो वर्ष तक गर्भ ठहरने के बाद भी संतान ना होने पर गांधारी ने क्रोध में आकर अपने पेट पर मुक्के से प्रहार किया जिससे उसके पेट से लोहे के समान एक मांस पिण्ड निकला। तब महर्षि वेद व्यास ने उस पिंड के १०० टुकड़े करवा कर उनको घी से भरकर घी सुरक्षित स्थान रखवा दिया और २ साल तक उसे छेड़ने से मना कर दिया, २ साल बाद उनमे से ९९ पुत्र और एक पुत्री हुई जिसका नाम दुशाला रखा गया

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