मंत्र-श्लोक-स्त्रोतं

सरस्वती मंत्र, श्लोक, स्त्रोतम – Saraswati Mantra, Sloka & Stotram

लेख सारिणी

सरस्वती मंत्र, श्लोक, स्त्रोतम – Saraswati Mantra, Sloka & Stotram

सरस्वती मंत्र – Saraswati Mantra, Saraswati Mantra Lyrics

ॐ ऎं सरस्वत्यै ऎं नमः।

सरस्वती मंत्र – Saraswati Mantra In Hindi

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः।

सरस्वती गायत्री मंत्र – Saraswati Gayatri Mantra

१ – ॐ सरस्वत्यै विधमहे, ब्रह्मपुत्रयै धीमहि । तन्नो देवी प्रचोदयात।

२ – ॐ वाग देव्यै विधमहे काम राज्या धीमहि । तन्नो सरस्वती: प्रचोदयात।

ज्ञान वृद्धि हेतु गायत्री मंत्र : Gayatri Mantra

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।

सरस्वती मंत्र परीक्षा भय निवारण हेतु – Saraswati Mantra For Passing Exams

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वीणा पुस्तक धारिणीम् मम् भय निवारय निवारय अभयम् देहि देहि स्वाहा।

सरस्वती मंत्र स्मरण शक्ति नियंत्रण हेतु – Saraswati Mantra For Intelligence

ॐ ऐं स्मृत्यै नमः।

सरस्वती मंत्र विघ्न निवारण हेतु – Saraswati Mantra For Problems

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं अंतरिक्ष सरस्वती परम रक्षिणी मम सर्व विघ्न बाधा निवारय निवारय स्वाहा।

सरस्वती मंत्र स्मरण शक्ति बढा के लिए  – Saraswati Mantra For Students

ऐं नमः भगवति वद वद वाग्देवि स्वाहा।

सरस्वती मंत्र परीक्षा में सफलता के लिए  – Saraswati Mantra For Passing Exams

१ – ॐ नमः श्रीं श्रीं अहं वद वद वाग्वादिनी भगवती सरस्वत्यै नमः स्वाहा विद्यां देहि मम ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा।

२ -जेहि पर कृपा करहिं जनु जानी, कवि उर अजिर नचावहिं बानी।

मोरि सुधारिहिं सो सब भांती, जासु कृपा नहिं कृपा अघाती॥

हंसारुढा मां सरस्वती का ध्यान कर मानस-पूजा-पूर्वक निम्न मन्त्र का २१ बार जप करे-”

ॐ ऐं क्लीं सौः ह्रीं श्रीं ध्रीं वद वद वाग्-वादिनि सौः क्लीं ऐं श्रीसरस्वत्यै नमः।”

सरस्वती मंत्र विद्या प्राप्ति एवं मातृभाव हेतु  – Saraswati Mantra For Study

विद्या: समस्तास्तव देवि भेदा: स्त्रिय: समस्ता: सकला जगत्सु।

त्वयैकया पूरितमम्बयैतत् का ते स्तुति: स्तव्यपरा परोक्तिः॥

अर्थातः– देवि! विश्वकि सम्पूर्ण विद्याएँ तुम्हारे ही भिन्न-भिन्न स्वरूप हैं। जगत् में जितनी स्त्रियाँ हैं, वे सब तुम्हारी ही मूर्तियाँ हैं। जगदम्ब! एकमात्र तुमने ही इस विश्व को व्याप्त कर रखा है। तुम्हारी स्तुति क्या हो सकती है? तुम तो स्तवन करने योग्य पदार्थो से परे हो।

उपरोक्त मंत्र का जप हरे हकीक या स्फटिक माला से प्रतिदिन सुबह १०८ बार करें, तदुपरांत एक माला जप निम्न मंत्र का करें।

देवी सरस्वती के अन्य प्रभावशाली मंत्र – Saraswati Mantra

एकाक्षरः “ ऐं”।

द्वियक्षर: १ “आं लृं”,।

२ “ऐं लृं”।

त्र्यक्षरः “ऐं रुं स्वों”।

चतुर्क्षर:“ॐ ऎं नमः।”

नवाक्षरः “ॐ ऐं ह्रीं सरस्वत्यै नमः”।

दशाक्षरः १ – “वद वद वाग्वादिन्यै स्वाहा”।

२ – “ह्रीं ॐ ह्सौः ॐ सरस्वत्यै नमः”।

एकादशाक्षरः १ – “ॐ ह्रीं ऐं ह्रीं ॐ सरस्वत्यै नमः”।

२ – “ऐं वाचस्पते अमृते प्लुवः प्लुः”

३ – “ऐं वाचस्पतेऽमृते प्लवः प्लवः”।

एकादशाक्षर-चिन्तामणि-सरस्वतीः

“ॐ ह्रीं ह्स्त्रैं ह्रीं ॐ सरस्वत्यै नमः”।

एकादशाक्षर-पारिजात-सरस्वतीः

१ – “ॐ ह्रीं ह्सौं ह्रीं ॐ सरस्वत्यै नमः”।

२ – “ॐ ऐं ह्स्त्रैं ह्रीं ॐ सरस्वत्यै नमः”।

द्वादशाक्षरः

“ह्रीं वद वद वाग्-वादिनि स्वाहा ह्रीं”

अन्तरिक्ष-सरस्वतीः

“ऐं ह्रीं अन्तरिक्ष-सरस्वती स्वाहा”।

षोडशाक्षरः

“ऐं नमः भगवति वद वद वाग्देवि स्वाहा”।

अन्य मंत्र

ॐ नमः पद्मासने शब्द रुपे ऎं ह्रीं क्लीं वद वद वाग्दादिनि स्वाहा।
“ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं सरस्वत्यै बुधजनन्यै स्वाहा”।
“ऐंह्रींश्रींक्लींसौं क्लींह्रींऐंब्लूंस्त्रीं नील-तारे सरस्वति द्रांह्रींक्लींब्लूंसःऐं ह्रींश्रींक्लीं सौं: सौं: ह्रीं स्वाहा”।
“ॐ ह्रीं श्रीं ऐं वाग्वादिनि भगवती अर्हन्मुख-निवासिनि सरस्वति ममास्ये प्रकाशं कुरु कुरु स्वाहा ऐं नमः”।
ॐ पंचनद्यः सरस्वतीमयपिबंति सस्त्रोतः सरस्वती तु पंचद्या सो देशे भवत्सरित्।

उपरोक्त आवश्यक मंत्र का प्रतिदिन जाप करने से विद्या की प्राप्ति होती है।

नोट :

स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ कपडे पहन कर मंत्र का जप प्रतिदिन एक माला करें। ब्राह्म मुहूर्त मे किये गए मंत्र का जप अधिक फलदायी होता हैं। इस्से अतिरीक्त अपनी सुविधा के अनुसार खाली में मंत्र का जप कर सकते हैं। मंत्र जप उत्तर या पूर्व की ओर मुख करके करें। जप करते समय शरीर का सीधा संपर्क जमीन से न हो इस लिए ऊन के आसन पर बैठकर जप करें।

सरस्वती श्लोक – Saraswati Sloka

सरस्वती श्लोक हिंदी में – Saraswati Sloka In Hindi

1) सरस्वति महाभागे विद्ये कमललोचने ।

विद्यारूपे विशालाक्षि विद्यां देहि नमोस्तुते ॥

सरस्वती स्त्रोत – Saraswati Stotram

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता

या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना ।

या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता

सा मां पातु सरस्वति भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥१॥

दोर्भिर्युक्ता चतुर्भिः स्फटिकमणिनिभैरक्षमालान्दधाना

हस्तेनैकेन पद्मं सितमपि च शुकं पुस्तकं चापेरण ।

भासा कुन्देन्दुशङ्खस्फटिकमणिनिभा भासमानाऽसमाना

सा मे वाग्देवतेयं निवसतु वदने सर्वदा सुप्रसन्ना ॥२॥

सुरासुरसेवितपादपङ्कजा

करे विराजत्कमनीयपुस्तका ।

विरिञ्चिपत्नी कमलासनस्थिता

सरस्वती नृत्यतु वाचि मे सदा ॥३॥

सरस्वती सरसिजकेसरप्रभा

तपस्विनी सितकमलासनप्रिया ।

घनस्तनी कमलविलोललोचना

मनस्विनी भवतु वरप्रसादिनी ॥४॥

सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि ।

विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा ॥५॥

सरस्वति नमस्तुभ्यं सर्वदेवि नमो नमः ।

शान्तरूपे शशिधरे सर्वयोगे नमो नमः ॥६॥

नित्यानन्दे निराधारे निष्कलायै नमो नमः ।

विद्याधरे विशालाक्षि शूद्धज्ञाने नमो नमः ॥७॥

शुद्धस्फटिकरूपायै सूक्ष्मरूपे नमो नमः ।

शब्दब्रह्मि चतुर्हस्ते सर्वसिद्ध्यै नमो नमः ॥८॥

मुक्तालङ्कृतसर्वाङ्ग्यै मूलाधारे नमो नमः ।

मूलमन्त्रस्वरूपायै मूलशक्त्यै नमो नमः ॥९॥

मनो मणिमहायोगे वागीश्वरि नमो नमः ।

वाग्भ्यै वरदहस्तायै वरदायै नमो नमः ॥१०॥

वेदायै वेदरूपायै वेदान्तायै नमो नमः ।

गुणदोषविवर्जिन्यै गुणदीप्त्यै नमो नमः ॥११॥

सर्वज्ञाने सदानन्दे सर्वरूपे नमो नमः ।

सम्पन्नायै कुमार्यै च सर्वज्ञे नमो नमः ॥१२॥

योगानार्य उमादेव्यै योगानन्दे नमो नमः ।

दिव्यज्ञान त्रिनेत्रायै दिव्यमूर्त्यै नमो नमः ॥१३॥

अर्धचन्द्रजटाधारि चन्द्रबिम्बे नमो नमः ।

चन्द्रादित्यजटाधारि चन्द्रबिम्बे नमो नमः ॥१४॥

अणुरूपे महारूपे विश्वरूपे नमो नमः ।

अणिमाद्यष्टसिद्ध्यायै आनन्दायै नमो नमः ॥१५॥

ज्ञानविज्ञानरूपायै ज्ञानमूर्ते नमो नमः ।

नानाशास्त्रस्वरूपायै नानारूपे नमो नमः ॥१६॥

पद्मदा पद्मवंशा च पद्मरूपे नमो नमः ।

परमेष्ठ्यै परामूर्त्यै नमस्ते पापनाशिनि ॥१७॥

महादेव्यै महाकाल्यै महालक्ष्म्यै नमो नमः ।

ब्रह्मविष्णुशिवायै च ब्रह्मनार्यै नमो नमः ॥१८॥

कमलाकरपुष्पा च कामरूपे नमो नमः ।

कपालि कर्मदीप्तायै कर्मदायै नमो नमः ॥१९॥

सायं प्रातः पठेन्नित्यं षण्मासात् सिद्धिरुच्यते ।

चोरव्याघ्रभयं नास्ति पठतां शृण्वतामपि ॥२०॥

इत्थं सरस्वतीस्तोत्रम् अगस्त्यमुनिवाचकम् ।

सर्वसिद्धिकरं नॄणां सर्वपापप्रणाशणम् ॥२१॥

इति श्री अगस्त्यमुनिप्रोक्तं सरस्वतीस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

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