योग - मैडिटेशन

सीत्कारी प्राणायाम : दन्त, मुँह, नाक, जिव्हा रोग से मुक्ति पाने के लिए करे प्राणायाम

सीत्कारी प्राणायाम | Shitkari Pranayama

ध्यानात्मक आसन में बैठकर जिव्हा को ऊपर तालु में लगाकर ऊपर- नीचे की दन्त पंक्ति को एकदम सटाकर ओठो को खोलकर रखे अब धीरे धीरे ‘सी-सी ‘ की आवाज करते हुए मुँह से सास ले और फेफड़ो को पूरी तरह भर ले जांलधर-बन्ध लगाकर जितनी देर आराम से रुक सके रुके फिर मुँह को बन्ध करके नाक से धीरे धीरे रेचक करें | पुनः इसी तरह दोहरावे | ८-१० बार का अभ्याश पर्याप्त है ! शीतकालीन में इस आसन का अभ्यास कम करना चाहिए |

सीत्कारी प्राणायाम की सावधानी

१. बिना कुम्भक व जालधर बध के भी अभ्यास कर सकते है |

२. पूरक के समय दांत व एवं जिहा अपने स्थान पर स्थिर रहनी चाहिए |

सीत्कारी प्राणायाम के लाभ 

१. गुण-धर्म व लाभ शितली प्राणायाम की तरह है |

२.दन्त रोग पायरिया आदि गले, मुँह, नाक, जिव्हा के रोग दूर होते है |

३. निंद्रा कम होती है और शरीर शीतल रहता है |

४. उच्च रक्त्चाप में ५० से ६०. तक आवर्ती करने से लाभ होता है |

About the author

Team Bhaktisatsang

भक्ति सत्संग वेबसाइट ईश्वरीय भक्ति में ओतप्रोत रहने वाले उन सभी मनुष्यो के लिए एक आध्यात्मिक यात्रा है, जिन्हे अपने निज जीवन में सदैव ईश्वर और ईश्वरत्व का एहसास रहा है और महाज्ञानियो द्वारा बतलाये गए सत के पथ पर चलने हेतु तत्पर है | यहाँ पधारने के लिए आप सभी महानुभावो को कोटि कोटि प्रणाम

क्या आपको हमारी पोस्ट पसंद आयी ?

Copy Paste blocker plugin by jaspreetchahal.org