प्रदोष व्रत 2020 – जाने प्रदोष व्रत तिथि एवं महत्व

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क्या है प्रदोष व्रत ? – Pradosh Vrat Kab Hai

प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat 2020) भगवान शिव और पार्वती को समर्पित एक व्रत है जो की हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्षों की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat Katha) प्रदोष काल में ही करना चाहिए। सूर्यास्त के बाद रात्रि के प्रथम पहर को जिसे की सांयकाल या तीसरा पहर भी कहते है, प्रदोष काल कहलाता है। हिन्दू पंचांग में एक साल में 12 महीने होते है इस तरह एक साल में 24 प्रदोष व्रत आते है। जबकि हर तीसरे साल एक अधिक मास आता है, उस साल 26 प्रदोष व्रत होते हैं।

अलग-अलग तरह के प्रदोष व्रत – Types Of Pradosh Vrat

  • सोमवार को आने वाले प्रदोष व्रत को सोम प्रदोषम या चन्द्र प्रदोषम भी कहा जाता है।
  • मंगलवार को आने वाले प्रदोष व्रत को भौम प्रदोषम कहा जाता है।
  • शनिवार को आने वाले प्रदोष व्रत को शनि प्रदोषम कहा जाता है।

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प्रदोष व्रत का महत्व

प्रदोष व्रत में महादेव व माता पार्वती की उपासना की जाती है। व्रत के महत्व के बारे में विस्तार से स्कंद पुराण में वर्णन किया गया है। साधक प्रदोष व्रत का पालन अपने जीवन में हर तरह के सुख की प्राप्ति के लिए करता है। इस व्रत को स्त्री तथा पुरूष दोनों कर सकते हैं। माना जाता है कि इस व्रत को करने से साधक पर भगवान शिव की कृपा दृष्टि बनती है। साधक अपने पाप कर्मों से मुक्त हो जाता है।

प्रदोष व्रत तिथि 2020 – Pradosh Vrat 2020 List

  • प्रदोष व्रत (शुक्ल)       –    बुधवार, 08 जनवरी
  • प्रदोष व्रत (कृष्ण)       –    बुधवार, 22 जनवरी
  • प्रदोष व्रत (शुक्ल)       –    गुरुवार, 06 फरवरी
  • प्रदोष व्रत (कृष्ण)        –   गुरुवार, 20 फरवरी
  • शनि प्रदोष व्रत (शुक्ल) –  शनिवार, 07 मार्च
  • शनि प्रदोष व्रत (कृष्ण)  – शनिवार, 21 मार्च
  • दोष व्रत (शुक्ल)           –   रविवार, 05 अप्रैल
  • सोम प्रदोष व्रत (कृष्ण)  – सोमवार, 20 अप्रैल
  • भौम प्रदोष व्रत (शुक्ल) –  मंगलवार, 05 मई
  • भौम प्रदोष व्रत (कृष्ण) –  मंगलवार, 19 मई
  • प्रदोष व्रत (शुक्ल)     –      बुधवार, 03 जून
  • प्रदोष व्रत (कृष्ण)     –      गुरुवार, 18 जून
  • प्रदोष व्रत (शुक्ल)      –     गुरुवार, 02 जुलाई
  • शनि प्रदोष व्रत (कृष्ण) –  शनिवार, 18 जुलाई
  • शनि प्रदोष व्रत (शुक्ल) –  शनिवार, 01 अगस्त
  • प्रदोष व्रत (कृष्ण)       –     रविवार, 16 अगस्त
  • प्रदोष व्रत (शुक्ल)      –      रविवार, 30 अगस्त
  • भौम प्रदोष व्रत (कृष्ण) –   मंगळवार, 15 सितंबर
  • भौम प्रदोष व्रत (शुक्ल) –   मंगळवार, 29 सितंबर
  • व्रत (कृष्ण)                –      बुधवार, 14 अक्टूबर
  • प्रदोष व्रत (शुक्ल)       –     बुधवार, 28 अक्टूबर
  • प्रदोष व्रत (कृष्ण)       –     शुक्रवार, 13 नवंबर
  • प्रदोष व्रत (शुक्ल)      –      शुक्रवार, 27 नवंबर
  • शनि प्रदोष व्रत (कृष्ण) –   शनिवार, 12 दिसंबर
  • प्रदोष व्रत (शुक्ल)     –       रविवार, 27 दिसंबर

* (कृष्ण) – कृष्ण पक्ष प्रदोष व्रत, (शुक्ल) – शुक्ल पक्ष प्रदोष व्रत

प्रदोष व्रत का महत्व 

प्रदोष व्रत अन्य दूसरे व्रतों से अधिक शुभ एवं महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता यह भी है इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से सभी पापों का नाश होता है एवं मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। उसी तरह प्रदोष व्रत रखने एवं दो गाय दान करने से भी यही सिद्धी प्राप्त होती है एवं भगवान शिव का आर्शीवाद प्राप्त होता है।

अलग-अलग वार (सप्ताह का दिन) के लाभ

  • रविवार के दिन व्रत रखने से अच्छी सेहत एवं उम्र लम्बी होती है।
  • सोमवार के दिन व्रत रखने से सभी मनोकामनाऐं पूर्ण होती है।
  • मंगलवार के दिन व्रत रखने से बीमारीयों से राहत मिलती है।
  • बुधवार के दिन प्रदोष व्रत रखने से सभी मनोकामनाऐं एवं इच्छाऐं पूर्ण होती है।
  • वृहस्पतिवार को व्रत रखने से दुश्मनों का नाश होता है।
  • शुक्रवार को व्रत रखने से शादीशुदा जिंदगी एवं भाग्य अच्छा होता है।
  • शनिवार को व्रत रखने से संतान प्राप्त होती है।

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार पूजा का सही समय

सभी शिव मन्दिरों में शाम के समय प्रदोषम मंत्र का जाप किया जाता है।

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