महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग – Mahakaleshwar Jyotirlinga

महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन – Mahakaleshwar Jyotirlinga

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर (Mahakaleshwar Mandir) भगवन शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से तीसरे स्थान पर है। इस मंदिर में दक्षिण मुखी महाकालेश्वर महादेव भगवान शिव (Mahakaleshwar Jyotirlinga) की पूजा की जाती है। महाकाल के यहां प्रतिदिन सुबह के समय भस्म आरती होती है। इस आरती की खासियत यह है कि इसमें मुर्दे की भस्म से महाकाल का श्रृंगार किया जाता है। इस जगह को भगवान शिव का पवित्र निवास स्थान माना जाता है। यह ज्योतिर्लिंग भारत में मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर में स्थित है।

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का इतिहास – Mahakaleshwar Temple History In Hindi

वर्तमान मंदिर को श्रीमान पेशवा बाजी राव और छत्रपति शाहू महाराज के जनरल श्रीमान रानाजिराव शिंदे महाराज ने 1736 में बनवाया था। इसके बाद श्रीनाथ महादजी शिंदे महाराज और श्रीमान महारानी बायजाबाई राजे शिंदे ने इसमें कई बदलाव और मरम्मत भी करवायी थी। महाराजा श्रीमंत जयाजिराव साहेब शिंदे आलीजाह बहादुर के समय में 1886 तक, ग्वालियर रियासत के बहुत से कार्यक्रमों को इस मंदिर में ही आयोजित किया जाता था।

महाकालेश्वर मंदिर – Mahakaleshwar Temple

महाकालेश्वर में बनी मूर्ति को अक्सर दक्षिणामूर्ति भी कहा जाता है, क्योकि यह दक्षिण मुखी मूर्ति है। शिवेंत्र परंपरा के अनुसार ही 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक इसे चुना गया था।ओमकारेश्वर महादेव की प्रतिमा को महादेव तीर्थस्थल के उपर पवित्र स्थान पर बनाया गया है। इसके साथ ही गणेश, पार्वती और कार्तिकेय की प्रतिमा को भी पश्चिम, उत्तर और पूर्व में स्थापित किया गया है। दक्षिण की तरफ भगवान शिव के वाहन नंदी की प्रतिमा भी स्थापित की गयी है।

कहा जाता है की यह बने नागचंद्रेश्वर के मंदिर को साल में सिर्फ नागपंचमी के दिन ही एक दिन के लिये खोला जाता है। इस मंदिर की कुल पाँच मंजिले है, जिनमे से एक जमीन के निचे भी है। यह मंदिर एक पवित्र गार्डन में बना हुआ है, जो सरोवर के पास विशाल दीवारों से घिरा हुआ है। इसके साथ ही निचले पवित्र स्थान पर पीतल के लैंप भी लगाये गए है। दुसरे मंदिरों की तरह यहाँ भी भक्तो को भगवान का प्रसाद दिया जाता है।

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महाकालेश्वर का मंदिर का शिखर इस तरह से बनाया गया है की हमें यह आकाश की छूता हुआ दिखाई देता है, अपने आप में ही यह एक चमत्कार है। उज्जैन का महाकाल मंदिर शहर जे जनजीवन पर भी अपना वर्चस्व रखता है और वर्तमान समय में भी पारंपरिक हिन्दू परंपराओ को दर्शाता है।

महा शिवरात्रि के दिन, मंदिर के पास एक विशाल महोत्सव का आयोजन किया जाता है और देर रात तक भगवान शिव की पूजा की जाती है। महाकालेश्वर मंदिर की सीमा में श्री स्वपनेश्वर महादेव मंदिर भी आता है, जहाँ भक्त महाकाल के रूप में शिवजी की पूजा करते है, और अपने सपनो को पूरा करने की उनसे मनोकामना करते है।

सदाशिव मंदिर, समानुभूति को दर्शाने वाला मंदिर है, जहाँ भक्त सच्चे दिल से भगवान शिव को प्रार्थना करते है। ऐसा माना जाता है की यहाँ महादेव स्वपनेश्वर है और शक्ति स्वपनेश्वरी है।

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग – Mahakaleshwar Jyotirlinga

शिव पुराण के अनुसार, एक बार ब्रह्मा और भगवान विष्णु रचना की महत्ता को लेकर बहस करने लगे थे। उनकी परीक्षा लेने के लिये शिवजी ने प्रकार के पिल्लर, ज्योतिर्लिंग को तीन भागो में बाटा। भगवान विष्णु और ब्रह्मा ने क्रमशः निचे और तरफ से और उपर की तरफ से अपने रास्तो की बाटा ताकि के प्रकाश के अंत को जान सके। इसके बाद ब्रह्मा ने झूट बोला की उन्हें अंत मिल गया, जबकि भगवान विष्णु ने अपनी हार स्वीकार की थी।

तभी शिवजी दुसरे पिल्लर में से प्रकट हुए और ब्रह्मा जी को उन्होंने अभिशाप दिया की दैवीय पूजा में ब्रह्मा को कोई स्थान नही मिलेंगा जबकि भगवान विष्णु को लोग हमेशा पूजते रहेंगे। कहा जाता है की इन 12 ज्योतिर्लिंगों में शिवजी का थोडा-थोडा भाग रहता है। शिवजी के रूप में ज्योतिर्लिंग के कुल 64 प्रकार है, लेकिन फिर भी इन 12 ज्योतिर्लिंगों की अलग ही पहचान है। 12 ज्योतिर्लिंगों में से हर एक ज्योतिर्लिंग का एक अपना ही अलग नाम है – जो भगवान शिव के विविध प्रत्यक्षीकरण पर आधारित है।

भारतीय स्वतंत्रता के बाद महाकालेश्वर मंदिर देव सुल्तान ट्रस्ट के हाथो से उज्जैन महानगरपालिका के अधीन चला गया, और आज यह मंदिर उज्जैन जिला कलेक्टर ऑफिस के अधीन आता है।

महाकालेश्वर दर्शन का समय – Mahakaleshwar Darshan Time

8:00 am – 10:00 am
10:30 am – 5:00 pm
6:00 pm – 7:00 pm

महाकालेश्वर पूजा का समय – Mahakaleshwar Puja Timings

प्रात: काल की पूजा – 
सुबह -7 बजे से 8 बजे: (चैत्र से आश्विन)
सुबह 7:30 से 8:00 बजे (फाल्गुन को कार्तिक)

मध्याह्न पूजा –
10:00 am – 10:30 am Or 10:30 am – 11:00 am

संध्या पूजा – 
शाम 5:00 – शाम 5:30 बजे या शाम 5:30 – शाम 6 बजे

महाकालेश्वर पूजा की बुकिंग – Mahakaleshwar Puja Booking

  • General Puja 51.00
  • Shiv Mahimn Path 101.00
  • Rudrabhishesk Vaidik Puja 151.00
  • Shiv Mahimn Strot 251.00
  • Rudrabhishek (11 Avartan) Rudra Patha 501.00
  • Laghu Rudraabhishek (121 Paath) by 11 Brhamin 1500.00
  • Maha Rudraabhishek 11000.00
  • Mahamrutyunjay Jaap (1.25 Lakh jaap) 15000.00
  • Bhanga Shringar 500.00

महाकालेश्वर आरती का समय – mahakaleshwar aarti timings

शाम 7:00 – शाम 7:30 बजे या शाम 7:30 – रात 8:00 बजे

भस्म आरती –  Bhasma Aarti

अपने साथ भस्म आरती में ऑनलाइन या ऑफलाइन मिली परमिशन का प्रिंट आउट साथ रखें। भस्म आरती से पहले शिवलिंग पर जलाभिषेक होता है उसके बाद सबको एक बड़े हॉल में ले जाया जाता है जहां से भस्म आरती दिखाई देती है। भस्म आरती के लिए कोई ड्रेस कोड नहीं होता लेकिन जो लोग जलाभिषेक करना चाहते हैं उनके लिए खास ड्रेस कोड होता है जिसका ध्यान रखें। महिलाएं केवल साड़ी में जा सकती हैं और पुरुष के शरीर पर केवल धोती होती है। धोती मंदिर के बाहर किराए पर भी मिल जाती है।

भस्म आरती अर्थ – Bhasma Aarti Meaning

ऐसी मान्यता है क‌ि वर्षों पहले श्मशान के भस्‍म से भूतभावन भगवान महाकाल की भस्‍म आरती होती थी लेक‌िन अब यह परंपरा खत्म हो चुकी है और अब कंडे के बने भस्‍म से आरती श्रृंगार क‌िया जा रहा है। दरअसल यह भस्‍म आरती महाकाल का श्रृंगार है और उन्हें जगाने की व‌िध‌ि है। इस आरती का एक न‌ियम यह भी है क‌ि इसे मह‌िलाएं नहीं देख सकती हैं। इसल‌िए आरती के दौरान कुछ समय के ल‌िए मह‌िलाओं को घूंघट करना पड़ता है। महाकाल की आरती भस्‍म से होने के पीछे ऐसी मान्यता है क‌ि महाकाल श्मशान के साधक हैं और यही इनका श्रृंगार और आभूषण है।

भस्म आरती बुकिंग – Bhasma Aarti Booking

उज्जैन के महाकाल मंदिर में भस्म आरती के लिए ऑनलाइन बुकिंग कराना सबसे अच्छा होता है क्योंकि इसमें आपको भस्म आरती में मौजूद रहने की सीधी परमिशन मिल जाती है। यह बुकिंग आप मंदिर की वेबसाइट से करवा सकते हैं। इसके अलावा भस्म आरती की ऑफलाइन बुकिंग भी होती है जो मंदिर में स्थित टिकट काउंटर से होती है लेकिन यहां लाइन बहुत लंबी होती है और अंदर जाने के लिए सीमित लोगों को ही परमिशन मिलती है। अपने साथ अपना आईडी प्रूफ जरूर साथ लेकर चलें।

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भाग लेने के इच्छुक भक्तों को एक दिन पहले नामांकन करना होता है यानी दोपहर 12:30 बजे से पहले। उसी दिन शाम 7:00 बजे सूची घोषित की जाती है। आवेदक को एसएमएस दिया जाता है। भक्तों से अनुरोध किया जाता है कि वे शाम 7:30 से रात 10:30 के बीच काउंटर से टिकट एकत्र करें। टिकट आवंटन फर्स्ट कम फर्स्ट सर्व पर आधारित है। गर्भगृह में प्रवेश करने वाले भक्त केवल जल से अभिषेक कर सकते हैं। दूध की अनुमति नहीं है। भक्तों से अनुरोध है कि वे रिपोर्टिंग के समय फोटो आईडी प्रूफ ले जाएं। अभिषेक भक्त को गर्भगृह छोड़ने के बाद सभी भक्तों के लिए यह केवल 5 मिनट है। प्रवेश द्वार पर एसएमएस प्रदर्शित करने के बजाय टिकट प्रिंटआउट ले जाने की सलाह दी जाती है।

उज्जैन भस्म आरती बुकिंग मूल्य – Ujjain Bhasma Aarti Booking Price

Ticket cost: Rs.100

महाकालेश्वर भस्म आरती का समय – Mahakaleshwar Bhasma Aarti Timings

महाकाल मंदिर में भस्म आरती सुबह 4 बजे से 5 बजे तक होती है लेकिन श्रद्धालुओं को रात 1 बजे से ही लाइन में लगना होता है। महाशिवरात्रि के दूसरे दिन आरती नहीं की जाती।

महाकालेश्वर तक कैसे पहुंचे – How To Reach Mahakaleshwar

महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन कैसे पहुंचे यह बड़ा सवाल है। उज्जैन यातायात के तीनो साधनों से ही पहुंचा जा सकता है

महाकालेश्वर वायुमार्ग से – Mahakaleshwar By Air

उज्जैन में कोई एयरपोर्ट नहीं है इसका सबसे नजदीकी एयरपोर्ट इंदौर में है जो करीब 58 किलोमीटर है एयरपोर्ट के बाहर से आप टैक्सी या बस पकड़कर उज्जैन पहुंच सकते हैं इसमें करीब 1-1.15 घंटे का समय लगता है।

महाकालेश्वर रेलमार्ग से – Mahakaleshwar By train

उज्जैन लगभग देश के सभी बड़े शहरों से रेलमार्ग से जुड़ा है। उज्जैन तक दिल्ली, मुंबई और कोलकाता से सीधी ट्रेन सेवा उपलब्ध है।

महाकालेश्वर सड़कमार्ग से – Mahakaleshwar By Road

उज्जैन में सड़को का अच्छा जाल बिछा है और यह देश के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा है। नैशनल हाइवे 48 और नैशनल हाइवे 52 इसे देश के प्रमुख शहरों से जोड़ते हैं।

महाकालेश्वर उज्जैन जाने का सबसे अच्छा समय – Best Time To Visit Mahakaleshwar Ujjain

उज्जैन की यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च सबसे अच्छे महीने हैं क्योंकि मौसम खुशनुमा होता है। यह दर्शनीय स्थलों की यात्रा के लिए सही समय है क्योंकि तापमान काम होता है। सर्दियों के दौरान पूरा शहर धुंध में घिर जाता है, सुबह ठंडी होती है और रातें में शुष्क तापमान रहता हैं इसलिए घूमने का मज़ा सर्दियों में है ग्रीष्मकाल में तापमान लगभग 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है। मार्च के महीने कुंभ मेला हर 12 साल में एक बार होता है।