Generated by All in One SEO v4.9.7.2, this is an llms.txt file, used by LLMs to index the site.भक्ति और अध्यात्म का संगम ## Sitemaps - [XML Sitemap](https://bhaktisatsang.com/sitemap.xml): Contains all public & indexable URLs for this website. ## Posts - [सप्तश्लोकी दुर्गा अर्थ सहित - भगवान् शिव रचित सप्तश्लोकी दुर्गा का पाठ](https://bhaktisatsang.com/durga-saptashloki-sapashati-mp3-lyrics/) - सप्तश्लोकी दुर्गा - Durga Saptashloki Durga Saptashati path in Hindi Pdf Free Download - माँ भगवती की आराधना दुर्गा सप्तसती से की जाती है, परन्तु समयाभाव में सप्तश्लोकी दुर्गा (Durga Saptashati path in Hindi) या दुर्गा सप्तश्लोकी (Durga Saptashloki PDF) का पाठ अत्यंत ही प्रभाव शाली और दुर्गा सप्तसती का सम्पूर्ण फल प्रदान करने वाला - [गायत्री मंत्र साधना विधि, गायत्री साधना से असम्भव सम्भव](https://bhaktisatsang.com/gayatri-mantra-sadhana-vidhi/) - गायत्री मंत्र का नियमित जाप अध्यात्मिक उन्नति में मदद करता है और मानसिक शांति और समृद्धि को प्राप्त करने में सहायक साबित होता है। गायत्री मंत्र में ब्रह्मा की - 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नवरात्री में करे नवग्रहों की शांति का उपाय - ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि नवरात्र में नवदुर्गा की पूजा करने से नवग्रह शांति की जा सकती है। आइये जानते हैं नवरात्रि - [नवरात्री में इन अनुष्ठान और पूजा से करे सभी समस्याओ का अंत](https://bhaktisatsang.com/navratri-puja-for-money-health/) - नवरात्री का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है | नवरात्रो का समय बेहद पावन और लाभकारी माना जाता है | यदि आप अपने जीवन में समस्यायों से ग्रसित है और उनका निवारण चाह - [नवरात्री विशेष - स्वयं देवी माँ अवतरित होती है माँ के रूप में](https://bhaktisatsang.com/maa-devi-goddess-mata-hindi/) - नवरात्री - हम माँ दुर्गा-भगवती की आराधना करते हैं, लेकिन यदि हम अपनी जननी माता की सेवा नहीं करते हैं तो माँ की आराधना का फल हमें प्राप्त नहीं होगा। आप अपनी मां की - [शक्ति अर्जन हेतु तप और साधना का पर्व नवरात्री](https://bhaktisatsang.com/navratri-sadhna-for-powers/) - चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को चैत्र नवरात्रारंभ हो रहा है। नवरात्री शक्ति-साधना का संधिपर्व है। शक्ति की साधना सधती है-शक्ति-संचय एवं इस संचित-शक्ति के सदुपयोग से। इस - 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[गणेश चतुर्थी का पूजन 21 दुखों का नाश करता है, इसलिए कहलाते है विनायक](https://bhaktisatsang.com/ganesh-chaturthi-pujan-importance/) - गणेश चतुर्थी का पूजन रहस्य - Ganesh Chaturthi Pujan Ganesh Chaturthi in Hindi - भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी के रूप में गणेशोत्सव (Ganesh Chaturthi Festival) पूरे देश में उमंग और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इसी शुभ दिन गणेशजी का जन्म हुआ था। इस दिन का बड़ा आध्यात्मिक - [जानिए गणेश चतुर्थी आयोजन का गूढ़ रहस्य](https://bhaktisatsang.com/secret-ganesh-chaturthi-festival-facts/) - गणेश चतुर्थी आयोजन - Secrets Of Ganesh Chaturthi Ganesh Chaturthi in Hindi - गणपति उपासना दरअसल स्व-जागरण की एक तकनीकी प्रक्रिया है। ढोल नगाड़ों से जुदा और बाहरी क्रियाकलाप से इतर अपनी समस्त इंद्रियों पर नियंत्रण करके ध्यान के माध्यम से अपने अंदर ईश्वरीय तत्व का परिचय प्राप्त करना और मोक्ष प्राप्ति की ओर अग्रसर - [क्यों होती है गणेश पूजन एवं गणेश स्तुति सर्वप्रथम](https://bhaktisatsang.com/why-lord-ganesha-worship/) - क्यों होती है गणेश पूजन एवं स्तुति सर्वप्रथम ? वक्रतुण्ड़ महाकाय सुर्यकोटि सपप्रभः। निर्विघ्नं कुरू में सर्वकार्येषु सर्वदा।। हिन्दू धर्म में किसी भी शुभ कार्य को शुरू करने से पहले गणेश जी की पूजा करने का विधान है। इसका कारण है कि गणेशजी रिद्धि - सिद्धि के स्वामी है। इनके स्मरण, ध्यान, जप, आराधना आदि से कामनाओं की - [Jai Ganesh Deva Aarti - जय गणेश देवा आरती](https://bhaktisatsang.com/jai-ganesh-deva-aarti/) - Jai Ganesh Deva Aarti - जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा Jai Ganesh Jai Ganesh Deva Aarti - गणेश चतुर्थी भारत में पूरे धूमधाम के साथ मनाया जाता है. इस खास मौके पर यश, सम्मान, समृद्धि और सुख के लिए गणेश जी की पूजा (Jai Ganesh Jai Ganesh Jai Ganesh Deva Aarti) की जाती - [श्री गणेश चालीसा - Ganesh Chalisa Lyrics](https://bhaktisatsang.com/श्री-गणेश-चालीसा-ganesh-chalisa-lyrics-in-hindi/) - Ganesh Chalisa – श्री गणेश को विघ्‍नकर्ता कहा जाता है. माना जाता है कि उनके पूजन से हर कार्य में सफलता मिलती है. जानिए गणेशचालीसा और उसका पाठ करने का महत्‍व - [गणेश चतुर्थी शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत और कथा महत्व](https://bhaktisatsang.com/ganesh-chaturthi-katha-muhurat-vidhi-hindi/) - Ganesh Chaturthi Vrat - हर चन्द्र महीने में हिन्दू कैलेंडर में 2 चतुर्थी तिथी होती है. हिन्दू शास्त्रों के अनुसार गणेश चतुर्थी भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मनाया.. - [कृष्ण जन्माष्टमी शुभ मुहूर्त तथा व्रत व पूजा विधि ](https://bhaktisatsang.com/krishna-janmashtami-puja-vrat-vidhi/) - Janmashtami in Hindi - हिन्दू धर्म में उपासकों के लिए सबसे अहम पर्वों में से एक है कृष्ण जन्माष्टमी। यह तिथि भगवान श्रीकृष्ण की जन्मतिथि के रूप में मनाई जाती है - [कृष्ण जन्माष्टमी : संसार के तारणहार का अलौकिक आगमन](https://bhaktisatsang.com/krishna-janmashtmi-katha/) - कृष्ण जन्माष्टमी - Krishna janmashtami Lord Krishna Story in Hindi : भगवान के माता-पिता वसुदेव-देवकी विवाह के तत्काल बाद बड़े प्रेम से विदा होते हैं और ऐश्वर्यशाली कंस रथ के घोड़ों की बागडोर थाम बड़े प्रेम से बहिन को पहुंचाने के लिए चलता है। इतने में ही आकाशवाणी हुई:- ’कंस, तेरी मृत्यु देवकी के आठवेंकृष्ण जन्माष्टमी पर जानिए भगवान कृष्ण के जन्म की रहस्यमयी और प्रेरणादायक कथा, जो जीवन में नैतिक मूल्य सिखाती है। - [जन्माष्टमी के दिन राशि अनुसार करें कृष्ण पूजन, बनेंगे बिगड़े काम](https://bhaktisatsang.com/janmashtami-puja-vidhi-according-to-zodiac-signs/) - जन्माष्टमी का त्योहार हर साल भादो की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन विधि विधान से श्री कृष्ण का पूजन करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। इस दिन लोग - [कृष्ण मंत्र श्लोक - Krishna Mantra & Krishna Sloka](https://bhaktisatsang.com/shri-krishna-mantra-sloka-strotam/) - कृष्ण मंत्र श्लोक - Krishna Mantra Sloka Krishna Sloka in Sanskrit - श्रीकृष्ण के मंत्र (Mantra of Shri Krishna) और कृष्ण श्लोक (Sloka on Krishna) ना सिर्फ आर्थिक समस्या दूर करते हैं बल्कि जीवन की हर परेशानी में कान्हा के चमत्कारी मंत्र और श्लोक सहायक सिद्ध होते हैं। चाहे संतान प्राप्ति हो या घर में - [कृष्ण जन्माष्टमी व्रत के नियम ](https://bhaktisatsang.com/krishna-janmashtami-puja-vrat-vidhi-hindi/) - Krishna Janmashtami - भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव Krishna Janmasthami in Hindi - भक्त लोग, जो जन्माष्टमी का व्रत करते हैं, जन्माष्टमी के एक दिन पूर्व केवल एक ही समय भोजन करते हैं। व्रत वाले दिन, स्नान आदि से निवृत्त होने के पश्चात, भक्त लोग पूरे दिन उपवास रखकर, अगले दिन रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि - [जन्माष्टमी पर श्री कृष्ण को भोग में चढ़ाएं ये 3 प्रसाद, जानें रेसिपी](https://bhaktisatsang.com/janmashtami-special-prasad-recipes/) - मक्खन के बिना जन्माष्टमी का पर्व पूरा नहीं हो सकता है। भगवान श्री कृष्ण को मक्खन बहुत पसंद था और इसी कारण उन्हें प्यार से माखन चोर बुलाया जाता है। उसमें मिश्री - [जय जय हनुमान, बजरंगी तू बलवान - Jay Jay Hanuman Song](https://bhaktisatsang.com/jay-jay-hanuman-song-जय-जय-हनुमान/) - जय-जय हनुमान! बजरंगी तू बलवान, तेरे नाम से निकले रे भूतो की जान, तेरी गदा में ज्वाला जलती, तेरी नजरो से आग निकलती! तेरे नाम को जो भी पुकारे,फिर किसी की नहीं है - [संकट हरो नाथ, जय जय श्री राम](https://bhaktisatsang.com/jay-shri-ram-sankat-haro-nath/) - "जय श्री राम... जय जय श्री राम!" जय श्री राम... जय जय श्री राम! संकट हरो नाथ, जय जय श्री राम! नाम तेरा लेके, सब काज हुए काम, भक्तों के प्यारे, जय जय श्री राम! - [जपे ओम नमः शिवाय - Jape Om Namh Shivay](https://bhaktisatsang.com/jape-om-namh-shivay-जपे-ओम-नमः-शिवाय/) - श्वेत हिमाचल सा तन सुहाना, (शिव शिव… शिव शिव…) गंग धार शीश पे प्यारा। चंद्र मुकुट पे जटा लहराए, भस्म से अंग की शोभा बढ़ाये ॥ जपे ओम नमः शिवाय… ओम नमः शिवाय… - [शेरों के जैसे गर्जना कर, जाग अब रण के जवान](https://bhaktisatsang.com/jay-jay-shri-ram-song-lyrics/) - शेरों के जैसे गर्जना कर, जाग अब रण के जवान ! राम तुम्हारे साथ खड़े हैं, बढ़ाओ धर्म की शान ! रघुकुल की रीति पुरानी, प्राण जाए पर वचन नहीं ! जो राम काज में शूल.. - [भगवान शिव का जन्म - भगवान शिव के माता पिता कौन है ?](https://bhaktisatsang.com/भगवान-शिव-का-जन्म/) - भगवान शिव के माता पिता कौन है, भगवान शिव का जन्म - मित्रो भगवन शिव को भोलेनाथ, शंकर, नीलकंठ, गंगाधार आदि नामों से भी जाना जाता है। तंत्र साधना में इन्हे भैरव - [आदि योगी शिव - संपूर्ण सृष्टि के मूल और अनादि देव](https://bhaktisatsang.com/about-adiyogi-shiva/) - आदि योगी शिव ही इस संपूर्ण सृष्टि के अनादि देव है जिनके महिमा का वर्णन वेदो, पुराणों, दर्शन, योग , तंत्र आदि साहित्य में सर्वत्र मिलता है। भारत का जन मानस वैष्णव - [शिव का रहस्य - क्या शिव ही स्रष्टि का आरंभ और अंत है ?](https://bhaktisatsang.com/is-shiva-the-beginning-and-end-of-the-universe/) - शिव का रहस्य - शिव संहार के प्रतिनिधि है जो प्रलय के द्वारा पुनः सृस्टि की संरचना में अपना योगदान देते है, प्रलय शब्द का वर्णन लगभग हर धर्म के ग्रंथों में मिलता है - [महाशिवरात्रि का वैज्ञानिक महत्व - महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है](https://bhaktisatsang.com/importance-of-shiv-puja-in-night/) - महाशिवरात्रि पर 10 लाइन - शिव पूजन की विशेषताएं क्या है ? शिव पूजा के संबंध में अनेक पंथों में अलग-अलग प्रथाएं प्रचलित है। कुछ पंथों में शिवाजी को अर्पण कया हुआ - [महाशिवरात्रि 2025 - राशिनुसार पूजाविधि व आराध्य ज्योतिर्लिंग](https://bhaktisatsang.com/maha-shivratri-astrology-rashi-vrat-hindi/) - Maha Shivaratri 2025 - महाशिवरात्रि 2025 - फाल्गुन कृष्ण पक्ष में चतुर्दशी के दिन महा शिवरात्रि (Maha Shivratri) का पर्व मनाया जाता है, मान्यता है इस दिन शंकर - [महाशिवरात्रि की कथा, महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है 10 लाइन](https://bhaktisatsang.com/mahashivratri-vrat-katha/) - महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है - फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी को महाशिवरात्रि (महाशिवरात्रि की कथा) के नाम से जाना जाता है। महाशिवरात्रि पर 10 लाइन, इस दिन - [महाशिवरात्रि व्रत और पूजन विधि 2025](https://bhaktisatsang.com/mahashivratri-puja-vrat/) - फाल्गुन कृष्ण पक्ष में चतुर्दशी के दिन महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है, इस दिन शंकर जी और पार्वती जी का विवाह संपन्न हुआ था, साथ ही महाशिवरात्रि को अर्द्ध - [शिव पार्वती विवाह कथा - Shiv Parvati Vivah](https://bhaktisatsang.com/shiv-parvati-vivah-katha-hindi/) - शिव पार्वती विवाह कथा - Shiv Parvati Vivah, शिव पार्वती विवाह हिंदी में - माता पार्वती के पिता हिमावन ने श्रेष्ठ मुनियों को आदरपूर्वक बुला लिया और उनसे शुभ दिन - [श्री राम कथा - राम अनंत, अनंत गुण, अमित कथा विस्तार](https://bhaktisatsang.com/shri-ram-katha-ram-anant-anant-gun-amit-katha/) - श्री रामनवमी की गहन अनुभूति श्री राम कथा है। इसमें श्री राम भक्ति की अगणित उमंगें एवं अनंत उछाह है। यही वह सच्ची अयोध्या है, जहाँ प्रभु श्री राम एवं उनके अनंत ग - [राशिफल 2025 - जाने 12 राशियों का सटीक राशिफल नववर्ष में](https://bhaktisatsang.com/rashifal-horoscope-राशिफल-2025/) - राशिफल 2025 (Rashifal 2025) को वैदिक ज्योतिष पर आधारित घटनाओं और ग्रह गोचर के आधार पर ज्योतिषीय गणना और विश्लेषण के बाद तैयार किया गया है। वार्षिक भविष्यफल 2025 - [रामनवमी - भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का दिन](https://bhaktisatsang.com/ram-navami-katha-vrat-hindi/) - मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में रामनवमी मनाई जाती है जो कि भगवान विष्णु के 7वें अवतार थे। प्रत्येक साल हिन्दू कैंलेडर के अनुसार चैत्र - [51 शक्तिपीठ के नाम और जगह - माता सती के 51 शक्तिपीठ लिस्ट](https://bhaktisatsang.com/details-of-51-shakti-peethas/) - शक्तिपीठ, देवीपीठ या सिद्धपीठ से उन स्थानों का ज्ञान होता है, जहां शक्तिरूपा देवी का अधिष्ठान (निवास) है। ऐसा माना जाता है कि ये शक्तिपीठ मनुष्य को समस्त सौभाग - [योगिनी एकादशी व्रत मुहूर्त - Yogini Ekadashi 2025](https://bhaktisatsang.com/yogini-ekadashi-vrat-योगिनी-एकादशी/) - Yogini Ekadashi 2023 - योगिनी एकादशी Yogini Ekadashi Vrat के दिन भगवान श्री नारायण की पूजा-आराधना की जाती है। ये व्रत करने से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और पीपल - [सावन का महीना 2025 - सावन कब से शुरू है, सावन की शिवरात्रि कब है](https://bhaktisatsang.com/sawan-kab-se-hai-start-date-shivratri/) - सावन का महीना 2023 - Sawan Month 2023 - आषाढ़ महीने की शुरुआत होते ही महादेव के भक्तों के अंदर उत्साह फूट पड़ता है क्योंकि इस महीने के बाद ही सावन का पवित्र.. - [तुलसी विवाह 2025 - जाने तुलसी विवाह कथा और तुलसी विवाह कब है](https://bhaktisatsang.com/tulsi-vivah-date-2023-katha/) - तुलसी विवाह 2023 - तुलसी विवाह 2023 date and time - आज आपको तुलसी विवाह की कहानी, तुलसी विवाह का शुभ मुहूर्त कब है और तुलसी विवाह कैसे करें के साथ माँ वृंदा... - [वार्षिक राशिफल 2025: भविष्यफल और उपाय  ](https://bhaktisatsang.com/वार्षिक-राशिफल-2024-भविष्यफल/) - आज हम जानेंगे कि आने वाला नया साल यानी कि वर्ष 2024 राशि चक्र की सभी 12 राशियों के लिए कैसा रहेगा। वार्षिक राशिफल 2024 की सहायता से आप सभी यह जान सकते हैं कि - [षटतिला एकादशी 2025 - Shattila Ekadashi](https://bhaktisatsang.com/षटतिला-एकादशी-shattila-ekadashi/) - षटतिला एकादशी (Shattila Ekadashi )के दिन भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है। कुछ लोग बैकुण्ठ रूप में भी भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। अपने नाम के अनुरूप यह व्रत - [महाशिवरात्रि 2025- शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और मंत्र](https://bhaktisatsang.com/mahashivratri-pujan-mantra-vidhi-महाशिवरात्रि/) - महाशिवरात्रि 2024 - शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और मंत्र - महाशिवरात्रि के प्रदोषकाल में शंकर-पार्वती का विवाह हुआ था। महाशिवरात्रि तिथि में सर्व ज्योतिर्लिंगों का - [मंगल ग्रह का प्रभाव और उपाय तथा शांति मंत्र](https://bhaktisatsang.com/mangal-grah-ke-upay/) - मंगल देवता लाल रंग का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में मंगल ग्रह की अपने जीवन में स्थिति मजबूत करने के लिए आप मंगलवार को लाल रंग या फिर कॉपर शेड के वस्त्र धारण - 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विजया एकादशी व्रत विधि और कथा - Vijaya Ekadashi Vrat Katha भगवान विष्णु की साधना-आराधना के लिए समर्पित एकादशी का सनातन परंपरा में विशेष महत्व है। फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी कहा जाता है। इस पावन तिथि पर किया जाने वाला यह व्रत जीवन में सफलता पाने और मनोकामना को - [सनातन धर्म के रहस्य - मृतक और मृत्यु से सम्बंधित](https://bhaktisatsang.com/secret-of-sanatan-dharma-hindi/) - मृतक का सिर उत्तर दिशा की ओर क्यों रखते हैं? मृत्युकाल के समय प्राणी (मनुष्य) को उत्तर की ओर सिर करके इसलिए लिटाते हैं कि प्राणों का उत्सर्ग दशम द्वार से हो । चुम्बकीय विद्युत प्रवाह की दिशा दक्षिण से उत्तर की ओर होती है। कहते हैं कि मरने के बाद भी कुछ क्षणों तक - [प्रकृति को समझने वाला व्यक्ति ही सर्वज्ञानी है](https://bhaktisatsang.com/prakriti-ko-samjhne-wala-vyakti/) - सनातन ग्रंथों में अनंत ज्ञान छिपा है। सनातन ज्ञान के 1-1 ग्रंथों पर यदि अध्ययन किया जाये तो व्यक्ति का संपूर्ण जीवन ही छोटा पड़ सकता है । लेकिन दुर्भाग्य है कि हमने सनातन ज्ञान के मार्ग को छोड़कर पैशाची संस्कृति के मार्ग को अपना लिया है और आज उसी का परिणाम है कि हमें - 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[सरस्वती स्तोत्र -Saraswati Stotram](https://bhaktisatsang.com/saraswati-stotram-lyrics-meaning/) - Saraswati Stotram - सरस्वती स्तोत्र माँ सरस्वती का स्तोत्र (Saraswati Stotram) को निरंतर पढ़ने से भक्तों को ज्ञान और बुद्ध‍ि प्राप्त होती हैं. सरस्वती स्तोत्र Saraswati Stotram Lyrics के प्रभाव से अज्ञानी भी थोड़े ही प्रयास से विद्वान बन जाता है. माता की एक ऐसी स्तुति है, जो सबसे ज्यादा प्रचलित है. मां सरस्वती की - [पापांकुशा एकादशी व्रत - जाने व्रत कथा, महत्व, नियम और शुभ मुहूर्त](https://bhaktisatsang.com/papankusha-ekadashi-vrat-katha-importance/) - Papankusha Ekadashi Vrat Katha - भगवान श्रीकृष्ण ने कहा: हे कुंतीनंदन! आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी का नाम पापांकुशा एकादशी है। इसका व्रत करने से सभी पाप - [भगवान शिव के 19 अवतार](https://bhaktisatsang.com/bhagwan-shiv-ke-avtar/) - भगवान शिव के अवतार - Avatar of Lord Shiva Lord Shiva Avatar - शिव महापुराण में भगवान शिव के अनेक अवतारों का वर्णन मिलता है, लेकिन बहुत ही कम लोग इन अवतारों के बारे में जानते हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव के 19 अवतार (Shiv Avatar) हुए थे। आइए जानें शिव के 19 (Story - 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[आदिशक्ति ही ब्रह्मा, विष्णु, महेश का रूप धर संसार का पालन और संहार करती हैं](https://bhaktisatsang.com/adishakti-shakti/) - आदिशक्ति ही ब्रह्मा, विष्णु, महेश का रूप धर संसार का पालन और संहार करती हैं आदिशक्ति का अवतरण सृष्टि के आरंभ में हुआ था। कभी सागर की पुत्री सिंधुजा-लक्ष्मी तो कभी पर्वतराज हिमालय की कन्या अपर्णा-पार्वती। तेज, द्युति, दीप्ति, ज्योति, कांति, प्रभा और चेतना तथा जीवन शक्ति संसार में जहां कहीं भी दिखाई देती है, - [चिंतपूर्णी माता का मंदिर - 51 शक्ति पीठो मे से एक जहा माता सती के चरण गिरे थे](https://bhaktisatsang.com/chintapurni-temple-himachal-pradesh/) - चिंतपूर्णी माता - Chintpurni Mata नौ देवियों में से पांच देवियो के मंदिर हिमाचल प्रदेश में ही स्थित हैं। इनमें माता चिंतपूर्णी के बारे में कहा जाता है कि वे मन की हर तरह की चिंता को दूर कर सुख प्रदान करती हैं। वे पहाड़ों की नौ देवियों और देश के 51 शक्तिपीठ में से - [माँ महागौरी के ध्यान मंत्र, स्त्रोत और कवच पाठ](https://bhaktisatsang.com/maa-mahagauri-mantra/) - मां महागौरी के मंत्र, स्त्रोत और कवच पाठ Mp3 Download श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।। या देवी सर्वभू‍तेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। माता महागौरी का ध्यान वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्। सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा महागौरी यशस्वनीम्॥ पूर्णन्दु निभां गौरी सोमचक्रस्थितां अष्टमं महागौरी त्रिनेत्राम्। वराभीतिकरां त्रिशूल डमरूधरां महागौरी भजेम्॥ पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालंकार - 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यह स्तोत्र देवताओं द्वारा देवी भगवती को प्रसन्न करने के लिये गाया गया था (Devi Suktam Path) यह सूक्त देवी माहात्म्य के अन्तर्गत दुर्गा सप्तशती के पांचवे अध्याय के 9वे श्लोक से 82वे श्लोक तक दिया गया है. तन्त्रोक्त देवी सूक्त इस प्रकार - [ऋणमोचक मंगल स्तोत्र](https://bhaktisatsang.com/rinmochak-mangal-strotam/) - ऋणमोचक मंगल स्तोत्र मङ्गलो भूमिपुत्रश्च ऋणहर्ता धनप्रदः । स्थिरासनो महाकयः सर्वकर्मविरोधकः ॥1।। लोहितो लोहिताक्षश्च सामगानां कृपाकरः । धरात्मजः कुजो भौमो भूतिदो भूमिनन्दनः॥2।। अङ्गारको यमश्चैव सर्वरोगापहारकः । व्रुष्टेः कर्ताऽपहर्ता च सर्वकामफलप्रदः॥3।। एतानि कुजनामनि नित्यं यः श्रद्धया पठेत् । ऋणं न जायते तस्य धनं शीघ्रमवाप्नुयात् ॥4।। धरणीगर्भसम्भूतं विद्युत्कान्तिसमप्रभम् । कुमारं शक्तिहस्तं च मङ्गलं प्रणमाम्यहम् ॥5।। यह भी - [श्री महासरस्वती सहस्त्रनाम स्तोत्रम](https://bhaktisatsang.com/maha-saraswati-sahastranaam-strotam-mantra/) - श्री महासरस्वती सहस्त्रनाम स्तोत्रम * अथ ध्यानम् श्रीमच्चन्दनचर्चितोज्ज्वलवपु: शुक्लाम्बरा मल्लिका- मालाललित कुन्तला प्रविलासन्मुक्तावलीशोभना । सर्वज्ञाननिधानपुस्तकधरा रुद्राक्षमालाङ्किता वाग्देवी वदनाम्बुजे वसतु मे त्रैलोक्यमाता शुभा ॥1॥ नारद उवाच- भगवन्परमेशान सर्वलोकैकनायक । कथं सरस्वती साक्षात्प्रसन्ना परमेष्ठिन: ॥2॥ कथं देव्या महावाण्या: सतत्प्राप सुदुर्लभम्‍ । एतन्मे वद तत्वेन महायोगीश्वरप्रभो ॥3॥ श्री सनत्कुमार उवाच - साधु पृष्टं त्वया ब्रह्मन्‍ गुह्याद्गुह्य मनुत्तमम्‍ । - [श्री हनुमान वडवानल स्तोत्र - हनुमान जी की पहली स्तुति](https://bhaktisatsang.com/hanuman-vadvanal-stotra/) - श्री हनुमान वडवानल स्तोत्र - Hanuman Vadvanal Stotra Hanuman Vadnaval Stotra PDF - हनुमानजी की प्रार्थना में तुलसीदासजी ने हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, हनुमान बाहुक आदि अनेक स्तोत्र लिखे, लेकिन हनुमानजी की पहली स्तुति किसने की थी? तुलसीदासजी के पहले भी कई संतों और साधुओं ने हनुमानजी की श्रद्धा में स्तुति लिखी है। जब हनुमानजी - [श्री यमुनाष्टकम् स्त्रोत - Yamunashtak Lyrics in Hindi](https://bhaktisatsang.com/yamuna-strotam/) - श्री यमुनाष्टकम् स्त्रोत - Shree Yamunashtak Strotram मुरारिकायकालिमाललामवारिधारिणी तृणीकृतत्रिविष्टपा त्रिलोकशोकहारिणी । मनोऽनुकूलकूलकुञ्जपुञ्जधूतदुर्मदा धुनोतु मे मनोमलं कलिन्दनन्दिनी सदा ॥१॥ मलापहारिवारिपूरभूरिमण्डितामृता भृशं प्रपातकप्रवञ्चनातिपण्डितानिशम् । सुनन्दनन्दनाङ्गसङ्गरागरञ्जिता हिता धुनोतु मे मनोमलं कलिन्दनन्दिनी सदा ॥२॥ यह भी पढ़े : यमुना जी की आरती लसत्तरङ्गसङ्गधूतभूतजातपातका नवीनमाधुरीधुरीणभक्तिजातचातका । तटान्तवासदासहंससंसृता हि कामदा धुनोतु मे मनोमलं कलिन्दनन्दिनी सदा ॥३॥ विहाररासखेदभेदधीरतीरमारुता गता गिरामगोचरे यदीयनीरचारुता । - [राधाषोडशनामस्तोत्रम् - राधा जी के 32 नाम](https://bhaktisatsang.com/radharani-strotam-mantra/) - राधाषोडशनामस्तोत्रम् (राधा जी के 32 नाम) - Names of Radha श्रीनारायण उवाच राधा रासेश्वरी रासवासिनी रसिकेश्वरी । कृष्णाप्राणाधिका कृष्णप्रिया कृष्णस्वरूपिणी ॥१॥ कृष्णवामाङ्गसम्भूता परमानन्दरूपिणी । कृष्णा वृन्दावनी वृन्दा वृन्दावनविनोदिनी ॥२॥ चन्द्रावली चन्द्रकान्ता शरच्चन्द्रप्रभानना । नामान्येतानि साराणि तेषामभ्यन्तराणि च ॥३॥ राधेत्येवं च संसिद्धौ राकारो दानवाचकः । स्वयं निर्वाणदात्री या सा राधा परिकिर्तिता ॥४॥ रासेश्वरस्य पत्नीयं तेन रासेश्वरी - [Hanuman Mantra - हनुमानजी के सर्व कष्ट निवारक सिद्ध मंत्र](https://bhaktisatsang.com/hanumanji-siddha-kashtniwarak-mantra-hindi/) - हनुमान मंत्र - Hanuman Mantra in Hindi Hanuman Matra in Sanskrit - हनुमान जी के शक्तिशाली मंत्रो (Hanuman Mantra Powerful) से भक्त अपने जीवन में चहुमुखी सफलता अर्जित (Hanuman Mantra For Success) कर सकता है, कला जादू, वशीकरण के निवारण (Hanuman Mantra to Remove Black Magic) में भी हनुमान मंत्र सिद्ध है, पूरी श्रद्धा से - [लाल किताब और ज्योतिष के अनुसार डर भागने के सर्वोत्तम उपाय और मंत्र यही है](https://bhaktisatsang.com/भयनाशक-उपाय-dar-bhagane-ke-upay-jyotish/) - लाल किताब के अनुसार डर भगाने के घरेलू उपाय दुनिया में ऐसे बहुत ही कम इंसान होते हैं जिन्हें डर नहीं लगता है। भले ही हम माने या न माने कि इस दुनिया में भूत, प्रेत, बाधा जैसी चीजें नहीं होती हैं पर समय-समय पर ये चीजें अपनी उपस्थिति का सबूत देती हैं जिससे आम इंसानों के - [शत्रुनाशिनी श्री बगलामुखी - शत्रु बाधा हेतु बगलामुखी मंत्र और यन्त्र साधना और सिद्धि विधि](https://bhaktisatsang.com/baglamukhi-sadhna-for-shatru-badha/) - शत्रु बाधा हेतु बगलामुखी मंत्र साधना - Baglamukhi Sadhna शत्रुनाशिनी श्री बगलामुखी (Baglamukhi) का परिचय भौतिकरूप में शत्रुओं का शमन करने की इच्छा रखने वाली तथा आध्यात्मिक रूप में परमात्मा की संहार शक्ति हैं। पीताम्बरा विद्या के नाम से विख्यात बगलामुखी की साधना (Baglamukhi Sadhna) प्रायः शत्रु भय से मुक्ति और वाक् सिद्धि के लिए - [आदि शक्ति योनिस्तोत्रम्](https://bhaktisatsang.com/adi-shakti-yonistrotam/) - आदि शक्ति योनिस्तोत्रम् ॐ भग-रूपा जगन्माता सृष्टि-स्थिति-लयान्विता । दशविद्या - स्वरूपात्मा योनिर्मां पातु सर्वदा ।।१।। कोण-त्रय-युता देवि स्तुति-निन्दा-विवर्जिता । जगदानन्द-सम्भूता योनिर्मां पातु सर्वदा ।।२।। कात्र्रिकी - कुन्तलं रूपं योन्युपरि सुशोभितम् । भुक्ति-मुक्ति-प्रदा योनि: योनिर्मां पातु सर्वदा ।।३।। वीर्यरूपा शैलपुत्री मध्यस्थाने विराजिता । ब्रह्म-विष्णु-शिव श्रेष्ठा योनिर्मां पातु सर्वदा ।।४।। यह भी पढ़े : श्री पार्वती जी - [देवी कवच-चण्डी कवच - Devi Kavach - Chabdi Kavach](https://bhaktisatsang.com/devi-chandi-kawach/) - विनियोग – ॐ अस्य श्रीदेव्या: कवचस्य ब्रह्मा ऋषि:, अनुष्टुप् छन्द:, ख्फ्रें चामुण्डाख्या महा-लक्ष्मी:देवता, ह्रीं ह्रसौं ह्स्क्लीं ह्रीं ह्रसौं अंग-न्यस्ता देव्य: शक्तय:, ऐं ह्स्रीं ह्रक्लीं श्रीं ह्वर्युं क्ष्म्रौं स्फ्रें बीजानि, श्रीमहालक्ष्मी-प्रीतये सर्व रक्षार्थे च पाठे विनियोग:। ऋष्यादि-न्यास – ब्रह्मर्षये नम: शिरसि, अनुष्टुप् छन्दसे नम: मुखे, ख्फ्रें चामुण्डाख्या महा-लक्ष्मी: देवतायै नम: हृदि, ह्रीं ह्रसौं ह्स्क्लीं ह्रीं ह्रसौं - [दुर्गा नाममाला](https://bhaktisatsang.com/durga-naam-mala/) - दुर्गा नाममाला - Durga Nam दुर्गा दुर्गार्तिशामिनी दुर्गापद्विनिवारिणी | दुर्गमच्छेदिनी दुर्गसाधिनी दुर्गनाशिनी || दुर्गतोद्धारिणी दुर्गनिहंत्री दुर्गमापहा | दुर्गमज्ञानदा दुर्गदैत्यलोकदवानला || दुर्गमा दुर्गमालोका दुर्गमात्मस्वरूपिणी | दुर्गमार्गप्रदा दुर्गमविधया दुर्गमाश्रिता || दुर्गमज्ञानसंस्थाना दुर्गमध्यानभासिनी | दुर्गमोहा दुर्गमगा दुर्गमार्थस्वरूपिणी || दुर्गमासुरसहंत्री दुर्गमायुधधरिणी | दुर्गमाङगी दुर्गमता दुर्गम्या दुर्गमेश्वरी|| दुर्गभीमा दुर्गभामा दुर्गभा दुर्ग दारिणी | यह भी पढ़े : श्री दुर्गा चालीसा - 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[जितिया व्रत 2022- जाने जिवित्पुत्रिका व्रत कब है तथा जितिया व्रत कथा](https://bhaktisatsang.com/जितिया-व्रत-2022-jitiya-vrat-katha-vidhi/) - जितिया व्रत 2022- Jitiya Vrat 2022, जितिया व्रत की कहानी - यु तो आश्विन मास की प्रत्येक तिथि बहुत महत्वपूर्ण होती है । लेकिन आश्विन मास की कृष्ण अष्टमी तिथि का शास्त्रों में बड़ा ही महत्व माना गया है क्यों की एक माँ के लिए संतान की सुरक्षा, सेहत - [राहु कवच स्तोत्र - राहु जनित सम्पूर्ण कष्टों से मुक्ति देने वाला पाठ](https://bhaktisatsang.com/rahu-kavach-stotra-path-in-hindi/) - राहु कवच स्तोत्र - Rahu Kavach Path अगर आपकी कुंडली में राहु की स्थिति अच्छी ना हो और राहु की महादशा का भोग कर रहे हैं अथवा राहु नीच राशि शत्रु भाव क्या किसी कारण से आपको राहु से कष्ट प्राप्त हो रहा है तो राहु कवच का पाठ करना बहुत ही ज्यादा फायदेमंद है। - [सर्वपितृ अमावस्या का महत्व और पितरो के निम्मित किये जाने वाले उपाय](https://bhaktisatsang.com/significance-of-shradh-sarva-pitru-amavasya/) - सर्वपितृ अमावस्या का महत्व सर्वपितृ अमावस्या आश्विन माह की अमावस्या को कहा जाता है। आश्विन माह का कृष्ण पक्ष वह विशिष्ट काल है, जिसमें पितरों के लिये तर्पण और श्राद्ध आदि किये जाते है। आश्विन मास की अमावस्या 'पितृपक्ष' के लिए उत्तम मानी गई है। इस अमावस्या को 'सर्वपितृ अमावस्या' या 'पितृविसर्जनी अमावस्या' या 'महालय - [सर्वपितृ अमावस्या 2022 – सभी पितरो का श्राद्ध और तर्पण करने का दिन](https://bhaktisatsang.com/sarvapitra-amavasya-shradh-karma-muhurat/) - सर्वपितृ अमावस्या 2022 - Sarvapitri Amavasya 2022 Date and Time आश्विन मास, वर्ष के सभी 12 मासों में खास माना जाता है। लेकिन इस मास की अमावस्या तिथि (सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या) तो और भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसकी सबसे बड़ी वजह है पितृ पक्ष में इस अमावस्या का होना। अंग्रेजी कलैंडर के अनुसार - [मार्गशीर्ष अमावस्या 2022 – अगहन अमावस्या का महत्व व व्रत पूजा विधि](https://bhaktisatsang.com/मार्गशीर्ष-अमावस्या-margashirsha-amavasya/) - मार्गशीर्ष अमावस्या 2022 – Margashirsha Amavasya मार्गशीर्ष माह को हिंदू धर्म में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे अगहन मास भी कहा जाता है यही कारण है कि मार्गशीर्ष अमावस्या को अगहन अमावस्या भी कहा जाता है। वैसे तो प्रत्येक अमावस्या का अपना खास महत्व होता है और अमावस्या तिथि स्नान-दान-तर्पण आदि के लिये जानी - [जानिए पितृ श्राद्ध करने के 24 नियम, श्राद्ध के प्रमुख अंग और श्राद्ध के प्रकार](https://bhaktisatsang.com/pitru-shraddha-rules/) - 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[अजा एकादशी - जानें एकादशी व्रत की पूजा विधि व मुहूर्त](https://bhaktisatsang.com/aja-ekadashi-vrat-katha-puja-vidhi/) - अजा एकादशी - Aja Ekadashi Aja Ekadashi - हिंदु कैलेंडर के हिसाब से प्रत्येक चंद्रमास में दो पक्ष होते हैं एक कृष्ण पक्ष और एक शुक्ल पक्ष। दोनों पक्षों में पंद्रह तिथियां होती हैं। कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से लेकर अमावस्या तक रहता है तो शुक्ल पक्ष की शुरुआत अमावस्या के बाद प्रतिपदा को चंद्र दर्शन - [श्री कृष्ण के जीवन के रहस्य](https://bhaktisatsang.com/secrets-of-shri-krishna-hindi/) - श्री कृष्णा जीवन रहस्य - Secrets of Shri Krishna - श्रीकृष्ण के जन्म के समय और उनकी आयु के विषय में पुराणों व आधुनिक मिथकविज्ञानियों में मतभेद हैं। हालाँकि महाभारत के समय उनकी आयु ७२ वर्ष बताई गयी है। महाभारत के पश्चात पांडवों ने ३६ वर्ष शासन किया और श्रीकृष्ण की मृत्यु के तुरंत बाद - [श्री कृष्ण और कालिया नाग का दमन](https://bhaktisatsang.com/shri-krishna-kaliya-daman-story/) - Krishna & Kaliya Naag Story - कालिया दमन - kaliya daman story - श्रीकृष्ण अभी बालक ही थे किन्तु उनपर कंस के राक्षसों द्वारा कई आक्रमण हो चुके थे। अब तक तो पूरा ब्रज भी जान चुका था कि कृष्ण कोई साधारण बालक नहीं हैं। प्रतिदिन कृष्ण अपने मित्रों और बलराम के साथ गौ चराने - [लड्डू गोपाल के मंदिर में ध्यान रखने वाली 6 बाते और 20 नियम](https://bhaktisatsang.com/ghar-ke-mandir-me-dhyan-rakhne-wali-baten-niyam/) - श्री कृष्ण को प्रेम स्वरूप माना जाता है। ग्रंथों में कहा गया है कि श्री कृष्ण का व्यक्तित्व बहुत ही सम्मोहक है। वे पीला पीतांबर धारण करते हैं और उनके मुकुट पर मोर पंख है। लड्डू गोपाल को छ: चीजों से बहुत प्रेम है, पहली बांसुरी जो हमेशा उनके होंठों से लगी रहती है। दूसरी - [शनि कवच- Shree Shani Kavacham](https://bhaktisatsang.com/शनि-कवच-shani-kavach-hindi-lyrics/) - शनि कवच - Shani Kavach in Hindi अथ श्री शनिकवचम् अस्य श्री शनैश्चरकवचस्तोत्रमंत्रस्य कश्यप ऋषिः ॥ अनुष्टुप् छन्दः ॥ शनैश्चरो देवता ॥ शीं शक्तिः ॥ शूं कीलकम् ॥ शनैश्चरप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः ॥ निलांबरो नीलवपुः किरीटी गृध्रस्थितस्त्रासकरो धनुष्मान् ॥ चतुर्भुजः सूर्यसुतः प्रसन्नः सदा मम स्याद्वरदः प्रशान्तः ॥ १ ॥ ब्रह्मोवाच ॥ श्रुणूध्वमृषयः सर्वे शनिपीडाहरं महत् । कवचं शनिराजस्य सौरेरिदमनुत्तमम् ॥ २ ॥ कवचं देवतावासं वज्रपंजरसंज्ञकम् । शनैश्चरप्रीतिकरं सर्वसौभाग्यदायकम् - [माता कुष्मांडा देवी कवच - Kushmanda Devi Kavach](https://bhaktisatsang.com/कुष्मांडा-कवच-kushmanda-kavach-mantra/) - मां दुर्गा अपने चतुर्थ स्वरूप में कूष्माण्डा (kushmanda devi) के नाम से जानी जाती है। सुरासम्पूर्णकलशंरुधिप्लूतमेव च। दधाना हस्तपदमाभयां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥ भगवती दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप का नाम कूष्माण्डा है। अपनी मंद हंसी द्वारा अण्ड अर्थात् ब्रह्माण्ड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कूष्माण्डा देवी के नाम से अभिहित किया गया है। जब सृष्टि - [शिव कामा सुंदरी अष्टकं - Shiva Kama Sundari Ashtakam](https://bhaktisatsang.com/shiva-kama-sundari-ashtakam/) - शिव कामा सुंदरी अष्टकं - Shiva Kama Sundari Ashtakam पुण्डरीक पुरा मध्य वसिनिं, नृथ राज सह ध्गर्मिनिं । अध्रि राज थानयां, धिने धिने चिन्थयामि शिवकामा सुन्दरीं ॥१॥ ब्रह्म विष्णु धाम देव पूजिथं, बहु स्रीपद्म सुक वथस शोबिथं । बहुलेय कलपन नथ्मजं, धिने धिने चिन्थयामि शिवकामा सुन्दरीं ॥२॥ वेद शीर्ष विनुथ आत्मा वैभवं, वन्चिथर्थ फल धन - [श्रीकृष्ण की सोलह हजार एक सौ आठ रानियों का पूर्वजन्म](https://bhaktisatsang.com/shri-krishna-16108-wives/) - हम सभी ने श्रीकृष्ण की 16108 रानियों के विषय में पढ़ा है। वास्तव में श्रीकृष्ण की 16108 पत्नियों की भूमिका त्रेता युग में रामावतार के समय ही बन गयी थी। त्रेतायुग में श्रीराम ने एक पत्नीव्रती होने का निश्चय कर लिया था किन्तु उस समय अनेकानेक युवतियां श्रीराम को अपने पति के रूप में प्राप्त - [श्रीकृष्ण का नाम "दामोदर" कैसे पड़ा?](https://bhaktisatsang.com/why-krishna-called-damodar/) - श्रीकृष्ण की लीलाओं (Krishna Stories) की भांति उनके नाम भी अनंत हैं। उनमें से ही एक नाम "दामोदर" है जो उन्हें बचपन में दिखाई गयी एक लीला के कारण मिला था। - [हरे कृष्णा महामंत्र – Hare Ram Hare Krishna Mahamantra](https://bhaktisatsang.com/hare-krishna-maha-mantra/) - हरे कृष्णा हरे राम महामंत्र - Hare Ram Hare Krishna Mahamantra हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे | हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ Hare Ram Hare Krishna Mahamantra - कलियुग में नाम संकीर्तन के अलावा जीव के उद्धार का अन्य कोई भी उपाय नहीं है| इस पंक्ति को सत्यापित करने - [Shri Krishna Mantra - श्री कृष्ण के मंत्रो से दूर करे सम्पूर्ण समस्याएं](https://bhaktisatsang.com/shree-krishna-mantra/) - श्री कृष्ण मंत्र - Shri Krishna Mantra श्री कृष्णा मंत्र अमोघ है, कृष्ण मंत्र (Krishna Gayatri Mantra) के नित्य जप से जीवन की सम्पूर्ण समस्याओ का निवारण (Krishna Mantra Hindi) हो जाता हैं। चाहे वो संतान प्राप्ति, गृह क्लेश, लव मैरिज या क़ानूनी समस्या हो उनका निश्चय ही अंत करते हैं घर में होता हो - 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[सद्गुरु द्वारा सिद्ध ईशा योग क्रिया ध्यान लगाने की सरल विधी](https://bhaktisatsang.com/isha-yog-kriya-hindi-sadguru-jaggi/) - ईशा योग क्रिया | Isha Meditation आध्यात्मिक विकास की संभावनाएं जो पहले केवल योगियों और संयासियों के लिए ही थी अब ईशा क्रिया के द्वारा सभी लोगों को उनके घर की सुख सुविधा में बैठे प्राप्त हो सकती है। योग विज्ञान के शाश्‍वत ज्ञान का हिस्‍सा है ईशा क्रिया। सद्‌गुरु ने ईशा क्रिया को एक - [सद्गुरु के अनुसार मानसिक तनाव, डिप्रेशन, बेचैनी जैसी बीमारियां के कारण](https://bhaktisatsang.com/reason-depression-मानसिक-तनाव-डिप्रेशन/) - मानसिक तनाव कैसे दूर करें | How To Deal With Depression पिछली पीढ़ी की तुलना में इस पीढ़ी में डिप्रेशन के मामलों में अचानक उछाल आया है। मानसिक तनाव, डिप्रेशन, बेचैनी जैसी कई बीमारियां आज काफी बढ़ गई हैं। हमारी पिछली पीढ़ी को ऐसी परेशानियों का सामना कभी नहीं करना पड़ा। हमारे समाज में आज - [जानिए निंद्रा के लिए कोनसा तरीका आध्यात्मिक दृष्टि से सर्वोत्तम है](https://bhaktisatsang.com/spiritual-manner-for-sleep-sound-hindi/) - पश्चिम दिशा में पैर करके सोने का तरीका | Sound sleep by Spiritual Exercise शांत निद्रा कैसे लें, इस लेख में हम अध्ययन करेंगे कि पश्चिम दिशा में पैर करके सोना सबसे उत्तम सोने का तरीका कैसे होता है, इस विषय पर अध्ययन पूर्णत: आध्यात्मिक दृष्टिकोण से किया गया है । इससे हम योग्य निर्णय - 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[स्वामी अखिलेश्वरानन्द गिरि - Swami Akhileshwaranandji Story](https://bhaktisatsang.com/about-swami-akhileshwaranandji/) - स्वामी अखिलेश्वरानन्द गिरि जी-Swami Akhileshwaranandji Story in Hindi प्रारम्भिक जीवन सन् 1955 में दिनांक 15 जून को भारतवर्ष में मध्यप्रदेश जिला छिंदवाड़ा (नगर छिंदवाड़ा) में जन्म हुआ। आपके पिता जी स्व. श्री सत्यनारायण दुबे पेशे से अधिवक्ता थे एवं माता जी स्व. श्रीमती राजेश्वरीदेवी दुबे धर्मनिष्ठ गृहणी थीं। आप अपने माता-पिता की इकलौती सन्तान हैं।बचपन में - [महर्षि भृगु](https://bhaktisatsang.com/learn-about-mahatma-maharishi-bhrigu/) - महात्मा महर्षि भृगु भार्गववंश के मूलपुरुष महर्षि भृगु जिनको जनसामान्य ॠचाओं के रचिता, भृगुसंहिता के रचनाकार, यज्ञों मे ब्रह्मा बनने वाले ब्राह्मण और त्रिदेवों की परीक्षा में भगवान विष्णु की छाती पर लात मारने वाले मुनि के नाते जानता है। महर्षि भृगु का जन्म प्रचेता ब्रह्मा की पत्नी वीरणी के गर्भ से हुआ था। अपनी - [सदगुरु ओशो - एक वैचारिक क्रांति](https://bhaktisatsang.com/sadhguru-osho-biography-hindi/) - ओशो का परिचय देना आकाश को मुट्ठी में बांधने जैसा असंभव काम है... और किस ओशो का परिचय दिया जाए- मृण्मय दीपक का अथवा चिन्मय ज्योति का? चैतन्य की वह लौ तो कागजी शब्द-पेटियों में समाती नहीं, केवल परोक्ष सांकेतिक भाषा में इशारे संभव हैं; जैसे उनकी समाधि पर अंकित ये : ओशो जिनका न - [ईशावास्योपनिषद - आत्मा के स्वरूप का प्रतिपादन करता उपनिषद](https://bhaktisatsang.com/isavasyopanishad-in-hindi-pdf-download/) - ईशावास्योपनिषद - Ishavasya Upanishad ईशोपनिषद (Ishavasya Upanishad Pdf) शुक्ल यजुर्वेदीय शाखा के अन्तर्गत एक उपनिषद है। ईशावास्य उपनिषद् अपने नन्हें कलेवर के कारण अन्य उपनिषदों के बीच बेहद महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। इसमें कोई कथा-कहानी नहीं है केवल आत्म वर्णन है। इस उपनिषद् के पहले श्लोक ‘‘ईशावास्यमिदंसर्वंयत्किंच जगत्यां-जगत…’’ से लेकर अठारहवें श्लोक ‘‘अग्ने नय सुपथा - [केनोपनिषद - ब्रह्म-चेतना जिज्ञासा को शांत करने वाला उपनिषद](https://bhaktisatsang.com/kenoapanishad-in-hindi-download-pdf/) - केनोपनिषद - Kena Upanishad Kena Upnaishad PDF- केनोपनिषद में चार खण्ड हैं। प्रथम और द्वितीय खण्ड में गुरु-शिष्य की संवाद-परम्परा द्वारा उस (केन) प्रेरक सत्ता की विशेषताओं, उसकी गूढ़ अनुभूतियों आदि पर प्रकाश डाला गया है। यह एक महत्त्वपूर्ण उपनिषद है। १. शान्तिपाठ येनेरिता: प्रवर्तन्ते प्राणिनः स्वेषु कर्मसु। तं वन्दे परमात्मानं स्वात्मानं सर्वदेहिनाम॥ यस्य पादांशुसम्भूतं - [माण्डूक्योपनिषद - समस्त भूत भविष्य और वर्तमान ओमकार मे ही निहित है](https://bhaktisatsang.com/माण्डूक्योपनिषद-mandukyopnishad-hindi/) - माण्डूक्योपनिषद - Mandukya Upanishad Pdf हे देवगण! हम कानों से कल्याणमय वचन सुने। यज्ञ कर्म में समर्थ होकर नेत्रों से शुभ दर्शन करें तथा अपने स्थिर अंग और शरीरों से स्तुति करने वाले हम लोग देवताओं के लिए हितकर आयु का भोग करें। त्रिविध ताप की शांति हो। महान कीर्तिमान इंद्र हमारा कल्याण करें; जो - [यजुर्वेदीयोपनिषद : शुक्ल यजुर्वेद और कृष्ण यजुर्वेद का जन्मदाता](https://bhaktisatsang.com/yajurveda-upanishad-hindi-pdf/) - यजुर्वेदीयोपनिषद – यजुर्वेद के उपनिषद यजुर्वेदीय उपनिषद के दो भाग है शुक्ल यजुर्वेद और कृष्ण यजुर्वेद शुक्ल यजुर्वेद के उपनिषद इशावास्योपनिषद यजुर्वेद सहिंता के चालीसवें अध्याय को ईशावास्योपनिषद कहा जाता है। यह अत्यंत प्राचीन पद्यात्मक उपनिषद है। इस उपनिषद में त्यागपूर्ण भोग, कर्म की महत्ता, विद्या-अविद्या का संबंध एवं परमात्मा का स्वरूप वर्णित है। इस - [प्रश्नोपनिषद : महर्षि पिप्पलाद और 6 ऋषियों के बीच हुवे आध्यात्मिक प्रश्नोत्तरी का संकलन](https://bhaktisatsang.com/प्रश्नोपनिषद-prashnopnishad-hindi-pdf/) - 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Names of 18 Puranas in Hindi अठारह पुराणों (18 Puranas in Hindi) में अलग-अलग हिन्दू देवी-देवता को केन्द्र मानकर पाप और पुण्य, धर्म और अधर्म, कर्म और अकर्म की गाथाएँ कही गई हैं | पुराण हिंदुओं के धर्मसंबंधी आख्यानग्रंथ हैं, जिनमें सृष्टि, लय, प्राचीन ऋषियों, मुनियों और राजाओं के - [कजरी तीज क्यों, कब और कैसे मनाई जाती है](https://bhaktisatsang.com/kajri-kajli-teej-vrat-pooja-vidhi-katha/) - कजरी तीज व्रत - kajri teej ki katha क्या आप जानते है की कजरी तीज व्रत कथा क्या है और कजरी तीज (kajli teej vrat katha hindi) क्यों मनाते हैं? कजरी या कजली तीज को भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष के तीसरे दिन मनाया जाता है। इस दिन आसमान में छाई काली घटाओं के कारण - [स्वतंत्रता दिवस : जाने असली स्वतंत्रता - Independence Day : What is True Freedom](https://bhaktisatsang.com/independence-day-the-real-freedom/) - स्वतंत्रता दिवस : जाने असली स्वतंत्रता - Independence Day : What is True Freedom स्वतंत्रता दिवस हमारे लिए महत्व रखता है, क्योंकि इस दिन हम राजनीति रूप से स्वतन्त्र हुए थे। लेकिन साथ ही कुछ नई सीमाएं भी रच दी गयीं थी। आइये जानते हैं कि सच्ची स्वतंत्रता सीमाओं को तोड़ने में है। सही मायनों - [स्वतंत्रता दिवस पर महान देशभक्तो के आदर्शो पर अडिग रहने का ले प्रण](https://bhaktisatsang.com/happy-independence-day-2018/) - स्वतंत्रता दिवस के मंगलमय अवसर पर समस्त राष्ट्र के साथ हम सबको राष्ट्रीय आदर्शों से प्रेरित होना होगा| आदर्शो में अपराजेय शक्ति और प्रेरणा भरी होती है और मनुष्य को महान बनाते हैं| उनके बिना भौतिक समृद्धि तो आ सकती है, परन्तु मनुष्य जीवन का लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सकता| विज्ञान और तकनीकी ज्ञान - [कजरी तीज कि पौराणिक कथा](https://bhaktisatsang.com/kajli-kajri-teej-vrat-katha/) - कजरी तीज - Kajli Teej कजरी तीज के दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयू के लिए व्रत रखती है और अविवाहित लड़कियां इस पर्व पर अच्छा वर पाने के लिए व्रत रखती हैं। इस दिन नीमड़ी माता की पूजा की जाती है. पूजन से पहले मिट्टी व गोबर से दीवार के सहारे एक - [अर्धनारीश्वर अष्टकम - Ardhanareeswara Ashtakam](https://bhaktisatsang.com/ardhanareeswara-ashtakam-lyrics-hindi/) - अर्धनारीश्वर अष्टकम - Ardhanareeswara Ashtakam चाम्पॆयगौरार्धशरीरकायै कर्पूरगौरार्धशरीरकाय । धम्मिल्लकायै च जटाधराय नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥ 1 ॥ कस्तूरिकाकुङ्कुमचर्चितायै चितारजःपुञ्ज विचर्चिताय । कृतस्मरायै विकृतस्मराय नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥ 2 ॥ झणत्क्वणत्कङ्कणनूपुरायै पादाब्जराजत्फणिनूपुराय । हॆमाङ्गदायै भुजगाङ्गदाय नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥ 3 ॥ विशालनीलॊत्पललॊचनायै विकासिपङ्कॆरुहलॊचनाय । समॆक्षणायै विषमॆक्षणाय नमः शिवायै च नमः - [श्री शिवाष्टोत्तर शतनामावलि - Shiv Ashtottar Shatnamavali](https://bhaktisatsang.com/108-names-of-lord-shiva-hindi/) - भगवान शिव के 108 नाम - 108 Names of Lord shiva भगवान शिव के 108 नामों (bhagwan shiv ke 108 naam) का विशेष महत्व है। सभी भक्तो को श्रावण मास, श्रावण सोमवार, प्रदोष, शिवरात्रि या प्रति सामान्य सोमवार को इन नामों का स्मरण करने से भगवान शिव की कृपा सहज प्राप्त हो जाती है। कर्पूरगौरं - [प्रदोष व्रत क्यों किया जाता है ? कितने प्रकार के होते है](https://bhaktisatsang.com/pradosh-shani-mangal-som-trayodashi-vrat/) - प्रदोष व्रत - Pradosh Vrat प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat 2022) भगवान शिव और पार्वती को समर्पित है, प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat Date) चार प्रकार के है - शनि प्रदोष, मंगल प्रदोष, सोम प्रदोष, पक्ष प्रदोष, जो की हर माह की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। सूर्यास्त के बाद रात्रि के प्रथम - [प्रदोष व्रत 2022 - जाने प्रदोष व्रत तिथि एवं महत्व](https://bhaktisatsang.com/pradosh-vrat-mahtva-dates-puja/) - क्या है प्रदोष व्रत ? - Pradosh Vrat Kab Hai प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat 2022) भगवान शिव और पार्वती को समर्पित एक व्रत है जो की हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्षों की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat Katha) प्रदोष काल में ही करना चाहिए। सूर्यास्त के बाद रात्रि - [कामिका एकादशी - व्रत कथा, पूजन विधि और महत्व](https://bhaktisatsang.com/kamika-ekadashi-vrat-katha/) - कामिका एकादशी व्रत - Kamika Ekadashi Vrat Kamika Ekadashi : कामिका एकादशी को पवित्रा एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के उपेंद्र स्वरूप की पूजा की जाती है। इस एकादशी के व्रत को करने से पूर्व जन्म की बाधाएं दूर हो जाती हैं। और जीवन में सुख-समृद्धि आती है और हजार गुना - [Kamika Ekadashi - कामिका एकादशी की महिमा](https://bhaktisatsang.com/kamika-ekadashi-vrat-katha-puja-vidhi-कामिका-एकादशी/) - Kamika Ekadashi - कामिका एकादशी व्रत पूजा विधि, कथा और महत्व Kamika Ekadashi - कामिका एकादशी में भगवान विष्णु की पूजा पीले फल फूल आदि से की जाती है. सभी एकादशी व्रतों में से कामिका एकादशी को भगवान विष्णु का उत्तम व्रत माना जाता है क्योंकि यह भगवान शिव के पावन महीने यानि कि श्रावण - [ग्रहों की शांति के लिए ऐसे करे शिव की साधना](https://bhaktisatsang.com/graho-ki-shanti-ke-liye-shiv-puja/) - ग्रहों की शांति के लिए शिव साधना सूर्य, चन्द्रमा सहित सभी ग्रह काल के आधार हैं और काल पर महादेव का अधिकार है इसीलिए तो वे महाकाल कहलाते हैं। ऐसा कौनसा ग्रह है जो शिव की साधना से शांत न हो। आपकी कुंडली में शनि, राहू, मंगल या किसी भी ग्रह से परेशानी हो। दशा, - [कष्टों के समूल निवारण के लिए ऐसे करे शिवलिंग पूजन](https://bhaktisatsang.com/shivling-puja-in-shravan-month-for-all-problems/) - शिवलिंग की पूजा - Shivlinga Puja For All Problems क्या आप जानते है शिवलिंग की पूजा कैसे की जाती है और घर में शिवलिंग की पूजा कैसे करें (Shivling Puja at Home) ? और किस कामना की पूर्ति किस द्रव्य और पुष्प के अभिषेक से होगी? नहीं, तो ये पोस्ट आपके लिए ही है। शिवलिंग की - [शिव प्रिय रूद्री पाठ के रहस्य](https://bhaktisatsang.com/shiv-rudri-path-secrets/) - शिव प्रिय रूद्री पाठ के रहस्य - Shiv Rudri Path Secrets शिवो गुरूः शिवो देवः शिवो बन्धुः शरीरिणाम्। शिव आत्मा शिवो जीवः शिवादन्यन्न किंचन।। यानी भगवान शिव गुरू हैं, शिव देवता हैं, शिव ही प्राणियों के बन्धु हैं, शिव ही आत्मा और शिव ही जीव है। शिव से भिन्न दूसरा कुछ भी नहीं है। और - [जया पार्वती व्रत - पूजन विधि और पौराणिक कथा](https://bhaktisatsang.com/jaya-parvati-vrat-date-katha/) - जया पार्वती व्रत - Jaya Parvati Vrat जया पार्वती व्रत को विजया व्रत भी कहा जाता है. यह व्रत मुख्य रूप से गुजरात में मनाया जाता है. आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष के त्रयोदशी से जया पार्वती व्रत का आरंभ होता है. यह व्रत लगातार पांच दिनों तक चलता है. जया पार्वती का व्रत विवाहित - [हवन - लाभ, सामग्री लिस्ट और रोगो में निवारण](https://bhaktisatsang.com/हवन-सामग्री-लिस्ट-लाभ-homa-hawan/) - हवन कब करना चाहिए आज इस पोस्ट में हम हवन कब करना चाहिए, हवन करने के लाभ और हवन सामग्री लिस्ट के बारे में जानेंगे। हवन वातावरण को प्रदूषण मुक्त बनाने के साथ ही अच्छी सेहत के लिए जरूरी है। हवन के धुएँ से प्राण में संजीवनी शक्ति का संचार होता है। हवन के माध्यम - [श्री श्री 1008 रामऋषि महाराज - जोधपुर के दिव्य संतो में से एक](https://bhaktisatsang.com/shri-ram-rishi-maharaj-jodhpur/) - श्री राम ऋषि महाराज का जन्म मध्यम वर्गीय पुष्करणा ब्राह्मण परिवार चताणी व्यास श्री आसूलाल जी के घर भादवा कृष्ण पक्ष तृतीय संवत् 1970 में बडी चताणियों की गली, गांछाबाजार स्थित उनके पैतृक मकान में हुआ । आपका बचपन का नाम रामचन्द्र था और मित्र इन्हे राम के नाम से सम्बोधित करते थे। बचपन में - [चारभुजा जी मंदिर](https://bhaktisatsang.com/charbhuja-ji-temple-rajasthan/) - चारभुजा जी मंदिर - Charbhuja Temple Rajsamand उदयपुर से 112 और कुंभलगढ़ से 32 किमी। मेवाड़ अपनी दूरी के लिए जाना जाता है - एक तीर्थ स्थल माना जाता है, जहां चारभुजा जी की एक बहुत ही पौराणिक चमत्कारी मूर्ति है। सांवलियाजी मंदिर, केशरियानाथ मंदिर, एकलिंगनाथ मंदिर, श्रीनाथजी मंदिर, द्वारकाधीश मंदिर और मेवाड़ के चारभुजानाथ - [द्वारकाधीश यात्रा - चारो धाम और सप्तपुरियों में से एक पवित्र तीर्थ](https://bhaktisatsang.com/dwarkadhish-temple-dwarka-dwarikapuri/) - द्वारकाधीश मंदिर, द्वारका - Dwarkadhish Temple, Dwarka गुजरात का द्वारका (Dwarka in Gujrat) शहर वह स्थान है जहाँ 5000 वर्ष पूर्व भगवान कृष्ण ने मथुरा छोड़ने के बाद द्वारका (Dwarkadhish Mandir) नगरी बसाई थी और भगवान कृष्ण के राज्य की प्राचीन और पौराणिक राजधानी कहा जाता है। जिस स्थान पर उनका निजी महल 'हरि गृह' - [शरीर में सन्निहित शक्ति-केंद्र या कुण्डलिनी चक्र](https://bhaktisatsang.com/inner-powers-center-chakra-in-body/) - चक्रों के प्रतीकात्मक वैदिक नाम | Vedic cycles symbolic name आपके अंदर जो सुषुप्त केंद्र हैं उनको विकसित करने के किये श्रृंगार होता है । हमारे शरीर में सात केंद्र हैं। १) मूलाधार केंद्र : जन्म से लेकर सात साल तक मूलाधार केंद्र विकसित होता है, यदि सात वर्ष की उम्र तक बच्चे की निरोगता - [शिवाष्टकम - Shivashtakam](https://bhaktisatsang.com/shivashtakam-hindi-lyrics-शिवाष्टकम्/) - शिवाष्टकम् - Shivashtakam with lyrics शिवाष्टकम या शिव अष्टकम (Shivashtakam) भगवान शिव की स्तुति में एक शक्तिशाली स्तोत्र है। ऐसा कहा जाता है कि शिवाष्टकम का पाठ करने से आपको जीवन में बाधाओं का सामना करने का अपार साहस मिलेगा। यह अपने पहले चरण के साथ लोगों के बीच भी बहुत लोकप्रिय है जो "प्रभुम - [शिव गीता - शिवजी द्वारा श्री रामचंद्र जी को उपदेश](https://bhaktisatsang.com/शिव-गीता-shiv-geeta-book-pdf/) - शिवजी द्वारा श्री रामचंद्र जी को शिव गीता का उपदेश भगवान शिव ही इस संपूर्ण सृष्टि के अनादि देव है जिनके महिमा का वर्णन वेदो, पुराणों, दर्शन, योग , तंत्र आदि साहित्य में सर्वत्र मिलता है। भारत का जन मन मानस वैष्णव धर्म से प्रभावित है उससे कही अधिक शैव धर्म से प्रभावित है। इस - [Karnavedha Sanskar – 16 संस्कारों में दसवा कर्णभेद संस्कार](https://bhaktisatsang.com/karnavedha-sanskar-कर्णभेद-संस्कार/) - Karnavedha Sanskar - कर्णवेध संस्कार का महत्व और विधि हिंदू धर्म में संस्कारों की महत्ता जातक के जन्म लेने की प्रक्रिया के आरंभ से लेकर अंत्येष्टि तक चलती रहती है। विभिन्न शास्त्रों के अनुसार संस्कार भी कई प्रकार के बताये जाते हैं लेकिन मुख्यत: इनकी संख्यां सोलह मानी जाती है। सोलह संस्कारों पर आधारित लेखों - [Chandi Kavach - श्री चण्डी कवच](https://bhaktisatsang.com/chandi-kavach-श्री-चण्डी-कवच/) - Chandi Kavach - श्री चण्डी कवच चंडी कवच आपके आस-पास के नकारात्मकता को खत्म करने के लिए एक शक्तिशाली स्तोत्र है। चंडी कवच ब्रह्मा द्वारा ऋषि मार्कंडेय को सुनाया गया था। जिसे बाद में उन्होंने ​​मार्कंडेय पुराण में शामिल किया। जो भी चंडी कवच पाठ करता है उसे मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है। - [Maa Baglamukhi Kavach - माँ बगलामुखी कवच](https://bhaktisatsang.com/maa-baglamukhi-kavach-माँ-बगलामुखी-कवच/) - माँ बगलामुखी कवच - Maa Baglamukhi Kavach दस महाविधा में आठवीं महाविद्या देवी बगलामुखी हैं। उनकी पूजा करने से शत्रु का विनाश और वाद-विवाद, कोर्ट कचहरी आदि में जीत के लिए की जाती है। उनको प्रसन्न करने और मनोवांछित फल प्राप्त करने के लिए बगलामुखी कवच का पाठ किया जाता है, जिससे भक्त के जीवन - [पदमपुराण - Padma Purana](https://bhaktisatsang.com/padam-puran-hindi/) - पदम पुराण Pdf - Padma Purana in Hindi 'पदमपुराण' हिन्दू धर्म के प्रसिद्ध धार्मिक ग्रंथों में विशाल पुराण है। केवल स्कन्द पुराण ही इससे बड़ा है। इस पुराण के श्लोकों |श्लोक की संख्या पचास हज़ार है। वैसे तो इस पुराण से संबंधित सभी विषयों का वर्णन स्थान विशेष पर आ गया है, किन्तु इसमें प्रधानता उपाख्यानों और कथानकों की - [वामन पुराण - Vamana Purana](https://bhaktisatsang.com/vaman-puran-hindi/) - वामन पुराण Pdf - Vamana Purana in Hindi वामन पुराण' (Vaman Puran) नाम से तो वैष्णव पुराण लगता है, क्योंकि इसका नामकरण विष्णु के 'वामन अवतार' के आधार पर किया गया है, परन्तु वास्तव में यह शैव पुराण है। इसमें शैव मत का विस्तारपूर्वक वर्णन प्राप्त होता है। यह आकार में छोटा है। कुल दस हज़ार श्लोक इसमें - [अग्नि पुराण - Agni Puran](https://bhaktisatsang.com/agni-puran-in-hindi/) - अग्नि पुराण - Agni Puran In Hindi अग्नि पुराण ज्ञान का विशाल भण्डार है। स्वयं अग्निदेव ने इसे महर्षि वसिष्ठ को सुनाते हुए कहा था - आग्नेये हि पुराणेऽस्मिन् सर्वा विद्या: प्रदर्शिता: अर्थात 'अग्नि पुराण' में सभी विद्याओं का वर्णन है। आकार में लघु होते हुए भी विद्याओं के प्रकाशन की दृष्टि से यह पुराणअपना विशिष्ट महत्त्व रखता है। इस - [मत्स्य पुराण - Matsya Puran](https://bhaktisatsang.com/matsya-puran-in-hindi/) - मत्स्य पुराण हिंदी में - Matsya Puran in Hindi मत्स्य पुराण (Matsya Purana) अष्टादश पुराणों (18 Puran) में से एक मुख्य पुराण है। इसमें 14 हजार श्लोक एवं 291 अध्याय है। भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार से सम्बद्ध होने के कारण यह पुराण मत्स्य पुराण कहलाता है। भगवान ने मत्स्यावतारी महात्म्य के द्वारा राजा वैवश्वत - [लिंग पुराण - Ling Puran](https://bhaktisatsang.com/linga-puran-hindi/) - लींग पुराण - Linga Purana लिंग पुराण (Ling Puran) शैव सम्प्रदाय का पुराण है। 'लिंग' का अर्थ शिव की जननेन्द्रिय से नहीं अपितु उनके 'पहचान चिह्न' से है, जो अज्ञात तत्त्व का परिचय देता है। इस पुराण में लिंग का अर्थ विस्तार से बताया गया है। यह पुराण प्रधान प्रकृति को ही लिंग रूप मानता है- - [भविष्य पुराण - Bhavishya Purana](https://bhaktisatsang.com/bhavishay-puran-hindi/) - भविष्य पुराण - Bhavishya Purana Hindi सूर्योपासना और उसके महत्त्व का जैसा व्यापक वर्णन भविष्य पुराण में प्राप्त होता है। वैसा किसी अन्य पुराण में नहीं उपलब्ध होता। इसलिए इस पुराण को 'सौर ग्रंथ' भी कहते हैं। यह ग्रंथ बहुत अधिक प्राचीन नहीं है। इस पुराण में दो हज़ार वर्ष का अत्यन्त सटीक विवरण प्राप्त - [मार्कण्डेय पुराण - Markandeya Purana](https://bhaktisatsang.com/markanday-puran-hindi/) - मार्कण्डेय पुराण Pdf - Markandeya Purana मार्कण्डेय पुराण आकार में छोटा है। इसके एक सौ सैंतीस अध्यायों में लगभग नौ हज़ार हैं। मार्कण्डेय ऋषि द्वारा इसके कथन से इसका नाम 'मार्कण्डेय पुराण' पड़ा। यह पुराण वस्तुत: दुर्गा चरित्र एवं के वर्णन के लिए प्रसिद्ध है। इसीलिए इसे शाक्त सम्प्रदाय का पुराण कहा जाता है। Puran के सभी - [तू पहले दस कदम तो चल](https://bhaktisatsang.com/motivational-story-in-hindi/) - गाँव के लोग उसे ' हरिया' कहकर बुलाते थे। वह एकदम सीधा सादा, भोला भाला, सहज सरल किसान था। गाँव में उसके थोड़े से खेत थे। इन खेतों से ही उसकी गुजर-बसर चलती थी। अपने खेतों में काम करते हुए वह गाँव के पास वाली पहाड़ियों की ओर बड़ी हसरत भरी निगाहों से देखा करता - [मन की शांति पानी हो तो क्षमाशील बनें](https://bhaktisatsang.com/man-ki-shanti-ke-upay-mental-peace/) - क्षमा बोरों का भूषण है, शूरमाओं का अलंकार है पर आकर्षणों को भूल भुलैया का होना स्वाभाविक है और देवताओं का दिव्य लक्षण है। सच्चा वीर व साहसी और संभवतः जीवन में गलतियाँ- त्रुटियाँ इसी वजह से नही है, जो औरों की गलतियों त्रुटियों एवं नासमझियों हुआ करती है। इसलिए सामान्य इंसान को गलतियों का - [होली 2022- पूजन विधि, होलिका दहन मुहूर्त और पौराणिक कथा](https://bhaktisatsang.com/holi-puja-vidhi-katha-holika-dahan/) - होली - Holi Festival होलिका (holika dahan) फाल्गुन मास की पूर्णिमा को कहतें हैं । इस दिन होली पर्व (holi festival) को वसन्तोत्सव के रूप में मनाया जाता है। कुछ स्थानों पर फाल्गुन पूर्णिमा के कुछ दिन पूर्व ही वसन्त ऋतु की रंगरेलिया प्रारम्भ हो जाती हैं । वस्तुत: वसन्तपंचमी से ही वसंत के आगमन - [आमलकी एकादशी - जानिए समस्त पापों का नाश करने वाली एकादशी की व्रत कथा और मंत्र](https://bhaktisatsang.com/amalaki-ekadasi-vrat-katha-muhurat/) - आमलकी एकादशी - Amalaki Ekadasi Amalaki Ekadasi Vrat Katha : आमलकी एकादशी व्रत शुक्ल पक्ष की एकादशी को किया जाता है. इस व्रत में आंवले के वृक्ष की पूजा करने का विधि-विधान है. इस व्रत के विषय में कहा जाता है, कि यह एकादशी समस्त पापों का नाश करने वाली है| ब्रह्माण्ड पुराण में मान्धाता अौर - [Amalaki Ekadashi 2022- आमलकी एकादशी व्रत मुहूर्त 2022](https://bhaktisatsang.com/amalaki-ekadashi-vrat-katha-2022-आमलकी-एकादशी/) - आमलकी एकादशी व्रत मुहूर्त 2022 - Amalaki Ekadashi Vrat 2022 आमलकी एकादशी को आमलक्य एकादशी भी कहा जाता है। आमलकी का मतलब आंवला होता है, जिसे हिन्दू धर्म और आयुर्वेद दोनों में श्रेष्ठ बताया गया है। पद्म पुराण के अनुसार आंवले का वृक्ष भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय होता है। आंवले के वृक्ष में श्री - [भगवान शिव के अनुसार दस शैवव्रत में से ये 4 व्रत मोक्षदायक है](https://bhaktisatsang.com/shiv-mahashivratri-vrat-upay-moksha-hindi/) - सावन में शिव भक्तों की हर-हर महादेव, बम-बम भोले, जय शिव शंभू की पवित्र गूंजों से हर शिवालय गूंज उठता है। इस अवसर पर देवाधिदेव महादेव की उपासना, व्रत एवं संकल्प के द्वारा आत्मबोध की झलक-झांकी पाने का प्रयास किया जाता है। यह साधना का परम दुर्लभ योग है, जिसमें उपवास और उपासना करने वाले - [Om Jai Shiv Omkara Aarti in Hindi Lyrics - ॐ जय शिव ओंकारा](https://bhaktisatsang.com/om-jai-shiv-omkara-aarti-in-hindi-lyrics-ॐ-जय-शिव-ओंकारा/) - Om Jai Shiv Omkara Aarti - ॐ जय शिव ओंकारा भगवन शंकर की पूजा अर्चना के बाद जरूर गायें ये आरती ...ॐ जय शिव ओंकारा (Om Jai Shiv Omkara Aarti in Hindi) Om Jai Shiv Omkara With Lyrics जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा । ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय - [जाने भगवान शिव के गले में साँप और आसन रुपी बाघ की खाल का रहस्य](https://bhaktisatsang.com/know-mystery-behind-lord-shiva-appearance/) - सनातन धर्म में भगवान शिव को सभी देवताओं का देवता कहा गया है यानी कि भगवान शिव सभी देवताओं में भी उतने ही पूज्य हैं जितने कि सभी जीवों में। भगवान शिव को इतना ऊंचा दर्जा प्राप्त है लेकिन सभी देवताओं में महादेव की वेशभूषा सबसे साधारण और अलग है। लेकिन क्या आप महादेव की - [भारत हजारों वर्षों से आध्यात्मिक जगद्गुरु क्यों रहा हैं ?](https://bhaktisatsang.com/why-india-is-spiritual-leader-in-the-world/) - हमारा देश भारत हजारों वर्षों से आध्यात्मिक जगद्गुरु क्यों रहा है? चार धामों की अवधारणा भारत में ही क्यों है? क्यों नौ बार इस भूमि पर भगवान ने जन्म लिया? सैकड़ों ऋषि-मुनियों ने क्यों वेद-पुराणों की रचना यहीं पर की? और क्यों हजारों साधु-संतों ने अपनी वाणी से इस देश की धरती को गुंजायमान किया? - [सनातन धर्म के रहस्य - भाग 1](https://bhaktisatsang.com/sanatan-dharm-ke-rahsya/) - मृतक का सिर उत्तर दिशा की ओर क्यों रखते हैं? मृत्युकाल के समय प्राणी (मनुष्य) को उत्तर की ओर सिर करके इसलिए लिटाते हैं कि प्राणों का उत्सर्ग दशम द्वार से हो । चुम्बकीय विद्युत प्रवाह की दिशा दक्षिण से उत्तर की ओर होती है। कहते हैं कि मरने के बाद भी कुछ क्षणों तक - [कर्मयोग - स्थूल शरीर की योग साधना](https://bhaktisatsang.com/karma-yoga-means-hindi/) - कर्मयोग (Karmna Yoga) की साधना में सबसे प्रथम और सबसे महत्त्वपूर्ण स्थान आलस्य और प्रसाद को निरस्त करना है। इसके लिए जरूरी है कि समय की बहुमूल्य व बेशकीमती समझा जाए और एक एक क्षण का पूरा सदुपयोग करने के लिए श्रम संलग्न रहा जाए। प्रातः काल उठते हो अथवा रात्रि को सोते समय अगले - [दैनिक यज्ञ और ज्ञान यज्ञ की असाधारण महत्ता](https://bhaktisatsang.com/advantage-of-yagya-yajna-यज्ञ-के-लाभ/) - दैनिक यज्ञ और ज्ञान यज्ञ यज्ञों की भौतिक और आध्यात्मिक महत्ता असाधारण है। भौतिक या आध्यात्मिक जिस क्षेत्र पर भी दृष्टि डालें उसी में दैनिक यज्ञ की महत्वपूर्ण उपयोगिता दृष्टिगोचर होती है। वेद में ज्ञान, कर्म, उपासना तीन विषय हैं । कर्म का अभिप्राय-कर्मकाण्ड से है, कर्मकाण्ड दैनिक यज्ञ को कहते हैं । वेदों का - [पौष पुत्रदा एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि](https://bhaktisatsang.com/putrada-ekadashi-vrat-katha/) - पौष पुत्रदा एकादशी - Putrada Ekadashi Vrat Katha पौष मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी को पौष पुत्रदा एकादशी (Putrada Ekadashi) कहा जाता है। इस एकादशी के व्रत को करने से निःसंतान दम्पत्तियों को संतान की प्राप्ति होती है। इस दिन प्रातः स्नान कर और निर्जल रह भगवान विष्णु का पूजन करना चाहिए। फिर ब्राह्मणों - [वार्षिक राशिफल 2022 - Rashifal 2022 - Horoscope 2022 in Hindi](https://bhaktisatsang.com/varshik-rashifal-horoscope-2022/) - Rashifal 2022 - राशिफल 2022 - Horoscope 2022 in Hindi वार्षिक राशिफल 2022 से अपने पारिवारिक जीवन, वैवाहिक जीवन और प्रेम जीवन के बारे में भी विस्तृत रूप से सभी जानकारी प्राप्त करते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं हम अपने इस राशिफल में हर राशि के जातक को अपने नव वर्ष को सफल बनाने के - [माघ स्नान का महत्व, नियम और विधि](https://bhaktisatsang.com/माघ-स्नान-maagh-maas/) - माघ स्नान - स्नान दान से मिलता है मोक्ष माघ, भारतीय संवत्सर का एक ऐसा माह जिसके हर दिन को पवित्र माना जाता है। जिसमें पड़ने वाली कड़कड़ाती ठंड भी लोगों की आस्था को नहीं रोक पाती। जिसमें हर रोज प्रात: काल सूर्योदय से पूर्व गंगा-यमुना सहित पवित्र नदियों व तीर्थ स्थलों पर लोग आस्था - 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[नाग पंचमी कथा](https://bhaktisatsang.com/naag-panchami-katha/) - नाग पंचमी कथा - Nag Panchami Katha नाग पंचमी (Nag Panchami) एक ऐसा पर्व है जिसमें नागों और सर्पों की पूजा की जाती है। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि में यह पर्व पूरे देश में पूर्ण श्रद्धा से मनाया जाता है। आइये जानते है इसकी पौराणिक कथाओ के बारे में नाग पंचमी - [नागपंचमी - नागराज की पूजा करने से मिलेगी कालसर्प दोष से मुक्ति ...](https://bhaktisatsang.com/nag-panchami-vrat-pooja-katha/) - नाग पंचमी - Nag Panchami श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। जहां सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को उत्तर भारत में नाग पूजा की जाती है, वहीं दक्षिण भारत में ऐसा ही पर्व कृष्ण पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। हिन्दू - [कैसे मिलती है गुरु की भक्ति से शक्ति](https://bhaktisatsang.com/guru-ke-bhakti/) - कैसे मिलती है गुरु की भक्ति से शक्ति गुरु क्या देता है? क्या सिखाता है? गुरु ज्ञान देता है। वह मनुष्य की जीवन रुपी नैया को सुचारू रूप से चलाने और उसे सुगमता से पार लगाने के अच्छे-अच्छे गुण सिखाता है। गुरु के बिना जीवन का अर्थ नहीं। संसार में गुरु ही कल्याणकारी मार्ग की ओर अग्रसर करते हैं। गुरु - [आषाढ़ पूर्णिमा – जानें गोपद्म व्रत और गुरु पूर्णिमा की पूजा विधि](https://bhaktisatsang.com/ashadh-purnima-guru-purnima-puja-muhurat/) - आषाढ़ पूर्णिमा - Ashadh Purnima वैसे तो प्रत्येक माह की पूर्णिमा तिथि धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण होती है लेकिन आषाढ़ माह की पूर्णिमा और भी खास होती है। आषाढ़ पूर्णिमा को ही गुरु पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है साथ ही इस दिन गोपद्म व्रत भी रखा जाता है। इस पूर्णिमा को - [गुरु पूर्णिमा - आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु की पूजा करने का पर्व](https://bhaktisatsang.com/guru-purnima-festival-hindu-beliefs/) - गुरु पूर्णिमा - Guru Purnima in Hindi आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरू पूर्णिमा (Guru Purnima) के नाम से भी जाना जाता है और इसी के संदर्भ में यह समय अधिक प्रभावी भी लगता है. इस वर्ष गुरू पूर्णिमा 24 जुलाई 2021, को मनाई जाएगी. गुरू पूर्णिमा अर्थात गुरू के ज्ञान एवं उनके स्नेह का - [महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग कथा - Mahakaleshwar Temple Ujjain](https://bhaktisatsang.com/mahakaleshwar-jyotirling-katha/) - महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग - Mahakaleshwar Temple उज्जैन नगरी में स्तिथ महाकाल ज्योतिर्लिंग (Mahakal Jyotirlinga) शिवजी का तीसरा ज्योतिर्लिंग कहलाता है। यह एक मात्र ज्योतिर्लिंग है जो दक्षिणमुखी है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग (Mahakaleshwar Mandir) से सम्बंधित दो पौराणिक कथा पुराणों में वर्णित है जो इस प्रकार है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग कथा 1 - Mahakaleshwar Temple History in Hindi शिव - [महाकालेश्वर की कथा](https://bhaktisatsang.com/mahakaleshwar-katha/) - महाकालेश्वर की कथा | Mahakaleshwar Khata उज्जयिनी में राजा चंद्रसेन का राज था। वह भगवान शिव का परम भक्त था।शिवगणों में मुख्य मणिभद्र नामक गण उसका मित्र था। एक बार मणिभद्र नेराजा चंद्रसेन को एक अत्यंत तेजोमय 'चिंतामणि' प्रदान की। चंद्रसेन ने इसे गले में धारण किया तो उसका प्रभामंडल तो जगमगा ही उठा, साथ ही दूरस्थ देशों में उसकी यश-कीर्ति बढ़ने लगी। उस 'मणि' को प्राप्त करने के लिए दूसरे राजाओं ने प्रयास आरंभ कर दिए। कुछ ने प्रत्यक्षतः माँग की, कुछ ने विनती की। चूँकि वह - [ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग - Omkareshwar Jyotirlinga](https://bhaktisatsang.com/omkareshwar-jyotirlinga-temple-mandir/) - ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग - Omkareshwar Jyotirlinga ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध शहर इंदौर के समीप खंडवा जिले में स्थित है। यह नर्मदा नदी के बीच मन्धाता या शिवपुरी नामक द्वीप पर स्थित है। यह द्वीप हिन्दू पवित्र चिन्ह ॐ के आकार में बना है।यह शिवजी का चौथा प्रमुख ज्योतिर्लिंग कहलाता है। ओंकारेश्वर में ज्योतिर्लिंग के दो - [सोमनाथ ज्योतिर्लिंग - Somnath jyotirlinga](https://bhaktisatsang.com/somnath-jyotirling-temple-gujarat-hindi/) - सोमनाथ ज्योतिर्लिंग - Somnath jyotirlinga शिवजी के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक सोमनाथ सर्वप्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में माना व जाना जाता है। यह भारतीय इतिहास तथा हिन्दुओं के चुनिन्दा और महत्वपूर्ण मन्दिरों में से एक है। कहा जाता है कि इसका निर्माण स्वयं चन्द्रदेव ने किया था, जिसका उल्लेख ऋग्वेद में स्पष्ट है। - [रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग - Rameshwaram Jyotirlinga](https://bhaktisatsang.com/rameshwaram-jyotirling-dham-temple-hindi/) - रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग - Rameshwaram Jyotirlinga रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग भारत के दक्षिण में 12 ज्योतिर्लिंगों में से 11 वे स्थान पर है और भारत के उत्तर मे काशी की जो मान्यता है, वही दक्षिण में रामेश्वरम् की है। रामेश्वरम चेन्नई से लगभग सवा चार सौ मील दक्षिण-पूर्व में है। रामेश्वरम मंदिर ज्योतिर्लिंग रामायण और राम की श्रीलंका - [मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग श्रीशैलम - mallikarjuna jyotirlinga / Srisailam ](https://bhaktisatsang.com/mallikarjun-jyotirling-srisailam-temple-hindi/) - मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग / श्रीशैलम - Mallikarjuna Jyotirlinga / Srisailam आन्ध्र प्रदेश के कृष्णा ज़िले में कृष्णा नदी के तट पर श्रीशैल पर्वत पर श्रीमल्लिकार्जुन विराजमान हैं। इसे दक्षिण का कैलाश कहते हैं। अनेक धर्मग्रन्थों में इस स्थान की महिमा बतायी गई है। यह मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से दूसरे स्थान पर है - [त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग - Trimbakeshwar Jyotirlinga](https://bhaktisatsang.com/trimbakeshwar-jyotirling-shiva-temple-hindi/) - त्रयम्बकेश्वर - Trimbakeshwar त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर भगवन शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से 8 वे स्थान पर है। त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र प्रदेश के नाशिक जिले में स्थित है, गोदावरी नदी यहां पर ब्रह्मा गिरि नामक पर्वत से उत्पन्न हुई। गौतम ऋषि तथा गोदावरी के प्रार्थनानुसार भगवान शिव इस स्थान में वास करने की कृपा की - [महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग - Mahakaleshwar Jyotirlinga](https://bhaktisatsang.com/mahakaleshwar-jyotirling-temple-ujjain-hindi/) - महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन - Mahakaleshwar Jyotirlinga महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर (Mahakaleshwar Mandir) भगवन शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से तीसरे स्थान पर है। इस मंदिर में दक्षिण मुखी महाकालेश्वर महादेव भगवान शिव (Mahakaleshwar Jyotirlinga) की पूजा की जाती है। महाकाल के यहां प्रतिदिन सुबह के समय भस्म आरती होती है। इस आरती की खासियत यह है - [काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग - Kashi Vishwanath Jyotirliga Temple](https://bhaktisatsang.com/kaashi-vishwanath-temple-jyotirling-varanasi/) - काशी विश्वनाथ मंदिर - Kashi Vishwanath Temple वाराणसी में 12 ज्योतिर्लिंगों में से सात वे प्रमुख ज्योतिर्लिंग काशी विश्वनाथ के दरबार में आस्था का जन सैलाब उमड़ता है। यहां वाम रूप में स्थापित बाबा विश्वनाथ शक्ति की देवी मां भगवती के साथ विराजते हैं। काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग दो भागों में है। दाहिने भाग में शक्ति - [वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग - Baidyanath Jyotirling](https://bhaktisatsang.com/baba-baidhyanath-dham-temple-hindi/) - वैद्यनाथ - Baidyanath बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर को साधारणतः बाबा बैद्यनाथ धाम – Baba Baidyanath Dham और बैद्यनाथ धाम – Baidyanath Dham के नाम से भी जाना जाता है। यह भगवान शिव के पवित्र 12 ज्योतिर्लिंगों में से 9 स्थान पर है यह मंदिर भारत के झारखण्ड जिले के देवगढ़ में बना हुआ है। मंदिर के - [भीमशंकर ज्योतिर्लिंग - Bhimashankar Jyotirlinga](https://bhaktisatsang.com/bhimashankar-jyotirlinga-2/) - भीमाशंकर - Bhimashankar शिव पुराण के अनुसार भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में से छठा ज्योतिर्लिंग है। यह असम प्रान्त के कामरूप जनपद में ब्रह्मरूप पहाड़ी पर स्थित है| वर्तमान में यह महाराष्ट्र में स्थित है। महादेव ने जिस स्थान पर भीमा का वध किया वह स्थान देवताओं के लिए पूज्यनीय बन गया। सभी ने भगवान शिव - [नागेश्वर ज्योतिर्लिंग - Nageshwar Jyotirling](https://bhaktisatsang.com/nageshwar-jyotirling-temple-mahadev-hindi/) - नागेश्वर मंदिर - Nageshwar Temple - Jyotirling In Gujarat नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर भगवान शिव के पवित्र 12 ज्योतिर्लिंगों में से दसवे स्थान पर है. नागेश्वर के वर्तमान मंदिर का पुनर्निर्माण, सूपर केसेट्स इंडस्ट्री के मालिक स्वर्गीय श्री गुलशन कुमार ने करवाया था. उन्होंने इस जीर्णोद्धार का कार्य 1996 में शुरू करवाया, तथा इस बीच उनकी - [सोमवार व्रत कथा](https://bhaktisatsang.com/monday-vrat-katha/) - सोमवार व्रत कथा | Monday Vrat Katha हिन्दू धर्म के अनुसार सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है। जो व्यक्ति सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा करते हैं उन्हें मनोवांछित फल अवश्य मिलता है। व्रत कथा: किसी नगर में एक साहूकार रहता था। उसके घर में धन की कोई कमी नहीं - [एकलिंगजी महादेव मंदिर](https://bhaktisatsang.com/eklingji-mahadev-temple/) - राजस्‍थान के उदयपुर जिले में एक तीर्थ है - कैलाशपुरी। शिव यहां एकलिंग के नाम से विराजित है। श्री एकलिंगजी महादेव मंदिर कि उदयपुर से लगभग २२ किमी और नाथद्वारा से लगभग २६ कि.मी. दूर राष्ट्रीय राजमार्ग ४८ पर कैलाशपुरी नाम के स्थान पर स्थित हैं। पूर्वी भारत में जहां त्रिकलिंग की मान्‍यता रही है - [अमरनाथ धाम यात्रा - Amarnath Dham Yatra](https://bhaktisatsang.com/amarnath-temple-yatra-dham-darshan-hindi/) - अमरनाथ - Amarnath अमरनाथ यात्रा भारत के चार प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है, और श्रद्धालुओं का झुंड हर साल दक्षिण कश्मीर हिमालय से होकर श्री अमरनाथ जी की पवित्र गुफा तीर्थ तक पहुंचता है। मंदिर को जुलाई से अगस्त के महीने में केवल ग्रीष्मकाल के दौरान भक्तों के लिए खोला जाता है। लोग लिंगम - [केदारनाथ ज्योतिर्लिंग : उत्तराखंड के चार धाम यात्रा में सबसे प्रमुख और सर्वोच्च ज्योतिर्लिंग](https://bhaktisatsang.com/kedarnath-jyotirling-temple-yatra-hindi-केदारनाथ/) - केदारनाथ - Kedarnath हिंदू धर्म में केदारनाथ यात्रा (kedarnath yatra) की काफी मान्‍यता है, केदारनाथ धाम ((kedarnath dham) और बद्रीनाथ धाम (Badrinath Dham Yatra) के दर्शन किए बिना चार धाम (char dham yatra) पूरे नहीं होते है। चार धामों (4 dham) में से एक केदारनाथ स्थित ज्योतिर्लिंग भी भगवान शिव के 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से पांचवे - [रुद्राक्ष की सम्पूर्ण जानकारी : रुद्राक्ष के मंत्र, आध्यात्मिक लाभ और असली रुद्राक्ष की पहचान तथा सकारात्मक प्रभाव](https://bhaktisatsang.com/original-rudraksha-benefits-power-रुद्राक्ष/) - रुद्राक्ष - Rudraksha भारतीय संस्कृति में रुद्राक्ष का महत्व (rudraksh Power) और रुद्राक्ष के फायदे (rudraksha benefits) अत्यधिक माने गए है। माना जाता है कि असली रुद्राक्ष (original rudraksha) इंसान को हर तरह की हानिकारक ऊर्जा से बचाता है। रुद्राक्ष एक बीज (rudraksha beads) होता है जिसका उपयोग रुद्राक्ष माला (rudraksha chain) बनाने में किया - [कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग और यात्रा के पहले और दौरान सावधानी और जरुरी जानकारी](https://bhaktisatsang.com/kailash-mansarovar-yatra-route-hindi/) - कैलाश मानसरोवर यात्रा - Kailash Mansarovar Yatra सनातन धर्म में कैलाश का अपना महत्व रहा है. 22000 फीट ऊंचे इस पर्वत को कैलाश कहा जाता है, जिसका सम्बन्ध आदियोगी शिव से माना जाता है. ये पर्वत तिब्बत में त्रान्शिमाल्या का एक अंश है, काफी ऊंचे और ठन्डे स्थान पर ये तीर्थ स्थल होने की वजह - [शिव विवाह की कथा](https://bhaktisatsang.com/shiv-vivah/) - शिव विवाह की कथा | Shiv Vivah सती के विरह में शंकरजी की दयनीय दशा हो गई। वे हर पल सती का ही ध्यान करते रहते और उन्हीं की चर्चा में व्यस्त रहते। उधर सती ने भी शरीर का त्याग करते समय संकल्प किया था कि मैं राजा हिमालय के यहाँ जन्म लेकर शंकरजी की - [जानिए क्यों है शिव का सबसे पवित्र मंदिर पशुपतिनाथ (नेपाल)](https://bhaktisatsang.com/पशुपतिनाथ-मंदिर-नेपाल-bhagwan-shiv-temple/) - पशुपतिनाथ मंदिर, नेपाल - Pashupatinath Temple, Nepal नेपाल अध्यात्म की भूमि है और एक समय में यह जगह पूरी तरह से जिंदगी के आध्यात्मिक पहलुओं (Spiritual Facts) से जुड़ी हुई थी। दुर्भाग्य से इस देश को राजनैतिक और आर्थिकस्तर पर बेहद उठा-पटक और पतन का दौर देखना पड़ा। इसी वजह से वे अपने यहां हुए - [इस तरह शिवजी करेंगे आपकी गृहस्थी को शुभ और लाभ से भरपूर](https://bhaktisatsang.com/shiv-pooja-गृहस्थ-के-लिए-शिव-पूजा/) - श्रीपुराणपुरुषोत्तमाय नम :, श्री गणेशाय नम: भवाब्धिमग्नं दिनं मां समुन्भ्दर भवार्णवात | कर्मग्राहगृहीतांग दासोऽहं तव् शंकर || श्री शिवपुराण – माहात्म्य रूद्रसंहिता, प्रथम (सृष्टि) खण्ड अध्याय – ३६ भगवान् शिव की श्रेष्ठता तथा उनके पूजन की अनिवार्य आवश्यकता का प्रतिपादन नारदजी बोले – ब्रह्मन ! प्रजापते ! आप धन्य हैं; क्योंकि आपकी बुद्धि भगवान शिवमें - [जानिए शिवपुराण के अनुसार धन लाभ यश प्राप्ति के उपाय](https://bhaktisatsang.com/shiv-purana-for-money-problem/) - इस सृष्टि का निर्माण भगवान शिव की इच्छा मात्र से ही हुआ है। अत: इनकी भक्ति करने वाले व्यक्ति को संसार की सभी वस्तुएं प्राप्त हो सकती हैं। शिवजी अपने भक्तों की समस्त मनोकामनाएं पूरी कर देते हैं। शिवपुराण के अनुसार, नियमित रूप से शिवलिंग का पूजन करने वाले व्यक्ति के जीवन में दुखों का - [तो ये है शिव के अद्भुत रूप का छुपा गूढ़ रहस्य, जानकर हक्के बक्के रह जायेंगे](https://bhaktisatsang.com/who-is-lord-shiv-in-hindi/) - कौन हैं शिव | who is lord shiva शिव संस्कृत भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है, कल्याणकारी या शुभकारी। यजुर्वेद में शिव को शांतिदाता बताया गया है। 'शि' का अर्थ है, पापों का नाश करने वाला, जबकि 'व' का अर्थ देने वाला यानी दाता। क्या है शिवलिंग (what is Shivlinga) शिव की दो काया - [शिव के अर्धनारीश्वर रूप की कथा - Shiv Puran Ki Katha](https://bhaktisatsang.com/ardhanarishvara-shiv-puran-katha/) - शिव के अर्धनारीश्वर रूप की कथा - Shiv Katha in Hindi शिवपुराण की कथाओ (Shiv Puran ki Katha) में अर्धनारीश्वर रूप की कथा (Shiv Katha) बड़ी प्रचलित है पर बहुत कम लोग जानते है की शिव ने ये रूप किसके दुखो को हरने के लिया धरा था ? तो आज आपको इस पौराणिक शिव पुराण - [कामेश्वर धाम - यहां शिव के तीसरे नेत्र से भस्म हो गए थे कामदेव](https://bhaktisatsang.com/shiv-kameshwar-dham-dharmik-yatra/) - कामेश्वर धाम यात्रा - Kameshwar Dham Yatra शिव पुराण में एक कथा का वर्णन मिलता है, जिसमें भगवान शिव कामदेव को अपने तीसरे नेत्र से जलाकर भस्म कर देते हैं। वह पौराणिक जगह आज भी लोगों की आस्था का केंद्र है। दूर-दूर से भोले के भक्त इस मंदिर में माथा टेकने आते हैं। सावन में और - [जानिए कौन थीं भगवान शिव और माता पार्वती की पुत्री](https://bhaktisatsang.com/shiv-parvati-putri-ashok-sundari-katha/) - भगवान शिव और माता पार्वती की पुत्री क्या आप जानते है कि कार्तिकेय और गणेश के अलावा भगवान शिव और माता पार्वती की एक पुत्री भी थी। जी हाँ, हर कोई शिव पुत्रों के विषय में जानता है किन्तु बहुत कम लोग यह जानते है कि कार्तिकेय और गणेश की एक बहन भी थी, जिसका - [शिव पूजा में 10 निषेध वस्तुए - भूलकर भी ना चढ़ाये](https://bhaktisatsang.com/shiv-puja-prohibited-items/) - शिव पूजा में 10 निषेध वस्तुए - Prohibited Items in Shiv Puja Shiv Puja : भगवान भोलेनाथ केवल मन के भाव से ही प्रसन्न हो जाते हैं और उनकी पूजा (Shiv Pujan) के लिए किसी विशेष वस्तुओं की आवश्यकता नहीं होती। परन्तु कुछ ऐसी वस्तुएं भी हैं जो पुराणों के अनुसार महादेव (Shivling Puja) को - [शिव षडाक्षर स्तोत्र - शकंराचार्य द्वारा रचित](https://bhaktisatsang.com/shiv-shadakshar-strotram-mp3-lyrics/) - शिव षडाक्षर स्तोत्र - Shiv Shadakshar Stotram Mp3 Commentry Mantra for Lord Shiva Strotam ॐ कारं बिंदुसंयुक्तं नित्यं ध्यायंति योगिन:। कामदं मोक्षदं चैव ॐकाराय नमो नम:॥ नमंतिऋषयो देवा नमन्त्यप्सरसां गणा:। नरा नमन्तिदेवेशं नकाराय नमो नम:॥ महादेवं महात्मानं महाध्यानं परायणम्। महापापहरं देवं मकाराय नमो नम:॥ शिवं शांन्तं जगन्नाथं लोकानुग्रहकारकम्। शिवमेकपदं नित्यं शिकाराय नमो नम:॥ - [शिव रूद्राभिषेक की सम्पूर्ण जानकारी, पूजन का समय, फल और विधि](https://bhaktisatsang.com/shiv-rudrabhishek-vidhi-labh-hindi/) - रूद्राभिषेक का महत्व क्यों - Shiv Rudrabhishek ऐसी मान्यता है कि शिव को प्रसन्न किए बिना मनुष्य का कल्याण संभव नहीं है। भले ही साधक के इष्टदेव भगवान विष्णु, श्रीराम, कृष्ण अथवा जगत्पिता ब्रह्म ही क्यों न हों। इन सभी देवताओं की उपासना के लिए भी भगवान शिव का पूजन स्मरण आवश्यक है। लोक-परलोक में - [शिव को अति प्रिय बिल्व वृक्ष लगाने से मनुष्य को नर्क-भोग से मुक्ति संभव](https://bhaktisatsang.com/bilva-patra-shiv-puja-importance-hindi/) - बिल्वपत्र का महत्त्व क्यों ? शिवपुराण आदि विभिन्न ग्रंथों में शिव पूजा करते समय बिल्वपत्र आवश्यक बतलाया गया है। पुराणों में कहा गया है कि एक बिल्व वृक्ष लगाने से मनुष्य की सात-पीढ़ियां नर्क-भोग से मुक्त हो जाती है। कहा जाता है कि बिल्व वृक्ष लगाने वाले मनुष्य को कोई भी गृह-पीडा़ नही सताती हैं - [जानिए भगवान शिव के स्वरुप के गूढ़ रहस्य को](https://bhaktisatsang.com/interesting-things-related-to-lord-shiva/) - भगवान शिव के स्वरुप के गूढ़ रहस्य - Interesting Facts of Lord Shiva भगवान शिव जितने रहस्यमयी हैं, उनकी वेश-भूषा व उनसे जुड़े तथ्य उतने ही विचित्र हैं। शिव श्मशान में निवास करते हैं, गले में नाग धारण करते हैं, भांग व धतूरा ग्रहण करते हैं। आदि न जाने कितने रोचक तथ्य इनके साथ जुड़े - [भगवान शिव के 108 नाम - Lord Shiva 108 Names](https://bhaktisatsang.com/shiv-kelord-shiva-108-names-naam/) - भगवान शिव के 108 नाम - Lord Shiva 108 Names Shiv Ke 108 Naam - प्रत्येक माह में शिवरात्रि की तिथि होती है। लेकिन फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष त्रयोदशी को भगवान शिव का वरदान प्राप्त है और यह तिथि भगवान शिव की पूजा अर्चना के लिए समर्पित मानी गई है। भगवान शिव को भोले - [Shiva Panchakshara Stotram - शिव पंचाक्षर स्तोत्रं](https://bhaktisatsang.com/shiva-panchakshara-stotram/) - Shiva Panchakshara Stotram - शिव पंचाक्षर स्तोत्रं ॥ श्रीशिवपञ्चाक्षरस्तोत्रम् ॥ नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय, भस्माङ्गरागाय महेश्वराय । नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय, तस्मै न काराय नमः शिवाय ॥१॥ मन्दाकिनी सलिलचन्दन चर्चिताय, नन्दीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय । मन्दारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय, तस्मै म काराय नमः शिवाय ॥२॥ शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द, सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय । श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय, तस्मै शि काराय नमः शिवाय ॥३॥ वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्य, मुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय। - [Shivashtakam with Lyrics in Hindi - शिवाष्टकम्](https://bhaktisatsang.com/shivashtakam-with-lyrics-in-hindi-शिवाष्टकम्/) - Shivashtakam - शिवाष्टकम् प्रस्तुत किया गया शिवाष्टक आदि गुरू शंकराचार्य द्वारा रचित है। आठ पदों में विभक्त यह रचना परंब्रह्म परमेश्वर भगवान् शिव की पुजा एक उत्तम साधन है । इसके जाप से आप मन को उस ब्रह्माण्ड नायक भगवान् श्री शम्भू के चरणों मैं आसानी से लगा सकते हैं। Shivashtakam with Lyrics - शिवाष्टकम् - [श्री शिवरामाष्टक स्तोत्रम् - Shiva Ramashtakam Stotram](https://bhaktisatsang.com/shiva-rama-ashtakam-lyrics-hindi/) - श्री शिवरामाष्टक स्तोत्रम् - Shiva Ramashtakam Stotram Lyrics in Hindi शिव हरे शिव राम सखे प्रभो त्रिविधतापनिवारण हे प्रभो । अज जनेश्वर यादव पाहि मां शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ॥१॥ कमललोचन राम दयानिधे हर गुरो गजरक्षक गोपते । शिवतनो भव शङ्कर पाहि मां शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ॥२॥ सुजनरञ्जन मङ्गलमन्दिरं भजति - [वास्तु टिप्स : इन आसान वास्तु उपायों से आपको मिलेगी मनचाही नौकरी](https://bhaktisatsang.com/easy-vastu-tips-to-get-job-and-crack-interview/) - सरल वास्तु उपायों से पाए नौकरी - Easy Vastu Tips To Get Job युवाओं के बीच बेरोजगारी एक बहुत बड़ी समस्या है। इस समस्या में इजाफा होता है हमारे देश की विशाल आबादी से जो कि एक साधारण सी नौकरी के लिए भी आम लोगों के बीच बहुत ज्यादा संघर्ष का माहौल तैयार करती है। - [चातुर्मास की अवधि में करे इन 5 नियमो का पालन, पूरी होगी हर मनोकामना](https://bhaktisatsang.com/chaturmas-rules-for-fulfill-all-wishes/) - चातुर्मास के 5 नियमो के पालन से पूरी होगी हर मनोकामना देवशयनी एकादशी के साथ ही सनातन धर्म में चातुर्मास लग जाता है। चातुर्मास हिन्दू धर्म के अनुयायियों के लिए बेहद ही महत्वपूर्ण अवधि मानी गयी है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस चार महीने की अवधि के दौरान भगवान विष्णु सृष्टि के संचालन का सारा - [एकादशी व्रत क्यों किया जाता है ? जाने देवशयनी और देवोत्थान एकादशी के बारे में](https://bhaktisatsang.com/ekadashi-vrat-devshayani-devothan/) - एकादशी व्रत क्यों किया जाता है ? एकादशी तिथि को मनःशक्ति का केन्द्र चन्द्रमा क्षितिज की ग्यारहवीं कक्षा पर स्थित होता है। यदि इस अनुकूल समय में मनोनिग्रह की साधना की जाए तो वह शीघ्र फलवती सिद्ध हो सकती है। इस वैज्ञानिक आशय से ही एकादशेन्द्रियभूत मन को एकादशी तिथि के दिन धर्मानुष्ठान एवं व्रतोपवास - [जानिए क्यों नहीं करते है शुभ कार्य देवशयनी एकादशी के बाद](https://bhaktisatsang.com/devshayani-ekadashi-katha-hindi/) - देवशयनी एकादशी आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कहा जाता है। इसे 'पद्मनाभा' तथा 'हरिशयनी' एकादशी भी कहा जाता है। पुराणों में ऐसा उल्लेख मिलता है कि इस दिन से भगवान विष्णु चार मास के लिए बलि के द्वार पर पाताल लोक में निवास करते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी को लौटते हैं। - [Devshayani Ekadashi - देवशयनी एकादशी का महत्व, कथा और पौराणिक मान्यताएँ](https://bhaktisatsang.com/devshayani-ekadashi-vrat-katha-देवशयनी-एकादशी-व्रत/) - Devshayani Ekadashi - देवशयनी एकादशी आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ही देवशयनी एकादशी कहा जाता है। भारत में कई जगह इस तिथि को 'पद्मनाभा' भी कहते हैं और इस एकादशी को शयनी एकादशी, महा-एकादशी, प्रथमा एकादशी, पद्मा एकादशी और देवोपदी एकादशी भी कहा जाता है। माना जाता है कि सूर्य के मिथुन - [भगवान जगन्नाथ और कर्मा बाई की कथा](https://bhaktisatsang.com/jagannath-story-karma-bai/) - भगवान जगन्नाथ और कर्मा बाई की कथा - Jagannath Story हर भक्त भगवान को अपना सर्वस्व अर्पित करने को तैयार रहता है। हम और आप ऐसे कई मंदिरों को जानते हैं जहां भक्त खुले हाथों से भगवान के चरणों में लाखों-करोड़ों रुपये अर्पित करते हैं लेकिन क्या आपने कभी ऐसा सोचा है कि सनातन धर्म - [गरुड़ पुराण - मृत्यु के समय इन 5 उपायों से बैकुंठ जाती है आत्मा](https://bhaktisatsang.com/गरुड़-पुराण-garud-puran-in-hindi/) - गरुड़ पुराण रहस्य . - Garud Puran in Hindi सनातन धर्म में यह मान्यता है कि मृत्यु के बाद भी एक दुनिया है जहां पाप और पुण्य का हिसाब होता है। धरती पर किए गए पुण्यों के बदले पुण्यात्माओं को स्वर्ग मिलता है और पाप करने वाले पापियों को नर्क की यातना सहनी पड़ती है। - [जगन्नाथ पूरी मंदिर - Jagannath Puri Temple](https://bhaktisatsang.com/jagannath-puri-temple-hindi/) - जगन्नाथ मंदिर - Jagannath Temple पुरी का श्री जगन्नाथ मंदिर एक महत्वपूर्ण हिंदू मंदिर है जो भारत के पूर्वी तट पर स्थित, भगवान जगन्नाथ का एक रूप है, जो ओडिशा राज्य के पुरी में स्थित है। पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर को हिन्दुओं के चार धाम में से एक गिना जाता है। पुराणों में इसे - [पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा - जाने जगन्नाथ मंदिर से जुड़े रहस्य और जरूरी बातें](https://bhaktisatsang.com/puri-jagannath-rath-yatra-2021/) - पुरी जगन्नाथ - Puri Jagannath आइए जानते हैं कि 2021 में जगन्नाथ रथ यात्रा कब है व जगन्नाथ रथ यात्रा 2021 की तारीख व मुहूर्त। भगवान जगन्नाथ को विष्णु का 10वां अवतार माना जाता है, जो 16 कलाओं से परिपूर्ण हैं। पुराणों में जगन्नाथ धाम की काफी महिमा है, इसे धरती का बैकुंठ भी कहा - [ज्योतिषीय ग्रहों के अनुसार जीवन में रंगों का महत्व और प्रभाव](https://bhaktisatsang.com/importance-of-colors-in-astrology/) - जीवन में रंगों का ज्योतिषीय महत्व - Significance of Colors In Astrology इस हसीन दुनिया को और भी खूबसूरत बनाने वाले रंग दरअसल ज्योतिष में भी बेहद ही महत्वपूर्ण भूमिका रखते हैं। यह खूबसूरत रंग व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक जीवन पर खासा प्रभाव डालते हैं। कई धर्मों में इन रंगों को अनुष्ठानों, समारोह - [जाने तुलसी पत्र को तोड़ने से पहले जरूरी नियमों को, नहीं मिलेगा नकारात्मक फल](https://bhaktisatsang.com/tulsi-ke-upay-hindi/) - Tulsi Ke Upay - सनातन धर्म में तुलसी को एक पवित्र पौधा माना गया है। जगत के संचालक भगवान विष्णु को तुलसी पत्र बेहद प्रिय है, यही वजह है कि तुलसी को हरिप्रिया भी कहा जाता है। सनातन धर्म में लगभग हर पूजा में तुलसी पत्र का इस्तेमाल होता है। तुलसी न सनातन धर्म के - [महिलाओ के लिए हनुमान जी की पूजा विधि, विशेष नियम, वर्जित कार्य](https://bhaktisatsang.com/hanuman-puja-rules-for-ladies/) - हनुमान जी की पूजा - Hanuman Puja आज हम महिलाओ को हनुमान जी की पूजा कैसे करनी चाहिए और हनुमान जी की पूजा के नियम के साथ हनुमान जी की पूजा की विधि (Hanuman Puja Vidhi) जैसे तथ्यों को इस पोस्ट में कवर करेंगे तो चलिए शरू करते है - भगवान हनुमान को मंगलवार का - [फिटकरी से जुड़े इन 5 वास्तु उपाय से ख़त्म करे जीवन की हर समस्या](https://bhaktisatsang.com/vastu-upay-tips-for-homes/) - वास्तु शास्त्र के टोटके - Vastu Tips For Homes वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का नक्शा (Vastu Tips) बना हो तो कहना ही क्या परन्तु ऐसा सर्वथा होता नहीं । वास्तु शास्त्र एक ऐसा विज्ञान है जो आपके जीवन को सकारात्मक ऊर्जा से भर सकता है क्यों की वास्तु शास्त्र के उपाय स्वयं ऋषि, मुनियों - 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आज कल के माहौल में मानसिक तनाव ने लोगों के वैवाहिक जीवन में भी खटास पैदा कर दी है। वैसे तो कोई भी अपने जीवनसाथी से मनमुटाव रखना नहीं चाहता है लेकिन बदलते परिवेश में ये संभव - [सुखी और सकारात्मक जीवन के लिये अपनाएं ये वास्तु टिप्स](https://bhaktisatsang.com/vastu-upay-remedies-for-positive-life/) - वास्तु उपाय - Vastu Remedies हर चीज़ को करने का एक सलीका होता है। जब चीज़ें करीने सजा कर एकदम व्यवस्थित रखी हों तो कितनी अच्छी लगती हैं। उससे हमारे भीतर एक सकारात्मक उर्जा का संचार होता है। वास्तु हमें यही सिखाता है। ज्योतिष शास्त्र में माना जाता है कि घर के निर्माण की रूप - [इन 4 राशियों का अक्सर होता है प्रेम विवाह - Love Marriage Astrology](https://bhaktisatsang.com/zodiac-signs-do-love-marriage-astrology/) - 4 रशिया जो करती है प्रेम विवाह - Love Marriage Astrology हिंदू धर्म में शादी के समय दूल्हा-दुल्हन की कुंडली मिलाने की परंपरा है. हालांकि कई लोग कुंडली से जुड़ी परंपराओं को नहीं मानते हैं, खासतौर से लव मैरिज में, परन्तु वैदिक ज्योतिष मानता है कि किसी भी जातक के जीवन में प्रेम और प्रेम - 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[महालक्ष्मी की कहानी- लक्ष्मीजी की अंगूठी और सेठ का अंहकार](https://bhaktisatsang.com/mahalaxmi-ki-kahani-katha/) - महालक्ष्मी की कहानी - Mahalaxmi Ki Kahani आज एक ऐसी Mahalaxmi Ki Katha बताएँगे जिसमे महालक्ष्मी की अंगूठी और सेठ के अंहकार की कथा है और इस Mahalaxmi Ki Kahani में लक्ष्मीजी की कृपा से निर्धन व्यक्ति कैसे सेठ बना और फिर उसका अहंकार कैसे टुटा ? तो चलिए शुरू करते है - महालक्ष्मी कथा - [Neel Saraswati Stotram - नीलसरस्वती स्तोत्रम्](https://bhaktisatsang.com/neel-saraswati-stotram-lyrics/) - Neel Saraswati Stotram - नील सरस्वती स्तोत्रम् जो व्यक्ति अष्टमी, नवमी तथा चतुर्दशी तिथि को नील सरस्वती स्तोत्र अर्थ सहित (neel saraswati stotram) का पाठ करता है वह आने वाले छ: महीनों में सिद्धि प्राप्त कर लेता है. नील सरस्वती स्तोत्रम् का पाठ करने से मोक्ष की कामना करने वाला मोक्ष पा लेता है, धन - [हे शारदे मां हे शारदे माँ -Hey Sharde Maa Lyrics](https://bhaktisatsang.com/hey-sharde-maa-lyrics-song/) - Hey Sharde Maa - हे शारदे माँ - Lyrics of Hey Sharde Maa - सरस्वती, ज्ञान और चेतना का प्रतिनिधित्व करती हैं। वे वेदों की जननी हैं और उनके मंत्रों को सरस्वती वंदना (Saraswati Vandana) भी कहते हैं। वह मनुष्य की वाणी, बुद्धि और विद्या की शक्तियों से संपन्न होती हैं। उनके पास व्यक्तित्व के - [श्री शिवनामावल्य अष्टकम् - Shiva Namavali Ashtakam](https://bhaktisatsang.com/shiva-namavali-ashtakam-lyrics/) - श्री शिवनामावल्य अष्टकम् - Shiva Namavali Ashtakam ॥ श्रीशिवनामावल्यष्टकम् ॥ हे चन्द्रचूड मदनान्तक शूलपाणे, स्थाणो गिरीश गिरिजेश महेश शंभो । भूतेश भीतभयसूदन मामनाथं, संसारदुःखगहनाज्जगदीश रक्ष ॥ १॥ हे पार्वतीहृदयवल्लभ चन्द्रमौले, भूताधिप प्रमथनाथ गिरीशचाप । हे वामदेव भव रुद्र पिनाकपाणे, संसारदुःखगहनाज्जगदीश रक्ष ॥ २॥ हे नीलकण्ठ वृषभध्वज पञ्चवक्त्र, लोकेश शेषवलय प्रमथेश शर्व । हे धूर्जटे - [महाकाल भैरवाष्टकम् - Mahakala Bhairava Ashtakam](https://bhaktisatsang.com/mahakala-bhairava-ashtakam-lyrics/) - महाकाल भैरवाष्टकम् - Mahakala Bhairava Ashtakam यं यं यं यक्षरूपं दशदिशिविदितं भूमिकम्पायमानं, सं सं संहारमूर्तिं शिरमुकुटजटा शेखरंचन्द्रबिम्बम् । दं दं दं दीर्घकायं विक्रितनख मुखं चोर्ध्वरोमं करालं, पं पं पं पापनाशं प्रणमत सततं भैरवं क्षेत्रपालम् ॥ १॥ रं रं रं रक्तवर्णं, कटिकटिततनुं तीक्ष्णदंष्ट्राकरालं, घं घं घं घोष घोषं घ घ घ घ घटितं घर्झरं घोरनादम् । - [श्री शिव महिमा अष्टकम - Shiv Mahima Ashtakam](https://bhaktisatsang.com/shiv-mahima-ashtakam-lyrics-hindi/) - Shiv Mahima Ashtakam - श्री शिव महिमा अष्टकम सुरवृन्दमुनीश्वरवन्द्यपदो हिमशैलविहारकरो रुचिरः । अनुरागनिधिर्मणिसर्पधरो जयतीह शिवः शिवरूपधरः ॥ १॥ भवतापविदग्धविपत्तिहरो भवमुक्तिकरो भवनामधरः । धृतचन्द्रशिरो विषपानकरो जयतीह शिवः शिवरूपधरः ॥ २॥ निजपार्षदवृन्दजयोच्चरितः करशूलधरोऽभयदानपरः । जटया परिभूषितदिव्यतमो जयतीह शिवः शिवरूपधरः ॥ ३॥ वृषभाङ्गविराजित उल्लसितः कृपया नितरामुपदेशकरः । त्वरितं फलदो गणयूथयुतो जयतीह शिवः शिवरूपधरः ॥ ४॥ अहिहारसुशोभित आप्तनुतो समुपास्यमहेश्वर - [बटुक भैरव कवच - Batuk Bhairav Kavach](https://bhaktisatsang.com/batuk-kal-bhairav-kavach/) - काल भैरव कवच- Bhairav Kavach काल भैरव की पूजा में बटुक भैरव कवच (batuk bhairav kavach) या काल भैरव कवच (kal bhairav kavach) का भी पाठ करना चाहिए। भक्त bhairav kavach को विशेषकर कालाष्टमी और काल भैरव जयंती के दिन भगवान कालभैरव की पूजा करते समय करते है।ऐसा करने से व्यक्ति को मनचाही सिद्धियां प्राप्त - [ब्रह्म वैवर्त पुराण - Brahma Vaivarta Purana](https://bhaktisatsang.com/brahma-vaivarta-purana/) - ब्रह्म वैवर्त पुराण - Brahma Vaivarta Purana ब्रह्म वैवर्त पुराण Brahma Vaivarta Puran वैष्णव पुराण है। इस में कृष्ण को ही प्रमुख इष्ट मानकर उन्हें सृष्टि का कारण बताया गया है। 'ब्रह्मवैवर्त' शब्द का अर्थ है- ब्रह्म का विवर्त अर्थात् ब्रह्म की रूपान्तर राशि। ब्रह्म की रूपान्तर राशि 'प्रकृति' है। प्रकृति के विविध परिणामों का - [ब्रह्माण्ड पुराण - Brahmanda Purana](https://bhaktisatsang.com/brahmand-puran-hindi/) - ब्रह्माण्ड पुराण - Brahmand Puran समस्त महापुराणों में 'ब्रह्माण्ड पुराण' (Brahmanda Purana) अन्तिम पुराण होते हुए भी अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। समस्त ब्रह्माण्ड का सांगोपांग वर्णन इसमें प्राप्त होने के कारण ही इसे यह नाम दिया गया है। वैज्ञानिक दृष्टि से इस पुराण का विशेष महत्त्व है। विद्वानों ने 'ब्रह्माण्ड पुराण' (Brahmand Puran) को वेदों के - [वराह पुराण - Varaha Purana](https://bhaktisatsang.com/varah-puran-hindi/) - वराह पुराण - Varaha Puran वराह पुराण (Varaha Purana) में विष्णु पूजा का अनुष्ठान विधिपूर्वक करने की शिक्षा दी गई है क्योकि वराह पुराण (Varaha Puranam) एक वैष्णव पुराण है। भगवान् विष्णु के दशावतारों में एक अवतार 'वराह' का है। पृथ्वी का उद्धार करने के लिए भगवान विष्णु ने राक्षस हिरण्याक्ष का वध करने हेतु - [नारद पुराण - Narad Puran](https://bhaktisatsang.com/narad-puran-hindi/) - नारद पुराण - Narad Purana नारद पुराण (Narad Puran) एक वैष्णव पुराण है। नारद पुराण (Narad Puran in Hindi) के विषय में कहा जाता है कि इसका श्रवण करने से पापी व्यक्ति भी पाप मुक्त हो जाते हैं। जो व्यक्ति ब्रह्महत्या का दोषी है, मदिरापान करता है, मांस भक्षण करता है, वेश्यागमन करता हे, लहसुन-प्याज - [परमा एकादशी 2022 – जानिए परम एकादशी व्रत की पूजा विधि और पौराणिक कथा](https://bhaktisatsang.com/parama-purushottami-ekadashi-vrat-katha-hindi/) - परमा एकादशी - Parama Ekadashi 2019 परमा एकादशी (Parama Ekadashi hindi) जिसे पुरुषोत्तम एकादशी (Purushottami Ekadashi) भी कहते हैं अधिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। प्रत्येक वर्ष 24 एकादशियां आती हैं। मलमास में इनकी संख्या 24 से बढ़कर 26 हो जाती है। साल 2019 में परम एकादशी मंगलवार, 12 सितंबर - [मस्तिष्क रेखा का ज्ञान - Head Line in Palmistry](https://bhaktisatsang.com/about-mastishk-rekha-hindi/) - मस्तिष्क रेखा का ज्ञान - Head Line in Palmistry मस्तिष्क रेखा (Mind Line) हृदय रेखा (Heart Line) के नीचे होती है, यह रेखा तर्जनी व अंगूठे के लगभग बीच से शुरू होती है | मस्तिष्क रेखा (Mastishk Rekha) की स्थिति में किसी तरह की गड़बड़ी से व्यक्ति की अस्वाभाविक प्रवृत्ति का पता चलता है, सामान्यतः - [कुण्डलिनी जागरण के लक्षण और चमत्कार - Kundalini Aawakening](https://bhaktisatsang.com/kundalini-awakening-symptoms-and-benefits/) - कुण्डलिनी जागरण के लक्षण - Awakening of The Kundalini कुण्डलिनी जागरण के लक्षण (Kundalini Awakening Symptoms) और कुण्डलिनी जागरण के चमत्कार जानने से पहले हमे उसके आध्यात्मिक लाभ का पता होना चाहिए लेकिन कुंडलिनी जागरण के आध्यात्मिक लाभ की अभिव्यक्ति शब्दो में तो नहीं की जा सकती, परन्तु इतना कह सकते है की कुण्डलिनी शक्ति - [वैष्णो देवी यात्रा - Vaishno Devi Yatra](https://bhaktisatsang.com/vaishno-devi-yatra-hindi/) - वैष्णो देवी यात्रा - Vaishno Devi Yatra वैष्णो देवी, जिन्हें माता रानी, ​​त्रिकुटा और वैष्णवी के रूप में भी जाना जाता है, हिंदू देवी, माता आदि शक्ति की एक अभिव्यक्ति हैं, जिन्हें महालक्ष्मी / मातृ देवी भी कहा जाता है। "माँ" और "माता" शब्द आमतौर पर "माँ" के लिए भारत में उपयोग किए जाते हैं, - [प्राणायाम की सम्पूर्ण प्रक्रिया और करने की योगिक विधि](https://bhaktisatsang.com/pranayama-prkirya-hindi/) - Pranayam | प्राणायाम यघपि प्राणायाम की विभिन्न विधियाँ शास्त्रो में वर्णित हे और प्रत्येक Pranayama का अपना एक विशेष महत्व है तथापि सभी प्राणायामों का व्यक्ति प्रतिदिन अभ्यास नहीं कर सकता अतः हमने गुरुओ की कृपा व अपने अनुभव के आधार पर प्राणायाम की एक सम्पूर्ण प्रक्रिया को विशिष्ट वैज्ञानिक रीती व आध्यात्मिक विधि से सात प्रक्रियाओ - [कुण्डलिनी चालीसा | Kundalini Chalisa](https://bhaktisatsang.com/kundalini-chalisha/) - Kundalini Chalisa | श्री कुण्डलिनी चालीसा सिर सहस्त्रदल कौ कमल , अमल सुधाकर ज्योति | ताकि कनिका मध्य में , सिंहासन छवि होति || शांत भाव आनंदमय , सम चित विगत विकार | शशि रवि अगिन त्रिनेत्रयुत , पावन सुरसरिधार || सोहे अंक बिलासनी, अरुण बरन सौ रूप | दक्षिण भुज गल माल शिव, बाएं - [स्वामी विवेकानन्द - Swami Vivekananda Biography in hindi](https://bhaktisatsang.com/about-swaami-vivekanand-life/) - स्वामी विवेकानन्द - Swami Vivekananda Biography in Hindi स्वामी विवेकानन्द (जन्म: १२ जनवरी,१८६३ – मृत्यु: ४ जुलाई,१९०२) वेदान्त के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु थे। उनका वास्तविक नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था। उन्होंने अमेरिका स्थित शिकागो में सन् १८९३ में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था। भारत - [रामकृष्ण परमहंस - Ramkrishna Paramhans](https://bhaktisatsang.com/ramakrishna-paramhansa/) - रामकृष्ण परमहंस - Ramkrishna Paramhans पूरा नाम- रामकृष्ण परमहंस अन्य नाम- गदाधर (बचपन में), वीतराग जन्म- 18 फ़रवरी, 1836 जन्म भूमि- कामारपुकुर गाँव, हुगली ज़िला, पश्चिमी बंगाल मृत्यु- 15 अगस्त, 1886 मृत्यु स्थान- कलकत्ता (अब कोलकाता) , अभिभावक- खुदीराम चट्टोपाध्याय , पत्नी- शारदामणि , कर्म- क्षेत्र - महान संत एवं विचारक , पुरस्कार-उपाधि- परमहंस , नागरिकता- भारतीय , अन्य जानकारी- सेवाग्राम के संत के शब्दों में 'उनका जीवन धर्म को व्यवहार क्षेत्र में उतारकर - [चमत्कारीक काल भैरव प्रतिमा करती हैं मदिरापान](https://bhaktisatsang.com/miraculous-statue-of-kal-bhairav/) - काल भैरव - Kaal Bhairav भैरवगढ़ नदी के छोर पर शहर से तीन मील दूरी पर है। प्राचीन अवन्तिका इधर बसी हुई है। अब भी एक उपनगर के समान यहां की भी बस्ती है। छपाई के काम करने वाले लोग अधिकांश यहां रहते हैं। इस स्थान के प्रमुख देव भैरव हैं। यह बस्ती टीले पर - [व्यवसाय में वृद्धि के लिए जबरदस्त ज्योतिष उपाय](https://bhaktisatsang.com/astrological-remedies-for-growth-in-business/) - व्यवसाय में वृद्धि के लिए जबरदस्त ज्योतिष उपाय आज Business में growth के कुछ ज्योतिषीय उपायों के बारे में जानेंगे, उम्मीद है आप जरूर इन उपायों को जानकर और जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल में लाकर अपना Business सफल बनायेंगे। आपको या आपके किसी परिचित या फिर किसी relative को उनकी अपनी shop या firm या - [कर्मयोग - Karma Yoga - गीता अध्याय -3](https://bhaktisatsang.com/geeta-adhyaay-3/) - गीता अध्याय -3 कर्मयोग - Karma Yoga ज्ञानयोग और कर्मयोग के अनुसार अनासक्त भाव से नियत कर्म करने की श्रेष्ठता का निरूपण: अर्जुन उवाचज्यायसी चेत्कर्मणस्ते मता बुद्धिर्जनार्दन । तत्किं कर्मणि घोरे मां नियोजयसि केशव ॥ भावार्थ : अर्जुन बोले- हे जनार्दन! यदि आपको कर्म की अपेक्षा ज्ञान श्रेष्ठ मान्य है तो फिर हे केशव! मुझे भयंकर - [ज्ञान कर्म संन्यास योग - Gyanakarma Sanyas Yoga - गीता अध्याय -4](https://bhaktisatsang.com/geeta-adhyaay-4/) - गीता अध्याय -4 ज्ञान कर्म संन्यास योग - Gyanakarma Sanyas Yoga सगुण भगवान का प्रभाव और कर्मयोग का विषय: श्री भगवानुवाच इमं विवस्वते योगं प्रोक्तवानहमव्ययम्‌ । विवस्वान्मनवे प्राह मनुरिक्ष्वाकवेऽब्रवीत्‌ ॥ भावार्थ : श्री भगवान बोले- मैंने इस अविनाशी योग को सूर्य से कहा था, सूर्य ने अपने पुत्र वैवस्वत मनु से कहा और मनु ने अपने - [वाल्मीकि - Valmiki ji Biography](https://bhaktisatsang.com/about-valmiki-rishi/) - वाल्मीकि - Valmiki ji Biography शिवपुराण में कहा गया है कि दयालु मनुष्य, अभिमानशून्य व्यक्ति, परोपकारी और जितेंद्रीय ये चार पवित्र स्तंभ हैं, जो इस पृथ्वी को धारण किए हुए हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि ये चारों गुण एक साथ मर्यादा पुरुषोत्तम राम के चरित्र में समाहित होकर पृथ्वी की धारण शक्ति बन गए - [तुलसीदास जी - Tulsidas Ji Ka Jeevan Parichay](https://bhaktisatsang.com/tulsidas-ji-ka-jeevan-parichay-biography/) - तुलसीदासजी - Tulsidas Ji Ka Jeevan Parichay प्रयाग के पास बाँदा जिले में राणापुर नामक एक ग्राम है। वहाँ आत्माराम दुबे नाम के एक प्रतिष्ठित सरयूपारीण ब्राह्मण रहते थे। उनकी धर्मपत्नी का नाम हुलसी था। संवत्‌ 1554 की श्रावण शुक्ल सप्तमी के दिन अभुक्त मूल नक्षत्र में इन्हीं भाग्यवान दम्पति के यहाँ बारह महीने तक - [कर्म संन्यास योग - Karma Sanyas Yoga - गीता अध्याय -5](https://bhaktisatsang.com/geeta-adhyaay-5/) - गीता अध्याय -5 कर्म संन्यास योग - Karma Sanyas Yoga सांख्ययोग और कर्मयोग का निर्णय: अर्जुन उवाच सन्न्यासं कर्मणां कृष्ण पुनर्योगं च शंससि । यच्छ्रेय एतयोरेकं तन्मे ब्रूहि सुनिश्चितम्‌ ॥ भावार्थ : अर्जुन बोले- हे कृष्ण! आप कर्मों के संन्यास की और फिर कर्मयोग की प्रशंसा करते हैं। इसलिए इन दोनों में से जो एक मेरे - [आत्मसंयमयोग - Atmasanyam Yoga - गीता अध्याय -6](https://bhaktisatsang.com/geeta-adhyaay-6/) - गीता अध्याय -6 आत्मसंयमयोग - Atmasanyam Yoga कर्मयोग का विषय और योगारूढ़ पुरुष के लक्षण: श्रीभगवानुवाच अनाश्रितः कर्मफलं कार्यं कर्म करोति यः । स सन्न्यासी च योगी च न निरग्निर्न चाक्रियः ॥ भावार्थ : श्री भगवान बोले- जो पुरुष कर्मफल का आश्रय न लेकर करने योग्य कर्म करता है, वह संन्यासी तथा योगी है और केवल - [ज्ञान विज्ञान योग - Gyan Vigyan Yoga - गीता अध्याय -7](https://bhaktisatsang.com/geeta-adhyaay-7/) - गीता अध्याय -7 ज्ञान विज्ञान योग - Gyan Vigyan Yoga श्रीभगवानुवाच मय्यासक्तमनाः पार्थ योगं युञ्जन्मदाश्रयः । असंशयं समग्रं मां यथा ज्ञास्यसि तच्छृणु ॥ भावार्थ : श्री भगवान बोले- हे पार्थ! अनन्य प्रेम से मुझमें आसक्त चित तथा अनन्य भाव से मेरे परायण होकर योग में लगा हुआ तू जिस प्रकार से सम्पूर्ण विभूति, बल, ऐश्वर्यादि गुणों - [गीता अध्याय -8](https://bhaktisatsang.com/geeta-adhyaay-8/) - गीता अध्याय -8 अक्षरब्रह्मयोग - अर्जुन उवाच किं तद्ब्रह्म किमध्यात्मं किं पुरुषोत्तम । अधिभूतं च किं प्रोक्तमधिदैवं किमुच्यते ॥ भावार्थ : अर्जुन ने कहा- हे पुरुषोत्तम! वह ब्रह्म क्या है? अध्यात्म क्या है? कर्म क्या है? अधिभूत नाम से क्या कहा गया है और अधिदैव किसको कहते हैं॥1॥ अधियज्ञः कथं कोऽत्र देहेऽस्मिन्मधुसूदन । प्रयाणकाले च कथं - [राजविद्या राजगुह्य योग - Rajvidya Rajgruha Yoga - गीता अध्याय -9](https://bhaktisatsang.com/geeta-adhyaay-9/) - गीता अध्याय -9 राजविद्या राजगुह्य योग - Rajvidya Rajgruha Yoga श्रीभगवानुवाच इदं तु ते गुह्यतमं प्रवक्ष्याम्यनसूयवे । ज्ञानं विज्ञानसहितं यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात्‌ ॥ भावार्थ : श्री भगवान बोले- तुझ दोषदृष्टिरहित भक्त के लिए इस परम गोपनीय विज्ञान सहित ज्ञान को पुनः भली भाँति कहूँगा, जिसको जानकर तू दुःखरूप संसार से मुक्त हो जाएगा॥1॥ राजविद्या राजगुह्यं पवित्रमिदमुत्तमम्‌ । - [विभूति योग - Vibhuti Yoga - गीता अध्याय -10](https://bhaktisatsang.com/geeta-adhyaay-10/) - गीता अध्याय -10 विभूति योग - Vibhuti Yoga श्रीभगवानुवाच भूय एव महाबाहो श्रृणु मे परमं वचः । यत्तेऽहं प्रीयमाणाय वक्ष्यामि हितकाम्यया ॥ भावार्थ : श्री भगवान्‌ बोले- हे महाबाहो! फिर भी मेरे परम रहस्य और प्रभावयुक्त वचन को सुन, जिसे मैं तुझे अतिशय प्रेम रखने वाले के लिए हित की इच्छा से कहूँगा॥1॥ न मे विदुः - [विश्वरूप दर्शन योग - Vishwa Roop Darshan Yoga - गीता अध्याय -11](https://bhaktisatsang.com/geeta-adhyaay-11/) - गीता अध्याय -11 विश्वरूप दर्शन योग - Vishwa Roop Darshan Yoga अर्जुन उवाच मदनुग्रहाय परमं गुह्यमध्यात्मसञ्ज्ञितम्‌ । यत्त्वयोक्तं वचस्तेन मोहोऽयं विगतो मम ॥ भावार्थ : अर्जुन बोले- मुझ पर अनुग्रह करने के लिए आपने जो परम गोपनीय अध्यात्म विषयक वचन अर्थात उपदेश कहा, उससे मेरा यह अज्ञान नष्ट हो गया है॥1॥ भवाप्ययौ हि भूतानां श्रुतौ विस्तरशो - [क्षेत्र क्षेत्रजना विभाग योग - Kshetra Kshetrajan Vibhag Yoga - अध्याय -13](https://bhaktisatsang.com/geeta-adhyaay-13/) - गीता अध्याय -13 क्षेत्र क्षेत्रजना विभाग योग - Kshetra Kshetrajan Vibhag Yoga ज्ञानसहित क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ का विषय - श्रीभगवानुवाच इदं शरीरं कौन्तेय क्षेत्रमित्यभिधीयते। एतद्यो वेत्ति तं प्राहुः क्षेत्रज्ञ इति तद्विदः॥ भावार्थ : श्री भगवान बोले- हे अर्जुन! यह शरीर 'क्षेत्र' (जैसे खेत में बोए हुए बीजों का उनके अनुरूप फल समय पर प्रकट होता है, वैसे ही - [गुणत्रय विभाग योग - Gunatray Vibhag Yoga - गीता अध्याय -14](https://bhaktisatsang.com/geeta-adhyaay-14/) - गीता अध्याय -14 गुणत्रय विभाग योग - Gunatray Vibhag Yoga ज्ञान की महिमा और प्रकृति-पुरुष से जगत्‌ की उत्पत्ति: श्रीभगवानुवाच परं भूयः प्रवक्ष्यामि ज्ञानानं मानमुत्तमम्‌ । यज्ज्ञात्वा मुनयः सर्वे परां सिद्धिमितो गताः ॥ भावार्थ : श्री भगवान बोले- ज्ञानों में भी अतिउत्तम उस परम ज्ञान को मैं फिर कहूँगा, जिसको जानकर सब मुनिजन इस संसार से - [पुरुषोत्तमयोग - Purushottma Yoga - गीता अध्याय -15](https://bhaktisatsang.com/geeta-adhyaay-15/) - गीता अध्याय -15 पुरुषोत्तमयोग - Purushottma Yoga संसार वृक्ष का कथन और भगवत्प्राप्ति का उपाय : श्रीभगवानुवाच ऊर्ध्वमूलमधः शाखमश्वत्थं प्राहुरव्ययम्‌ । छन्दांसि यस्य पर्णानि यस्तं वेद स वेदवित्‌ ॥ भावार्थ : श्री भगवान बोले- आदिपुरुष परमेश्वर रूप मूल वाले (आदिपुरुष नारायण वासुदेव भगवान ही नित्य और अनन्त तथा सबके आधार होने के कारण और सबसे ऊपर - [दैवासुर सम्पद विभाग योग - Daivasur Sampad Vibhag Yoga - गीता अध्याय -16](https://bhaktisatsang.com/geeta-adhyaay-16/) - गीता अध्याय -16 दैवासुर सम्पद विभाग योग - Daivasur Sampad Vibhag Yoga फलसहित दैवी और आसुरी संपदा का कथन: श्रीभगवानुवाच अभयं सत्त्वसंशुद्धिर्ज्ञानयोगव्यवस्थितिः। दानं दमश्च यज्ञश्च स्वाध्यायस्तप आर्जवम्‌॥ भावार्थ : श्री भगवान बोले- भय का सर्वथा अभाव, अन्तःकरण की पूर्ण निर्मलता, तत्त्वज्ञान के लिए ध्यान योग में निरन्तर दृढ़ स्थिति (परमात्मा के स्वरूप को तत्त्व से जानने - [श्रद्धात्रय विभाग योग - Shradhatray Vibhag Yoga- गीता अध्याय -17](https://bhaktisatsang.com/geeta-adhyaay-17/) - गीता अध्याय -17 श्रद्धात्रय विभाग योग - Shradhatray Vibhag Yoga श्रद्धा का और शास्त्रविपरीत घोर तप करने वालों का विषय : अर्जुन उवाच ये शास्त्रविधिमुत्सृज्य यजन्ते श्रद्धयान्विताः। तेषां निष्ठा तु का कृष्ण सत्त्वमाहो रजस्तमः॥ भावार्थ : अर्जुन बोले- हे कृष्ण! जो मनुष्य शास्त्र विधि को त्यागकर श्रद्धा से युक्त हुए देवादिका पूजन करते हैं, उनकी स्थिति - [मोक्ष संन्यास योग - Moksha Sanyas Yoga - गीता अध्याय -18](https://bhaktisatsang.com/geeta-adhyaay-18/) - गीता अध्याय मोक्ष संन्यास योग - Moksha Sanyas Yoga त्याग का विषय: अर्जुन उवाच सन्न्यासस्य महाबाहो तत्त्वमिच्छामि वेदितुम्‌ । त्यागस्य च हृषीकेश पृथक्केशिनिषूदन ॥ भावार्थ : अर्जुन बोले- हे महाबाहो! हे अन्तर्यामिन्‌! हे वासुदेव! मैं संन्यास और त्याग के तत्व को पृथक्‌-पृथक्‌ जानना चाहता हूँ॥1॥ श्रीभगवानुवाच काम्यानां कर्मणा न्यासं सन्न्यासं कवयो विदुः । सर्वकर्मफलत्यागं प्राहुस्त्यागं - [साल में 5 घंटे खुलने वाला अद्भुत निराई माता का मंदिर](https://bhaktisatsang.com/nirai-mata-temple/) - निराई माता - Nirai Mata Temple देवी-देवता के मंदिर भारत के कोने-कोने पर स्थित है। हर मंदिर का अपना कोई न कोई रहस्य होता है। जिसके कारण वह विश्व प्रसिद्ध होते है। कोई अपने कामों के कारण भी हो सकता है। आज हम आपको ऐसे मंदिर के बारें में बता रहे है जो अपने आप - [लाल किताब के ज्योतिष उपाय से करे शनि देव को प्रसन्न](https://bhaktisatsang.com/how-to-please-lord-shani/) - लाल किताब और शनि धार्मिक मान्यता के अनुसार शनिवार (शनिवार व्रत कथा) को कुछ विशेष उपाय करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों का कल्याण करते हैं। मान्यता के अनुसार, मनुष्य को उसके अच्छे-बुरे कामों का फल शनिदेव ही देते हैं, इसलिए अच्छे काम करने के साथ ही शनिदेव को प्रसन्न रखना भी आवश्यक - [लाल किताब के इन उपायो से शत प्रतिशत भूत व प्रेतबाधा से मुक्ति मिलेगी](https://bhaktisatsang.com/bhoot-pret-badha-totke-upay-hindi/) - लाल किताब के इन उपायो से शत प्रतिशत भूत व प्रेतबाधा से मुक्ति मिलेगी में भूतों से बचने के अनेक उपाय बताए गए हैं। चरक संहिता में प्रेत बाधा से पीड़ित रोगी के लक्षण और निदान के उपाय विस्तार से मिलते हैं।ज्योतिष साहित्य के मूल ग्रंथों- प्रश्नमार्ग, वृहत्पराषर, होरा सार, फलदीपिका, मानसागरी आदि में ज्योतिषीय - [जानिए श्री कृष्ण कौनसी 64 अद्भुत कलाओं में पारगंत थे](https://bhaktisatsang.com/krishna-wonderful-arts/) - जानिए श्री कृष्ण कौनसी अद्भुत कलाओं में पारगंत थे श्री कृष्ण अपनी शिक्षा ग्रहण करने आवंतिपुर (उज्जैन) गुरु सांदीपनि के आश्रम में गए थे जहाँ वो मात्र 64 दिन रह थे। वहां पर उन्होंने ने मात्र 64 दिनों में ही अपने गुरु से 64 कलाओं की शिक्षा हासिल कर ली थी। हालांकि श्री कृष्ण भगवान के अवतार थे - [ब्रहम मुहूर्त में उठने के फायदे](https://bhaktisatsang.com/the-advantages-of-gatup-early-morning/) - ब्रहम मुहूर्त में उठने के फायदे रात्रि के अंतिम प्रहर के तत्कालबाद का समय को ब्रह्म मुहूर्त कहते हैं। हमारे ऋषि मुनियों ने इस मुहूर्त का विशेष महत्व बताया है। उनके अनुसार यह समय निद्रा त्याग के लिए सर्वोत्तम है। ब्रह्म मुहूर्त में उठने से सौंदर्य, बल, विद्या, बुद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। - [जानिये आपकी कुंडली में नौकरी के योग](https://bhaktisatsang.com/learn-yoga-job-in-your-horoscope/) - जानिये आपकी कुंडली में नौकरी के योग ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों और उनके योगो के आधार पर ही आपके कार्यो के फलो का ज्ञान मिलता है. इनमे से कुछ ग्रह ऐसे होते है जो अशुभ ग्रह बनाते है और आपका सुख चैन चुरा लेते है लेकिन कुछ ग्रह ऐसे भी होते है जो आपके जीवन - [जानिये आपके पुनर्जन्म में किये गए कार्यो और पुनर्जन्म के संकेत](https://bhaktisatsang.com/the-work-in-your-afterlife/) - जानिये आपके पुनर्जन्म में किये गए कार्यो और पुनर्जन्म के संकेत rebirth से अर्थ उस जन्म से है जो आपको आपके इस जन्म से पहले मिला था और कहा जाता है कि हमे इस जन्म में जो भी सुख या दुःख मिलता है उसका आधार हमारा पूर्व जन्म और पूर्व जन्म में किये हुए हमारे - [जाने ईश्वर और जीवात्मा का सम्बन्ध](https://bhaktisatsang.com/relation-between-soul-god/) - जाने ईश्वर और जीवात्मा का सम्बन्ध हम अनुभव करते हैं कि यह विषय मनुष्यों के विचार करने व जानने हेतु उत्तम विषय है। यह तो हम जानते ही हैं कि ईश्वर इस सृष्टि का कर्ता व रचयिता है व इसका तथा प्राणी जगत का पालन करता है। यह भी जानते हैं कि जब इस सृष्टि - [भगवान् श्री कृष्ण के 51 नाम और उन के अर्थ](https://bhaktisatsang.com/lord-krishna-51-names/) - भगवान् श्री कृष्ण के 51 नाम और उन के अर्थ *1 कृष्ण* : सब को अपनी ओर आकर्षित करने वाला.। *2 गिरिधर* : गिरी: पर्वत ,धर: धारण करने वाला। अर्थात गोवर्धन पर्वत को उठाने वाले। *3 मुरलीधर* : मुरली को धारण करने वाले। *4 पीताम्बर धारी* : पीत :पिला, अम्बर:वस्त्र। जिस ने पिले वस्त्रों को - [कैसे जाने की आप आध्यात्मिक व्यक्ति है](https://bhaktisatsang.com/know-about-your-spirituality/) - कैसे जाने की आप आध्यात्मिक व्यक्ति है आध्यात्मिकता अनादिकाल से भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रही है। लेकिन समय के साथ इस शब्द का गलत इस्तेमाल बढ़ता चला गया।आजकल दुनिया में अधिकतर लोगों को, विशेषकर युवावर्ग को, आध्यात्मिकता के नाम से एक तरह की एलर्जी हो गई है। इसका कारण यह है कि आध्यात्मिकता को - [जाने क्या है मनुष्य जीवन का रहस्य](https://bhaktisatsang.com/the-secrate-of-human-life/) - मनुष्य जीवन का रहस्य भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं... मम योनिर्महद्ब्रह्म तस्मिन्गर्भं दधाम्यहम्‌ । सम्भवः सर्वभूतानां ततो भवति भारत ॥ (गीता १४/३) मेरी यह आठ तत्वों वाली जड़ प्रकृति (जल, अग्नि, वायु, पृथ्वी, आकाश, मन, बुद्धि और अहंकार) ही समस्त वस्तुओं को उत्पन्न करने वाली माता है और मैं ही ब्रह्म रूप में चेतन-रूपी बीज को - [गुरु : साक्षात एक परमात्मा](https://bhaktisatsang.com/guru-ek-pramatama/) - गुरु साक्षात परम भाह्मा प्रश्नकर्ता - भगवान श्री, आशीर्वाद क्या है? और गुरु जब शिष्य के सिर पर हाथ धरता है, तब क्या प्रेषित करता है? और क्या आशीर्वाद लेने की भी क्षमता होती है? आशीर्वाद गुरु तो अकारण देता है, बेशर्त देता है; लेकिन तुम ले पाओगे या न ले पाओगे, यह तुम पर निर्भर है। - [8 लक्षण जो देते है आपकी मृत्यु का संकेत](https://bhaktisatsang.com/8-signs-which-give-an-indication-of-your-death/) - 8 लक्षण जो देते है आपकी मृत्यु का संकेत मृत्यु एक अटल सत्य है जिसका सामना हर इंसान को करना पड़ता है। पर मृत्यु होती क्या है? यह प्रश्न मनुष्य के लिए हमेशा से एक पहेली बना हुआ है। विज्ञान व धर्म दोनों इसके बारे में अलग-अलग राय रखते है। पौराणिक व धार्मिक ग्रंथों का - [क्या आपका व्यक्तित्व पिछले जन्म से प्रभावित तो नही ?](https://bhaktisatsang.com/your-personality-not-so-affected-by-past-life/) - क्या आपका व्यक्तित्व पिछले जन्म से प्रभावित तो नही ? 1. मन के आध्यात्मिक पहलू की प्रस्तावना एक ही परिस्थिति में अलग लोग अलग वर्त्तन क्यों करते हैं, इसे समझने में व्यक्ति के मन का आध्यात्मिक पक्ष एक महत्वपूर्ण पहलू है । किसी परिस्थिति में व्यक्ति कैसे वर्त्तन करेगा, कभी-कभी यह उसके स्वभाव से विपरीत - [पूर्वजन्म का सिद्धांत](https://bhaktisatsang.com/prenatal-theory/) - पूर्वजन्म का सिद्धांत पिछले जन्म में आप क्या थे? क्या वाकई आप जानना चाहते हैं? क्या आप पुनर्जन्म के सिद्धांत को मानते हैं? पिछला या पुनर्जन्म होता है या नहीं? यह सवाल प्रत्येक व्यक्ति के मन में होगा। हो सकता है कि कुछ लोग मानकर ही बैठ गए हैं कि हां होता है और कुछ - [योग से जाने अपने पिछले जन्म का राज़](https://bhaktisatsang.com/the-secret-of-his-past-life-with-yoga/) - योग से जाने अपने पिछले जन्म का राज़ हमारा संपूर्ण जीवन स्मृति-विस्मृति के चक्र में फंसा रहता है। उम्र के साथ स्मृति का घटना शुरू होता है, जोकि एक प्राकृति प्रक्रिया है, अगले जन्म की तैयारी के लिए। यदि मोह-माया या राग-द्वेष ज्यादा है तो समझों स्मृतियां भी मजबूत हो सकती है। व्यक्ति स्मृति मुक्त - [33 करोड़ देवी-देवता : जाने हिन्दू धर्म में ३३ करोड़ देवताओ को मानने का गूढ़ रहस्य](https://bhaktisatsang.com/33-crore-gods-secret/) - हिन्दू धर्म में ३३ करोड़ देवताओ को मानने का गूढ़ रहस्य हिन्दू धर्म सागर की तरह विशाल है. इसकी विशालता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हिन्दू धर्म में कुल देवी देवताओं की संख्या ३३ करोड़ बताई जाती है. सुनने में कुछ अजीब नहीं लगता? क्या ये संभव है कि किसी धर्म - [जाने दक्ष प्रजापति की पुत्रियों और उनके पतियों के बारे में](https://bhaktisatsang.com/daughters-of-daksha-prajapati/) - दक्ष प्रजापति की पुत्रियां और उनके पति पुराणों के अनुसार दक्ष प्रजापति परमपिता ब्रम्हा के पुत्र थे जो उनके दाहिने पैर के अंगूठे से उत्पन्न हुए थे. प्रजापति दक्ष की दो पत्नियाँ थी - प्रसूति और वीरणी. प्रसूति से दक्ष की चौबीस कन्याएँ थीं और वीरणी से साठ कन्याएँ. उन सभी का वर्णन - [जानिये ज्योतिष शास्त्र : पार्ट -1](https://bhaktisatsang.com/learn-astrology-part-1/) - जानिये ज्योतिष शास्त्र : पार्ट -1 लोकानामन्तकृत्कालः कालोन्यः कल्नात्मकः | स द्विधा स्थूल सुक्ष्मत्वान्मूर्त श्चामूर्त उच्यते || अर्थात :- एक प्रकार का काल संसार का नाश करता है और दूसरे प्रकार का कलानात्मक है अर्थात जाना जा सकता है | यह भी दो प्रकार का होता है (१) स्थूल और (२) सूक्ष्म | स्थूल नापा जा सकता है इसलिए - [जानिये ज्योतिष शास्त्र : पार्ट -2](https://bhaktisatsang.com/learn-astrology-part-2/) - जानिये ज्योतिष शास्त्र : पार्ट -2 योजनानि शतान्यष्टो भूकर्णों द्विगुणानि तु |तद्वर्गतो दशगुणात्पदे भूपरिधिर्भवते || अर्थात पृथ्वी का व्यास ८०० के दूने १६०० योजन है, इसके वर्ग का १० गुना करके गुणनफल का वर्गमूल निकालने से जो आता है, वह पृथ्वी कि परिधि है | इस श्लोक को विस्तार से आगे चर्चा करेंगे किन्तु इस - [जानिये ज्योतिष शास्त्र : पार्ट-3](https://bhaktisatsang.com/learn-astrology-part-3/) - जानिये ज्योतिष शास्त्र : पार्ट-3 अब हम थोडा और आगे बढ़ेंगे | जैसे जैसे हम आगे बढ़ते हैं, वैसे वैसे हमारा वास्ता पंचांग और कैलेंडर से पड़ता जायेगा | अतः हमें पंचांग के भी कुछ अंगों से प्रत्यक्ष होना पड़ेगा | पंचांग में तिथि, वार, नक्षत्र, योग तथा करण, ये पांच अंग होते हैं इसीलिए - [कृष्ण (नारायण) और अर्जुन (नर) की प्रगाढ़ मित्रता](https://bhaktisatsang.com/nar-narayan-friendship-story/) - कृष्ण (नारायण) और अर्जुन (नर) की प्रगाढ़ मित्रता महाभारत कथा के सन्दर्भ में – कृष्ण और अर्जुन, नर और नारायण हैं। अर्जुन नर, और कृष्ण नारायण हैं। अर्जुन से मित्रता बनाए रखने के लिए कृष्ण ने हद से ज्यादा प्रयत्न किये, क्योंकि वे अस्तित्व के स्तर पर एक दूसरे से जुड़े थे। बहुत सी बार, - [जाने क्यों भगवान् कृष्ण ने अर्जुन को युद्ध के लिए प्रेरित किया](https://bhaktisatsang.com/why-go-to-war-has-led-lord-krishna-to-arjuna/) - जाने क्यों भगवान् कृष्ण ने अर्जुन को युद्ध के लिए प्रेरित किया गीता में कृष्ण ने अर्जुन को युद्ध के लिए प्रेरित किया जिसको लेकर अकसर लोगों के मन में सवाल उठते हैं कि क्या कृष्ण युद्ध चाहते थे? क्या युद्ध उचित है? कृष्ण ने अर्जुन को युद्ध लड़ने को कहा – क्या था कारण? - [जाने लाल किताब अनुसार पूर्वजन्म के ऋण और उनके उपाय](https://bhaktisatsang.com/purvajanm-ke-rin-karz-hindi/) - जाने लाल किताब अनुसार पूर्वजन्म के ऋण और उनके उपाय अपने पूर्वजों के लिए पापों का फल जब उनकी वंशावली में से किसी एक जातक को भोगना पडे़, तो वह पितृ ऋण कहलाता है। पितृ ऋण अर्थात् पितरों (पूर्वजों) का ऋण । पिता ऋण लेता है, पुत्र चुकाता है। यही परम्परा है। लाल किताब ने इसे - [प्रेम क्या है - बंधन या मुक्ति ? - What is Love - A Bond or Liberation](https://bhaktisatsang.com/what-is-true-love/) - प्रेम क्या है - बंधन या मुक्ति ? - What is Love - A Bond or Liberation प्रेम क्या है? किसी को पाना या खुद को खो देना? एक बंधन या फिर मुक्ति? जीवन या फिर जहर? इसके बारे में सबकी अपनी अपनी राय हो सकती हैं,लेकिन वास्तव में प्रेम क्या है – आइए जानते - [श्रीयंत्र : रातोरात कुबेरपति बनने का साधन](https://bhaktisatsang.com/shree-yantra-mantra/) - श्रीयंत्र : रातोरात कुबेरपति बनने का साधन श्रीयंत्र सर्वोपरि क्यों? श्रीयंत्र को सभी यंत्रो का राजा कहा गया है। इस संदर्भ में एक पौराणिक कथा इस प्रकार है- एक बार lakshmi ji पृथ्वी से नाराज होकर वैकुंठ चल गई। लक्ष्मीजी की अनुपस्थिति में पृथ्वी पर अनेक प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो गई। lord Vishnu के बहुत मनाने - [जनेऊ धारण करने के वैज्ञानिक लाभ](https://bhaktisatsang.com/janeu-dharan-karne-ke-vegyanic-labh/) - जनेऊ धारण करने के वैज्ञानिक लाभ hindu religion जनेऊ (यज्ञोपवीत) धारण करना पवित्र मन जाता है । इसके धारण करने के बाद ही द्विज बालक को यज्ञ तथा स्वाध्याय करने का अधिकार मिलता है। hindu dharm में यज्ञोपवीत धारण करने का एक वैज्ञानिक कारण भी है। शरीर के पिछले भाग में पीठ पर से जाने वाली एक कुदरती रेखा है जो - [जाने तिलक लगाने के आध्यात्मिक और वैज्ञानिक चमत्कार](https://bhaktisatsang.com/tilak-kyu-lagate-hai/) - जाने तिलक लगाने के आध्यात्मिक और वैज्ञानिक चमत्कार हिन्दू आध्यात्मिक की असली पहचान तिलक से होती है। मान्यता है कि तिलक लगाने से समाज में मस्तिष्क हमेशा गर्व से ऊंचा होता है। indians culture में किसी भी शुभ कार्य में “तिलक या टीका” लगाने का विधान हैं। यह तिलक कई वस्तुओ और पदार्थों से लगाया जाता - [जानिये सात्विक और तामसिक भोजन के प्रभाव को](https://bhaktisatsang.com/satvic-or-tamsic-bhojan/) - सात्विक और तामसिक भोजन के प्रभाव एक कहावत है- ‘‘जैसा खाए अन्न, वैसा बने मन’’। hindu dharm में परान्न ग्रहण को निषिद्ध कहा गया है, परान्न का अभिप्राय इस प्रकार है- hindu traditions की दृष्टि से स्वयं, स्वपत्नी एवं स्वमाता के अलावा अन्य लोगों द्वारा पकाया हुआ अन्न परान्न होता है। परान्न निषेध का मुख्य उदेश्य यह है कि - [शास्त्रानुसार इन क्रियाओं को करने से शुभ रहेगा हर दिन](https://bhaktisatsang.com/jaldi-uthne-ke-fayde/) - शास्त्रानुसार इन क्रियाओं को करने से शुभ रहेगा हर दिन प्रातः इष्ट स्मरण क्यों ? दिन की शुरूआत mental peace और मांगलिक घटनाओं के साथ हो, इसलिए hindu dharm में प्रातः इष्ट स्मरण का विधान किया हैं। जिस प्रकार चित्र के पीछे चरित्र छिपा रहता है, उसी प्रकार नाम के साथ रूप और उससे संबंधित सद्गुणों की समूची - [जाने अपनी सनातन संस्कृति को](https://bhaktisatsang.com/facts-about-sanatan-dharm-or-sanskriti/) - जाने अपनी सनातन संस्कृति को दो पक्ष - कृष्ण पक्ष एवं शुक्ल पक्ष ! तीन ऋण - देव ऋण, पित्र ऋण एवं ऋषि ऋण ! चार अकृतक लोक - महर्लोक, जनलोक, तपलोक, सत्यलोक चार युग - सतयुग , त्रेता युग , द्वापरयुग एवं कलयुग ! चार धाम - द्वारिकाधीश धाम , बद्रीनाथ धाम, जगन्नाथ पूरी धाम एवं रामेश्वरम धाम ! चारपीठ - शारदा पीठ ( द्वारिका ), ज्योतिष पीठ ( जोशीमठ - [जाने हिन्दू धर्म की मान्यताये और वैज्ञानिक तर्क](https://bhaktisatsang.com/facts-hindu-religion-beliefs/) - hindu religion beliefs | hinduism information | hindu spirituality | indians culture एक गोत्र में शादी क्यूँ नहीं वैज्ञानिक कारण :एक दिन डिस्कवरी पर जेनेटिक बीमारियों से सम्बन्धित एक ज्ञानवर्धक कार्यक्रम था उस प्रोग्राम में एक अमेरिकी वैज्ञानिक ने कहा की जेनेटिक बीमारी न हो इसका एक ही इलाज है और वो है "सेपरेशन ऑफ़ जींस" मतलब अपने नजदीकी रिश्तेदारो में - [जाने भारत के महान ऋषि मुनियों की महत्ता](https://bhaktisatsang.com/indian-saint-sage-rishi-muni/) - information on hindu religion | hindu spirituality | hindu dharm | ved | puran | upnishad अंगिरा ऋग्वेद ( ved ) के प्रसिद्ध ऋषि अंगिरा ब्रह्मा के पुत्र थे। उनके पुत्र बृहस्पति देवताओं के गुरु थे। ऋग्वेद के अनुसार, ऋषि अंगिरा ने सर्वप्रथम अग्नि उत्पन्न की थी। विश्वामित्र gaytri mantra का ज्ञान देने वाले विश्वामित्र वेदमंत्रों के सर्वप्रथम द्रष्टा माने जाते हैं। आयुर्वेदाचार्य सुश्रुत इनके पुत्र थे। विश्वामित्र - [हिंदू विवाह के सात फेरे और सात वचन](https://bhaktisatsang.com/hindu-marriage/) - हिंदू विवाह में सात फेरे और सात वचन hindu dharm के अनुसार सोलह संस्कारों को जीवन के सबसे महत्त्वपूर्ण संस्कार माने जाते हैं। hindu marriage उन्हीं में से एक है जिसके बिना मानव जीवन पूर्ण नहीं हो सकता। hindu religion में विवाह संस्कार को सोलह संस्कारों में से एक संस्कार माना गया है। शाब्दिक अर्थ विवाह = वि + वाह, अत: इसका - [Indian Astrology के अनुसार जाने आपकी Education और career में सफलता के योग](https://bhaktisatsang.com/education-and-career-selection-according-to-indian-astrology/) - 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[विपरीत राजयोग बना सकता है आपको ऐश्वर्ययुक्त धनसंपदा का स्वामी](https://bhaktisatsang.com/veeprit-rajyog-hindi/) - विपरीत राजयोग बना सकता है आपको ऐश्वर्ययुक्त धनसंपदा का स्वामी गणित का नियम है ऋणात्मक ऋणात्मक मिलकर धनात्मक हो जाता हैं. इसी प्रकार का नियम ज्योतिषशास्त्र में भी है. ज्योतिषशास्त्र में जब दो अशुभ भावों एवं उनके स्वामियों के बीच सम्बन्ध बनता है. तो अशुभता शुभता में बदल जाती है. विपरीत राजयोग (Vipreet Rajyoga) - [ज्योतिष के अनुसार 9 आदतों से नवग्रहो का सम्मान कर सुधारें अपना जीवन](https://bhaktisatsang.com/navgrah-dosh-upchar-hindi-for-happy-life/) - ज्योतिष के अनुसार 9 आदतों से नवग्रहो का सम्मान कर सुधारें अपना जीवन अगर आपको कहीं पर भी थूकने की आदत है तो यह निश्चित है कि आपको यश, सम्मान अगर मुश्किल से मिल भी जाता है तो कभी टिकेगा ही नहीं . wash basin में ही यह काम कर आया करें ! यश,मान-सम्मान में - [गृह कलह : क्लेश निवारण हेतु सरल और आसन उपाय](https://bhaktisatsang.com/grah-kalesh-jhagde-niwaran-hindi/) - पति - पत्नी के बीच क्लेश के उपाय यदि पति-पत्नी के माध्य वाक् युद्ध होता रहता है तो दोनों पति-पत्नी को बुधवार के दिन दो घण्टे का मौन व्रत धारण करें। पति को चाहिए की शुक्रवार को अपनी पत्नी को सुन्दर सुगन्ध युक्त पुष्प एवं इत्र भेंट करें एवं चाँदी की कटोरी चम्मच से दही - [रत्न धारण करने की विधि](https://bhaktisatsang.com/ratna-dharan-karne-ki-vidhi/) - रत्न धारण करने की विधि - Ratna Dharan Karne ki Vidhi Opal Ratna Dharan Vidhi, Manik Ratna Dharan Vidhi, Nilam Ratna Dharan Vidhi, Moti Ratna Dharan Vidhi in Hindi : किसी भी रत्न को अंगूठी में जड़वाते समय इन महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए। जिस अंगूठी में आप रत्न को जड़वाना चाहते हैं,उसका नीचे का - [कुंडली में पितृ दोष हो तो घर और परिवार पर कैसा रहेगा असर](https://bhaktisatsang.com/pitra-dosh-upay-kundali-hindi/) - कुंडली में पितृ दोष हो तो घर और परिवार पर कैसा रहेगा असर आइये, पहले लक्षणों को देखते है उसके उपरांत उपायों को जानेंगे । घर में पितृ दोष होगा तो घर के बच्चे की शिक्षा , दिमाग , बाल , व्यवहार पर अच्छा प्रभाव नहीं पड़ता । जिन जातकों को पितृ दोष होता है उनके - [यमुनोत्री धाम यात्रा - Yamunotri Dham Yatra](https://bhaktisatsang.com/chardham-yamunotri-dham-yatra-hindi/) - यमुनोत्री - Yamunotri यमुनोत्री चार धामों मे से एक प्रमुख धाम है. यमुनोत्री हिमालय के पश्चिम में ऊँचाई पर स्थित है. यमुनोत्री को सूर्यपुत्री के नाम से भी जाना जाता है. और यमुनोत्री से कुछ किलोमीटर की दूरी पर कालिंदी पर्वत स्थित है. जो अधिक ऊँचाई पर होने के कारण दुर्गम स्थल भी है. यही - [ज्योतिष अनुसार उत्तम यौन सुख के लक्षण](https://bhaktisatsang.com/love-physical-relation-astrology/) - ज्योतिष अनुसार उत्तम यौन सुख के लक्षण ज्योतिष विज्ञान के अनुसार शुक्र ग्रह की अनुकूलता से व्यक्ति भौतिक सुख पाता है। जिनमें घर, वाहन सुख आदि समिल्लित है। इसके अलावा शुक्र यौन अंगों और वीर्य का कारक भी माना जाता है। शुक्र सुख, उपभोग, विलास और सुंदरता के प्रति आकर्षण पैदा करता है। विवाह के - [जानिए राशियों से जुड़े नौकरी और व्यवसाय](https://bhaktisatsang.com/job-business-jyotish-upay-hindi/) - जानिए राशियों से जुड़े नौकरी और व्यवसाय 1.मेष पुलिस अथवा सेना की नौकरी, इंजीनियरिंग, फौजदारी का वकील, सर्जन, ड्राइविंग, घड़ी का कार्य, रेडियो व टी.वी. का निर्माण या मरम्मत, विद्युत का सामान, कम्प्यूटर, जौहरी, अग्नि सम्बन्धी कार्य, मेकेनिक, ईंटों का भट्टा, किसी फैक्ट्री में कार्य, भवन निर्माण सामग्री, धातु व खनिज सम्बन्धी कार्य, नाई, दर्जी, - [कैसे करे भोजन द्वारा ग्रहो को अपने पक्ष में](https://bhaktisatsang.com/kese-kare-graho-ko-apne-paksh-me/) - कैसे करे भोजन द्वारा ग्रहो को अपने पक्ष में हम अपने आहार द्वारा भी ग्रहों को बल दे सकते हैं जैसे :- सूर्य अगर मजबूत हो तो हमें मान सम्मान, सुख समृध्धि मिलती है| १ पिता का संग और सहयोग मिलता है|१ अगरसूर्य कमजोर हो तो मुंह में थूक ज्यादा बनेगा, पिता से नहीं बनेगी, सरकार से परेशानी रहेगी| सूर्य को बल देने के लिए चौकर वालेआटे कि रोटी खाएं , फल अधिक खाएं निहार मुंहगुड़ खाकर ऊपर से पानी पियें| १ ग्वारठाका सेवन करें| चन्द्र: माँ से दूरी बन जाये, जातक वहमी हो जाये, हाथपैर शिथिल पड़ जाएँ| चेहरे पर दागधब्बे पड़ जाएँ, मन में उमंग ख़ुशी न रहे तो समझेंचंदरमा खराब है| चंद्रमा को ठीक करने के लिए दूध में हरी इलायची डालकर पियें१ खीर खाएं,केवडा डालकरचांदी के गिलास में पानी, दूध पियें लीची| मंगल: यह भी पढ़े : कैसे करे भोजन द्वारा ग्रहो को अपने पक्ष में बिना तोड़-फोड़ के वास्तु दोष दूर करने के उपाय जल्दी थकना, भाईबहन से झगड़ा, चोट ज्यादा लगे तो समझ लें मंगल ख़राब हैं १ पपीता, चुकंदर खाने सेमंगल मजबूत होता है - मीठी लस्सीपियें गुड़ डालकर मंगल मजबूत होगा १ लौकी, तौरी की सब्जी खाएं - बुध: - [भगवान शंकर के अवतार आदि शंकराचार्य](https://bhaktisatsang.com/adi-shakaracharya-motivational-hindi/) - भगवान शंकर के अवतार आदि शंकराचार्य पूरा नाम - आदि शंकराचार्य जन्म- 788 ई. जन्म भूमि- कालडी़ ग्राम, केरल मृत्यु- 820 ई. मृत्यु स्थान- केदारनाथ, उत्तराखण्ड गुरु- गोविन्द योगी कर्म भूमि- भारत कर्म-क्षेत्र- दार्शनिक, संत, संस्कृत साहित्यकार मुख्य रचनाएँ- उपनिषदों, श्रीमद्भगवद गीता एवं ब्रह्मसूत्र पर भाष्य लिखे हैं। विशेष योगदान- चार पीठों (मठ) की स्थापना करना इनका मुख्य रूप से उल्लेखनीय कार्य रहा, जो आज - [जानिए नक्षत्रो के अद्भुत संस्कार को](https://bhaktisatsang.com/जानिए-नक्षत्र-क्या-हैं-nakshtra-kya-hai/) - जानिए नक्षत्रो के अद्भुत संस्कार को नक्षत्र का सिद्धांत भारतीय वैदिक ज्योतिष में पाया जाता है। यह पद्धति संसार की अन्य प्रचलित ज्योतिष पद्धतियों से अधिक सटीक व अचूक मानी जाती है। आकाश में चन्द्रमा पृथ्वी के चारों ओर अपनी कक्षा पर चलता हुआ 27.3 दिन में पृथ्वी की एक परिक्रमा पूरी करता है। इस - [सामवेदोपनिषद - साम के भेदों और ॐ की उत्पत्ति का वर्णन करता उपनिषद](https://bhaktisatsang.com/samavedopanishad-in-hindi-pdf/) - सामवेद के उपनिषद छान्दोग्योपनिषद यह अत्यंत प्राचीन उपनिषद है। तलवकार शाखा के छान्दोग्य ब्रह्मण के अंतिम ८ अध्याय इस उपनिषद के रूप में प्रसिद्द है। यह विशालकाय प्राचीन गद्यात्मक उपनिषद है। इसमें सामविद्या का निरूपण है। साम और उद्नीथ की महत्ता का वर्णन करते हुए सामगान में कुशल आचार्यों की कथाएं दी गयी है। साम - [अत्यंत सरल ध्यान योग (मैडिटेशन) विधि - ध्यान लगाने की विधि](https://bhaktisatsang.com/dhyan-meditation-tips-hindi/) - मैडिटेशन- ध्यान योग - Meditation in Hindi मेडिटेशन (dhyan yog) का लक्ष्य एकाग्रता और मन की शान्ति को प्राप्त करना है, और इस प्रकार अंततः ध्यान योग अर्थात मैडिटेशन (mindfulness) का उद्देश्य आत्म-चेतना (Self-consciousness) और आंतरिक शांति (Internal peace) के एक ऊँचे स्तर पर ले जाना है। आपको जानके आश्चर्य होगा कि इस अत्यंत सरल ध्यान - [श्वेताश्वतरोपनिषद - जगत का मूल कारण और उत्पत्ति को दर्शाता उपनिषद](https://bhaktisatsang.com/svetasvataropanishad-in-hindi-pdf/) - कृष्ण यजुर्वेद शाखा के इस उपनिषद में छह अध्याय हैं। इनमें जगत का मूल कारण, ॐकार-साधना, परमात्मतत्त्व से साक्षात्कार, ध्यानयोग, योग-साधना, जगत की उत्पत्ति, संचालन और विलय का कारण, विद्या-अविद्या, जीव की नाना योनियों से मुक्ति के उपाय, ज्ञानयोग और परमात्मा की सर्वव्यापकता का वर्णन किया गया है। प्रथम अध्याय इस अध्याय में जगत के - [जीवन में ऐश्वर्य और सुख के लिए करे शुक्र के उपाय](https://bhaktisatsang.com/shukra-related-problem-solution-hindi/) - जीवन में ऐश्वर्य और सुख के लिए करे शुक्र के उपाय शुक्र को शुभ करने के उपाय : शुक्र की अशुभता दूर करने के लिए सामथ्र्य अनुसार रुई और दही को मंदिर मेंं दान करना चाहिए। स्त्रीजाति का कभी भी अपमान या निरादर नहीं करना चाहिए उन्हें सदैव आदर और सम्मान देने का प्रयास करना - [विवाह रेखा - Marriage Line Palmistry](https://bhaktisatsang.com/marriage-line-vivah-rekha-hindi/) - विवाह रेखा - Marriage Line on Palm Vivah Rekha in Hindi हर स्त्री या पुरुष के मन में यौवन आते ही प्रेम विवाह (Love Marriage) या विवाह कब होगा, विवाह किससे होगा जैसे प्रश्न आने लगते है पर हस्त रेखा ज्योतिष (Palm Reading Marriage lines) से ये पता चल सकता है की स्त्री के हाथ में - [जाने अपने इष्ट देवता और कुल देवता को जो करते है आपका उद्धार](https://bhaktisatsang.com/my-isht-devta-kul-devta-hindi/) - हाथी दांत की माला गणेशजी की साधना के लिए श्रेष्ठ मानी गई है। लाल चंदन की माला गणेशजी व देवी साधना के लिए उत्तम है। तुलसी की माला से वैष्णव मत की साधना होती है (विष्णु, राम व कृष्ण)। मूंगे की माला से लक्ष्मी जी की आराधना होती है। पुष्टि कर्म के लिए भी मूंगे - [बृहदारण्यकोपनिषद - प्रलय के बाद ‘सृष्टि की उत्पत्ति’ का वर्णन करता उपनिषद](https://bhaktisatsang.com/brihadaranyaka-upanishad-in-hindi-pdf/) - बृहदारण्यकोपनिषद - Brihadaranyaka Upanishad बृहदारण्यक उपनिषद (Brihadaranyaka Upanishad Pdf) शुक्ल यजुर्वेद की काण्व-शाखा के अन्तर्गत आता है। ‘बृहत’ (बड़ा) और ‘आरण्यक’ (वन) दो शब्दों के मेल से इसका यह ‘बृहदारण्यक’ नाम पड़ा है। इसमें छह अध्याय हैं और प्रत्येक अध्याय में अनेक ‘ब्राह्मण’ हैं। बृहदारण्यक उपनिषदों पर भर्तु प्रपंच ने भाष्य रचना की थी। प्रथम - [उपनिषद - वैदिक दर्शन के प्रतिपादक ग्रन्थ](https://bhaktisatsang.com/ved-upnishad-hindi-pdf-download/) - उपनिषद - Upanishad Pdf Upanishad Meaning : उपनिषद वैदिक दर्शन के प्रतिपादक ग्रन्थ हैं। वैदिक साहित्य में सबसे अंत में परिगणित होने के कारण तथा उच्च दार्शनिक चिंतन के कारण इन्हें वेदांत भी कहा जाता है। सम्प्रति उपलब्ध उपनिषद इस प्रकार हैं - "उप" तथा "नि" उपसर्ग के पश्चात् विशरण, गति एवं अवसादन अर्थों में - [जाने कोनसी विशेष माला से प्रसन्न होते है भगवान](https://bhaktisatsang.com/देवता-के-लिए-माला-konsi-mala-kam-me-le/) - हाथी दांत की माला गणेशजी की साधना के लिए श्रेष्ठ मानी गई है। लाल चंदन की माला गणेशजी व देवी साधना के लिए उत्तम है। तुलसी की माला से वैष्णव मत की साधना होती है (विष्णु, राम व कृष्ण)। मूंगे की माला से लक्ष्मी जी की आराधना होती है। पुष्टि कर्म के लिए भी मूंगे - [व्यापार, स्वास्थ्य और विवाह सम्बंधित अचूक और आसान टोटके](https://bhaktisatsang.com/lal-kitab-ke-upay-totke-hindi/) - व्यापार, स्वास्थ्य और विवाह सम्बंधित अचूक और आसान टोटके धन संबंधित टोटके यदि धन कहीं फंस गया हो या कोई उधार न लौटा रहा हो तो रोजाना सुबह 11 बीज लाल मिर्च के जल में डालकर सूर्य भगवान को चढ़ाना चाहिये और ‘‘ऊँ आदित्याय नमः’’ मंत्र का जाप करते हुये सूर्य भगवान से धन वापसी - [ईश्वर और मोक्ष प्राप्ति के लिए जरुरी है, सिर्फ मानसिक आध्यत्मिक यात्रा](https://bhaktisatsang.com/moksha-ishwar-kese-milega-moksha-yatra/) - अध्यात्म बड़ा सरल है | फिर भी लोग मन में कई भ्रांतियां पाल लेते हैं कि कहीं spiritual होने पर घर छोड़कर संन्यास लेना पड़ जाए, कहीं बैरागी न हो जाऊं, कहीं गृहस्थ धर्म न छोड़ दूं। अध्यात्म तो हमें जीवन जीना सिखाता है। ऐसे ही तन-मन को चलाने के लिए मैन्युअल बुक bhagwat geeta आदि आध्यात्मिक - [शुक्ल यजुर्वेद के उपनिषद के अंतर्गत आने वाले उपनिषद](https://bhaktisatsang.com/shuklayajurvedaupanisad-in-hindi-pdf-downlaod/) - शुक्ल यजुर्वेद के उपनिषद इशावास्योपनिषद यजुर्वेद सहिंता के चालीसवें अध्याय को ईशावास्योपनिषद कहा जाता है। यह अत्यंत प्राचीन पद्यात्मक उपनिषद है। इस उपनिषद में त्यागपूर्ण भोग, कर्म की महत्ता, विद्या-अविद्या का संबंध एवं परमात्मा का स्वरूप वर्णित है। इस पर सायन, अव्वट, महीधर एवं शंकराचार्य के भाष्य उपलब्ध है। वृह्दारन्याकोप्निषद शतपथ ब्रह्मण के अंतिम ६ - [कठोपनिषद - नचिकेता और यमराज का संवाद](https://bhaktisatsang.com/kathopnishad-hindi-pdf-download/) - कठोपनिषद - Katha Upanishad कठोपनिषद (Kathopanishad PDF) कृष्ण यजुर्वेद शाखा का एक उपनिषद है जिनमें वाजश्रवा-पुत्र नचिकेता और यमराज के बीच संवाद हैं। कठोपनिषद (Katha Upanishad Hindi) के रचयिता कठ नाम के तपस्वी आचार्य थे। वे मुनि वैशम्पायन के शिष्य तथा यजुर्वेद की कठशाखा के प्रवृर्त्तक थे। इसमें दो अध्याय हैं और प्रत्येक अध्याय में - [चेहरा देख कर पहचाने इंसान का चरित्र](https://bhaktisatsang.com/seeing-the-familiar-face-of-human-character/) - चेहरा देख कर पहचाने इंसान का चरित्र - Face Reading Tips व्यक्ति का चेहरा एक खुली किताब होता है हम जब भी किसी व्यक्ति से मिलते हैं तो सबसे पहले उसके चेहरे पर हमारी नजर जाती है। यदि उस समय चेहरे के खास अंगों की बनावट पर ध्यान दिया जाए तो तुरंत ही उस व्यक्ति - [सर्वे भवन्तु सुखिन: - परिवार कैसे संगठित और सुखी रहे](https://bhaktisatsang.com/hindu-concept-to-be-happy-family/) - ved के आधार पर ऋषियों ने मानव जीवन को चार आश्रमों में (ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ, संन्यास) बांटा है। वैदिक धर्म के अतिरिक्त अन्य किसी भी मत-मतान्तर में जीवन का यह वैज्ञानिक वर्गीकरण नहीं पाया जाता। यह वैदिक विचारधारा की महान् विशेषता है।यह जीवन मानो गणित का एक प्रश्न है, जिसमें इन आश्रमों के माध्यम से जोड़ - [जाने स्वास्थ्य रेखा का रहस्य](https://bhaktisatsang.com/health-line-swasthya-rekha-hindi/) - अनियमित जीवन शैली से उपजने वाले रोगों से जीवन प्रभावित तो होता ही है, मनुष्य के काम करने, पढ़ने लिखने और सोचने विचारने की क्षमता पर भी असर पड़ता है। इन रोगों के अलावा कैंसर, हृदयाघात, गठिया, एड्स जैसी अन्य बीमारियां भी को प्रभावित करती हैं। इस प्रकार कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि - [छान्दोग्योपनिषद - ‘ॐकार’ की अध्यात्मिक महत्ता को समझाता उपनिषद](https://bhaktisatsang.com/chhandogyopanishad-in-hindi-pdf/) - छान्दोग्योपनिषद - Chandogya Upanishad pdf सामवेद की तलवकार शाखा में इस उपनिषद को मान्यता प्राप्त है। इसमें दस अध्याय हैं। इसके अन्तिम आठ अध्याय ही इस उपनिषद में लिये गये हैं। यह उपनिषद पर्याप्त बड़ा है। नाम के अनुसार इस उपनिषद का आधार ‘छन्द’ है, इसका यहाँ व्यापक अर्थ के रूप में प्रयोग किया गया - [जानिए किस माह में जन्मे जातक कैसे होते है](https://bhaktisatsang.com/which-month-baby-are-you/) - जानिए किस माह में जन्मे जातक कैसे होते है क्या आपका बर्थ डे जनवरी में है ? जनवरी में जन्में युवा प्रखर होते हैं, आपका जन्म किसी भी साल के जनवरी माह में हुआ है तो एस्ट्रोलॉजी कहती है आप बेहद आकर्षक और प्रोफेशनल हैं। भाग्य का चमकीला सितारा हमेशा आपके साथ चलता है। आप अपने गम कभी किसी को नहीं बताते - [आत्मबोध से परमतत्व की प्राप्ति](https://bhaktisatsang.com/self-realisation-journey-to-divine/) - आत्मबोध (self realisation) से परमतत्व की प्राप्ति का मार्ग समस्त सृष्टि को मानवता, एकता, अखंडता, विश्व-बंधुत्व आदि सृजनात्मक शक्तियों का परिचय प्रदान कर्ता है। वास्तविक अर्थों में मानव जीवन का अंतिम लक्ष्य आत्मा का परमतत्व रूपी परमात्मा से मिलन है। इसके लिए आत्मबोध आवश्यक है। यदि परमतत्व का बोध कर लें तो फिर अपने आप - [मंत्र- जप और पूजन से सम्बंधित शब्दावली जानना है आवश्यक](https://bhaktisatsang.com/pooja-vidhi-meaning-in-hindi/) - मंत्र- जप , देव पूजन तथा उपासना के संबंध में प्रयुक्त होने वाले कुछ विशिष्ट शब्दों का अर्थ इस प्रकार समझना चाहिए – 1. पंचोपचार –गन्ध , पुष्प , धूप , दीप तथा नैवैध्य द्वारा पूजन करने को ‘पंचोपचार’ कहते हैं | 2. पंचामृत –दूध ,दही , घृत, मधु { शहद ] तथा शक्कर इनके - [भगवान राम और हनुमान जी का प्रेरणात्मक संवाद](https://bhaktisatsang.com/katha-bhagwan-ram-hanuman-hindi/) - बहुत सुन्दर और ज्ञान वर्धक प्रसंग, जरूर पढ़े 1 हनुमान जी जब संजीवनी बुटी का पर्वत लेकर लौटते है तो भगवान से कहते है। प्रभु आपने मुझे संजीवनी बूटी लेने नहीं भेजा था, बल्कि मेरा भ्रम दूर करने के लिए भेजा था। और आज मेरा ये भ्रम टूट गया कि मै ही आपका राम नाम - [जाने हाथ में बने त्रिशूल, स्वास्तिक, टेंट, कमल, सूर्य, हाथी के चिन्ह का रहस्य](https://bhaktisatsang.com/hast-rekha-shastra-in-hindi-palmistry/) - Palm Signs - हाथ में बने चिन्ह इस संसार रूपी सिनेमा के पर्दे पर हमारी भूमिका क्या रहेगी इसकी पूरी कहानी और पटकथा विधाता ने हमारी हथेली पर लिख कर हमें अपना पात्र निभाने के लिए धरती पर भेज दिया है। हथेली पर रेखाओं के साथ कुछ विशेष चिन्ह ( Special Symbols in Palmistry) भी होते है जो - [अवधूत बाबा शिवानंद जी की बायोग्राफी - Avdhoot Baba Shivanand Biography](https://bhaktisatsang.com/about-avdhoot-shivanand-biography/) - अवधूत बाबा शिवानंद - Avdhoot Baba Shivanand डॉ. अवधूत शिवानंद जी (Shivanand Baba) का जन्म 26 मार्च 1955 को दिल्ली में हुआ और वे राजस्थान में बड़े हुए। अवधूत बाबा शिवानंद जी (shivanand babaji) को बचपन से ही ईश्वर की प्राप्ति को लेकर एक जुनून-सा था। वह जब मात्र आठ साल के थे, एक महान - [सुखी जीवन के सरल उपाय](https://bhaktisatsang.com/sukhi-jiwan-ke-upay/) - सुखी जीवन के सरल उपाय प्रातःकाल उठने के बाद स्नान से पूर्व जो आवश्यक विभिन्न कृत्य हैं, शास्त्रों ने उनके लिये भी सुनियोजित विधि-विधान बताया है। गृहस्थ को अपने नित्य-कर्मों के अन्तर्गत स्नान से पूर्व के कृत्य भी शास्त्र-निर्दिष्ट-पद्धति से ही करने चाहिये। अत एव यहाँ पर क्रमशः जागरण-कृत्य एवं स्नान-पूर्व कृत्यों का निरुपण किया जा रहा है। ब्रह्म-मुहूर्त में जागरण सूर्योदय से चार घड़ी (लगभग डेढ़ घण्टे) पूर्व ब्रह्म मुहूर्त में ही जग जाना चाहिये। इस समय सोना शास्त्र निषिद्ध है। “ब्रह्ममुहूर्ते या निद्रा सा पुण्यक्षयकारिणी” (ब्रह्ममुहूर्त की पुण्य का नाश करने वाली होती है।) करावलोकन – आँखों के खुलते ही दोनों हाथों की हथेलियों को देखते हुये निम्नलिखित - [वेद और वैदिक परम्पराओ के ज्ञाता स्वामी दयानंद सरस्वती](https://bhaktisatsang.com/swami-dayanand-saraswati-motivational-thoughts/) - स्वामी दयानंद सरस्वती पूरा नाम – मूलशंकर अंबाशंकर तिवारी. जन्म – 12 फरवरी 1824 जन्मस्थान – टंकारा (मोखी संस्थान, गुजरात). पिता – अंबाशंकर. माता – अमृतबाई. शिक्षा – शालेय - [चौक जाएंगे आप जानकर पद्मनाभ स्वामी मंदिर का रहस्य](https://bhaktisatsang.com/pandmanabh-swami-temple/) - पद्मनाभ स्वामी मंदिर - Padmanabhaswamy Temple तिरुवनंतपुरम शहर के बीच में स्थित है श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर। इस मंदिर को बहुत ही खूबसूरती से द्रविड़ शैली में बनाया गया है, इस शहर को इस मंदिर के नाम से जाना जाता है। मंदिर में भगवान विष्णु वास करते हैं, यहां भगवान विष्णु, ब्रह्मांडीय नागिन अनाथन पर सहारा - [जाने यात्रा रेखा का रहस्य - आपके हाथो में विदेश यात्रा के योग है या नहीं ?](https://bhaktisatsang.com/yatra-rekha-travel-line-palm-hindi/) - यात्रा रेखा - Yatra Rekha in Hindi अगर आप विदेश यात्रा पर जाने की सोच रहे हैं तो आपकी चाहत पूरी हो सकती है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि आपकी कुण्डली में विदेश यात्रा के योग (Foreign Travel Through Palmistry) मौजूद हों। वैसे आप चाहें तो अपनी हथेली देखकर भी यह जान सकते हैं - [Kundalini Shakti - कुण्डलिनी शक्ति का भेद और जाग्रत करने के बीज मन्त्र](https://bhaktisatsang.com/kundalini-shakti-hindi/) - Kundalini Shakti - कुण्डलिनी शक्ति कुण्डलिनी योग (Kundalin Yoga) के अंतर्गत कुण्डलिनी शक्ति (Kundalini Shakti) का शक्तिपात विधान से कुण्डलिनी चक्र (Kundalini Chakra) जागरण का वर्णन अनेक ग्रंथों में मिलता है । कुण्डलिनी जागरण साधना (Kundalini Awakening) को अनेक स्थानों पर षट्चक्र वेधन की साधना (Kundalini Jagran) भी कहते हैं । पंचकोशी साधना या पंचाग्नि - [जीवन में तरक्की के लिए अपशकुनों को पहचाने, करे लाल किताब के सरल उपाय](https://bhaktisatsang.com/lal-kitab-ke-totke-upay-hindi-me/) - लाल किताब अनुसार शकुन - अपशकुन टोटके शकुन-अपशकुन की अवधारणा हमारे भारतवर्ष में प्राचीन समय से ही रही है। आज के वैज्ञानिक युग में आदमी चांद, मंगल और शुक्र ग्रह पर नई दुनिया बसाने की सोच रहा है, ऐसे में शकुनों तथा अपशकुनों पर विश्वास करना कुछ उचित नहीं लगता, फिर भी समाज का शायद ही - [जानिए हिन्दू धर्मानुसार मास, ऋतुएँ और दिशाएँ को](https://bhaktisatsang.com/hindu-months-tithi/) - हिन्दू पंचांग हिन्दू समाज द्वारा माने जाने वाला कैलेंडर है। इसके भिन्न-भिन्न रूप मे यह लगभग पूरे भारत मे माना जाता है। पंचांग (पंच + अंग = पांच अंग) हिन्दू काल-गणना की रीति से निर्मित पारम्परिक कैलेण्डर या कालदर्शक को कहते हैं। पंचांग नाम पाँच प्रमुख भागों से बने होने के कारण है, यह है- तिथि, वार, नक्षत्र, - [मुण्डकोपनिषद - मस्तिक्ष को अत्यधिक शक्ति देने वाला](https://bhaktisatsang.com/mundkopnishad-pdf-hindi/) - मुण्डकोपनिषद - Mundakopnishad Pdf मदकू द्वीप मुण्डकोपनिषद के रचयिता ऋषि माण्डूक्य की तप स्थली रही है। यही पर उन्होंने इसकी रचना करी थी, मुण्डकोपनिषद अथर्ववेद की शौनकीय शाखा से सम्बन्धित है। इसमें अक्षर-ब्रह्म 'ॐ: का विशद विवेचन किया गया है। इसे 'मन्त्रोपनिषद' नाम से भी पुकारा जाता है। इसमें तीन मुण्डक हैं और प्रत्येक मुण्डक - [कर्मयोग (karma yoga) - भगवत गीता, श्री राम शर्मा आचार्य और सद गुरु के अनुसार](https://bhaktisatsang.com/karm-yoga-in-hindi/) - कर्मयोग | karma yoga “अनासक्त भाव से कर्म करना”। कर्म के सही स्वरूप का ज्ञान। कर्मयोग दो शब्दों से मिलकर बना है – ‘कर्म’ तथा ‘योग’ । कर्मयोग के सन्दर्भ ग्रन्थ – गीता, योगवाशिष्ठ एवं अन्य। 1. कर्मों का मनोदैहिक वर्गीकरण कर्म से तात्पर्य है कि वे समस्त मानसिक एवं शारीरिक क्रियाएँ । ये क्रियाएँ - [जाने हाथ मे बने चिन्ह - स्टार, आइलैंड, क्रॉस का रहस्य](https://bhaktisatsang.com/palm-reading-in-hindi/) - हाथ मे बने चिन्ह - स्टार, आइलैंड, क्रॉस का रहस्य इस दुनियां में जो व्यक्ति जन्म लेता है उनका भाग्य ईश्वर जन्म के साथ ही निर्धारित कर देता है। ईश्वर हर व्यक्ति के साथ उसकी जन्म कुण्डली स्वयं तैयार करके हाथों में थमा देता है। आपके हाथों में खींची आडी तीरछी रेखाएं और विभिन्न चिन्ह - [माणिक्य रत्न - सूर्य को बल और उसका प्रतिनिधित्व करने वाला अनमोल रत्न](https://bhaktisatsang.com/माणिक्य-ratna-dharan-vidhi-hindi/) - माणिक्य रत्न - सूर्य को बल और उसका प्रतिनिधित्व करने वाला अनमोल रत्न आज के परिवेश में आमतौर पर हर व्यक्ति रत्नों (Gems) के चमत्कारी प्रभावों का लाभ उठा कर अपने जीवन को समृ्द्धिशाली व खुशहाल बनाना चाहता है. रत्न भाग्योन्नति में शीघ्रातिशीघ्र अपना असर दिखाते हैं. रत्न समृ्द्धि व ऎश्वर्य के भी प्रतीक होते - [मोती रत्न - चन्द्रमा को बल और मानसिक शांति का सर्वोत्तम उपाय](https://bhaktisatsang.com/मोती-ratna-dharan-vidhi-hindi/) - मोती रत्न - चन्द्रमा को बल और मानसिक शांति का सर्वोत्तम उपाय वैदिक ज्योतिष के अनुसार चन्द्रमा का प्रत्येक कुंडली में विशेष महत्व है तथा किसी कुंडली में चन्द्रमा का बल, स्वभाव और स्थिति कुंडली से मिलने वाले शुभ या अशुभ परिणामों पर बहुत प्रभाव डाल सकती है। चन्द्रमा के बल के बारे में चर्चा - [नीलम रत्न - शनि गृह को बलवान करने और भाग्य चमकाने का सर्वोत्तम उपाय](https://bhaktisatsang.com/neelam-ratna-dharan-vidhi-hindi/) - नीलम रत्न - Neelam Ratna शनि ग्रह राशि रत्‍न नीलम (Neelam Ratna) जिसे अंग्रेजी में 'Blue Sapphire Stone' कहते हैं वास्‍तव में उसी श्रेणी का रत्‍न है जिसमें माणिक रत्‍न आता है। ज्‍योतिष विज्ञान में इसे कुरूंदम समूह का रत्‍न कहते हैं। इस समूह में लाल रत्‍न को माणिक तथा दूसरे सभी को नीलम कहते हैं। - [जाने संतान रेखा का रहस्य - संतान सम्बन्धी सम्पूर्ण जानकारी](https://bhaktisatsang.com/santan-rekha-children-line-hindi/) - संतान रेखा - Palm Reading Children किसी भी व्यक्ति को विवाह के बाद संतान के विषय में जानने की इच्छा होती है। इस इच्छा की पूर्ति के लिए हम अपने हाथों में संतान रेखा (children line) को ध्यान से देखें तो पता चलता है की जातक को कितनी संतानें होंगी, वह उसे कितना सुख देगी, संतान स्वस्थ - [कोई कैसे जान सकता है अपने पूर्व जन्म को](https://bhaktisatsang.com/jaane-apne-purva-janam-ke-baare-me/) - कैसे पता चल सकता है की पिछले जन्म में हम क्या थे ? इसका उत्तर यह है कि सामान्य श्रेणी हम मनुष्यों को इस प्रश्न का पूर्ण व स्पष्ट उत्तर ज्ञात नहीं हो सकता परन्तु यदि हम ऋषि पतंजलि के योग दर्शन के अनुसार योग को पूर्णतया अपने जीवन में धारण कर लें, उसका पालन करें - [जाने हाथ में बने त्रिभुज, जाली, वर्ग और गोले का रहस्य](https://bhaktisatsang.com/hast-rekha-shastra-hindi-palmistry/) - हस्त रेखा - त्रिभुज, जाली, वर्ग और गोले का रहस्य हाथों में पाए जाने वाले चिन्ह और उनके प्रभाव के विषय में हम काफी बातें पहले भाग में कर चुके हैं। कड़ी को आगे बढ़ते हुए इस भाग में हम कुछ और चिन्हों को जानेंगे और देखेंगे कि ये चिन्ह हमारे विषय में क्या कहते - [गोमुखी कामधेनु शंख : मन की कल्पनाओ को पूर्ण करने वाला चमत्कारिक शंख](https://bhaktisatsang.com/mythology-gaumukhi-shankh-hindi/) - शंख निधि का प्रतीक है। ऐसा माना जाता है कि इस मंगलचिह्न को घर के पूजास्थल में रखने से अरिष्टों एवं अनिष्टों का नाश होता है और सौभाग्य की वृद्धि होती है। भारतीय धर्मशास्त्रों में शंख का विशिष्ट एवं महत्वपूर्ण स्थान है। मंदिरों एवं मांगलिक कार्यों में शंख-ध्वनि करने का प्रचलन है। मान्यता है कि - [मनुष्य की आयु घटाने व बढ़ाने वाले कर्म जानकर रहे 100 वर्ष जीवित](https://bhaktisatsang.com/karma-yog-hindu-dharma-mythology-hindi/) - हमारे प्राचीन धर्म ग्रंथों के अनुसार हम मनुष्यों की आयु लगभग 100 वर्ष या उससे अधिक मानी गयी है लेकिन वर्तमान समय में हमारे रहन सहन, विचारों, कर्मों के कारण हमारी आयु में लगातार कमी आती जा रही है। हम अपनी आयु को बढ़ाने, निरोगी रहने के तमाम प्रयत्न भी करते है लेकिन ज्यादातर लोगो - [सच्चियाय माता मंदिर, ओसियां जिसके गर्भगृह में है स्वयं माँ महिषमर्दिनी](https://bhaktisatsang.com/sacchiya-mata-temple-osian/) - सच्चियाय माता मंदिर - Sachiya Mata Temple श्री सच्चियाय माताजी का यह शक्ति पीठ भारत में सुविख्यात देवी उपासना का केन्द्र माना जाता है । जहाँ आधिदैविक एंव आधिभौतिक सम्पदाओ का समनिवत रूप युगो युगो से प्रत्यक्ष द्रष्टिगोचर होता रहता है ओसियां नगर की सांस्कृतिक परम्परा और इसकी ऐतिहासिकता इतनी प्राचीन है कि इसका उदभव - [राशिनुसार मन्त्र जपने और लक्की चार्म रखने से बदलेगा आपका भाग्य](https://bhaktisatsang.com/rashi-ratna-mantra-lucky-charm-hindi/) - राशिनुसार मन्त्र जपने और लक्की चार्म रखने से बदलेगा आपका भाग्य संसार में हर व्यक्ति चाहता है कि से हर कार्य में सफलता मिले, उसके ऊपर माँ लक्ष्मी कि सदैव कृपा बनी रहे, इसके लिए वह दिन रात मेहनत करता है हर जतन करता है लेकिन सभी लोगो को अपनी मेहनत का उचित फल नहीं - [नवरतनों को धारण करने की विधि और रत्नों से मनोकामना सिद्धि उपाय](https://bhaktisatsang.com/rashi-ratna-dharan-vidhi-upay-hindi/) - नवरतनों को धारण करने की विधि और रत्नों से मनोकामना सिद्धि उपाय सूर्य का रत्न माणिक्य सूर्य ब्राह्मण का केंद्र है । इसकी शाकी से समग्र विश्व अनुप्रणित है । यह ज्योतिष की दृष्टि से आत्मकारक ग्रह है । आत्मबल और इच्छा शक्ति तथा पिता का विचार इससे किया जाता है । सूर्य को ‘भुवनस्य - [मैडिटेशन करने के लाभ - Benefits of Meditation](https://bhaktisatsang.com/dhyan-karne-se-labh-hindi/) - मैडिटेशन करने के लाभ - Benefits of Meditation in Hindi Benefits of Meditation In Hindi - नियमित मैडिटेशन करने के फायदों (Benefits To Meditation) को अनेक प्रकार से विभाजित किया गया है। मैडिटेशन अभ्यास से मन का तनाव कम हो कर शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत बनती है, मन की एकाग्रता में सुधार, स्मृति में - [नित्य पूजा विधि मंत्र सहित - Nitya Puja Vidhi](https://bhaktisatsang.com/daily-pujan-mantra/) - नित्य पूजा विधि मंत्र सहित- Nitya Puja Vidhi & Mantra Mantra For Puja - सभी कष्टों के निवारण एवं ईश्वर प्राप्ति के लिए नित्य पूजा विधि (Nitya Puja Vidhi) का मार्ग श्रेष्ट माना गया है। नित्य पूजन (Daily Puja) और नित्य पूजा मंत्र (Nitya Puja Mantra) जपने से श्रद्धा और विश्वास का ही जन्म नही - [ज्येष्ठ मास – ज्येष्ठ मास के व्रत त्योहारों की तिथि](https://bhaktisatsang.com/jyeshtha-month-vrat/) - ज्येष्ठ मास - Jyeshtha Month ज्येष्ठ मास (Jyestha Month) का नाम सुनते ही तपती हुई धुप याद आती है, चैत्र और वैशाख पार करने पर जब ज्येष्ठ मास का आरंभ होता है तो गर्मी का मौसम ऊफान पर होता है। इसलिये हमारे ऋषि-मुनियों ने ज्येष्ठ में जल का महत्व बहुत अधिक माना है। जल के - [Putrada Ekadashi - संतान सुख के लिए जरूर करें श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत](https://bhaktisatsang.com/putrada-ekadashi-vrat-katha-puja-vidhi-पुत्रदा-एकादशी/) - Putrada Ekadashi - श्रावण पुत्रदा एकादशी Putrada Ekadashi Vrat - पुत्रदा एकादशी का व्रत हर साल श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस दिन विधि-विधान से भगवान श्रीहरि की पूजा की जाती है। मान्यता है कि पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान प्राप्ति और उससे जुड़ी समस्याओं के निपटारे या - [जीवन मे चहुमुखी खुशिया और तरक्की के लिए लाये घर मे पारद पिरामिड](https://bhaktisatsang.com/parad-pyramid-shivling-locket-hindi/) - जीवन मे चहुमुखी खुशिया और तरक्की के लिए लाये घर मे पारद पिरामिड पारद का प्रत्येक अक्षर एक-एक देवता का प्रतीक है। ‘पारद’ का शाब्दिक अर्थ है-प-विष्णु, अ-कालिका, र-शिव और द-ब्रह्मा। यदि पारद प्रतिमा को मंत्रात्मक क्रियाओं द्वारा चैतन्य करके पारद पिरामिड के रूप में भवन में स्थापित किया जाए तो वहां रहने वाला प्रत्येक - [सत्यनारायण कथा : जीवन के सभी कष्टो से मुक्ति देती अद्भुत कथा](https://bhaktisatsang.com/satyanarayan-vrat-katha-puja-vidhi-hindi/) - सत्यनारायण कथा : Satyanarayan katha in Hindi Satyanarayan vrat katha in Hindi - सत्यनारायण कथा सनातन (हिंदूधर्म) के अनुयायियों में लगभग पूरे भारतवर्ष में प्रचलित है। सत्यनारायण भगवान विष्णु (Satyanarayan vrat katha) को ही कहा जाता है भगवान विष्णु जो कि समस्त जग के पालनहार माने जाते हैं। लोगों की मान्यता है कि भगवान सत्यनारायण - [यजुर्वेद : यज्ञ-कर्म और विधि विधान को बतलाने वाला](https://bhaktisatsang.com/yajurved-hindi-ved-pdf-download/) - यजुर्वेद (Yajurveda in Hindi) हिन्दू धर्म का एक महत्त्वपूर्ण श्रुति धर्मग्रन्थ और चार वेदों (यजुर्वेद, अथर्वेद, सामवेद, ऋगवेद ) में से एक है। इसमें यज्ञ की असल प्रक्रिया के लिये गद्य और पद्य मन्त्र हैं। ये हिन्दू धर्म के चार पवित्रतम प्रमुख ग्रन्थों में से एक है और अक्सर ऋग्वेद के बाद दूसरा वेद माना जाता है - [ऋग्वेदीयोपनिषद : जन्म, जीवन और मरण का वर्णन करता उपनिषद](https://bhaktisatsang.com/rigveda-upanishad-hindi-pdf/) - ऋग्वेद के उपनिषद – ऋग्वेदीयोपनिषद ऐतरेयोपनिषद ऋग्वेद के ऐतरेय आरण्यक के द्वितीय खंड के अंतर्गत चतुर्थ से षष्ठ अध्याय को ऐतरेय उपनिषद माना जाता है। इसमें 3 अध्याय है जिसमें विश्व की उत्पत्ति का विवेचन है तथा पुरुष सूक्त के आधार पर सृष्टि का क्रम निरुपित है। जन्म, जीवन और मरण का वर्णन प्राप्त होता - [वशीकरण यन्त्र : व्यापार रोजगार में सम्पूर्ण सफलता हेतु विशेष लाभकारी](https://bhaktisatsang.com/vashikaran-yantra-vyapar-me-safalta-in-hindi/) - वशीकरण यन्त्र : व्यापार रोजगार में सम्पूर्ण सफलता हेतु विशेष लाभकारी ॐ क्लीं कृष्णाय नमः ।। ॐ नमो नारायणाय सर्व लोकन मम वश्य कुरु कुरु स्वहा ।। ऊपर दिए गए मंत्र मे सर्वलोक की जगह उस व्यक्ति का नाम लिया जा सकता है जिसे सम्मोहित करना हो | सामान्यता यह देखा जाता है की पति पत्नी, घर के अन्य सदस्यों, सगे सम्बन्धियों, अभिन्न मित्रों में किसी न किसी बात - [हिन्दु धर्मानुसार व्यक्ति के पुनर्जन्म के कारण ये हो सकते है](https://bhaktisatsang.com/purva-janam-ke-karan-in-hindi/) - संसार में कुछ वर्ग विशेष के लोग यह मानते हैं कि व्यक्ति का बार बार जन्म नहीं होता तथा प्रत्येक व्यक्ति का केवल एक ही जन्म होता है। इस धारणा को यदि सच मान लिया जाए तो मानव जीवन से जुड़े ऐसे अनेक प्रश्नों के उत्तर प्राप्त नहीं हो पाते जिनका प्राप्त होना अति आवश्यक - [कैसे ली शनिदेव ने पांडवो के ज्ञान की परीक्षा](https://bhaktisatsang.com/pandvo-ki-pariksha-shanidev-dwara/) - कैसे ली शनिदेव ने पांडवो के ज्ञान की परीक्षा पाण्डवों का अज्ञातवाश समाप्त होने में कुछ समय शेष रह गया था। पाँचो पाण्डव एवं द्रौपदी जंगल मे छूपने का स्थान ढूंढ रहे थे, उधर शनिदेव की आकाश मंडल से पाण्डवों पर नजर पड़ी शनिदेव के मन में विचार आया कि इन सब में बुद्धिमान कौन - [राहु शान्ति का उपाय कर पाए जीवन में तरक्की और खुशहाली](https://bhaktisatsang.com/rahu-shanti-upay-in-hindi/) - राहु शान्ति का उपाय कर पाए जीवन में तरक्की और खुशहाली १. राहु को प्रसन्न करने हेतु गोमेद युक्त राहु यंत्र लॉकेट गले में धारण करें। २. शिवजी पर बिल्वपत्र चढ़ाएं व शिव मंदिर के नियमित दर्शन करें। शिव जी पर धतूरे के पुष्प चढ़ावें। ३. घर में या आँगन में गोबर, लकड़ी आदि - [योग्य गुरु के मागदर्शन मे बढाए ईश्वर प्राप्ति की ओर क़दम](https://bhaktisatsang.com/bhagwan-guru-ko-kese-paye-hindi/) - योग्य गुरु के मागदर्शन मे बढाए ईश्वर प्राप्ति की ओर क़दम जिस प्रकार ईश्वर द्वारा निर्मित मनुष्य, प्राणी आदि को मन एवं बुद्धि होती है, उसी प्रकार ईश्वर द्वारा निर्मित संपूर्ण विश्व के विश्वमन और विश्वबुद्धि होते हैं, जिनमें विश्व के सम्बंध में पूर्णतः विशुद्ध (सत्य) जानकारी संग्रहित होती है । इसे ईश्वरीय मन - [ऐतरेयोपनिषद : मानव-शरीर की उत्पत्ति रहस्य बतलाने वाला उपनिषद](https://bhaktisatsang.com/aitareya-upanishad-hindi-pdf/) - ऐतरेयोपनिषद प्रथम अध्याय इस उपनिषद के प्रथम अध्याय में तीन खण्ड हैं पहले खण्ड में सृष्टि का जन्म, दूसरे खण्ड में मानव-शरीर की उत्पत्ति और तीसरे खण्ड में उपास्य देवों की क्षुधा-तृप्ति के लिए अन्न के उत्पादन का वर्णन किया गया है। प्रथम खण्ड / सृष्टि की उत्पत्ति प्रथम खण्ड में ऋषि कहता है कि - [कृष्णयजुर्वेदीयोपनिषद : ब्रह्म आनंद और सत्य ज्ञान की महिमा मंडित करता विशिष्ट उपनिषद](https://bhaktisatsang.com/krishna-yajurveda-upnisad-hindi-pdf/) - कृष्णयजुर्वेदीयोपनिषद - कृष्ण यजुर्वेद के उपनिषद तैत्तिरीयोपनिषद ………………………… कृष्ण आयुर्वेद की तैत्तिरीय शाखा के तैत्तिरीय आरण्यक के सप्तम से नवं प्रपाठक को तैत्तिरीयोपनिषद कहते है। इसमें ३३ आध्याय है जिन्हें क्रमशः शिक्षावल्ली, ब्रह्मानन्दवल्ली एवं भृगुवल्ली कहते हैं। ये वल्लियाँ अनुवाकों में विभक्त हैं। इस उपनिषद में दिए गए मातृ देवो भवः, अतिथि देवो भवः इन - [प्रेम में सफलता और वशीकरण के चमत्कारी और सटीक उपाय व टोटके](https://bhaktisatsang.com/love-prem-vashikaran-totke-hindi/) - प्रेम में सफलता और वशीकरण के चमत्कारी और सटीक उपाय - Love Vashikaran Remedies यहाँ पर बताये गए प्रयोगों द्वारा आप निश्चित ही किसी भी वर या कन्या को अपने पक्ष में कर सकते हैं, उसके दिल में अपनी जगह बना सकते है परन्तु इनका प्रयोग तभी करना चाहिए जब आपका प्रेम सच्चा हो आपकी - [जन्म से पूर्व जीवन : गर्भधारण होने से पूर्व](https://bhaktisatsang.com/janm-se-purva-jiwan-before-birth/) - १. जन्म से पहले का जीवन-एक परिचय क्या मेरे पास यही जीवन है ? जन्म से पूर्व हम कहां होते हैं ? मृत्यु के उपरांत हम कहां जाते हैं ? लगभग हम सभी इन प्रश्‍नों से परिचित होंगे । कुछ समय पूर्व हमने मृत्यु के उपरांत क्या होता है, इस विषय पर एक लेख प्रकाशित - 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[अथर्ववेदोपनिषद : कई महान उपनिषद का स्त्रोत](https://bhaktisatsang.com/अथर्ववेदोपनिषद-atharvavedopnishad-hindi-pdf/) - अथर्ववेदोपनिषद - अर्थवेद के उपनिषद प्रश्नोपनिषद - यह अथर्ववेद की पैप्पलाद शाखा से सम्बद्ध उपनिषद है। यह उपनिषद ६ ऋषि महर्षि पिप्पलाद से अध्यात्म-विषयक प्रश्न पूछते हैं। उपनिषद में महर्षि पिप्पलाद उन प्रश्नों का उत्तर देते हैं। इन प्रश्नों के कारण ही इसे प्रश्नोपनिषद कहा जाता है। इसमें सृष्टि की उत्पत्त, उसके धारण, प्राण की - [हिन्दू पौराणिक कथाओ के अनुसार यह है पृथ्वी में भूकम्प आने का कारण](https://bhaktisatsang.com/hindu-spiritual-stories-hindi/) - हिन्दू पौराणिक कथाओ के अनुसार यह है पृथ्वी में भूकम्प आने का कारण हमारे हिन्दू धर्म में पृथ्वी को माता की उपाधि दी गई है तथा उनको धरती माता के रूप में पूजा जाता है. पुराणों में पृथ्वी को मंगल ग्रह की माता बतलाया गया है जिसके संबंध में एक कथा दी गई है. जब - [शिक्षाप्रद कहानी : ईश्वर का न्याय](https://bhaktisatsang.com/best-inspirational-story-hindi/) - शिक्षाप्रद कहानी : ईश्वर का न्याय Hindi Inspirational Story : एक रोज रास्ते में एक महात्मा अपने शिष्य के साथ भ्रमण पर निकले. गुरुजी को ज्यादा इधर-उधर की बातें करना पसंद नहीं था, कम बोलना और शांतिपूर्वक अपना कर्म करना ही गुरू को प्रिय था. परन्तु शिष्य बहुत चपल था, उसे हमेशा इधर-उधर की बातें - 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बृहस्पति / गुरु गृह शांति के उपाय बृहस्पति/गुरू एक राशि में 13 मास तक निवास करते हैं और सूर्य, चन्द्र और मंगल इनके मित्र है, जबकि बुध, शुक्र इनके शत्रु है तथा शनि, राहु, केतु इनके समग्रह हैं। इसके साथ ही बृहस्पति विशाखा, पुनर्वसु तथा पूर्वभाद्रपद नक्षत्रों के स्वामी भी हैं। ग्रहों में गुरु ग्रह - [क्या जीवन सार "जाही विधी राखे राम ताही विधी रहिये" मे ही है ?](https://bhaktisatsang.com/hindi-motivational-spiritual-blog-in-hindi/) - यह ब्रह्माण्ड बहुत विशाल है, इसके हर तत्त्व को, इसकी हर रचना को ना तो जाना जा सकता है और ना ही समझा जा सकता है, हमारी पृथ्वी का एक ही सूर्य लाखों डिग्री ताप के साथ इस पृथ्वी को तपा कर रख देता है, जबकी ब्रह्माण्ड में ऐसे ऐसे कोटि कोटि सूर्य हैं - [परमात्मा के अनेक नाम और उनमे छुपा उनका चरित्र रहस्य](https://bhaktisatsang.com/name-meaning-of-gods-goddess-hindi/) - परमात्मा के विविध नाम (Name of Hindu God & Goddess) किसी का भी संबोधन हम उसके नाम से करते हैं | नाम हमारे गुणों के सूचक हैं नियमानुसार रखे जाए अतः नाम गुण, कर्म और स्वभाव अनुसार रखे जाते हैं | उस परमात्मा के तो असंख्य गुण हैं हमें परमात्मा के उन गुणों के बारे - [श्रीमद भगवद गीता अध्याय - 1 (अर्जुनविषाद योग )](https://bhaktisatsang.com/geeta-adhyaay-1/) - - अर्जुनविषाद योग : Arjun Vishad Yog दोनों सेनाओं के प्रधान-प्रधान शूरवीरों की गणना और सामर्थ्य का कथन: धृतराष्ट्र उवाच धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः । मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत संजय ॥ भावार्थ : धृतराष्ट्र बोले- हे संजय! धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में एकत्रित, युद्ध की इच्छावाले मेरे और पाण्डु के पुत्रों ने क्या किया?॥1॥ संजय उवाच दृष्टवा तु पाण्डवानीकं - [श्रीमद भगवद गीता अध्याय - 2 ( सांख्य योग )](https://bhaktisatsang.com/geeta-adhyaay-2/) - सांख्ययोग - Sankhya Yog अर्जुन की कायरता के विषय में श्री कृष्णार्जुन-संवाद: संजय उवाचतं तथा कृपयाविष्टमश्रुपूर्णाकुलेक्षणम्‌ । विषीदन्तमिदं वाक्यमुवाच मधुसूदनः ॥ भावार्थ : संजय बोले- उस प्रकार करुणा से व्याप्त और आँसुओं से पूर्ण तथा व्याकुल नेत्रों वाले शोकयुक्त उस अर्जुन के प्रति भगवान मधुसूदन ने यह वचन कहा॥1॥ श्रीभगवानुवाच कुतस्त्वा कश्मलमिदं विषमे समुपस्थितम्‌ । - [जानिए त्राटक द्वारा आज्ञाचक्र ध्‍यान साधना विधि और सावधानिया](https://bhaktisatsang.com/aagya-chakra-sadhna-tratak-dhyan-hindi/) - आज्ञाचक्र ध्‍यान साधना | Aagya Chakra Dhyan Sadhna जिसे हम ध्‍यान कहते है वो आज्ञा चक्र ध्‍यान (trataka meditation) ही है मगर इसको सीधे ही करना लगभग असम्‍भव है उसके लिये साधक को पहले त्राटक करना चाहिये और एकाग्रता हासिल होने पर ध्‍यान का अभ्‍यास आरम्‍भ करना चाहिये। इस त्राटक में हमकों अपनी आंख के अंदर - [श्री कृष्णा द्वारा वर्णित ध्यान विधि और भक्ति योग की महिमा](https://bhaktisatsang.com/lord-krishna-dhyan-vidhi-bhakti-yog/) - श्रीमद भागवत - एकादश स्कन्ध - चौदहवाँ अध्याय उद्धव जी ने पुछा - श्रीकृष्ण ! ब्रम्हवादी परमात्मा आत्मकल्याण के लिए अनेको साधन बतलाते हे । उनमे दृष्टि के अनुसार सभी श्रेष्ठ है अथवा किसी एक की प्रधानता है? मेरे स्वामी ! आपने तो अभी अभी भक्तियोग को ही निरपेक्ष एवं स्वन्त्र साधन बतलाया हे क्योकि इसी से - [श्री कृष्ण और राधा रानी के प्रेम का प्राकट्य और जीवन की कथामृत सार](https://bhaktisatsang.com/shri-krishna-radha-life-facts-hindi/) - श्री राधा और कृष्ण जी के बारे में ऐसा कौन होगा जिसने कभी सुना नही होगा। सभी जानते है की राधा और कृष्ण एक दूसरे से प्रेम करते थे। और इतना प्रेम करते थे की कृष्ण जी शरीर हैं राधा रानी आत्मा हैं। जैसे सूर्य और प्रकाश। जैसे चन्द्रमा और चकोर। कृष्ण गीत हैं तो - [मानसिक और शारीरिक क्लेश कारक तलाक और पुनर्विवाह के ज्योतिषीय उपाय](https://bhaktisatsang.com/divorce-remarriage-astrology-remedies-hindi/) - Punar Vivaah and Divorce Solutions - तलाक और पुनर्विवाह के ज्योतिषीय उपाय आजकल के ज़माने में वैवाहिक जीवन का सफल हो पाना बेहद मुश्किल हो गया है। आजकल पति-पत्नी छोटी-छोटी बातों पर भी तलाक लेने जितना बड़ा फैसला ले बैठते हैं। लेकिन कई बार शादी के बंधन में बंधे दो लोगों में से अन्य साथी - [छठी इंद्री (सिक्स्थ सेन्स) को जाग्रत करने के लिए इतने तरीको में से कोई एक ही करले](https://bhaktisatsang.com/sixth-sense-activation-chati-indriy-hindi/) - छठी इंद्री - Sixth Sense in Human छठी इंद्री को अंग्रेजी में सिक्स्थ सेंस कहते हैं। इसे परामनोविज्ञान का विषय भी माना जाता है। असल में यह संवेदी बोध का मामला है। छठी इंद्री के बारे में आपने बहुत सुना और पढ़ा होगा लेकिन यह क्या होती है, कहां होती है और कैसे इसे जाग्रत - [शुक्र गृह के कारण हो रहे अनिष्ट को रोकने हेतु सरल शांति उपाय](https://bhaktisatsang.com/शुक्र-शान्ति-का-उपाय-shukra-shanti-upay/) - शुक्र गृह के कारण हो रहे अनिष्ट को रोकने हेतु सरल शांति उपाय १. श्रीसूक्त, लक्ष्मी सूक्त और कवच का जाप अत्यंत लाभकारी है। २. विलम्ब विवाह में अभिमंत्रिक मोहिनी कवच धारण करें तथा या कामदेव मंत्र का जप कल्याणकारी होते है। ३. शुक्र मन्त्र का जप, स्तोत्र, कवच शतनाम के सहित करके (आचार्य - [इन सरल और अचूक ज्योतिष उपाय से बदल सकते है अपना बुरा समय](https://bhaktisatsang.com/change-your-fortune-bhagya-badalne-ke-upay/) - इन सरल और अचूक ज्योतिष उपाय से बदल सकते है अपना बुरा समय वक्त कभी भी एक जैसा नहीं रह्ता है, जीवन भर व्यक्ति उतार चढ़ाव का सामना करता है, लेकिन हमारे ऋषियों मुनियों और महान ज्योतिष आचार्यो ने हमारे कल्याण के अनेकोँ आसान और अचूक सरल ज्योतिषीय उपाय बताएं है, जिससे चाहे कैसा भी - [जानिए सद्गुरु जग्गी वासुदेव के अनुसार हठयोग में बंध का महत्व और लाभ](https://bhaktisatsang.com/hatha-yoga-yogasana-bandh-hindi-sadguru/) - हठयोग में बंध का महत्व और लाभ | Hatha Yoga Isha हठ योग और क्रिया योग में कुछ ऐसे आसन और क्रियाएं होती हैं, जिनमें बंध लगाया जाता है। एक साधक ने सद्‌गुरु से बंध लगाने का महत्व जानना चाहा। जानते हैं सद्‌गुरु से। हठयोग के बंधों का लक्ष्य – ऊर्जा शरीर पर काबू पाना - [जानिए भगवान् दत्तात्रेय की जन्म कथा, साधना विधि, अवतार और उनके 24 गुरुओ के बारे मे](https://bhaktisatsang.com/lord-dattatreya-story-katha-sadhna-avtar-guru-hindi/) - भगवान् दत्तात्रेय की जन्म कथा (Lord Dattatrey Birth Story) हिंदू धर्म में भगवान दत्तात्रेय को त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश का एकरूप माना गया है। धर्म ग्रंथों के अनुसार श्री दत्तात्रेय भगवान विष्णु के छठे अवतार हैं। वह आजन्म ब्रह्मचारी और अवधूत रहे इसलिए वह सर्वव्यापी कहलाए। यही कारण है कि तीनों ईश्वरीय शक्तियों से - [कुंडली और ग्रहो के योग से जाने की पिछले जन्म में आप कौन थे और इस जन्म में मृत्यु के बाद आपका क्या होगा](https://bhaktisatsang.com/punarjanm-last-birth-astrology-prediction-hindi/) - Reincarnation - जन्म, मृत्यु और पुनर्जन्म in hindi हिंदू धर्म में पुनर्जन्म की मान्यता है। हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार प्राणी का केवल शरीर नष्ट होता है, आत्मा अमर है। आत्मा एक शरीर के नष्ट हो जाने पर दूसरे शरीर में प्रवेश करती है, इसे ही पुनर्जन्म कहते हैं। पुनर्जन्म के सिद्धांत को लेकर सभी - [बुध ग्रह : जाने बीज मन्त्र, राशि स्वामी, शुभ, अशुभ फल और ग्रह शांति के ज्योतिषीय उपाय](https://bhaktisatsang.com/budh-grah-mecury-planet-rashi-jyotish-upay-shanti-hindi/) - बुध ग्रह का परिचय - Mercury Planet in Hindi सूर्य के सबसे निकटतम बुध ग्रह (Bugh grah) है। देवों की सभा में बुध को राजकुमार कहा गया है। ज्योतिष शास्त्र में बुद्ध का एक महत्वपूर्ण स्थान है और इसे एक शुभ ग्रह माना जाता है। परन्तु कुछ परिस्थितियों में या अशुभकारी ग्रह के संगम से - [सियार सिंगी : सिद्ध करने का मंत्र और विधि जिससे होगा व्यापार और जॉब में तुरंत प्रमोशन](https://bhaktisatsang.com/siyar-singhi-vashikaran-mantra-vidhi-vyapar-labh-hindi/) - सियार सिंगी - Siyar Singhi सियार सिंगी (Siyar Singhi) बहुत ही चमत्कारी वस्तु होती है इसे घर में रखने से सकारात्मक उर्जा का अनुभव होता है, सियार सिंगी बालो के एक गुच्छे कि तरह होती है, असल में सियार के सींग नहीं होते परन्तु कुछ सियारों के नाक के ऊपर बालो का एक गुच्छा बन - [सद्गुरु ओशो और बुद्ध के अनुसार विपश्यना ध्यान विधि साधना का रहस्य](https://bhaktisatsang.com/osho-vipashyana-dhyan-sadhna-meditation-hindi/) - सद्गुरु ओशो के अनुसार क्या है विपश्यना | What is Vipassana Meditation विपश्यना (Vipassana) आत्मनिरीक्षण द्वारा आत्मशुद्धि की अत्यंत पुरातन साधना-विधि है। जो जैसा है, उसे ठीक वैसा ही देखना-समझना विपश्यना है। लगभग 2500 वर्ष पूर्व भगवान गौतम बुद्ध (buddhism) ने विलुप्त हुई इस पद्धति का पुन: अनुसंधान कर इसे सार्वजनीन रोग के सार्वजनीन इलाज, जीवन - [प्रदोष व्रत कथा - जानिए क्या है इस व्रत का महत्व, कैसे करें पूजा ?](https://bhaktisatsang.com/pardosh-vrat-katha/) - प्रदोष व्रत - Pradosh Vrat Pradosh Vrat - प्रदोष व्रत कथा (Pradosh Vrat Katha) जानिए क्या है इस व्रत का महत्व कैसे करें (Pradosh Vrat Puja Vidhi) विधि अनुसार पूजा. प्रत्येक माह की दोनों पक्षों की त्रयोदशी के दिन संध्याकाल के समय को "प्रदोष" कहा जाता है और इस दिन शिवजी को प्रसन्न करने के - [सर्व कार्य सिद्धि और नव ग्रह यन्त्र जीवन में सर्वत्र सफलता , यश, कीर्ति और घर में प्रेम और सुख शांति के लिए](https://bhaktisatsang.com/karya-siddhi-nav-grah-yantra-mantra-hindi/) - सर्व कार्य सिद्धि यन्त्र | Sarva Karya Siddhi Yantra मन्त्र - ऊँ ब्रह्मा मुरारि स्त्रिपुरान्तकारी भानु : शशी भूमिसुतो: बुधश्च । गुरुशच शुक्र : शनि : राहू केतव : सर्वे ग्रहा : शांति करा :भवन्तु ।। इस धरती पर हम सभी मनुष्य और जीवजंतु सूर्य और अन्य ग्रहों से प्रभावित रहते है । हमारे पूरे जीवन में किसी ना किसी गृह की महादशा , अंतर दशा चलती ही रहती है । यह गृह हमें कभी शुभ और कभी - [रानी पद्मावती : प्राणों की आहुति देकर अपने और देश के मान सम्मान की रक्षा करने वाली वीरांगना](https://bhaktisatsang.com/rani-padmavati-history-story-hindi/) - रानी पद्मावती - Rani Padmavati History in Hindi हमारे देश में जिन वीर बालाओ ने अपने प्राणों की आहुति देकर अपने मान सम्मान की रक्षा की उनमे वीरांगना रानी पद्मिनी (Rani Padmavati) का नाम सर्वोपरि है | राजकुमारी पद्मिनी (Rani Padmavati) सिंहल द्वीप के राजा की पुत्री थी | वह बचपन से ही बड़ी सुंदर - [महाभारत काल से पुराने इन मन्दिरों का है पांडवों का ऐतिहासिक जुड़ाव](https://bhaktisatsang.com/hindu-temple-mahabharat-pandav-yatra-mandir-hindi/) - हम भले किसी चीज में यकीन करें या ना करें, लेकिन भगवान में विश्वास जरुर करते हैं। भारत में आस्था इतनी है कि, आप यहां कदम कदम पर मंदिर आदि देख सकते हैं। भारत में आस्था का महत्व इतना है कि, लोग दूर देश विदेशो से आकर भारत के मन्दिरों में मत्था टेकते हैं। कुछ - [महाराणा प्रताप : मुगुलों को छटी का दूध याद दिलाने वाले वीर राजपूत देशभक्त](https://bhaktisatsang.com/maharana-pratap-history-story-haldi-ghati-hindi/) - महाराणा प्रताप का इतिहास - Maharana Pratap History महाराणा प्रताप के नाम से भारतीय इतिहास गुंजायमान हैं. यह एक ऐसे योद्धा थे जिन्होंने मुगुलों को छटी का दूध याद दिला दिया था. इनकी वीरता की कथा से भारत की भूमि गोरवान्वित हैं. महाराणा प्रताप मेवाड़ की प्रजा के राणा थे. वर्तमान में यह स्थान राजिस्थान - [जाने जीवन रेखा का रहस्य - मनुष्य के जीवन-मरण का सारा रहस्य बतलाने वाली](https://bhaktisatsang.com/life-line-jeevan-rekha-hindi/) - जीवन रेखा - Life Line Palmistry जीवन रेखा (Palmistry Life Line) अंगूठे के आधार से निकलती हुई, हथेली को पार करते हुए वृत्त के आकार मे कलाई के पास समाप्त होती है। यह सबसे विवादास्पद रेखा है। यह रेखा शारीरिक शक्ति और जोश के साथ शरीर के महत्वपूर्ण अंगों की भी व्याख्या करती है। शारीरिक - [नीम करोली बाबा का कैंची धाम जहा है बिगड़ी तकदीर बनाने वाला अद्भुत हनुमान मंदिर](https://bhaktisatsang.com/neem-karoli-baba-kainchi-dham-hanuman-mandir/) - नीम करोली बाबा - Neem Karoli Baba : Maharaji नीम करोली बाबा (हिंदी: नीम करौली बाबा या नीब करोरी बाबा (सी। 1900 - 11 सितंबर 1973) उनके अनुयायी उनको महाराज-जी के नाम से जानते थे। वे एक हिंदू गुरु और हिंदू देवता हनुमान के भक्त थे। वह 1960 और 1970 के दशक में भारत की - [देवकीनंदन ठाकुर जी जीवन परिचय - Devkinandan Thakur ji Biography](https://bhaktisatsang.com/devkinandan-thakur-maharaj-biography-hindi/) - देवकीनंदन ठाकुर जी जीवन परिचय - Devkinandan Thakur ji Devkinandan Thakur Ji - श्री देवकीनन्दन ठाकुर जी महाराज के भजन और भागवत कथा (Devkinandan Thakur ke Bhajan & Bhagwat Katha) को भक्तजन बहुत पसंद करते है | देवकीनन्दन ठाकुर जी (devkinandan thakur pravachan) महाराज का जन्म 12 सितम्बर 1978 को श्री कृष्ण जी की जन्मभूमि - 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[चंद्र ग्रहण के दिन होगी माघ पूर्णिमा , गंगा जल स्नान से मिलेगा भगवान विष्णु का आशीर्वाद और लाभ](https://bhaktisatsang.com/magh-purnima-ganga-snan-katha-hindi/) - चंद्र ग्रहण के दिन होगी माघ पूर्णिमा , गंगा जल स्नान से मिलेगा भगवान विष्णु का आशीर्वाद और लाभ Magh Purnima Snan : इस बार माघी पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण होने से इस दिन स्नान और दान देने से कई गुना फल प्राप्त होगा. आध्यात्म के सबसे बड़े मेले का अंतिम प्रमुख स्नान पर्व माघी पूर्णिमा - [क्यों रखते हैं शिखा](https://bhaktisatsang.com/reason-of-shikha-in-hindu-dharma/) - क्यों रखते हैं शिखा हमारे देश भारत में प्राचीन काल से ही लोग सिर पे शिखा रखते आ रहे है ख़ास कर ब्राह्मण और गुरुजन। सिर पर शिखा रखने की परंपरा को इतना अधिक महत्वपूर्ण माना गया है कि , इस कार्य को आर्यों की पहचान तक माना लिया गया। यदि आप ये सोचते है - [जप ध्यान योग : घर बैठे मैडिटेशन करने की सरलतम विधि और उसके आध्यात्मिक लाभ](https://bhaktisatsang.com/japa-dhyan-yoga-meditation-hindi/) - जप ध्यान योग - Japa Meditation Japa Yoga : मन को केंद्रित करने, आंतरिक आत्म और युद्ध के तनाव से जुड़ने के लिए ध्यान (Meditation in Hindi) एक शक्तिशाली और प्रभावी तरीका माना जाता है | योग साधना (Yog Sadhna) में जप योग अपना विशिष्ट स्थान रखता है। अधिकतर धर्मो व मठो के लोग माला लिए किसी न किसी - [कुंडली के 12 भावो के अनुसार शनि शांति के ज्योतिषीय उपाय और लाल किताब के टोटके](https://bhaktisatsang.com/lal-kitab-shani-shanti-upay-jyotish-hindi/) - शनि शांति के ज्योतिषीय उपाय - Shani Shanti Ke Upay यदि आपको किसी भी कारण शनि (shani dev) के शुभ फल प्राप्त नहीं हो रहे हैं। फिर वह चाहे जन्मकुंडली (janam Kundali) में शनि ग्रह (Shani Grah) के अशुभ होने, शनि साढ़ेसाती (shani sade sati) या शनि ढैय्या के कारण है तो पोस्ट में दिये गये - [धार्मिक प्रश्नोतरी - Hinduism Quiz Questions & Answers](https://bhaktisatsang.com/hindu-dharm-religious-questions/) - धार्मिक प्रश्नोतरी - Hinduism Quiz Questions & Answers ईश्वर क्या है ? ईश्वर अखिल ब्रह्माण्डनायक सर्वव्यापी सर्वभूतान्तरात्मा एवं सर्व शक्तिमान् है । वेद किसे कहते हैं ? अनादि अनन्त अपौरुषेय नियतानुपर्वी वह शब्दराशि जिससे धर्म - अर्थ - काम - मोक्ष पुरुषार्थ चतुष्टय जाने जाते हैं , उसे वेद कहते हैं । इनकी परम्परा सृष्टि के आरम्भ काल - [आज है साल का पहला सूर्य ग्रहण, क्या पड़ेगा फर्क ज्योतिषानुसार 12 राशियों पर, जाने पौराणिक कथा](https://bhaktisatsang.com/surya-grahan-katha-solar-eclipse/) - सूर्य ग्रहण 2018 (Solar Eclipse 2018) 15 फरवरी को सूर्य ग्रहण (Surya Grahan) है जो इस साल का पहला सूर्य ग्रहण होगा.भौतिक विज्ञानं की दृस्टि से जब पृथ्वी और सूर्य के बीच में चन्द्रमा आ जाता है तो चन्द्रमा के कारण सूर्य की ज्योति ढक जाती है। इसी घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है। - [श्री हनुमान जी की 9 परम सिद्ध शक्ति पीठ भक्तिमय यात्रा](https://bhaktisatsang.com/hanuman-temple-mandir-hindi/) - हनुमान मंदिर, शक्ति पीठ - Hanuman Temple देश के कुछ प्रख्यात सिद्ध हनुमान मंदिर (Hanuman Temple) जो की हनुमान शक्ति पीठ (Hanuman Shakti Peeth) भी है के विषय में यहां विशिष्ट जानकारी प्रस्तुत की जा रही है। इन हनुमत तीर्थों (Hanuman Holy Place) की जानकारी से जहां भक्त जनों को आनंद मिलेगा, वहीं उन शक्ति - [ज्ञानयोग - ब्रह्म की अनूभूति होना ही वास्तविक ज्ञान है](https://bhaktisatsang.com/gyan-yoga-in-hindi/) - ज्ञानयोग क्या है - What Is Gyan yoga ज्ञानयोग से तात्पर्य है – ‘विशुद्ध आत्मस्वरूप का ज्ञान’ या ‘आत्मचैतन्य की अनुभूति’ है। इसे उपनिषदों में ब्रह्मानुभूति भी कहा गया है। और यह भी कहा गया है की - “ऋते ज्ञानन्न मुक्तिः” ज्ञान के विना मुक्ति संभव नहीं है – ज्ञानयोग के साहित्य में उपनिषत्, गीता, तथा - 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मेहंदीपुर बालाजी - Mehandipur Balaji राजस्थान के सवाई माधोपुर और जयपुर की सीमा रेखा पर स्थित मेंहदीपुर कस्बे में बालाजी का एक अतिप्रसिद्ध मन्दिर है जिसे श्री मेंहदीपुर बालाजी मन्दिर (Mehandipur Balaji Temple) के नाम से जाना जाता है । दो पहाडिय़ों के बीच की घाटी में स्थित होने के कारण इसे घाटा मेहंदीपुर (Ghata Mehandipur) - [यात्रा करे 51 शक्तिपीठो में से एक हिंगलाज माता के मंदिर की जिन्हे मुसलमान भी पूजते है](https://bhaktisatsang.com/hinglaj-mata-temple-mandir-pakistan/) - हिंगलाज माता - Hinglaj Mata हिंगलाज माता को एक शक्तिशाली देवी माना जाता है जो अपने सभी भक्तों के लिए मनोकामना पूर्ण करती है। जबकि हिंगलाज उनका मुख्य मंदिर है, मंदिरों के पड़ोसी भारतीय राज्य गुजरात और राजस्थान में भी उनके लिए समर्पित मंदिर बने हुए हैं। मंदिर को विशेष रूप से संस्कृत में हिंदू - [शतचंडी यज्ञ - बिगड़े हुवे ग्रहो को अपने पक्ष में करने का अचूक उपाय](https://bhaktisatsang.com/shatchandi-yagya-vidhi-hindi-शतचंडी-यज्ञ/) - शतचंडी यज्ञ - Shatchandi Yagya in Hindi माँ दुर्गा को शक्ति की देवी कहा जाता है। दुर्गा जी को प्रसन्न करने के लिए जिस यज्ञ विधि को पूर्ण किया जाता है उसे सतत चंडी यज्ञ बोला जाता है। नवचंडी यज्ञ को सनातन धर्म में बेहद शक्तिशाली वर्णित किया गया है। इस यज्ञ से बिगड़े हुए - 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[कैलाश मानसरोवर यात्रा - Kailash Mansarovar Yatra](https://bhaktisatsang.com/kailash-mansarovar-introduction-yatra-hindi/) - कैलाश मानसरोवर यात्रा - Kailash Mansarovar Yatra कैलाश मानसरोवर (Kailash Mansarovar Yatra) को शिव-पार्वती का घर माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार मानसरोवर (Mansarovar Lake) के पास स्थित कैलाश पर्वत ( Mount Kailash Yatra) पर शिव-शंभू का धाम है। कैलाश बर्फ़ से आच्छादित 22,028 फुट ऊँचे शिखर और उससे लगे मानसरोवर को 'कैलाश मानसरोवर - [सीता स्वयंवर में तोड़े गए धनुष का रहस्य - Sita Swayamvar Ramayan](https://bhaktisatsang.com/sita-swayamvar-ramayan-shiv-dhanush-hindi/) - सीता स्वयंवर और शिव धनुष - Sita Swayamvar Ramayan आप रामायण के सीता माता के स्वयंवर (Sita Swayamvar) प्रसंग से अवश्य ही अवगत होंगे, राजा जनक शिव जी के वंशज थे तथा शिव जी का धनुष उनके यहाँ रखा हुआ था। राजा जनक ने कहा था कि जो राजा उस धनुष की प्रत्यंचा को चढा - [प्रतिकूल ग्रहो को अपने पक्ष में करने के लाल किताब के टोटके और उपाय, ये रखे सावधानियां](https://bhaktisatsang.com/lal-kitab-ke-totke-or-savdhani/) - लाल किताब के उपाय - Lal Kitab Ke Upay लाल किताब के अद्भुत उपाय (Lal Kitab ke Achuk Upay) और चमत्कारी टोटके (Lal Kitab ke Totke) करने से शीघ्र लाभ प्राप्त होता है। ये अत्यन्त सरल और प्रभावशाली है। पर इन टोटकों औरउपायों को करतें समय निम्न बातें ध्यान रखनी आवश्यक हैं- लाल किताब का - [कुक्के सुब्रमण्या मंदिर, कर्नाटक - Kukke Subrahmanya Temple, Karnataka](https://bhaktisatsang.com/kukke-subramanya-temple-karnataka/) - कुक्के सुब्रमण्या मंदिर - Kukke Subramanya Temple भारत के प्राचीन तीर्थ स्थानों में से एक कुक्के सुब्रमण्या मंदिर, (Kukke Subramanya Temple Yatra) कर्नाटक राज्य के दक्षिणा कन्नड़ जिले मैंगलोर के पास के सुल्लिया तालुक के सुब्रमण्या के एक छोटे से गांव में स्थित है | यहां भगवान सुब्रमण्या को पूजा जाता है, भगवान् शिव के पुत्र - [बुद्ध पूर्णिमा - भगवान विष्णु के 9 वे अवतार को आज ही के दिन मोक्ष प्राप्त हुआ था](https://bhaktisatsang.com/buddha-purnima-jayanti-katha-puja-hindi/) - बुद्ध पूर्णिमा - Buddha Purnima वैशाख मास की पूर्णिमा को गौतम बुद्ध की जयंती के रूप में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है | इसलिए वैशाख पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा कहा जाता है | कहते है इसी दिन भगवान बुद्ध को बुद्धत्व की प्राप्ति हुई थी| जहां विश्वभर में बौध धर्म के करोड़ों अनुयायी और - [यज्ञ - शास्त्रानुसार यज्ञ के प्रकार और उनसे निजी जीवन में सम्पूर्ण लाभ और महत्व](https://bhaktisatsang.com/hindu-dharma-belief-vedic-yagya-yajna-hindi/) - यज्ञ - Yagya - Yajna in Hindi यज्ञ (Yagna) दो प्रकार के होते है- श्रौत और स्मार्त। श्रुति प्रतिपादित यज्ञो को श्रौत यज्ञ और स्मृति प्रतिपादित यज्ञो को स्मार्त यज्ञ कहते है। श्रौत यज्ञ में केवल श्रुति प्रतिपादित मंत्रो का प्रयोग होता है और स्मार्त यज्ञ में वैदिक (vedic yagya) पौराणिक और तांत्रिक मंन्त्रों का - [जानिए शरीर पर तिल का प्रभाव और उनका महत्व, आश्चर्यजनक किन्तु सत्य](https://bhaktisatsang.com/astrology-palmistry-mole-on-body-hindi/) - शरीरी पर तिल का प्रभाव और उनका महत्व - Mole on Body According to Astrology समुद्रशास्त्र में शरीर पर मौजूद तिलों का बड़ा महत्व बताया गया है। लाल तिल शरीर के जिस भी अंग पर होता है वह शुभ फलदायक होता है। लेकिन काला तिल शुभ भी होता है और अशुभ भी। मस्सों का भी - [अधिक मास - क्या होता है मलमास ? अधिक मास में क्या करें, क्या न करें ?](https://bhaktisatsang.com/adhik-maas-mal-maas-caluculation-2018/) - अधिक मास 2020 - Adhik mass 2020 अधिक शब्द जहां भी इस्तेमाल होगा निश्चित रूप से वह किसी तरह की अधिकता को व्यक्त करेगा। हाल ही में अधिक मास शब्द आप काफी सुन रहे होंगे। विशेषकर हिंदू कैलेंडर वर्ष को मानने वाले इस शब्द से खूब परिचित हैं। जब किसी मास में दिनों की संख्या - [वट सावित्री व्रत कथा, पूजा विधि - Vat Savitri Vrat Katha & Puja Vidhi](https://bhaktisatsang.com/vat-savitri-vrat-katha/) - वट सावित्री व्रत - Vat Savitri Vrat Vat Savitri Vrat - आज हम आपको वट सावित्री व्रत की कथा (Vat Savitri Vrat Katha) पूजा विधि (Vat Savitri Pooja Vidhi) के साथ उसके महत्व की जानकारी देंगे. वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat) एक ऐसा व्रत जिसमें हिंदू धर्म में आस्था रखने वाली स्त्रियां अपने पति - [नाक की आकृति के आधार पर व्यक्ति का स्वाभाव और ज्योतिषीय महत्व](https://bhaktisatsang.com/shape-of-nose-types-of-nose-astrology-hindi/) - नाक की आकृति के आधार पर ज्योतिषीय धारणा - Shape of Nose According To Astrology नाक किसी प्राणी के शरीर का अत्यंत महत्वपूर्ण अंक है क्योंकि इसी के सहारे वह प्राण-वायु को खींचता और अशुद्ध-मलयुक्त अपान वायु को बाहर फैंकता है अर्थात श्वसन करता है। नाक के सहारे ही वह सुगंध में सुवासित होता है - [गंगा दशहरा – इस दिन गंगा स्नान से नष्ट होंगे ये दशों पाप, मिलेगी मुक्ति और अक्षत पुण्य](https://bhaktisatsang.com/ganga-dussehra-2018-19-puja-vidhi-mantra-katha-hindi/) - गंगा दशहरा 2019 - Ganga Dussehra 2019 दुनिया की सबसे पवित्र नदियों में एक है गंगा। गंगा के निर्मल जल पर लगातार हुए शोधों से भी गंगा विज्ञान की हर कसौटी पर भी खरी उतरी विज्ञान भी मानता है कि गंगाजल में किटाणुओं को मारने की क्षमता होती है जिस कारण इसका जल हमेशा पवित्र - [जानिए भगवान ब्रह्मा के परिवार और वंशज का संक्षिप्त विवरण](https://bhaktisatsang.com/lord-brahma-family-history-story/) - ब्रह्मा के परिवार और वंशज का संक्षिप्त विवरण ब्रह्मा हिन्दू धर्म में एक प्रमुख देवता हैं। वे हिन्दुओं के तीन प्रमुख देवताओं (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) में से एक हैं। ब्रह्मा को सृष्टि का रचयिता कहा जाता है। सृष्टि का रचयिता से आशय सिर्फ ‍जीवों की सृष्टि से है। पुराणों ने इनकी कहानी को मिथकरूप में - [महाभारत काल के विपुलस्वान मुनि और उनके पुत्रों की अमर कथा](https://bhaktisatsang.com/pauranik-katha-vipulswami-spiritual-stroies-hindi/) - महाभारत काल के विपुलस्वान मुनि और उनके पुत्रों की अमर कथा द्वापर युग की बात है मंदनपाल नाम का एक पक्षी था । उसके चार पुत्र थे, जो बड़े बुद्धिमान थे । उनमें द्रोण सबसे छोटा था । वह बड़ा धर्मात्मा और वेद - वेदांग में पारंगत था । उसने कंधर की अनुमति से उसकी - [कांवड़ यात्रा – जानें शिव कांवड़ परंपरा के इतिहास और महत्व के बारे में](https://bhaktisatsang.com/kavad-yatra-2018-story-importance/) - कांवड़ यात्रा - Kavad Yatra Story & Importance भगवान शिव की आराधना के लिये फाल्गुन की महाशिवरात्रि के पश्चात सावन शिवरात्रि भी बाला भोलेनाथ की आराधना का खास पर्व माना जाता है। सावन माह तो विशेष रूप से भगवान शिव का प्रिय मास माना जाता है। दोनों ही अवसरों पर शिवभक्त गोमुख, ऋषिकेश से हरिद्वार - [श्री खाटू श्याम जी श्याम बाबा - पौराणिक कथा माहात्म्य और संक्षिप्त परिचय](https://bhaktisatsang.com/shri-khatu-shyam-baba-devotional-story/) - श्री खाटू श्याम जी - श्याम बाबा - Shri Khatu Shyam Ji श्री खाटू श्याम जिन्हें शीश का दानी के नाम से यह संसार पूजता है | खाटू श्याम महाभारत काल में पांडव महाबली भीम के पोत्र और घटोत्कच और माँ मोर्वी ( कामकटंकटा ) के पुत्र वीर बर्बरीक ने जब कुरुक्षेत्र के युद्ध में - [इन 5 योग से आपका कुंडली में लिखा राजयोग भी असफल हो जाता है, करे ये उपाय तुरंत ...](https://bhaktisatsang.com/astrology-jyotish-rajyog-labh-hani-hindi/) - भाग्य में राजयोग - Rajyog in Astrology ज्योतिष अनुसार कुंडली में नौवें और दशवें भाव का बहुत बड़ा महत्व है। नौवां भाव भाग्य का और दशवाँ कर्म का भाव माना जाता है। कोई भी व्यक्ति इन दोनों घरों की वजह से ही जीवन में सुख और समृधि प्राप्त करता है। कर्म से ही भाग्य का - [पुत्रदा या पवित्रा एकादशी : जानें, पूजा विधि और महत्व](https://bhaktisatsang.com/putrada-pavitra-ekadashi-puja-vidhi-shubh-muhurat/) - पुत्रदा एकादशी - Pavitra Ekadashi Vrat Katha सावन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा या पवित्रा एकादशी भी कहते हैं। इस बार यह एकादशी 11 अगस्त 2019 ,रविवार दिन को पड़ रही है। जैसा कि इसके नाम से पता चलता है कि इस एकादशी का व्रत पुत्र प्राप्ति के लिए किया जाता है। - [शुभ मुहूर्त: सम्पूर्ण जानकारी के साथ जाने महत्व और उपयोगिता](https://bhaktisatsang.com/shubh-muhurat-tithi-mahtva-hindu-dharma/) - शुभ मुहूर्त - Shubh Muhurat & Tithi मुहूर्त का मतलब है किसी शुभ और मांगलिक कार्य को शुरू करने के लिए एक निश्चित समय व तिथि का निर्धारण करना। अगर हम सरल शब्दों में इसे परिभाषित करें तो, किसी भी कार्य विशेष के लिए पंचांग के माध्यम से निश्चित की गई समयावधि को ‘मुहूर्त’ कहा - [अपनी पत्नी के चौथे पति हैं आप, आपसे पहले उनके हुए हैं तीन विवाह](https://bhaktisatsang.com/hindu-dharma-vivah-story-indian-mythology/) - हिन्दू धर्म विवाह शास्त्रोक्त आपकी होनेवाली पत्नी का विवाह आपसे कराने से पहले तीन अन्य से होता है, लेकिन आज के समय में कम ही वर और वधू इस बात को समझते हैं क्योंकि ज्यादातर को संस्कृत के श्लोक और विवाह के रिवाज की जानकारी नहीं होती है। कैसे होते हैं 1 महिला के 4 पति - [जानिए क्यों श्री गणेश यन्त्र से मनोवांछित फल और अभीष्ट सिद्धि की प्राप्ति निश्चित है](https://bhaktisatsang.com/lord-ganesh-yantra-mantra-benefits-hindi/) - श्री गणेश यन्त्र - Shri Ganesh Yantra अभिष्ट फलों की प्राप्ती हेतु यंत्र साधना का प्रतिकात्मक या चित्रात्मक रुप में उपयोग बहुत लाभदायक होता है, गणेश यंत्र सबसे महत्वपूर्ण, शुभ और शक्तिशाली यंत्र होता है जो न केवल लाभ देता है तथा व्यक्ति के लिए शुभ फलदायक होता है, गणेश भगवान को विघ्नहर्ता तथा सर्वकार्यों - [जानिए लैंगिक वर्जनाओं पर क्या कहते हैं हमारे पुराण और धर्मग्रंथ](https://bhaktisatsang.com/sexual-freedom-transgenders-in-indian-mythology/) - देश के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में बनी पांच सदस्यों की खंडपीठ ने 6 सितंबर 2018 को समलैंगिकता को अपराध माननेवाली धारा 377 को खत्म कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार, अब वयस्क व्यक्तियों द्वारा स्वेच्छा से बनाए गए समलैंगिक संबंध अपराध नहीं होंगे। वैसे आपको बता दें कि लैंगिक वर्जनाओं - [जाने सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार अंग फड़कने का रहस्य - बाजू, कंठ, आंख, पेट, पीठ, छाती, होंठ, पैर आदि](https://bhaktisatsang.com/ang-fadakna-matlab-अंग-फड़कना/) - अंग फड़कने का रहस्य - Ang Fadakne Ka Rahasya मनुष्य का शरीर काफी संवेदनशील होता है इसलिए छोटी से छोटी गतिविधि का एहसास भी हमारे शरीर को हो जाता है। और शायद यही कारण है की भविष्य में होने वाली घटना के बारे में शरीर पहले से ही आशंका व्यक्त कर देता है। मनुष्य के शरीर के - [आज के इस बदलते समय में कैसी शिक्षा और संस्कार बच्चो को देना चाहिए ? जानिए](https://bhaktisatsang.com/शिष्टाचार-अच्छे-संस्कार/) - बच्चों को सिखाएं शिष्टाचार और अच्छे संस्कार परिवार को बच्चों की प्रथम पाठशाला भी कहा जाता है। बच्चों मे अच्छे संस्कारो की नीव परिवार में ही पड़ती है। जब बच्चा पैदा होता है तब वह सीखना शुरु कर देता है। यही सही समय है जब बच्चों मे अच्छे संस्कार विकसित किये जा सकते है क्यूंकि - [घर के मंदिर और दैनिक पूजा-पाठ से जुड़े नियम, जानकारी और सावधानिया](https://bhaktisatsang.com/puja-ke-niyam-precaution-in-temple/) - घर के मंदिर और दैनिक पूजा-पाठ से जुड़े नियम पूजा-पाठ दैनिक जीवन से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण और शांतिपूर्ण कार्य है। जिसे सभी घरों में प्रातःकाल और सायंकाल किया जाता है। हिन्दू धर्म के अनुसार घर में पूजा पाठ करने से परिवार में शांति बनी रहती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा रहती है। पूजा - [नवग्रह पूजन - ग्रहों की दशा और विपरीत चाल को व्यवस्थित करने हेतु घर बैठे सरल समाधान](https://bhaktisatsang.com/नवग्रह-पूजन-navagraha-pujan-vidhi/) - नवग्रह पूजन - Navagraha Pujan Vidhi Hindi ज्योतिषशास्त्र के अनुसार ग्रहों की दशा और उनकी चाल का व्यक्ति के जीवन पर प्रभाव पड़ता है। व्यक्ति की जन्मतिथि, जन्मस्थान और जन्म के समय के अनुसार कुंडली बनाई जाती है जिसमे 9 ग्रहों की दशा का विवरण होता है और उन्ही ग्रहों की दशाओं की देखकर यह - [हाथ की रेखाओ से लगाए पता, किस देवी देवता की पूजा से प्राप्‍त होगा उत्‍तम फल](https://bhaktisatsang.com/hast-rekha-palmistry-predict-god-to-worship/) - हस्त रेखा ज्ञान - Palmistry Reading Hindi सनातन धर्म में 33 करोड़ देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। लेकिन ये आप कैसे जान पाएंगे किस देवता की पूजा करना आपके लिए अधिक मंगलकारी हो सकता है। इसका एक तरीका है आपकी हस्‍तरेखाएं। हस्‍तरेखाएं देखकर आप जान सकते हैं कि आपको किसकी पूजा करने से प्राप्‍त - [गुरु पुष्य योग 2019 - सभी अति शुभ कार्यो के लिए सर्वोत्तम योग](https://bhaktisatsang.com/guru-pushya-yog-shubhtithi/) - गुरु पुष्य योग 2019, गुरु पुष्य नक्षत्र, गुरु पुष्य अमृत योग मुहूर्त 2019, Guru Pushya, Guru Pushya Yoga Date 2019, Guru Pushya Auspicious Time on Thursday, Guru Pushya Yoga 2019, 2019 Pushya Nakshatra, गुरु पुष्य योग ... गुरु पुष्य योग 2019 - Guru Pushya Yog 2019 यह एक ऐसा खास ज्योतिषीय योग है जिस दौरान - [मूल नक्षत्र क्या है और मूल नक्षत्र में जन्मे जातक उसका क्या प्रभाव पड़ता है ?](https://bhaktisatsang.com/मूल-नक्षत्र-mula-nakshatra-in-hindi/) - मूल नक्षत्र - Mula Nakshatra In Hindi मूल नक्षत्र क्या है, मूल नक्षत्र का कुंडली पर प्रभाव, मूल नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति कैसे होते है, मूल नक्षत्र वाले व्यक्ति का स्वभाव कैसा होता है, मूल नक्षत्र के उपाय, मूल नक्षत्र के प्रभाव से बचने के ज्योतिष उपाय, मूल नक्षत्र और उनके प्रभाव, मूल नक्षत्र में - 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काली पूजा 2019 - Kali Puja 2019 काली पूजा 2019, निशीथ काल पूजा समय, काली पूजा का मुहूर्त, काली पूजा का महत्व, बंगाल काली पूजा, अमावस्या काली पूजा, काली पूजा विधि, 2019 में काली पूजा कब है, काली पूजा का शुभ मुहूर्त, निशीथ काल में काली पूजा, महानिशा पूजा, श्यामा पूजा, काली पूजा in 2019 - [गंगोत्री धाम यात्रा - Gangotri Temple Yatra](https://bhaktisatsang.com/chardham-gangotri-dham-yatra-hindi/) - गंगोत्री - Gangotri गंगोत्री (Gangotri Temple) पौराणिक काल से ही एक धार्मिक स्थल के रूप मे प्रसिद्ध रही है. मान्यता है की गंगोत्री धाम (Gangotri Dham) की यात्रा जो की उत्तराखंड के चार धाम (Uttarakhand Chardham Yatra) में प्रमुख है, करने पर आपको वही पुण्य मिलता है जो चार धाम यात्रा (Char Dham Yatra) करने - [कार्तिक पूर्णिमा 2019 - जानिए पौराणिक महत्व और व्रत पूजा विधि](https://bhaktisatsang.com/kartik-purnima-ganga-puja-vidhi-hindi/) - कार्तिक पूर्णिमा 2019 | Kartik Purnima 2019 हिंदू धर्म में कार्तिक के महीने का खास महत्‍व होता है, कार्तिक पूर्ण‍िमा (Kartik Purnima) इस साल 22 नवंबर को है | सभी 12 पूर्णिमाओं में कार्तिक मास (Kartik Mas) की पूर्णिमा अपना खास स्थान रखती है. इस पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा और गंगा स्नान पूर्णिमा (Ganga Snan - [बिना तोड़-फोड़ के वास्तु दोष दूर करने के उपाय](https://bhaktisatsang.com/vastu-in-hindi/) - बिना तोड़-फोड़ के वास्तु दोष दूर करने के उपाय एक सुंदर एवं दोषमुक्त घर हर व्यक्ति की कामना होती है। किंतु वास्तु विज्ञान के पर्याप्त ज्ञान के अभाव में भवन निर्माण में कुछ अशुभ तत्वों तथा वास्तु दोषों का समावेश हो जाता है। फलतः गृहस्वामी को विभिन्न आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक कष्टों का सामना करना पड़ता - [वास्तु दोष निवारण के कुछ सरल उपाय](https://bhaktisatsang.com/vastu-dosh-nivaran/) - वास्तु दोष निवारण के कुछ सरल उपाय | Easy Vastu Tips कभी-कभीदोषों का निवारण वास्तुशास्त्रीय ढंग से करना कठिन हो जाता है। ऐसे में दिनचर्या के कुछ सामान्य नियमों का पालन करते हुए निम्नोक्त सरल उपाय कर इनका निवारण किया जा सकता है। पूजा घर पूर्व-उत्तर (ईशान कोण) में होना चाहिए तथा पूजा यथासंभव प्रातः06 से 08 बजे के - [वास्तुशास्त्र और कार्यालय](https://bhaktisatsang.com/vastu-for-office/) - किसी भी वास्तु खंड में सर्वश्रेष्ठ स्थिति दक्षिण दिशा की मानी गई है। वास्तु संबंघी किसी भी पुराने वास्तुशास्त्र में दक्षिण-पश्चिम को प्रमुख स्थान नहीं दिया गया है। प्राचीन योजनाओं में दक्षिण-पश्चिम में शस्त्रागार के लिए स्थान बताया है। लगभग सभी शास्त्रों मे वास्तु खंड में दक्षिण दिशा तथा जन्मपत्रिका में दशम भाव (दक्षिण - 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[नारद जी द्वारा अर्जुन को बतलाया गया ब्रह्माण्ड के सभी लोको के गूढ़ रहस्य](https://bhaktisatsang.com/navgrah-position-and-patal-information/) - अर्जुन द्वारा ब्रह्माण्ड और उसके विभिन्न लोको के बारे में पूछे गए प्रश्नो के उत्तर देवमुनि नारद जी ने बड़ी सरलता से देते हुवे समझाया की – कुरुश्रेष्ठ ! भूमि से लाख योजन ऊपर सूर्य मंडल है । भगवान् सूर्य के रथ का विस्तार नौ सहस्त्र योजन है । इसकी धुरी डेढ़ करोड़ साढ़े सात - [किस मनोकामना के लिए कौन से देवी-देवता को पूजना चाहिए?](https://bhaktisatsang.com/kis-devta-ki-puja-kare-problem-solutions/) - मनोकामना पूर्ति के लिए किस देवता की पूजा करे हर व्यक्ति की अपनी-अपनी इच्छाएं और मनोकामनाएं होती हैं जिन्हे पूरा करने के लिए भगवान की भक्ति से बेहतर उपाय और कोई नहीं है। कहते हैं यदि सच्चे मन से भगवान की प्रार्थना और उपासना की जाए तो प्रभु सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। इसके अलावा - [पुरुष सूक्त - चातुर्मास में भगवान विष्णु के समक्ष पुरुष सूक्त का पाठ करने से मिलेगी कुशाग्र बुद्धि](https://bhaktisatsang.com/purush-sukt-mantra-path-hindi-mp3-download/) - पुरुष सूक्त मंत्र पाठ - Purush Sukt Mantra path Hindi Mp3 Download पुरुष सूक्त (Purush Suktam) का प्रयोग विशेष पूजन के क्रम में किया जाता है। षोडशोपचार पूजन के एक- एक उपचार के साथ क्रमशः एक- एक मन्त्र बोला जाता है। जहाँ कहीं भी किसी देवशक्ति का पूजन विस्तार से करना हो, तो पुरुष सूक्त - [हस्तरेखा शास्त्र अनुसार नाखूनों के गुण-अवगुणों द्वारा स्वास्थ्य की दुर्लभ जानकारी](https://bhaktisatsang.com/health-according-to-nails-palmistry/) - हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार नाखूनों के गुण और अवगुण हाथ की उंगलियों, पोरूवों आदि की तरह नाखनों का भी अपना अलग महत्व होता है। इनके रंग-रूप वर्ग-आकार आदि की देखकर कई प्रकार की बीमारियों व्याधियों इत्यादि का पता चल जाता है । प्रत्येक उंगली के नाखून का भी अलग महत्व समझा जाता है । महिलाओं - [गंगा मंत्र, स्त्रोतम और गंगा स्तुति - Ganga Mantra Strotram & Stuti](https://bhaktisatsang.com/mata-ganga-mantra-and-strotam/) - गंगा मंत्र, स्त्रोतम और गंगा स्तुति - Ganga Mantra Strotram & Stuti गङ्गास्तुती गङ्गादशहरास्तोत्रम् च श्रीगणेशाय नमः ॥ ब्रह्मोवाच -- ॐ नमः शिवायै गङ्गायै शिवदायै नमो नमः । नमस्ते रुद्ररूपिण्यै शाङ्कर्यै ते नमो नमः ॥ १॥ नमस्ते विश्वरूपिण्यै ब्रह्मामूर्त्यै नमो नमः । सर्वदेवस्वरूपिण्यै नमो भेषजमूर्तये ॥ २॥ सर्वस्य सर्वव्याधीनां भिषक्ष्रेष्ठ्यै नमोऽस्तु ते । स्थाणुजङ्गमसम्भूतविषहन्त्र्यै - [राम रक्षा स्त्रोत - Ram Raksha Stotra Lyrics & Benefits](https://bhaktisatsang.com/ram-raksha-strot-hindi-download-mp3/) - राम रक्षा स्त्रोत - Ram Raksha Stotra Lyrics & Benefits राम रक्षा स्त्रोत (Ram Raksha Stotra in Hindi) को नित्य 11 बार पढ़ना चाहिए. अगर रोज 45 दिन तक राम रक्षा स्त्रोत का पाठ (Ram Raksha Stotra in Hindi Download) करते हैं तो इसके फल की अवधि बढ़ जाती है। इसका प्रभाव दुगुना तथा दो - [सिद्धकुंजिका स्तोत्र - दुर्गा सप्तसती का फल देने वाला माँ दुर्गा का लघु स्त्रोत](https://bhaktisatsang.com/maa-durga-siddh-kunjika-strot/) - सिद्ध कुंजिका स्तोत्र Mp3 - Siddha Kunjika Stotram सिद्ध कुंजिका स्तोत्र Pdf (Kunjika Strotam) एक अत्यधिक प्रभावशाली स्तोत्र है जो माँ दुर्गा का है, माँ दुर्गा को जगत माता का दर्जा दिया गया है | माँ दुर्गा को आदिशक्ति भी कहा जाता है, इस स्तोत्र को सिद्ध कुंजिका स्तोत्र (Siddha Kunjika Strot Mp3) कहा गया है जिसमे - [राशि अनुसार अपने इष्टदेव का मंत्र जप करने से होंगे धन धान्य से परिपूर्ण](https://bhaktisatsang.com/rashi-mantra-dhan-money-astrology-hindi/) - राशिनुसार मंत्र - Mantra According Sun-sign आज जिस युग में हम जी रहे हैं, वहां धन अर्थात पैसा एक मौलिक आवश्यकता बन चुका है। तभी तो बोला जाता है कि “बाप बड़ा ना भईया, सबसे बड़ा रुपईया।” आपने कभी कल्पना की है कि अगर आपकी जेब में पैसा ना हो, आपका बैंक अकाउंट बैलेंस खत्म - [भगवान् दत्तात्रेय के अचूक मंत्र जो करेंगे सम्पूर्ण जीवन को सुखी और मनोवांछित फल से भरपूर](https://bhaktisatsang.com/lord-dattatreya-mantra-upay-hindi-me/) - गृह क्लेश निवारण मंत्र - Dattatreya Mantra दत्तात्रेय भगवान का चित्र स्थापित करे । चित्र के समुख एक पानीवाला नारियल मिट्टी के घड़े के ऊपर रखकर चारों तरफ पत्ते लगाकर कलश स्थापित करें और चार मुख वाला दीपक उसके सामने प्रज्ज्वलित करें। स्वयं पीले वस्त्र धारण करें और दत्तात्रेय भगवान को भी पीले वस्त्र अर्पित करें। - [वास्तु शास्त्र के अनुसार यहाँ हो आपका पूजा घर](https://bhaktisatsang.com/vastu-tips-in-hindi-for-house/) - वास्तु शास्त्र के अनुसार यहाँ हो आपका पूजा घर कोई भी व्यक्ति चाहे किसी भी धर्म का हो उसके भवन में पूजा कास्थान अवश्य ही होता है । हिदु धर्म में पूजा के लिए भवन में ईशान की दिशा को सर्वश्रेष्ठ माना गया है । चाहे भवन का मुख किसी भी दिशा में हो लेकिन पूजा घर यथासंभव ईशान कोण में बनाने से शुभ प्रभाव प्राप्त - [24 देवताओं के 24 चमत्कारी मंत्र](https://bhaktisatsang.com/24-chamtkarik-mantra-hindu-devi-devta/) - 24 देवताओं के 24 चमत्कारी मंत्र - Hindu God Mantra Pdf हिन्दू धर्म के अनुसार ताकत, सफलता व इच्छाएं पूरी करने के लिए इष्टसिद्धि बहुत आवश्यक है इष्टसिद्धि का मतलब है कि व्यक्ति जिस देव शक्ति के लिए श्रद्धा और आस्था मन में बना लेता है, उस देवता से जुड़ी सभी शक्तियां, प्रभाव और - [केतु अष्टोत्तर शतनामावलि - श्री केतु के 108 नाम और बीज मंत्र](https://bhaktisatsang.com/ketu-ashtotar-shat-namavali-mantra/) - केतु बीज मन्त्र - Ketu Beej Mantra Mp3 Free Download Ketu Beej Mantra - केतु ग्रह की शुभता के लिए प्रस्तुत है मंत्र, ग्रहों के बीज मंत्र बहुत ही शक्तिशाली मंत्र होते हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि किसी भी मंत्र की शक्ति उसके बीज मंत्र में समाहित होती है। केतु महादशा के - [राहु अष्टोत्तर शतनामावलि - श्री राहु के 108 नाम और बीजमंत्र](https://bhaktisatsang.com/rahu-ashtotar-shat-namavali-mantra/) - राहु बीज मन्त्र - Beej Mantra for Rahu Mp3 Download Free Beej Mantra for Rahu - नौ रत्ती का गोमेद रत्न पंचधातु या रत्न को लोहे की अंगूठी में जड़वा कर शनिवार के दिन राहु बीज मंत्र- "ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं स: राहवे नम:" (Beej Mantra for Rahu) का 108 बार उच्चारण कर अभिमंत्रित - [शुक्र अष्टोत्तरशतनामावलिः - श्री शुक्र के 108 नाम और बीज मंत्र](https://bhaktisatsang.com/sukra-ashtotar-shat-namavali-mantra/) - शुक्र बीज मन्त्र - Shukra Beej Mantra ॐ द्राँ द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः || Mantra for Shukra Graha - शास्त्रों में कहा गया है कि किसी भी मंत्र की शक्ति उसके बीज मंत्र में समाहित होती है। शुक्र ग्रह को तेज करने के लिए ओम द्राँ द्रीं द्रों सः शुक्राय नमः बीज मंत्र - [शास्त्रानुसार मनुष्य कल्याण हेतु समयानुसार किये जाने वाले कर्म और कर्तव्य](https://bhaktisatsang.com/karm-kartvya-hindu-dharma/) - मनुष्य कल्याण हेतु किये जाने वाले कर्म और कर्तव्य १. दो घटी अर्थात्‌ अड्तालीस मिनट का एक मुहूर्त होता है । पन्द्रह मुहूर्त का एक दिन और पन्द्रह मुहूर्त की एक रात होती है । सूर्योदय से तीन मुहूर्त का ' प्रात: काल ', फिर तीन मुहूर्त का ' संगवकाल ', फिर तीन मुहूर्त का - [हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार हाथ देखने के सर्वोत्तम तरीके](https://bhaktisatsang.com/read-hand-according-to-palmistry/) - हाथ किस तरह देखें ? | How To Read Hand According to Palmistry Hast Rekha Vigyan : हाथ देखने वाले (Palmistry Reader) को चाहिए कि हाथ देखने वाले व्यक्ति के सामने इस तरह बैठे कि जातक के हाथ पर अच्छी तरह रोशनी पड़ सकें । क्योंकि रोशनी जितनी अधिक और अच्छी होगी, हाथ की रेखाऐं - [कुम्भ मेला - भक्ति और सभ्यता का संगम तथा विश्व का सर्वोच्च तीर्थराज](https://bhaktisatsang.com/kumbh-mahakumbh-mela-hindi/) - कुम्भ मेला - Kumbha Mela कुम्भ पर्व (mahakumbh) विश्व मे किसी भी धार्मिक प्रयोजन हेतु भक्तो का सबसे बड़ा संग्रहण है । सैंकड़ो की संख्या में लोग इस पावन पर्व में उपस्थित होते हैं । कुम्भ (kumbh) का संस्कृत अर्थ है कलश, ज्योतिष शास्त्र में कुम्भ राशि का भी यही चिन्ह है । हिन्दू धर्म - [देवकृत लक्ष्मी स्तोत्रम](https://bhaktisatsang.com/devkrat-laxmi-strota/) - देवकृत लक्ष्मी स्तोत्रम - Shri Lakshmi Strotam Mantra Japa क्षमस्व भगवंत्यव क्षमाशीले परात्परे | शुद्धसत्त्वस्वरूपे च कोपादिपरिवर्जिते || उपमे सर्वसाध्वीनां देवीनां देवपूजिते | त्वया विना जगत्सर्वं मृततुल्यं च निष्फलम् || सर्वसंपत्स्वरूपा त्वं सर्वेषां सर्वरूपिणी | रासेश्वर्यधि देवी त्वं त्वत्कलाः सर्वयोषितः || कैलासे पार्वती त्वं च क्षीरोदे सिन्धुकन्यका | स्वर्गे च स्वर्गलक्ष्मीस्त्वं मर्त्यलक्ष्मीश्च भूतले || वैकुंठे - [श्री ब्रह्मवैवर्ते महालक्ष्मी कवचं](https://bhaktisatsang.com/mahalaxmi-kavach-mantra/) - श्री महालक्ष्मी कवच - Shri Mahalakshmi Kavach Hindi Lyrics नारायण उवाच सर्व सम्पत्प्रदस्यास्य कवचस्य प्रजापतिः। ऋषिश्छन्दश्च बृहती देवी पद्मालया स्वयम्।।१ धर्मार्थकाममोक्षेषु विनियोगः प्रकीर्तितः। पुण्यबीजं च महतां कवचं परमाद्भुतम्।।२ ॐ ह्रीं कमलवासिन्यै स्वाहा मे पातु मस्तकम्। श्रीं मे पातु कपालं च लोचने श्रीं श्रियै नमः।।३ ॐ श्रीं श्रियै स्वाहेति च कर्णयुग्मं सदावतु। ॐ श्रीं ह्रीं - [दशरथ कृत शनि स्तोत्र - Dashrath Krit Shani Stotra](https://bhaktisatsang.com/dashrath-krat-shani-strota/) - दशरथ कृत शनि स्तोत्र - Dashrath Krit Shani Stotra शनि स्तोत्र (Shani Stotra in Hindi) जो भी जातक शनि ग्रह, शनि साढ़ेसात‍ी, शनि ढैया या शनि की महादशा से पीड़ित हैं उन्हें दशरथ कृत शनि स्तोत्र (Shani Stotram) का नियमित पाठ करना चाहिए। इस पाठ को नियमित करने से भगवान शनि प्रसन्न होते हैं तथा - [बुध अष्टोत्तरशतनामवलिः - श्री बुध के 108 नाम और बीज मंत्र](https://bhaktisatsang.com/budh-ashtotar-shat-naam-mantra/) - बुध बीज मन्त्र ॐ ब्राँ ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः || बुध अष्टोत्तर शतनामवलिः - Budha Ashtottara Shatanamavali ॐ बुधाय नमः || ॐ बुधार्चिताय नमः || ॐ सौम्याय नमः || ॐ सौम्यचित्ताय नमः || ॐ शुभ: प्रदाय नमः || ॐ दृढव्रताय नमः || ॐ दृढफलाय नमः || ॐ श्रुतिजालप्रबोधकाय नमः || ॐ सत्यवासाय नमः || - [श्री नारायण कवचम](https://bhaktisatsang.com/shri-narayan-kavach/) - श्री नारायण कवचम - Shri Narayana Kavacham Mp3 & Lyrics Narayan Kavch - श्रीमद्भागवत के आठवे अध्याय में नारायण कवच के संबंध में न्यास व कवच पाठ बताया गया है, भय का अवसर उपस्थित होने पर नारायण कवच धारण करके अपने शरीर की रक्षा कर सकते है, नारायण कवच सही विधि से धारण करके - [शनि वज्र पञ्जर कवच](https://bhaktisatsang.com/shani-vajra-kavach-mantra/) - शनि वज्र पञ्जर कवच विनियोगः- ॐ अस्य श्रीशनैश्चर-कवच-स्तोत्र-मन्त्रस्य कश्यप ऋषिः, अनुष्टुप् छन्द, शनैश्चरो देवता, शीं शक्तिः, शूं कीलकम्, शनैश्चर-प्रीत्यर्थं जपे विनियोगः।। नीलाम्बरो नीलवपुः किरीटी गृध्रस्थितस्त्रासकरो धनुष्मान्। चतुर्भुजः सूर्यसुतः प्रसन्नः सदा मम स्याद्वरदः प्रशान्तः।।१ ब्रह्मोवाच श्रृणुषवमृषयः सर्वे शनिपीड़ाहरं महप्। कवचं शनिराजस्य सौरेरिदमनुत्तमम्।।२ कवचं देवतावासं वज्रपंजरसंज्ञकम्। शनैश्चरप्रीतिकरं सर्वसौभाग्यदायकम्।।३ ॐ श्रीशनैश्चरः पातु भालं मे सूर्यनंदनः। नेत्रे छायात्मजः - [सन्तानगोपाल स्तोत्र](https://bhaktisatsang.com/santan-gopal-strota/) - ।। सन्तानगोपाल मूल मन्त्र ।। ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते । देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ।। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय । सन्तानगोपालस्तोत्रं श्रीशं कमलपत्राक्षं देवकीनन्दनं हरिम् । सुतसंप्राप्तये कृष्णं नमामि मधुसूदनम् ।।१।। नमाम्यहं वासुदेवं सुतसंप्राप्तये हरिम् । यशोदाङ्कगतं बालं गोपालं नन्दनन्दनम्।। २ ।। अस्माकं पुत्रलाभाय गोविन्दं मुनिवन्दितम् - [देवी माहात्म्य - Devi Mahatmya](https://bhaktisatsang.com/devi-mahatmay-maa/) - देवी माहात्म्य - Devi Mahatmya ।। अष्टमोऽध्यायः ।। ॐ अरुणां करुणातरङ्गिताक्षीं धृतपाशाङ्कुशबाणचापहस्ताम्। अणिमादिभिरावृतां मयूखैरहमित्येव विभावये भवानीम्।। ‘ॐ’ ऋषिरुवाच ।। १।। चण्डे च निहते दैत्ये मुण्डे च विनिपातिते । बहुलेषु च सैन्येषु क्षयितेष्वसुरेश्वरः ।। २।। ततः कोपपराधीनचेताः शुम्भः प्रतापवान् । उद्योगं सर्वसैन्यानां दैत्यानामादिदेश ह ।। ३।। अद्य सर्वबलैर्दैत्याः षडशीतिरुदायुधाः । कम्बूनां चतुरशीतिर्निर्यान्तु स्वबलैर्वृताः ।। ४।। - [गणपति अथर्वशीर्ष](https://bhaktisatsang.com/ganpati-atharvashirsh/) - श्री गणपत्यथर्वशीर्ष – Shri Ganpatyatharvshirsh ॥ शान्ति पाठ ॥ ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवाः । भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः ॥ स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवांसस्तनूभिः । व्यशेम देवहितं यदायुः ॥ ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः । स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः ॥ स्वस्तिनस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः । स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु ॥ ॐ तन्मामवतु तद् वक्तारमवतु अवतु माम् अवतु वक्तारम् ॐ शांतिः । शांतिः - [मंगला गौरी स्तोत्रं](https://bhaktisatsang.com/mangla-gauri-strotam/) - श्री मंगला गौरी स्तोत्र मंगला गौरी स्तोत्रं ॐ रक्ष-रक्ष जगन्माते देवि मङ्गल चण्डिके । हारिके विपदार्राशे हर्षमंगल कारिके ॥ हर्षमंगल दक्षे च हर्षमंगल दायिके । शुभेमंगल दक्षे च शुभेमंगल चंडिके ॥ मंगले मंगलार्हे च सर्वमंगल मंगले । सता मंगल दे देवि सर्वेषां मंगलालये ॥ पूज्ये मंगलवारे च मंगलाभिष्ट देवते । पूज्ये मंगल भूपस्य मनुवंशस्य संततम् - [गणेश संकटनाशन स्तोत्र](https://bhaktisatsang.com/sankatnashan-strota-narad-puran/) - गणेश संकटनाशन स्तोत्र - Ganesh Sankatnashan Strotam प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम् भक्तावासं स्मरेनित्यम आयुष्कामार्थ सिध्दये ॥१॥ प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम् तृतीयं कृष्णपिङगाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम ॥२॥ लम्बोदरं पञ्चमं च षष्ठं विकटमेव च सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धुम्रवर्णं तथाषष्टम ॥३॥ नवमं भालचंद्रं च दशमं तु विनायकम् एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम ॥४॥ द्वादशेतानि नामानि त्रिसंध्यं य: - [गणेश सहस्त्र नाम](https://bhaktisatsang.com/ganesh-sahastra-naam-hindi/) - श्री गणेश सहस्त्र नामावली - Ganesh Sahasranamam भगवान श्री गणेश सभी देवताअों में प्रथम पूज्य माने गए हैं। उनके 1000 नामों का सस्वर पवित्र ध्वनि के साथ प्रति बुधवार उच्चारण किया जाए तो घर में मंगल कार्य होने लगते हैं। बच्चों को प्रगति मिलने लगती है और मुखिया को हर काम में सफलता प्राप्त होती है - [राधाकृष्णा वंदना](https://bhaktisatsang.com/radha-krishna-vandana/) - राधाकृष्णा वंदना त्वं माता कृष्ण प्राणाधिका देवी कृष्ण प्रेममयी शक्ति शुभे पुजितासी मया सा च या श्री कृष्णेन पूजिता कृष्ण भक्ति प्रदे राधे नमस्ते मंगल प्रदे हे माँ राधा, आप श्री कृष्ण के प्राण ( अधिष्ठात्री देवी ) हैं तथा आप ही श्री कृष्ण की प्रेममयी शक्ति तथा शोभा हैं | श्री कृष्ण भी - [तुम्मो मैडिटेशन – ठंड के दिनों में आपके शरीर को गर्म रखे](https://bhaktisatsang.com/tummo-meditation-in-hindi/) - तुम्मो मैडिटेशन - Tummo Meditation ठंड के दिनों में पूरा शरीर जकड़ा जकड़ा लगता है, कुछ करने का मन नहीं करता, हम बिस्तर पर ही पढ़े रहते है | ऐसे में ठण्ड के दिनों में बाहर निकलना तो भूल ही जाते है | लेकिन ऐसे से तो हम अस्वस्थ हो जायेंगे क्योकि हद से ज्यादा सोना - [नीव भराई से गृह निर्माण तक का सम्पूर्ण वास्तु ज्ञान और उपाय](https://bhaktisatsang.com/vastu-upay-griha-nirman-construction/) - गृह निर्माण, नींव पूजन, नींव भराई, नींव की खुदाई, नींव की भराई, नींव खोदने के लिए दिशा-विचार, गृह निर्माण में वास्तु विचार, गृह निर्माण में दिशा-विचार, नींव खुदाई से पहले दिशा की जानकारी कौन सी दिशा से शुरू करें और कौन सी दिशा से भराई करें, वास्तु पुरुष दिशा, वास्तुशास्त्र घर निर्माण, Grih aarambh kab kare नीव भराई से गृह - [108 उपनिषद के नाम और 11 मुख्य उपनिषद](https://bhaktisatsang.com/108-upanishad-in-hindi-pdf/) - 108 उपनिषद के नाम - 11 मुख्य उपनिषद हिन्दू धर्म के अनुसार कुल मिलाकर 108 उपनिषद् वर्णित है, यह सारे उपनिषद वास्तविक रूप से हिन्दू धर्म की दार्शनिक अवधारणा एवं विचारो का अद्भुत संग्रह है, जो अत्यंत प्राचीन एवं महत्त्वपूर्ण श्रुति धर्मग्रन्थ है | इन उपनिषदों में बौद्ध धर्म, जैन धर्म एवं सिख धर्म के बारे - [हनुमान सहस्त्रनाम स्त्रोत- Hanuman Sahasranamam](https://bhaktisatsang.com/shri-hanuman-sahastra-namavali-mantrasahasra/) - हनुमान सहस्त्र नामावली – Hanuman Sahasranamam हनुमत्सहस्त्रनाम (Hanuman Sahasranama) का वर्णन ‘बृहज्ज्योतिषार्णव ’ में किया गया है । सर्वप्रथम श्री रामचंद्रजी ने हनुमान सहस्त्रनाम (Lord Hanuman 1008 Names) से हनुमानजी की स्तुति की थी । हनुमान जी को अपना इष्ट देव मानने वालो को हनुमत्-सहस्त्रनाम का पाठ प्रतिदिन करना चाहिये । इस सहस्त्रनाम स्तोत्र का - [शनि अष्टोत्तरशतनाम](https://bhaktisatsang.com/shani-asthotarshat-namavali-mantra/) - शनि अष्टोत्तरशतनामावलिः शनि बीज मन्त्र ॐ प्राँ प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः ॥ ॐ शनैश्चराय नमः ॥ ॐ शान्ताय नमः ॥ ॐ सर्वाभीष्टप्रदायिने नमः ॥ ॐ शरण्याय नमः ॥ ॐ वरेण्याय नमः ॥ ॐ सर्वेशाय नमः ॥ ॐ सौम्याय नमः ॥ ॐ सुरवन्द्याय नमः ॥ ॐ सुरलोकविहारिणे नमः ॥ ॐ सुखासनोपविष्टाय नमः ॥ ॐ सुन्दराय - [राम सहस्त्रनाम स्त्रोतम - Ram sahastranaam Stotram](https://bhaktisatsang.com/ram-sahastranaam-strot-mantra/) - श्रीराम सहस्रनामस्तोत्र - Ram Sahastranaam Stotram श्रीराघवं दशरथात्मजमप्रमेयंसीतापतिं रघुकुलान्वयरत्नदीपम् आजानुबाहुमरविन्ददलायताक्षंरामं निशाचरविनाशकरं नमामि वैदेहीसहितं सुरद्रुमतले हैमे महामण्डपेमध्ये पुष्पकमासने मणिमये वीरासने सुस्थितम् अग्रे वाचयति प्रभञ्जनसुते तत्त्ं मुनिभ्यः परंव्याख्यान्तं भरतादिभिः परिवृतं रामं भजे श्यामलम् श्रीरामो रामभद्रश्च रामचन्द्रश्च शाश्वतः राजीवलोचनः श्रीमान् राजेन्द्रो रघुपुङ्गवः १ जानकीवल्लभो जैत्रो जितामित्रो जनार्दनः विश्वामित्रप्रियो दान्तः शत्रुजिच्छत्रुतापनः २ वालिप्रमथनो वाग्मी सत्यवाक् सत्यविक्रमः .सत्यव्रतो व्रतधरः सदा - [भुवनेश्वरी ध्यानम् मंत्र](https://bhaktisatsang.com/bhuvneshwari-dhyanam-mantra/) - भुवनेश्वरी ध्यानम् मंत्र उद्यद्दिनद्युतिमिन्दुकिरीटां तुङ्गकुचां नयनत्रययुक्ताम् । स्मेरमुखीं वरदाङ्कुशपाशां_ ऽभीतिकरां प्रभजे भुवनेशीम् ॥१॥ सिन्दूरारुणविग्रहां त्रिनयनां माणिक्यमौलिस्फुरत् । तारानायकशेखरां स्मितमुखीमापीनवक्षोरुहाम् ॥ पाणिभ्यामलिपूर्णरत्नचषकं संविभ्रतीं शाश्वतीं । सौम्यां रत्नघटस्थमध्यचरणां द्यायेत्परामम्बिकाम् ॥२॥ - [राम मानस के सिद्ध मंत्र](https://bhaktisatsang.com/ram-manas-ke-mantra/) - मानस के सिद्ध मंत्र : १॰ विपत्ति-नाश के लिये “राजिव नयन धरें धनु सायक। भगत बिपति भंजन सुखदायक।।” २॰ संकट-नाश के लिये “जौं प्रभु दीन दयालु कहावा। आरति हरन बेद जसु गावा।। जपहिं नामु जन आरत भारी। मिटहिं कुसंकट होहिं सुखारी।। दीन दयाल बिरिदु संभारी। हरहु नाथ मम संकट भारी।।” ३॰ कठिन क्लेश नाश के - [अथ ऋग्वेदोक्तं देवीसूक्तं मंत्र](https://bhaktisatsang.com/ath-rigvedoktam-devisuktam-maa/) - अथ ऋग्वेदोक्तं देवीसूक्तं मंत्र ॐ अहं रुद्रेभिर्वसुभिश्चराम्यहमादित्यैरुत विश्वदेवैः । अहं मित्रावरुणोभा बिभर्म्यहमि॓न्द्राग्नी अहमश्विनोभा ॥1॥ अहं सोममाहनसं बिभर्म्यहं त्वष्टारमु॒त पूषणं भगम् । अहं दधामि द्रविणं हविष्मते सुप्राव्ये ये॑ ‍ यजमानाय सुन्वते ॥2॥ अहं राष्ट्री सङ्गमनी वसूनां चिकितुषी प्रथमा यज्ञियानाम् । तां मा देवा व्यदधुः पुरुत्रा भूरिस्थात्रां भू~र्या॓वेशयन्तीम् ॥3॥ मया सो अन्नमत्ति यो विपश्य॑ति यः प्राणिति य - [नित्य क्रिया पूजन मंत्र](https://bhaktisatsang.com/kshesh-mantra/) - शयन का मन्त्र जले रक्षतु वाराहः स्थले रक्षतु वामनः । अटव्यां नारसिंहश्च सर्वतः पातु केशवः ।। क्षमा प्रार्थना मन्त्र मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं जनार्दन । यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे ।। अग्नि जिमाने का मन्त्र ॐ भूपतये स्वाहा, ॐ भुवनप, ॐ भुवनपतये स्वाहा । ॐ भूतानां पतये स्वाहा ।। कहकर तीन आहूतियाँ बने हुए भोजन - [श्री वेद स्तुति मन्त्र](https://bhaktisatsang.com/sri-ved-stuti-mantra/) - मंत्र क्या है मंत्र शब्द मन +त्र के संयोग से बना है !मन का अर्थ है सोच ,विचार ,मनन ,या चिंतन करना ! और “त्र ” का अर्थ है बचाने वाला , सब प्रकार के अनर्थ, भय से !लिंग भेद से मंत्रो का विभाजन पुरुष ,स्त्री ,तथा नपुंसक के रूप में है !पुरुष मन्त्रों के - [9 ग्रहों के मंत्र - Navgrah Mantra](https://bhaktisatsang.com/mantra-for-planets-grah/) - 9 ग्रहों के मंत्र - Navagraha Vedic Mantra सूर्य मन्त्र ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः || ( 3 या 5 माला का जप प्रतिदिन ) चन्द्र मन्त्र ॐ श्रीं क्रीं चं चन्द्राय नमः || ( 3 माला का जाप प्रतिदिन ) मंगल मन्त्र ॐ हुं श्रीं मंगलाय नमः || ( 3 माला का जाप प्रतिदिन - [भोजन सम्बन्दित मन्त्र जाप - Bhojan Mantra](https://bhaktisatsang.com/mantra-related-to-food/) - भोजन सम्बन्दित मन्त्र जाप - Bhojan Mantra अन्न ग्रहण करने से पहले विचार मन मे करना है किस हेतु से इस शरीर का रक्षण पोषण करना है हे परमेश्वर एक प्रार्थना नित्य तुम्हारे चरणो में लग जाये तन मन धन मेरा विश्व धर्म की सेवा में ॥ ॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं - [12 राशियों के मंत्र - 12 Rashi Mantra](https://bhaktisatsang.com/mantra-of-zodiac-signs/) - 12 राशियों के अनुसार मंत्र मेष राशि का मन्त्र || ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मी नारायणाय नमः || वृष राशि का मन्त्र || ॐ गोपालाय उत्तर ध्वजाय नमः || मिथुन राशि का मन्त्र || ॐ क्लीं कृष्णाय नमः || कर्क राशि का मन्त्र ||ॐ हिरण्य गर्भाय अवयक्त रुपिणे नमः || सिंह राशी का मन्त्र ||ॐ क्लीं बह्मणे - [वास्तु दोष निवारण के सरल घरेलु उपाय से करे सभी दोष दूर](https://bhaktisatsang.com/saral-vastu-dosh-nivaran-tips-hindi/) - वास्तु दोष निवारण के उपाय (Vastu Dosh Nivaran in Hindi) हर व्यक्ति की कामना होती है कि उसका एक सुंदर एवं वास्तु के अनुरूप घर हो जिसमें वह और उसका परिवार प्रेम, सुख शांति से जीवन जी सकें । लेकिन यदि उस भवन में कुछ वास्तु दोष (Vastu Dosh) हो तो भवन के निवासियों को को - [नर्मदाष्टकम् स्त्रोत - Narmada Ashtak](https://bhaktisatsang.com/narmada-strotam/) - नर्मदाष्टकम् स्त्रोत - Narmada Ashtakam सबिन्दुसिन्धुसुस्खलत्तरङ्गभङ्गरञ्जितं द्विषत्सु पापजातजातकारिवारिसंयुतम् । कृतान्तदूतकालभूतभीतिहारिवर्मदे त्वदीयपादपङ्कजं नमामि देवि नर्मदे ॥१॥ त्वदम्बुलीनदीनमीनदिव्यसम्प्रदायकं कलौ मलौघभारहारि सर्वतीर्थनायकम् । सुमच्छकच्छनक्रचक्रचक्रवाकशर्मदे त्वदीयपादपङ्कजं नमामि देवि नर्मदे ॥२॥ महागभीरनीरपूरपापधूतभूतलं ध्वनत्समस्तपातकारिदारितापदाचलम् । जगल्लये महाभये मृकण्डसूनुहर्म्यदे त्वदीयपादपङ्कजं नमामि देवि नर्मदे ॥३॥ गतं तदैव मे भवं त्वदम्बुवीक्षितं यदा मृकण्डसूनुशौनकासुरारिसेवि सर्वदा । पुनर्भवाब्धिजन्मजं भवाब्धिदुःखवर्मदे त्वदीयपादपङ्कजं नमामि देवि नर्मदे ॥४॥ अलक्षलक्षकिन्नरामरासुरादिपूजितं सुलक्षनीरतीरधीरपक्षिलक्षकूजितम् - [भगवान सूर्य मंत्र, स्त्रोतम - Surya Mantra, Strotam & Ashtakam](https://bhaktisatsang.com/lord-surya-mantra-and-strotam/) - सूर्य मंत्र - Surya Mantra 1) ॐ सूर्य देवं नमस्ते स्तु गृहाणं करूणा करं | अर्घ्यं च फ़लं संयुक्त गन्ध माल्याक्षतै युतम् || 2) सूर्य बीज मंत्र : ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः ॥ 3) श्री सूर्य मंत्र : आ कृष्णेन् रजसा वर्तमानो निवेशयत्र अमतं मर्त्य च | हिरणययेन सविता रथेना देवो याति भुवनानि - [कार्तिकेय,सुब्रमण्य मंत्र, स्त्रोतम](https://bhaktisatsang.com/kartikay-subramanyam-mantra-and-strotam-mantra/) - मंत्र ओम श्री सरवनभावया नमः स्त्रोत कार्तिकेय प्रज्ञाविवर्धन स्तोत्र योगीश्वरो महासेनः कार्तिकेयोऽग्निनंदनः । स्कंदः कुमारः सेनानीः स्वामी शंकरसंभवः ॥१॥ गांगेयस्ताम्रचूडश्च ब्रह्मचारी शिखिध्वजः । तारकारिरुमापुत्रः क्रौंचारिश्च षडाननः ॥२॥ शब्दब्रह्मसमुद्रश्च सिद्धः सारस्वतो गुहः । सनत्कुमारो भगवान् भोगमोक्षफलप्रदः ॥३॥ शरजन्मा गणाधीश पूर्वजो मुक्तिमार्गकृत् । सर्वागमप्रणेता च वांच्छितार्थप्रदर्शनः ॥४॥ अष्टाविंशतिनामानि मदीयानीति यः पठेत् । प्रत्यूषं श्रद्धया - [सरस्वती मंत्र, श्लोक, स्त्रोतम - Saraswati Mantra, Sloka & Stotram](https://bhaktisatsang.com/devi-saraswati-mantra-shlok-and-strotam/) - सरस्वती मंत्र, श्लोक, स्त्रोतम - Saraswati Mantra, Sloka & Stotram सरस्वती मंत्र - Saraswati Mantra, Saraswati Mantra Lyrics ॐ ऎं सरस्वत्यै ऎं नमः। सरस्वती मंत्र - Saraswati Mantra In Hindi ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः। सरस्वती गायत्री मंत्र - Saraswati Gayatri Mantra १ – ॐ सरस्वत्यै विधमहे, ब्रह्मपुत्रयै धीमहि । तन्नो देवी प्रचोदयात। - [सप्तवार व्रत क्यों किये जाते है ? क्या है हर दिन का अपना अलग महत्व, व्रत उपवास की दृष्टि से](https://bhaktisatsang.com/saptvaar-vrat-importance-hindi/) - सप्तवार व्रत क्यों ? कलियुग में जब पापकर्मो की अत्यधिक वृद्धि होने लगी और पुण्य क्षीण हुए, तब पुण्यार्जन के लिए अनेक प्रकार के व्रतों को करने का प्रचलन तेजी से बढा़ और वे लोक-जीवन में प्रसिद्ध हो गए। प्रत्येक वार के व्रत का अपना महत्व है तथा सभी व्रतों का फल बहुत प्रभावशाली सिद्ध - [नरसिंह मंत्र और स्त्रोत - Narsingh Mantra And Strotam](https://bhaktisatsang.com/narsinh-strotam/) - नरसिंह मंत्र और स्त्रोत - Narsingh Mantra And Strotam नरसिंह स्त्रोत - Narsingh Strotam लक्ष्मीनृसिंह करावलम्बम् स्त्रोतम: श्रीमत्पयोनिधिनिकेतन चक्रपाणे भोगीन्द्रभोगमणिरञ्जितपुण्यमूर्ते । योगीश शाश्वत शरण्य भवाब्धिपोत लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ॥१॥ ब्रह्मेन्द्ररुद्रमरुदर्ककिरीटकोटि_ सङ्घट्टिताङ्घ्रिकमलामलकान्तिकान्त । लक्ष्मीलसत्कुचसरोरुहराजहंस लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ॥२॥ संसारघोरगहने चरतो मुरारे मारोग्रभीकरमृगप्रवरार्दितस्य । आर्तस्य मत्सरनिदाघनिपीडितस्य लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ॥३॥ संसारकूपमतिघोरमगाधमूलं सम्प्राप्य दुःखशतसर्पसमाकुलस्य । - [स्वस्थ रहने के 5 सरल वास्तु उपाय](https://bhaktisatsang.com/vaastu-tips-for-health/) - स्वस्थ रहने के 5 सरल वास्तु उपाय | Vastu tips For Health at Home स्वस्थ शरीर में ही ईश्वर का निवास होता है। यदि कोई व्यक्ति स्वस्थ ही नहीं है, तो ऐसे में वह ईश्वर की बनाई, इतनी प्यारी मानव शरीर रचना का आनंद ही नहीं उठा सकता है। बेशक आप करोड़पति हों या अरबपति हों, अब - [चन्द्र अष्टोत्तर शतनामावली - Chandra Ashtottara Shatanamavali](https://bhaktisatsang.com/chandra-ashotar-shat-naam-mantra/) - चन्द्र अष्टोत्तर शतनामावली - Chandra Ashtottara Shatanamavali चंद्र अष्टोत्तर शतनामावली (Mantra of Chandra) या चन्द्र बीज मन्त्र (Chandra Beej Mantra) के नियमित पाठ करने से आप चन्द्र ग्रह द्वारा दिए गए अशुभ फल या प्रभाव को क्षीण कर उसके दुष्प्रभाव से बच सकते हैं, अगर चन्द्र आपकी कुंडली में नीच या अशुभ भाव में हो - [ब्रह्म पुराण - Brahma Purana in Hindi](https://bhaktisatsang.com/brahma-puran-hindi/) - ब्रह्म पुराण - Brahma Purana Hindi ब्रह्मपुराण (Brahma Purana) को गणना की दष्ष्टि से प्रथम माना जाता है। ब्रह्म पुराण (Brahma Purana PDF Hindi) में साकार ब्रह्म की उपासना का विधान है। ब्रह्मपुराण में भगवान श्रीकष्ष्ण को ब्रह्म स्वरूप माना गया है। उनके चरित्र का निरूपण होने के कारण यह पुराण ब्रह्म पुराण कहा जाता - [विष्णु पुराण सम्पूर्ण कथा - Vishnu Puran Katha in Hindi](https://bhaktisatsang.com/vishnu-puran-hindi/) - विष्णु पुराण - Vishnu Puran Katha Hindi विष्णु पुराण (Vishnu Puran) -18 Puran में विष्णु पुराण (Vishnu Puran Hindi) का आकार सबसे छोटा है, विष्णु पुराण (Vishnu Puran Ki Katha) में भगवान विष्णु के चरित्र का विस्तृत वर्णन है। विष्णु पुराण (Vishnu Puran Katha) के रचियता ब्यास जी के पिता पराशर जी हैं। विष्णु पुराण - [गरुड़ पुराण सम्पूर्ण कथा अनुसार नरक - Garud Puranam](https://bhaktisatsang.com/garuda-purana-hindi-pdf-download-free/) - गरुड़ पुराण कथा अनुसार नरक - Garud Puran Pdf गरुड़ पुराण (Garud Puran) अनुसार नरक वह स्थान है जहां पापियों की आत्मा दंड भोगने के लिए भेजी जाती है। गरुण पुराण (Garud Puran Katha) में वर्णित दंड के बाद कर्मानुसार उनका दूसरी योनियों में जन्म होता है। स्वर्ग धरती के ऊपर है तो नरक धरती - [कूर्म पुराण - Kurma Purana In Hindi](https://bhaktisatsang.com/kurma-puran-in-hindi/) - कूर्म पुराण - Kurma Purana in Hindi कूर्म पुराण (Kurma Purana) : हिन्दू धर्म की मान्यता अनुसार यह माना जाता है कि भगवान् विष्णु ‘कूर्मावतार’ (Kurma Avatar) अर्थात् कच्छप रूप में समुद्र मंथन के समय मन्दराचल को अपनी पीठ पर धारण करने के प्रसंग में राजा इन्द्रद्युम्न को ज्ञान, भक्ति और मोक्ष का उपदेश देते है| कूर्म पुराण संहिता : - [स्कन्द पुराण कथा - Skanda Puran](https://bhaktisatsang.com/skand-puran-hindi/) - Skanda Purana - स्कन्द पुराण स्कन्द पुराण (Skand Puran) शैव सम्प्रदाय का पुराण हैं यह अठारह पुराणों में सबसे बड़ा है। स्कन्द पुराण (Skand Puran Hindi) के छह खण्ड हैं- माहेश्वर खण्ड, वैष्णव खण्ड, ब्रह्म खण्ड, काशी खण्ड, अवन्तिका खण्ड और रेवा खण्ड। शिव-पुत्र का नाम ही स्कन्द है। स्कन्द का अर्थ होता है- क्षरण - 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[हिन्दू धर्म के सभी आध्यात्मिक ग्रंथो को करे डाउनलोड बिलकुल फ्री](https://bhaktisatsang.com/download-hindi-ved-puran-upnishad-geeta/) - Free Download वेद-पुराण-उपनिषद-pdf पुराण डाउनलोड ( Puran in Hindi Download) अग्नि पुराण (Download) श्रीमद भागवत पुराण (Download) भविष्य पुराण (Download) ब्रह्मा पुराण (Download) ब्रह्माण्ड पुराण (Download Part I) (Download Part II) गरुड पुराण (Download) कूर्म पुराण (Download) लिंग पुराण (Download) मार्कंड़य पुराण (Download) मत्स्य पुराण (Download Part I) (Download Part II) नारद पुराण (Download) पद्म - [हाथ की बनावट से मनुष्य की प्रवृति, गुण-अवगुण और चरित्र का वर्गीकरण](https://bhaktisatsang.com/type-properties-of-hand-in-palmistry/) - Hast Rekha Gyan - व्यक्ति गुणों के आधार पर हाथ का वर्गीकरण Hast Rekha Gyan : हाथ की बनावट यानी प्रकार करपृष्ठ आदि से मनुष्य की प्रवृति शक्ति, बौद्विक स्तर एवं नैतिक चरित्र का पता चलता हैं। हाथ की आकृति एवं पर्वतों की रचना (Hast Rekha Vigyan) एवं रेखाचिन्हृ प्रत्येक हाथ में अलग-अलग होते हैं, - [क्यों ईशान मुखी भवन की तुलना कुबेर देव की नगरी अलकापुरी से की जाती है](https://bhaktisatsang.com/ishan-mukhi-bhawan-vastu-tips-hindi/) - ईशान मुखी भवन (Ishan Mukhi Bhawan) : जिस भवन के सामने - मुख्य द्वार के सामने ईशान दिशा ( उत्तर पूर्व दिशा ) की ओर मार्ग होता है ऐसे भवन को ईशान मुखी भवन कहा जाता है। इस तरह के भवन के शुभ अशुभ के परिणाम का प्रभाव सीधे गृह स्वामी एवं उसकी संतान पर - [ब्रह्म मुहूर्त क्या है ? और क्यों इसमें निद्रा को निषेध बतलाया गया है](https://bhaktisatsang.com/brahma-muhurat-nidra-importance-hindi/) - सूर्योदय से पूर्व दिन में दो प्रहार होते है, ब्रहम मुहूर्त उन्ही दो प्रहर में से पहले प्रहर को कहा जाता है. उसके बाद वाले समय को विष्णु मुहूर्त कहते है. अगर समय की बात की जाये तो जिस वक़्त सुबह होती है लेकिन सूर्य अभी दिखाई नही दे रहा होता है, उस वक़्त हमारी - [धार्मिक कार्यों में अलग अलग दिशाओ का वैज्ञानिक महत्व और आरोग्य लाभ](https://bhaktisatsang.com/dharmik-karyo-me-dishaye-hindu-dharma/) - धार्मिक कार्यों में अलग दिशाएं ? शास्त्रों अनुसार दस दिशाएं मानी गई है- चार मुख्य, चार उपदिशा एवं ऊध्र्व-अधवरा। सूर्योंदय को पूर्व दिशा और सूर्यास्त को पश्चिम दिशा मानकर आठ अन्य दिशाएं निश्चित की गई हैं। प्रातः संध्या में देव कार्य, यज्ञ कार्य, आचमन और प्राणयाम के लिए पूर्व दिशा की तरफ मुख किया जाता - [क्यों शिखा (चोटी) को हिंदू धर्म का एक उपलक्षण माना गया है ?](https://bhaktisatsang.com/shikha-choti-hindu-dharma-importance/) - शिखा (चोटी) का महत्व क्यों ? शिखा (चोटी) को हिंदू धर्म का एक उपलक्षण माना गया है। प्रकृति एवं विज्ञान के नियमों को ध्यान में रखकर ‘शिखा शास्त्र’ की रचना की गई है। शिखा संस्कार को ही चूडा़-कर्म कहा गया है। शिखा का भेद समझने के लिए हमें सर्वप्रथम मस्तक की रचना समझनी चाहिए। मस्तक - [हिन्दू धर्मानुसार उपवास ( व्रत ) क्यों किया जाता है, जानिए वैज्ञानिक कारण](https://bhaktisatsang.com/fasting-vrat-in-hindu-dharma/) - उपवास ( व्रत ) क्यों ? | Fasting in Hinduism उपवास का व्यावहारिक अर्थ है अन्न ग्रहण न करना य उपवास के पदार्थ खाना। उपवास में आलस्य, निद्रा एवं पित्त विकार आदि का उद्भव न हो; इसलिए कम अन्न भक्षण करना आवश्यकत रहता है। उपवास अच्छी तरह हो, इसके लिए दिनभर कुछ न खाकर केवल - [गृह प्रवेश और भूमि पूजन, शुभ मुहूर्त और विधिपूर्वक करने पर रहेंगे दोष मुक्त और लाभदायक](https://bhaktisatsang.com/bhumi-pujan-grah-pravesh-vidhi-muhurat-hindi/) - गृह प्रवेश और भूमि पूजन - Grah Pravesh & Bhumi Pujan भवन सम्बन्धी कार्यों की शुरुआत के लिए शुभ माह का चयन करना अति महत्वपूर्ण होता है । भारतीय कैलेण्डर के अनुसार फाल्गुन, वैसाख एवं सावन के महीने भूमिपूजन, शिलान्यास एवं गृह निर्माण ( Grah Nirman ) हेतु के लिए सर्वश्रेष्ठ महीने माने गए हैं। - [पुराणों के अनुसार मानव जीवन में संकल्प का महत्व क्यों और कैसे ?](https://bhaktisatsang.com/संकल्प-का-महत्व-क्यों/) - संकल्प का महत्व क्यों और कैसे ? बहुत-सी इच्छाओं में से किसी एक इच्छा का चुनाव कर उसे मुर्त रूप देने का नाम ही संकल्प है। अतःसंकल्पपूर्वक किए गए कार्य का फल अवश्य मिलता हैं। ‘मनु स्मृति’ में कहा गया है- संकल्पमूलः कामौ वै यज्ञाः संकल्प सम्भवाः व्रता नियम कर्माश्च सर्वे संकल्पजाः स्मृताः।। यह भी - [मंत्र जप में माला का प्रयोग क्यों किया जाता है ?](https://bhaktisatsang.com/mantra-japa-mala-hindi/) - मंत्र जप में माला का प्रयोग जप करते समय दाएं हाथ की मध्यता उंगली के बीच पोर पर माला रखकर अंगूठे से माला के एक-एक मनके अपनी ओर खींचनी होती है। खीचते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि माला के मनके एक-दूसरे से न टकराएं। इसलिए माला के मनके गुथे हुए होने चाहिए। जप करते - [ओंकार सर्वश्रेष्ठ क्यों ?](https://bhaktisatsang.com/ओंकार-सर्वश्रेष्ठ-क्यों/) - ओंकार सर्वश्रेष्ठ क्यों ? ‘ योग दर्शन ’ में कहा गया है ऊॅं साक्षात् ब्रह्म एतद्वि एवं अक्षर परम्। एतद्धयेवाक्षरं ज्ञात्वा यो यदिच्छति तस्य तत्।। ‘ओेंकार ’ की संकल्पना के विषय में भारत की सभी भाषाओं में प्रचुर साहित्य उपलब्ध है। उपनिषद् एवं योग ग्रंथों में ओंकार विषयक उद्बोधक उपपत्ति बताई गई है। ‘श्रीमद्भगवद् गीता ’ - [भैरव उपासना क्यों ? और क्यों विष्णु-स्वरूप होकर भी ये साक्षात् शिव के दूसरे रूप माने जातें है](https://bhaktisatsang.com/भैरव-उपासना-kaal-bhairav-upasana/) - भैरव उपासना क्यों ? धर्म-शास्त्रों में भैरव को एक विशिष्ट देवता कहा गया है। इनका एक स्वतंत्र आगम है, जो ‘भैरव आगम’ के नाम से जाना जाता है। भैरव को भगवान विष्णु तथा भगवान शिव के बराबर माना जाता हैं। विष्णु-स्वरूप होकर भी ये साक्षात् शिव के दूसरे रूप माने जातें हैं। शिवपुराण में कहा - [भगवन शिव की आराधना हेतु महेश नवमी उत्सव क्यों मनाया जाता है](https://bhaktisatsang.com/mahesh-navami-festival-story-hindi/) - महेश नवमी उत्सव क्यों ? हिंदू समाज का महेश्वरी वर्ग महेश (शिव) नवमी उत्सव धूमधाम से मनाता है। कहा जाता है कि इस वंश की उत्पत्ति शिव यानी महेश द्वारा हुई थी। इस उत्सव पर रूद्राभिषेक करके भगवान शिव की या़त्रा निकालीस जाती हैं किसी समय खड्गलसेन नाम का राजा एक राज्य में सिंहासनारूढ़ था। - [अकालमृत्यु और असाध्य रोगों से मुक्ति के लिए महामृत्युंजय मंत्र जप](https://bhaktisatsang.com/mahamrityunjay-japa-mantra-hindi/) - महामृत्युंजय मंत्र जाप क्यों ? धर्मग्रंन्थों में भगवान शिव कों प्रसन्न करने, अकालमृत्यु से बचने तथा असाध्य रोगों से मुक्त होने के लिए भगवान शिव केे महामृत्युंजय मंत्र के जप का उल्लेख किया गया हैं। इस जप के प्रभाव से व्यक्ति मौत के मुंह में जाने से भी बच जाता हैं। यदि मारक ग्रह दशाओं - [भगवान महाकाल जिस पर समस्त ब्रम्हांड गति शील है](https://bhaktisatsang.com/shiv-mahakal-sadhna-hindi/) - भगवान शंकर काल के भी काल है अर्थात महाकाल है | महाकाल तो वह धुरी है, जिस पर समस्त ब्रम्हांड गति शील है | महा काल में ही या समस्त चराचर जीव जगत विश्व व्याप्त है, महाकाल ही शिव का ही एक रूप है, जो की खुद शिव से सह्त्र गुना जादा तेजेस्विता युक्त है - [शास्त्रानुसार आरोग्य के लिए कुश का आसन, भस्म का लेपन और पंचगव्य की महत्ता](https://bhaktisatsang.com/पंचगव्य-भस्म-लेपन-कुश-आसन/) - कुश के आसन की महत्ता क्यों ? पुराणों के अनुसार जब भगवान विष्णु वाराह रूप धारण कर समुद्र में छिपे असुर हिरण्याक्ष का वध कर बाहर निकले तो उन्होनें अपने बालों को झटका। उस समय उनके कुछ रोम पृथ्वी पर गिर । वही कुश के रूप में प्रकट हुए। कुश कुचालक है, इसलिए इसके आसन - [धार्मिक क्रियाओ में पिले वस्त्र, खास धातु के पात्र और आसन क्यों आवश्यक और लाभदायक होता है ? जानिए](https://bhaktisatsang.com/dharmik-kriya-karm-hindu-dharma/) - धार्मिक क्रियाओं में पीत-वस्त्र धारण क्यों ? आजकल कार्यानुसार वस्त्र धारण की धारण विविध क्षेत्रों में प्रचलित हो गई हैं। इसमें वातावरण निर्माण के लिए विशिष्ट पोशाक की आवश्यकता होती है। देव कार्य-पूजा, होम तथा नित्य कर्म और देव पितृकार्य-श्रद्वा आदि धार्मिक प्रसंगों के समय रोेजाना के वस्त्र शरीर पर रखना उचित नहीं है। इसके - [क्यों भगवान विष्णु को जगत का पालनहार कहा जाता है ?](https://bhaktisatsang.com/about-lord-vishnu-shri-hari-hindi/) - Bhagwan Vishnu - भगवान विष्णु की साधना क्यों ? Lord Vishnu : सृष्ट्रि की उत्पति का कार्य जहां ब्रह्म द्वारा संचालित होता है, वहा जीवन के पश्चात मृत्यु तक पालन-पोषण का प्रबंध विष्णु देखते है। साधक को यदि पूर्ण शांति, परम वैराग्य और साक्षात् सामीप्य एवं कृपा की आवश्यकता है, तो इसके लिए वैकुण्ठाधिपति विष्णु - [अंक ज्योतिष 2020 - जाने कौन से मूलांक वालो की होगी जीवन के कोनसे वर्ष में बल्ले बल्ले](https://bhaktisatsang.com/numerology-ank-jyotish-astrology-bhavishya-hindi/) - अंक ज्योतिष - Numerology 2020 Numerology By Date of Birth - न्यूमरोलॉजी यानी अंक ज्योतिष से भी भविष्य के बारे में काफी कुछ जाना जा सकता है। अंक ज्योतिष के माध्यम से आप कई समस्याओं के समाधान जान सकते हैं, साथ ही ये भी जान सकते हैं कि आपकी भाग्योदय किस साल में होगा। ये - [सनातन धर्म में शास्त्रानुसार नामकरण पूजा विधि](https://bhaktisatsang.com/नामकरण-naamkaran-sanskar-puja-vidhi/) - सनातन धर्म में शास्त्रानुसार नामकरण पूजा विधि नाम में क्या रखा है? अपने नाटक में रोमैंटिकता लाने के लिये शेक्सपियर ने ये बात लिख तो दी कि नाम में क्या रखा है लेकिन वे इस बात पर गौर करना भूल गये होंगे कि यदि उनका नाम नहीं होता तो उनकी कोई पहचान नहीं होती और - 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[कोरोना वायरस से बचने के वास्तु उपाय - Vastu Tips for corona Virus](https://bhaktisatsang.com/vastu-tips-upay-corona-virus-hindi/) - कोरोना से बचने के वास्तु उपाय - Vastu Tips for Corona इन दिनों जहां कोरोना वायरस (Vastu Upay Corona Virus) का खौफ पूरी दुनिया में फैला हुआ है। वहीं इससे पहले भी कई घरों में लोग अक्सर बीमारी से परेशान रहते थे। इस संबंध में क्या कभी आपने सोचा है कि आपके घर में लोग - [कमजोर छात्रों के लिए ज्योतिषीय उपाय - Remedies For Weak Students](https://bhaktisatsang.com/pariksha-me-pass-hone-ka-mantra-upay/) - कमजोर छात्रों के लिए उपाय - Remedies For Weak Students Students Tip in Hindi - भगवान ने हर मनुष्य को एक विशेष दिमागी क्षमता देकर ही धरती पर भेजा है। कोई दिमाग से तेज है तो कोई अन्य कार्यों में फुर्तीला है। परीक्षा में सफल होना, हर किसी की मनोकामना होती है। लेकिन कभी-कभी मेहनत - [भगवान नृसिंह जयंती पूजा मंत्र और उपाय](https://bhaktisatsang.com/narasimha-jayanti-mantra-upay/) - नृसिंह जयंती - Narasimha Jayanti वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को नृसिंह जयंती (mantra for narasimha) के रूप में मनाया जाता है. भगवान श्री नृसिंह शक्ति तथा पराक्रम के प्रमुख देवता हैं, पौराणिक मान्यता एवं धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इसी तिथि को भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार लेकर दैत्यों के राजा हिरण्यकशिपु का - [अर्जुन और उलूपी की प्रेमकथा और पुत्र इरावन का बलिदान](https://bhaktisatsang.com/arjun-ulupi-vivah-iravan-story-hindi/) - अर्जुन और उलूपी विवाह - Arjun Ulupi Vivah Arjun Son Iravan - महाभारत से जुड़े ऐसे कई प्रसंग है जो बहुत कम लोग जानते हैं. सभी को अर्जुन की सिर्फ दो ही पत्नी, द्रौपदी और सुभद्रा के बारे में पता है, लेकिन आपको ये जानकर आश्चर्य होगा की इन दो के अलावा दो और पत्नी - [महाभारत युद्ध के बाद की कथा - After Mahabharata War](https://bhaktisatsang.com/after-mahabharat-war-yuddha-ke-baad/) - महाभारत के युद्ध के बाद की कथा - After Mahabharata What Happened After Mahabharata War - महाभारत युद्ध को कुरुक्षेत्र में लड़ा गया था। कौरवों और पांडवों की सेना भी कुल 18 अक्षोहिनी सेना थी जिनमें कौरवों की 11 और पांडवों की 7 अक्षौहिणी सेना थी। श्री राम के पुत्र लव और कुश की 50वीं - [महाभारत के पात्रो के अनसुने रहस्य - Secrets Of the Mahabharata](https://bhaktisatsang.com/secrets-of-mahabharat-rahsya-hindi/) - महाभारत के अनसुने रहस्य - Secrets Of the Mahabharata mahabharat facts - अगर आपने गौर किया हो तो महाभारत के सभी पात्रो का जन्म बड़ा ही विचित्र था कोई भी सरल तरीके से नहीं जन्मा था, इसका हर एक पात्र अपने आप में आकर्षक और रहस्यों से भरा है। महाभारत से जुड़े कई ऐसे तथ्य - 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[ज्योतिष राशिनुसार रुद्राक्ष धारण का उपाय और लाभ](https://bhaktisatsang.com/rashi-anusar-rudraksh-dharan-vidhi-upay-hindi/) - रुद्राक्ष धारण का उपाय और लाभ - Rudraksha Power & Benefits in Hindi 1. मेष राशि (Aries) मेष राशि में जन्म लेने वाले जातकों में पेट के विकार, रक्तचाप, शीश रोग व गुर्दे के रोग प्रायः होते रहते हैं। अतः बीमारियों व संकटों से बचे रहने के लिए इन्हे तीनमुखी रुद्राक्ष को छोड़कर कोई भी - [हरियाली तीज - जानें श्रावणी तीज की व्रत कथा व पूजा विधि और आवश्यक सामग्री](https://bhaktisatsang.com/hariyali-teej-pooja-vidhi-vrat-katha/) - हरियाली तीज व्रत - Hariyali Teej Vrat श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को श्रावणी तीज (छोटी तीज) कहते हैं। परन्तु ज्यादातर लोग इसे हरियाली तीज के नाम से जानते हैं। यह त्यौहार मुख्य रूप से उत्तर भारत में मनाया जाता है। इस दिन स्त्रियाँ माता पार्वती जी और भगवान शिव जी की पूजा - [जाने रक्षाबंधन का धार्मिक महत्व और शास्त्रानुसार मंत्रो के साथ मनाये वैदिक राखी उत्सव](https://bhaktisatsang.com/vaidik-rakhi-raksha-bandhan-hindi/) - रक्षाबंधन - Raksha Bandhan यह तो सभी जानते हैं कि भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन का त्यौहार हर वर्ष हर्ष और उल्लास के साथ श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। श्रावण मास को भगवान शिव की पूजा का माह मानते हुए धार्मिक रुप से बहुत महत्व दिया जाता है। चूंकि रक्षाबंधन - 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अगर आप श्रीकृष्ण की कृपा पाना चाहते हैं तो आपको राधाजी की पूजा करनी होगी। राधारानी के पूजन के बिना कृष्ण की कृपा मिल ही नहीं सकती है, क्योंकि भगवान कृष्ण के प्राणों की अधिष्ठात्री देवी राधारानी कही जाती हैं, - [राधा अष्टकम - Radha Aashtkam](https://bhaktisatsang.com/radha-radhika-aashtkam-lyrics-hindi/) - राधाष्टकम् - Radha Aashtkam RadhaAashtkam - भाद्रपद माह में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के 15 दिन बाद शुक्ल पक्ष की अष्टमी को राधाष्टमी का पर्व मनाया जाता है। राधा अष्टमी का त्योहार श्री राधा रानी के प्राकट्य उत्सव के रूप में मनाया जाता है। शास्त्रों में श्री राधा कृष्ण की शाश्वत शक्तिस्वरूपा एवम प्राणों की - [श्री राधा कृपा कटाक्ष स्रोत - भगवान शिव द्वारा रचित](https://bhaktisatsang.com/shri-radha-kripa-kataksh-stotram/) - श्री राधा कृपा कटाक्ष स्रोत - Radha Kripa Kataksh Stotra श्रीराधा कृपाकटाक्ष स्तोत्र(radha kripa kataksh stotra) का गायन वृन्दावन के विभिन्न मन्दिरों में नित्य किया जाता है। अगर आपको संस्कृत नहीं आती तो आप हिंदी में नीचे दिए गए भाव पढ़ सकते है। आपको उतना ही फल मिलेगा। इस स्तोत्र के पाठ से साधक नित्यनिकुंजेश्वरि - [श्री लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली – लक्ष्मी जी के 108 नाम](https://bhaktisatsang.com/mahalaxmi-namavali-mantra/) - श्री लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली - लक्ष्मी जी के 108 नाम Goddess Laxmi Names - मां लक्ष्मी के 108 नामों का प्रतिदिन जप करने से धन-धान्य, सुख-संपत्ति, वैभव, कीर्ति, ऐश्वर्य, सौभाग्य और आरोग्य की प्राप्ति होती है. Maa Laxmi ke 108 Naam लक्ष्मी जी के 108 नाम - Maa Laxmi ke 108 Naam ऊँ प्रकृत्यै नम:। ऊँ - [कैसे करे दान - दान से सम्बन्धित 9 विशेष बातें जिसका स्मरण सदैव रहे](https://bhaktisatsang.com/daan-kaise-kare-hindi-dharma/) - कैसे करे दान - दान से सम्बन्धित 9 विशेष बातें दान की महिमा हर धर्म में मानी गई है। लेकिन दान किसे दिया जाए और किस विधि से दिया जाए इस पर बहुत कम शास्त्रों में वर्णित है। यहां हम दे रहे हैं कुछ ऐसे नियम जो दान से पूर्व हर व्यक्ति को जानना आवश्यक है। - [क्यों रविवार को नहीं करें पीपल की पूजा](https://bhaktisatsang.com/why-do-not-worship-peepal-tree-on-sunday/) - रविवार को नहीं की जाती पीपल के वृक्ष की पूजा जानीए क्या है इसका कारण - सनातन धर्म में पीपल वृक्ष को देवों का देव कहा गया है। स्वयं भगवान ने उससे अपनी उपमा देकरपीपल को देवत्व और दिव्यत्व को व्यक्त किया है। गीता में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं," मैं वृक्षों में पीपल हूं।" - [शास्त्रानुसार पूजन एवं साधना के तरीके](https://bhaktisatsang.com/methods-of-worship-in-hindu-dharm/) - शास्त्रानुसार पूजन एवं साधना के तरीके पूजन एवं साधना के सन्दर्भ में प्रयुक्त होने वाले कुछ शब्दों का अर्थ आप सभी के ज्ञानवर्धन के लिए : 1. पंचोपचार – गन्ध , पुष्प , धूप , दीप तथा नैवैध्य द्वारा पूजन करने को ‘पंचोपचार’ कहते हैं। 2. पंचामृत – दूध , दही , घृत , शहद - [वेदो के अनुसार महालक्ष्मी आगमन हेतु विशेष वास्तु उपचार](https://bhaktisatsang.com/vastu-laxmi-hindi/) - लक्ष्मी आगमन के विशेष वास्तु उपचार वास्तु शास्त्र का आधार प्रकृति है। आकाश, अग्नि, जल, वायु एवं पृथ्वी इन पांच तत्वों को वास्तु-शास्त्र में पंचमहाभूत कहा गया है। शैनागम एवं अन्य दर्शन साहित्य में भी इन्हीं पंच तत्वों की प्रमुखता है। अरस्तु ने भी चार तत्वों की कल्पना की है। चीनी फेंगशुई में केवल दो - [महालक्ष्मी अष्टकं - Mahalakshmi Ashtakam](https://bhaktisatsang.com/maha-lakshmi-ashtakam-lyrics-pdf/) - महालक्ष्मी अष्टकं - Mahalakshmi Ashtakam Mahalakshmi Ashtakam With Lyrics - श्री महालक्ष्मी अष्टकं स्तोत्र (Mahalakshmi Ashtakam Stotram) के रचियता इंद्र देव हैं, श्री महालक्ष्मी अष्टकं (Lakshmi Ashtakam) माँ लक्ष्मी को अति प्रिय हैं। आठ श्लोक होने का कारण इसे श्री महालक्ष्मी अष्टकं (Lakshmi Stotram with Lyrics) कहा जाता है, नियमित रूप से पढ़ने से जातक - [मार्गशीष - हिन्दू धर्म अनुसार मार्गशीर्ष माह के व्रत और त्यौहार](https://bhaktisatsang.com/मार्गशीष-margashirsha-vrat-dates/) - हिन्दू धर्म अनुसार मार्गशीर्ष माह के व्रत और त्यौहार चैत्र जहां हिंदू वर्ष का प्रथम मास होता है तो फाल्गुन महीना वर्ष का अंतिम महीना होता है। महीने की गणना चंद्रमा की कलाओं के आधार पर की जाती है इसलिये हर मास को अमावस्या और पूर्णिमा की तिथियों तक कृष्ण और शुक्ल पक्ष में विभाजित - [क्या और क्यों होता है ग्रहण - जाने सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण](https://bhaktisatsang.com/सूर्य-ग्रहण-चंद्र-ग्रहण-solar-moon-eclip/) - सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण ग्रहण जो दो ग्रहों के बीच में किसी भी अन्य ग्रह या पिंड के आने के बाद घटित होता है। इस स्थिति में ज्यादातर सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण का निर्माण होता है। चंद्रग्रहण उस खगोलीय स्थिति को कहते है जब चंद्रमा पृथ्वी के ठीक पीछे उसकी प्रच्छाया में आ - [मोक्षदा एकादशी - जाने महत्व और पूजा करने की विधि](https://bhaktisatsang.com/mokshda-ekadashi-geeta-jayanti-puja-vidhi/) - मोक्षदा एकादशी - जाने महत्व और पूजा करने की विधि मार्गशीर्ष मास के शुक्लपक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहा जाता है, मान्यता है इस दिन व्रत करने से मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है. इस व्रत का पालन करने से पितरों को मुक्ति मिलती है और मोक्ष प्राप्त होता है, इसी दिन - [गीता जयंती - जानिए कैसे हुआ श्रीमद्भगवद्गीता का जन्म](https://bhaktisatsang.com/गीता-जयंती-gita-jayanti-katha-puja-vidhi/) - गीता जयंती महत्व और कथा - Gita Jayanti मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को गीता जयंती मनाई जाती है. गीता केवल एक धर्म ग्रंथ ही नहीं, बल्कि यह एक जीवन ग्रंथ भी है, जो हमें पुरुषार्थ की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देती है. शायद इसी कारण से हजारों साल बाद आज भी - [Dattatreya Jayanti - दत्तात्रेय जयंती व्रत कथा, महत्व और पूजा विधि](https://bhaktisatsang.com/dattatreya-jayanti-दत्तात्रेय-जयंती/) - दत्तात्रेय जयंती - Dattatreya Jayanti दत्तात्रेय जयंती को दत्त जयंती भी कहा जाता है, इस दिन भगवान दत्तात्र्य (दत्त) के जन्मदिन को मनाते है, हिंदू धर्म में भगवान दत्तात्रेय को त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश का एकरूप माना गया है। धर्म ग्रंथों के अनुसार श्री दत्तात्रेय भगवान विष्णु के छठे अवतार हैं। वह आजन्म ब्रह्मचारी - [मार्गशीर्ष पूर्णिमा - जानिए तारीख, शुभ मुहूर्त, व्रत नियम और पूजा विधि](https://bhaktisatsang.com/मार्गशीर्ष-पूर्णिमा-margashirsha-purnima-vrat-katha-pu/) - मार्गशीर्ष पूर्णिमा - Margashirsha Purnima मार्गशीर्ष पूर्णिमा का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन भगवान शिव और चंद्रदेव की अराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूर्णिमा के दिन भगवान सत्यनारायण की कथा और पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। पूर्णिमा के दिन स्नान, दान और ध्यान का भी - [भगवान गणेश को समर्पित संकष्टी चतुर्थी व्रत को करने से दूर होती हैं बाधाएं](https://bhaktisatsang.com/संकष्टी-चतुर्थी-sankashti-chaturthi-katha-puja-vidhi/) - संकष्टी चतुर्थी - sankashti chaturthi कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि गणपति महाराज की आराधना के लिए समर्पित है और उनके भक्त आशीर्वाद पाने के लिए इस दिन व्रत रखते हैं। हिन्दू पंचांग के प्रत्येक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को यह व्रत रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी का आशय - [सफला एकादशी - भगवान विष्णु को प्रसन्न करने का सबसे श्रेष्ठ व्रत](https://bhaktisatsang.com/सफला-एकादशी-saphala-ekadashi-vrat-katha/) - सफला एकादशी - Saphala Ekadashi पौष माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन सफल एकादशी कहा जाता है। इस एकादशी का व्रत करने से सारे कार्य सफल हो जाते हैं। इसलिए इसे सफला एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान अच्युत की पूजा की जाती है। मान्यता है कि एक हजार अश्वमेध यज्ञ भी - [श्री शनि चालीसा – Shani Chalisa](https://bhaktisatsang.com/शनि-चालीसा-shani-chalisa-lyrics-hindi/) - श्री शनि चालीसा – Shani Chalisa in Hindi Shani Chalisa – शनिदेव को ज्योतिष शास्त्र में न्यायाधीश कहा गया है यानी मनुष्यों के अच्छे-बुरे कामों का फल यही देते हैं (Shani Chalisa Lyrics) वहीं कहा जाता है यदि यह कुंडली में प्रतिकूल स्थान पर बैठे हो, तो जातक को हमेशा परेशानियों का सामना करना पड़ता - [16 संस्कारों में पहला संस्कार - गर्भाधान संस्कार](https://bhaktisatsang.com/गर्भाधान-संस्कार-garbhadhan-sanskar/) - गर्भाधान संस्कार – श्रेष्ठ संतान के लिये विधिनुसार करें गर्भाधान संस्कार का अर्थ संस्करण, परिष्करण, विमलीकरण अथवा विशुद्धिकरण से लिया जाता है। हिंदू धर्म में जातक के जन्म की प्रक्रिया आरंभ होने से लेकर मृत्यु पर्यन्त तक कई संस्कार किये जाते हैं। पहला संस्कार गर्भधान का माना जाता है तो अंतिम संस्कार अंत्येष्टि संस्कार होता - [भागवत भगवान की आरती – Bhagwat Bhagwan ki Aarti](https://bhaktisatsang.com/shri-bhagwat-bhagwan-ki-aarti-lyrics/) - भागवत भगवान की आरती – Bhagwat Bhagwan ki Aarti Bhagwat Bhagwan Ki Aarti – मनुष्य के जीवन में भागवत का बड़ा महत्व है। (Bhagwat Bhagwan Ki Hai Aarti) इसमें भक्त, भगवान एवं स्थान का वर्णन होता है। मनुष्य का मन और बुद्धि निर्मल होने पर ही ज्ञान की बातें समझ में आती हैं। ( Shri Bhagwat - [भैरव चालीसा – Bhairav Chalisa Lyrics in Hindi](https://bhaktisatsang.com/भैरव-चालीसा-bhairav-chalisa-lyrics-in-hindi/) - श्री भैरव चालीसा – Bhairav Chalisa Bhairav Chalisa in Hindi – भैरव चालीसा का चमत्कारिक पाठ आपका सारी मुसीबतों और आने वाले संकट से बचाता है…Bhairav Chalisa Lyrics. भैरव चालीसा – Bhairav Chalisa Lyrics in Hindi ॥ दोहा ॥ श्री गणपति, गुरु गौरि पद, प्रेम सहित धरि माथ । चालीसा वन्दन करों, श्री शिव भैरवनाथ ॥ श्री - [Paush Putrada Ekadashi - संतान प्राप्ति के लिए करें पौष पुत्रदा एकादशी व्रत](https://bhaktisatsang.com/पौष-पुत्रदा-एकादशी-paush-putrada-ekadashi/) - पौष पुत्रदा एकादशी - Paush Putrada Ekadashi पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पौष पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन व्रत रखने और विधिपूर्वक पूजा करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है। संतान को हुई समस्याओं से निजात भी मिलता है। इस दिन व्रत रखने से धन - [ॐ जय जगदीश हरे – Om Jay Jagdish Hare ](https://bhaktisatsang.com/om-jay-jagdish-hare-aarti-lyrics/) - ॐ जय जगदीश हरे – Om Jay Jagdish Hare Om Jay Jagdish Hare Lyrics – पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की विशेष रूप से पूजा की जाती है और भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए पूजा के बाद आरती जरूर गानी चाहिए। (Om Jay Jagdish Hare Aarti) ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश - [16 संस्कारों में सांतवा संस्कार - अन्नप्राशन संस्कार](https://bhaktisatsang.com/annaprashana-sanskar-अन्नप्राशन-संस्कार/) - अन्नप्राशन संस्कार कब और क्यों - Annaprashana Sanskar Annaprashana Sanskar : हिंदू धर्म में मनुष्य के पैदा होने से मरण तक 16 संस्कार किए जाते हैं। इन सभी का व्यक्ति के जीवन में विशेष महत्व होता है। हालांकि, आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में ये सभी संस्कार केवल नाम के रह गए हैं। ऐसे में - [Sankashti Chaturthi Vrat - भगवान गणेश को समर्पित इस व्रत को करने से दूर होती हैं बाधाएं, तरक्की मिलने की है मान्यता](https://bhaktisatsang.com/sankashti-chaturthi-vrat-संकष्टी-चतुर्थी/) - संकष्टी चतुर्थी व्रत - Sankashti Chaturthi Vrat 2021 संकष्टी चतुर्थी हिन्दू धर्म का एक प्रसिद्ध त्यौहार है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। भगवान गणेश को अन्य सभी देवी-देवतों में प्रथम पूजनीय माना गया है। इन्हें बुद्धि, बल और विवेक का देवता - [श्री काली चालीसा – Kali Chalisa Lyrics in Hindi](https://bhaktisatsang.com/काली-चालीसा-maa-maha-kali-chalisa-lyrics-hindi/) - श्री काली चालीसा – Kali Chalisa Kali Chalisa in Hindi – इनकी अर्चना से रोग मुक्त होते हैं. राहु और केतु की शांति के लिए मां काली की उपासना अचूक है. मां अपने भक्तों की रक्षा करके उनके शत्रुओं का नाश करती हैं. इनकी पूजा (Kali Chalisa Lyrics) से तंत्र-मंत्र का असर खत्म हो जाता - [मंगलवार आरती – Hanuman ji ki Aarti With Lyrics](https://bhaktisatsang.com/hanuman-ji-ki-aarti-lyrics-hindi/) - मंगलवार आरती – Hanuman ji ki Aarti Hanuman ji ki Aarti in Hindi – शास्त्रों के अनुसार हनुमान जी को मंगल ग्रह का नियंत्रक भी कहा जाता है। इनकी पूजा-अर्चना (Hanuman ji ki Aarti Lyrics) से मात्र सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और जो कोई भी भक्त इनकी सच्चे मन से पाठ (Hanuman ji - [साईं चालीसा – Sai Chalisa in Hindi Lyrics](https://bhaktisatsang.com/साईं-चालीसा-sai-chalisa-in-hindi-lyrics/) - साईं चालीसा – Sai Chalisa in Hindi Sai Chalisa in Hindi – धर्म कर्म शिरड़ी के बाबा साई नाथ सदैव सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते रहते हैं । अगर मन में जरा सी भी शंका रहती है कि साई नाथ कृपा करेंगे या नहीं तो ऐसे में आपकी मनोकामनाएं शीघ्र नहीं हो पायेगी, इसलिए गुरुवार - [16 संस्कारों में दूसरा संस्कार - पुंसवन संस्कार](https://bhaktisatsang.com/पुंसवन-संस्कार-pumsavana-16-sanskar/) - पुंसवन संस्कार - Pumsavana Karma हिंदू धर्म में जन्म से लेकर मृत्यु पर्यन्त किये जाने वाले प्रमुख संस्कार 16 माने जाते हैं। पहला संस्कार गर्भाधान संस्कार माना जाता है जो कि शिशु के गर्भधारण के समय किया जाता है। गर्भधारण के तीसरे महीने में दूसरा संस्कार किया जाता है। इस संस्कार को पुंसवन संस्कार कहा - [श्री सांईबाबा की आरती – Sai Baba ki Aarti ](https://bhaktisatsang.com/श्री-सांईबाबा-की-आरती-sai-baba-ki-aarti/) - आरती श्री सांईबाबा की – Sai Baba ki Aarti Sai Baba ki Aarti – शिरडी वाले साईं बाबा (Shirdi ke Sai Baba ki Aarti) को प्रसन्न करने के लिए किसी घोर तप की जरूरत नहीं है, बाबा तो बस भाव के भूखे हैं (Shirdi Sai Baba ki Aarti) कहते हैं दिल से उनके भक्त जब - [नवग्रह चालीसा – Nav Grah Chalisa](https://bhaktisatsang.com/नवग्रह-चालीसा-nav-grah-chalisa-lyrics/) - नवग्रह चालीसा – Nav Grah Chalisa Nav Grah Chalisa – नवग्रह के नाम से नौ दीये जलाएं और उसके बाद पूरी श्रद्धा से नियमित रूप नवग्रह चालीसा पाठ करे. लगभग तीन महीने लगातार पाठ (Nav Grah Chalisa Lyrics) करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. जो भी रुकावट अथवा बाधाएं व्यक्ति के जीवन में होती - [16 संस्कारों में तीसरा संस्कार - सीमन्तोन्नयन संस्कार](https://bhaktisatsang.com/16-संस्कार-सीमन्तोन्नयन-simantonnayana-anskar/) - सीमन्तोन्नयन संस्कार - Simantonnayana Sanskar हिंदू धर्म के संस्कारों पर हमने लेखों की श्रृंखला शुरु की है जिसमें अभी तक हमने पहले और दूसरे संस्कार यानि गर्भाधान और पुंसवन के बारे में जानकारी दी है इस लेख में हम तीसरे संस्कार की बात करेंगें। यह संस्कार कहलाता है सीमन्तोन्नयन का। इस संस्कार को पुंसवन संस्कार - [खाटू श्याम जी की आरती - khatu shyam ji ki Aarti Lyrics in Hindi](https://bhaktisatsang.com/खाटू-श्याम-जी-आरती-khatu-shyam-ji-ki-aarti-lyrics-in-hindi/) - खाटू श्याम जी की आरती - khatu shyam ji ki Aarti Khatu Shyam Aarti – श्याम बाबा की आरती (khatu shyam ji ki Aarti) हिन्दी में यहाँ दी जा रही है जिसका खाटू श्याम जी की पूजा में बहुत अधिक महत्व है | श्याम भक्तो को यह आरती (khatu shyam Aarti Lyrics) जुबानी याद रहती - [16 संस्कारों में चौथा संस्कार - जातकर्म संस्कार](https://bhaktisatsang.com/16-संस्कार-जातकर्म-jatakarma-sanskar/) - जातकर्म संस्कार - Jatakarma Sanskar हिंदू धर्म के 16 संस्कारों पर आधारित लेखों की श्रृंखला में हम अभी तक आपको पहले तीन संस्कारों के बारे में बता चुके हैं। पहले के तीनों संस्कार गर्भाधान से लेकर गर्भावस्था तक शिशु में संस्कारों का संचार करने व गर्भ को सुरक्षित व स्वस्थ रखने के लिये किये जाते - [भैरव बाबा आरती - Bhairav ​​Baba ki Aarti Lyrics in Hindi](https://bhaktisatsang.com/भैरव-बाबा-आरती-bhairav-​​baba-ki-aarti-lyrics-in-hindi/) - भैरव बाबा आरती - Bhairav ​​Baba ki Aarti Bhairav Aarti – काल भैरव को तंत्र का देवता माना जाता है, भगवान शिव का रूद्र अवतार भी माना जाता है, भगवान काल भैरव की पूजा करने से भूत – प्रेत जैसी समस्या नहीं सताती तो आइए जानते हैं काल भैरव की आरती (Bhairav ​​Baba ki Aarti - 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Hanuman Chalisa is currently accessible in english, read underneath - Doha Shri Guru Charan Sarooja-raj Nija manu Mukura Sudhaari Baranau Rahubhara Bimala Yasha Jo - [कुबरे चालीसा - Kuber Chalisa in Hindi Lyrics](https://bhaktisatsang.com/kuber-chalisa-in-hindi-lyrics/) - कुबरे चालीसा - Kuber Chalisa धन के देवता कुबेर कहे जाते हैं जो सभी देवताओं के कोषाध्यक्ष भी हैं, अगर कोई नियमित रूप से श्री कुबरे चालीसा (Kuber Chalisa ) का पाठ करता हैं तो उसके जीवन में कभी भी धन की समस्या नहीं रहती । कुबरे चालीसा - Kuber Chalisa दोहा जैसे अटल हिमालय - [Brihaspativar Vrat ki Aarti - बृहस्पतिवार व्रत की आरती](https://bhaktisatsang.com/brihaspativar-vrat-ki-aarti-बृहस्पतिवार-आरती/) - बृहस्पतिवार व्रत की आरती - Brihaspativar ki Aarti गुरुवार यानी बृहस्पतिवार (Brihaspativar Vrat Aarti) के दिन भगवान विष्णु और देव (Brihaspati Dev ki Aarti) गुरु बृहस्पति की पूजा (Brihaspativar ki Aarti) का विधान है। बहुत से लोग इस दिन व्रत रखते हैं। माना जाता है इस व्रत को करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति हो - [Giriraj Chalisa - गिरिराज चालीसा](https://bhaktisatsang.com/giriraj-chalisa-lyrics-गिरिराज-चालीसा/) - Giriraj Chalisa - गिरिराज चालीसा गोवर्धन पर्वत उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के अंतर्गत एक नगर पंचायत है। गोवर्धन व इसके आसपास के क्षेत्र को ब्रज भूमि भी कहा जाता है। यह भगवान श्री कृष्ण की लीलास्थली है। यहीं पर भगवान श्री कृष्ण ने द्वापर युग में ब्रजवासियों को इन्द्र के प्रकोप से बचाने के - [मंगलवार आरती - Aaj Mangalwar Hai Mahaveer ka Vaar Hai](https://bhaktisatsang.com/aaj-mangalwar-hai-mahaveer-ka-vaar-hai-lyrics/) - मंगलवार आरती - Aaj Mangalwar Hai Mahaveer ka Vaar Hai मंगलवार को (Aaj Mangalwar Hai Mahaveer ka Vaar Hai) हनुमान जी की पूजा, उपासना, मंत्रा और चालीसा पाठ करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं. धर्मिक मान्यतानुसार श्रीराम की आज्ञा का पालन करते हुए आज भी हनुमान जी भक्तों की रक्षा और कल्याण - [Ramdev Chalisa - रामदेव चालीसा](https://bhaktisatsang.com/ramdev-chalisa-रामदेव-चालीसा/) - Ramdev Chalisa - रामदेव चालीसा पीरों के पीर रामापीर, बाबाओं के बाबा रामदेव बाबा को सभी भक्त बाबारी कहते हैं। जहां भारत ने परमाणु विस्फोट किया था, वे वहां के शासक थे। हिन्दू उन्हें रामदेवजी (Ramdev Chalisa) और मुस्लिम उन्हें रामसा पीर कहते हैं। मध्यकाल में जब अरब, तुर्क और ईरान के मुस्लिम शासकों द्वारा - [Balaji ki Aarti - मेहंदीपुर बालाजी की आरती](https://bhaktisatsang.com/balaji-ki-aarti-मेहंदीपुर-बालाजी-की-आरत/) - Balaji ki Aarti - मेहंदीपुर बालाजी की आरती श्री हनुमान जन्मोत्सव, मंगलवार व्रत, शनिवार पूजा, बूढ़े मंगलवार और अखंड रामायण के पाठ में प्रमुखता से गाये जाने वाली आरती है.... Balaji ki Aarti - मेहंदीपुर बालाजी की आरती श्री बालाजी महाराज महाराज, तेरे माथे मुकुट बिराज रहो ।। श्लोक लाल देह लाली लसे, अरु धरि - [Aarti Kunj Bihari ki - आरती कुंजबिहारी की](https://bhaktisatsang.com/aarti-kunj-bihari-ki-lyrics-in-hindi/) - Aarti Kunj Bihari ki - आरती कुंजबिहारी की Aarti Kunj Bihari Ki - जन्माष्टमी पर कुंजबिहारी की आरती गान का अपना ही महत्व है। भगवान श्रीकृष्ण संग देवी राधा की इस आरती गान से वातावरण आनंदमय हो जाता है। कुंज बिहारीजी की आरती (Aarti Kunj Bihari Ki Lyrics) गान के समय शंख, घंटी और करताल - [Vidyarambh Sanskar – 16 संस्कारों में नव्वा विद्यारंभ संस्कार](https://bhaktisatsang.com/mundan-sanskar-विद्यारंभ-संस्कार/) - बालक में दिव्य संस्कारों के लिए विद्यारंभ संस्कार - Vidyarambh Sanskar भारत में इंसान को जीवन आरंभ से लेकर मृत्यु तक कई संस्कारों से होकर गुजरना पड़ता है। हर एक संस्कार का जीवन में अपना महत्व होता है। इन संस्कारों में सबसे महत्वपूर्ण संस्कार होता है विद्यारंभ संस्कार। विद्या और ज्ञान को यूँ तो हर - [Saraswati Vandana - मां सरस्‍वती की वंदना](https://bhaktisatsang.com/saraswati-vandana-lyrics-in-hindi-geet/) - Saraswati Vandana - मां सरस्‍वती की वंदना Saraswati Vandana in Hindi - मां सरस्वती की पूजा की बात हो और उनकी वंदना (Saraswati Vandana) या वंदना गीत (Saraswati Vandana Geet) न हों ऐसे संभव नहीं है। मां सरस्वती वंदना (Saraswati Vandana With Lyrics)का महत्व प्राचीन काल से ही भारतीय समाज में रहा है। यही कारण - [Sheesh Gang Ardhang Parvati Lyrics](https://bhaktisatsang.com/shiv-aarti-sheesh-gang-ardhang-parvati-lyrics/) - Sheesh Gang Ardhang Parvati Lyrics - शीश गंग अर्धंग पार्वती शीश गंग अर्धंग पार्वती सदा विराजत कैलासी। नंदी भृंगी नृत्य करत हैं धरत ध्यान सुर सुखरासी॥ शीतल मन्द सुगन्ध पवन बह बैठे हैं शिव अविनाशी। करत गान-गन्धर्व सप्त स्वर राग रागिनी मधुरासी॥ यक्ष-रक्ष-भैरव जहँ डोलत बोलत हैं वनके वासी। कोयल शब्द सुनावत सुन्दर भ्रमर करत - [Hey Hans Vahini Gyan Dayini - सरस्वती वंदना](https://bhaktisatsang.com/saraswati-vandana-hey-hans-vahini-gyan-dayini-सरस्वती-वंदना/) - Hey Hans Vahini Gyan Dayini - सरस्वती वंदना हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥ जग सिरमौर बनाएं भारत, वह बल विक्रम दे। वह बल विक्रम दे॥ हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥ साहस शील हृदय में भर दे, जीवन त्याग-तपोमर कर दे, संयम सत्य स्नेह - [Ambe Tu Hai Jagdambe Kali Aarti - अम्बे तू है जगदम्बे काली आरती](https://bhaktisatsang.com/ambe-tu-hai-jagdambe-kali-aarti-lyrics/) - Ambe Tu Hai Jagdambe Kali Aarti - अम्बे तू है जगदम्बे काली आरती मां को प्रसन्न करने के लिए पूजा पाठ सभी करते है। लेकिन एक चीज ऐसी है जिसके बिना मां दुर्गा की पूजा पूरी नहीं मानी जाती है वो है मां की आरती (Ambe Tu Hai Jagdambe Kali Aarti) लेकिन मां की आरती - [Jai Ambe Gauri Aarti lyrics - जय अम्बे गौरी](https://bhaktisatsang.com/jai-ambe-gauri-aarti-lyrics-जय-अम्बे-गौरी/) - Jai Ambe Gauri Aarti lyrics - जय अम्बे गौरी नवरात्रि, माता की चौकी, देवी जागरण शुक्रवार तथा करवा चौथ के दिन गाई जाने वाली दुर्गा माँ की प्रसिद्ध आरती Jai Ambe Gauri Aarti lyrics Jai Ambe Gauri Aarti - जय अम्बे गौरी जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी । तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा - [Saraswati Mata Aarti Lyrics in Hindi - सरस्वती मां की आरती](https://bhaktisatsang.com/saraswati-mata-ki-aarti-lyrics-in-hindi/) - Saraswati Mata Aarti - सरस्वती मां की आरती Saraswati Mata Aarti in Hindi अगर आप माँ सरस्वती जी की पूजा साधना के बाद Saraswati Mata ki Aarti करते हैं तो अत्यधिक फलदाई होता है. माँ की आराधना में Saraswati Chalisa के साथ सरस्वती मां की आरती (Saraswati Maa Aarti Lyrics) का भी विशेष महत्त्व है. - [Santoshi Mata ki Aarti - संतोषी माता की आरती](https://bhaktisatsang.com/santoshi-mata-ki-aarti-संतोषी-माता-की-आरती/) - शुक्रवार के दिन माता लक्ष्मी के साथ मां संतोषी की भी पूजा की जाती है। मान्यता है कि मां संतोषी का व्रत रखने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता संतोषी के पिता गणेश और माता रिद्धि-सिद्धि हैं। कहते हैं कि मां संतोषी की पूजा के बाद आरती (Santoshi Mata - [फाल्गुन मास के व्रत और त्यौहार](https://bhaktisatsang.com/hindu-festivals-calendar-फाल्गुन-मास-के-व्रत-त्य/) - Falgun Mas Ke Vrat Tyohar - फाल्गुन मास के व्रत और त्यौहार फागुन यह मास हिंदू पंचाग का आखिरी महीना होता है इसके पश्चता हिंदू नववर्ष का आरंभ होता है। हिंदू पंचाग के बारह महीनों में पहला महीना चैत्र का होता है तो फाल्गुन आखिरी। फागुन मास को मस्त महीने के तौर पर जाना जाता - [पितरों को मोक्ष प्रदान करती है फाल्गुनी अमावस्या](https://bhaktisatsang.com/phalguni-tyohar-festival-vrat-amavasya/) - पितरों को मोक्ष प्रदान करती है फाल्गुनी अमावस्या फाल्गुन मास जो कि अल्हड़पन और मस्ती के लिये जाना जाता है और हिंदू वर्ष का अंतिम मास है। फाल्गुन माह में पड़ने वाली अमावस्या ही फाल्गुन या कहें फाल्गुनी अमावस्या कहलाती है। यह हिंदू वर्ष की अंतिम अमावस्या भी होती है। अमावस्या से पहले दिन यानि - [Phulera Dooj - फुलैरा दूज फाल्गुन मास में सबसे शुभ दिन](https://bhaktisatsang.com/phulera-dooj-फुलैरा-दूज/) - Phulera Dooj - फुलैरा दूज फाल्गुन महीने में शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को फुलैरा दूज मनाई जाती है। इसे फाल्गुन मास में सबसे पावन दिन माना जाता है। आज भी गांवों में इस त्योहार को मनाया जाता है। इस दिन गांवों में बच्चे फूलों को तोड़कर इसकी रंगोली बनाते है। कहा जाता है कि - [चैत्र मास के पर्व व त्यौहार](https://bhaktisatsang.com/chaitra-चैत्र-मास-पर्व-त्यौहार/) - चैत्र मास के पर्व व त्यौहार - Chaitra Month Festivals 2021 चैत्र मास का हिंदू धर्म में धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से बहुत अधिक महत्व है। क्योंकि फाल्गुन और चैत्र ये दो मास प्रकृति के बहुत ही खूबसूरत मास माने जाते हैं। भारत की छह ऋतुओं में से ऋतुराज मानी जाने वाली बसंत ऋतु इन्हीं - [बुधवार व्रत कथा](https://bhaktisatsang.com/budhvaar-vrat-katha/) - बुधवार व्रत कथा - Budhwar Vrat Katha Budhwar Vrat - बुध ग्रह की शांति और सर्व-सुखों की इच्छा रखनेवाले स्त्री-पुरुषों को बुधवार का व्रत अवश्य करना चाहिए। बुधवार का व्रत बुध ग्रह को शांत करने के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। बुधवार के दिन बुद्ध देव के साथ भगवान गणेश की पूजा की जाती - [वामन अवतार कथा : भगवान विष्णु और राजा बलि के दान की कथा](https://bhaktisatsang.com/vaman-avatar-katha/) - वामन अवतार कथा | Vaman Avatar ki Katha Vaman Avatar in Hindi - वामन अवतार भगवान विष्णु का पाचवा (Vaman Avatar of Vishnu) अवतार है । भगवान की लीला अनंत है (Vaman Avatar Story in Hindi) और उसी में से एक वामन अवतार है । इसके विषय में श्रीमद्भगवदपुराण में (Vaman Avatar Story) एक कथा है। - [शनिवार व्रत कथा](https://bhaktisatsang.com/saturday-vrat-katha/) - शनिवार व्रत कथा | Shani Dev Vrat Katha Shani Dev Vrat Katha - अग्नि पुराण के अनुसारशनि ग्रह की से मुक्ति केलिए "मूल" नक्षत्र युक्तशनिवार से आरंभ करकेसात शनिवार शनिदेव की पूजा (Shani Vrat Katha) करनी चाहिए और व्रत करना चाहिए। व्रत कथा (Shani Dev Vrat Katha in Hindi) एक समय में स्वर्गलोक में सबसे - [देवी लक्ष्मी | विष्णुप्रिया](https://bhaktisatsang.com/maha-laxmi-hindi/) - देवी लक्ष्मी | विष्णुप्रिया लक्ष्मी हिन्दू धर्म की एक प्रमुख देवी हैं। वो lord Vishnu की पत्नी हैं और धन, सम्पदा, शान्ति और समृद्धि की देवी मानी जाती हैं। दिवाली उत्सव में उनकी lord ganesha सहित पूजा की जाती है। gaytri mantra जपने से गायत्री की कृपा से मिलने वाले वरदानों में एक lakshmi भी है। जिस पर यह - [सिद्धिविनायक मंदिर - Siddhivinayak Mandir](https://bhaktisatsang.com/siddhivinayak-temple/) - सिद्घिविनायक मंदिर - Siddhivinayak Mandir अष्ट विनायक में दूसरे गणेश हैं सिद्धिविनायक। यह मंदिर पुणे से करीब 200 किमी दूरी पर स्थित है। समीप ही भीम नदी है। यह क्षेत्र सिद्धटेक गावं के अंतर्गत आता है। यह पुणे के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। मंदिर करीब 200 साल पुराना है। सिद्धटेक में सिद्धिविनायक - [बाबा रामदेव मंदिर,रामदेवरा](https://bhaktisatsang.com/ramdevra-temple/) - रामदेवजी मंदिर राजस्थान के जैसलमेर जिले में पोकरण के उत्तर से लगभग १२ किमी दूर है। यह मन्दिर रामदेवरा गांव में स्थित है। यहाँ बाबा रामदेवजी ने १४५९ ई. में समाधि ले ली थी और तभी से इस गाँव का नाम रामदेवरा पड गया। मेला रामदेवरा में स्थित रामदेवजी के वर्तमान मंदिर का निर्माण सन् - [तनोट मंदिर,जैसलमेर](https://bhaktisatsang.com/tanot-temple-jaisalmer/) - जैसलमेर में तनोट माता (आवड़ माता) का मंदिर है। तनोट माता को देवी हिंगलाज माता का एक रूप माना जाता है। हिंगलाज माता शक्तिपीठ वर्तमान में पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के लासवेला जिले में स्थित है। भाटी राजपूत नरेश तणुराव ने तनोट को अपनी राजधानी बनाया था। - [अरथूना मंदिर,बांसवाड़ा](https://bhaktisatsang.com/arthuna-temples-banswara/) - राजस्थान के वागड़ क्षेत्र के बाँसवाड़ा नगर से लगभग 45 किमी दक्षिण पश्चिम में अर्थूना नामक स्थान भारतीय इतिहास के 11 वीं एवं 12 वीं सदी में निर्मित मंदिर समूह और मूर्तियों के लिए विख्यात है। वागड़ क्षेत्र में 8 वीं शताब्दी में मालवा के राजा उपेन्द्र ने परमार वंश की नींव डाली थी। बाद - [बैजनाथ मंदिर,पालमपुर](https://bhaktisatsang.com/baijnath-temple-palampur/) - बैजनाथ शिव मंदिर हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा ज़िले में शानदार पहाड़ी स्थल पालमपुर में स्थित है। 1204 ई. में दो क्षेत्रीय व्यापारियों 'अहुक' और 'मन्युक' द्वारा स्थापित बैजनाथ मंदिर पालमपुर का एक प्रमुख आकर्षण है और यह शहर से 16 कि.मी. की दूरी पर स्थित है। हिन्दू देवता शिव को समर्पित इस मंदिर की स्थापना - [नाथद्वारा श्री नाथ जी](https://bhaktisatsang.com/shri-nath-ji/) - श्री नाथद्वारा राजस्थान के राजसमन्द जिले मै स्थित है। श्रीनाथद्वारा पुष्टिमार्गीय वैष्‍णव सम्‍प्रदाय की प्रधान (प्रमुख) पीठ है। यहाँ नंदनंदन आनन्‍दकंद श्रीनाथजी का भव्‍य मन्‍दिर है जो करोडों वैष्‍णवो की आस्‍था का प्रमुख स्‍थल है, प्रतिवर्ष यहाँ देश-विदेश से लाखों वैष्‍णव श्रृद्धालु आते हैं जो यहाँ के प्रमुख उत्‍सवों का आनन्‍द उठा भावविभोर हो जाते - [खाटू श्याम जी मंदिर](https://bhaktisatsang.com/khatu-shyam-temple/) - खाटूश्याम जी मंदिर राजस्थान के सीकर जिले में स्थित है भगवान खाटू श्याम जी का मुख्य मंदिर। श्री कृष्ण भगवान के कलयुग के अवतार के रूप में यहां पर खाटू में विराजमान हैं। खाटू श्याम जी को हारे का सहारा माना जाता है। भीम के पुत्र घटोत्कच और नाग कन्या अहिलवती के पुत्र बर्बरीक अपनी - [गिरिराज गोवर्धन](https://bhaktisatsang.com/giriraj-govardhan/) - मथुरा नगर के पश्चिम में लगभग 21 किलोमीटर की दूरी पर श्री गिरिराज गोवर्धन विराजमान हैं। गिरिराज 4 या 5 मील तक फैले हुए हैं। अपने प्राकट्य के समय यह 80 किलोमीटर लम्बे, 20 किलोमीटर ऊँचे और 50 किलोमीटर चौड़े थे। ऐसा कहा जाता है कि गोवर्धन पर्वत की छाया कभी यमुना जी पर पड़ती - [गंगश्याम जी मंदिर,जोधपुर](https://bhaktisatsang.com/gangshyam-ji-temple-jodhpur/) - गंगश्याम जी का मंदिर जोधपुर, राजस्थान में स्थित है | यह मंदिर शहर के भीतर जूनी मंडी में है | तिहास जोधपुर के राजा सुजाजी के सुपुत्र बांधाजी राठौड़ के दो पुत्र थे | एक तो श्री वीरम जी और दुसरे श्री गांगाजी जो बड़े ईश्वर भक्त थे, गांगाजी की शादी सिरोही राज्य के देवड़ा - [एकलव्य की गुरुभक्ति](https://bhaktisatsang.com/eklawya-gurubhakti/) - एकलव्य की गुरुभक्ति | Eklawya Gurubhakti आचार्य द्रोण राजकुमारों को धनुर्विद्या की विधिवत शिक्षा प्रदान करने लगे। उन राजकुमारों में अर्जुन के अत्यन्त प्रतिभावान तथा गुरुभक्त होने के कारण वे द्रोणाचार्य के प्रिय शिष्य थे। द्रोणाचार्य का अपने पुत्र अश्वत्थामा पर भी विशेष अनुराग था इसलिये धनुर्विद्या में वे भी सभी राजकुमारों में अग्रणी थे, - [शनि की महत्ता](https://bhaktisatsang.com/shani-katha/) - शनि की महत्ता | Shani Katha एक समय स्वर्गलोक में सबसे बड़ा कौन के प्रश्न को लेकर सभी देवताओं में वाद-विवाद प्रारम्भ हुआ और फिर परस्पर भयंकर युद्ध की स्थिति बन गई। सभी देवता देवराज इंद्र के पास पहुंचे और बोले, हे देवराज! आपको निर्णय करना होगा कि नौ ग्रहों में सबसे बड़ा कौन है? - [दानवीर कर्ण](https://bhaktisatsang.com/daanveer-karna/) - दानवीर कर्ण | Daavveer Karan कर्ण कुंती का पुत्र था| पाण्डु के साथ कुंती का विवाह होने से पहले ही इसका जन्म हो चुका था| लोक-लज्जा के कारण उसने यह भेद किसी को नहीं बताया और चुपचाप एक पिटारी में रखकर उस शिशु को अश्व नाम की नदी में फेंक दिया था| इसके जन्म की - [मायावी घटोत्कच](https://bhaktisatsang.com/ghatotkach/) - मायावी घटोत्कच | Ghatotkach भीमसेन का विवाह हिडिंबा नाम की एक राक्षसी के साथ भी हुआ था| वह भीमसेन पर आसक्त हो गई थी और उसने स्वयं आकर माता कुंती से प्रार्थना की थी कि वे उसका विवाह भीमसेन के साथ करा दें| कुंती ने उस विवाह की अनुमति दे दी, लेकिन भीमसेन ने विवाह - [दुष्यंत एवं शकुन्तला की कथा](https://bhaktisatsang.com/dusyanth-and-shakuntala/) - दुष्यंत एवं शकुन्तला की कथा | Dushyanth Shakuntala Story एक बार हस्तिनापुर नरेश दुष्यंत आखेट खेलने वन में गये। जिस वन में वे शिकार के लिये गये थे उसी वन में कण्व ऋषि का आश्रम था। कण्व ऋषि के दर्शन करने के लिये महाराज दुष्यंत उनके आश्रम पहुँच गये। पुकार लगाने पर एक अति लावण्यमयी - [कर्ण की दानवीरता](https://bhaktisatsang.com/karna-ki-danveerta/) - कर्ण की दानवीरता | Karan Ki Daanveerta महाभारत के युद्ध का सत्रहवां दिन समाप्त हो गया था| महारथी कर्ण रणभूमि में गिर चुके थे| पांडव-शिविर में आनंदोत्सव हो रहा था| ऐसे उल्लास के समय श्रीकृष्ण खिन्न थे| वे बार-बार कर्ण की प्रशंसा कर रहे थे, "आज पृथ्वी से सच्चा दानी उठ गया|" धर्मराज युधिष्ठिर के - [धर्मराज को श्राप](https://bhaktisatsang.com/dharmraj-shrap/) - धर्मराज को श्राप | Dharmraj Shrap एक धर्मात्मा ब्राह्मण थे, उनका नाम मांडव्य था| वे बड़े सदाचारी और तपोनिष्ठ थे| संसार के सुखों और भोगों से दूर वन में आश्रम बनाकर रहते थे| अपने आश्रम के द्वार पर बैठकर दोनों भुजाओं को ऊपर उठाकर तप करते थे| वन के कंद-मूल-फल खाते और तपमय जीवन व्यतीत - [दानवीर विक्रमादित्य](https://bhaktisatsang.com/vikramaditya/) - दानवीर विक्रमादित्य | Vikramaditya एक दिन राजा विक्रमादित्य दरबार को सम्बोधित कर रहे थे तभी किसी ने सूचना दी कि एक ब्राह्मण उनसे मिलना चाहता है। विक्रमादित्य ने कहा कि ब्राह्मण को अन्दर लाया जाए। जब ब्राह्मण उनसे मिला तो विक्रम ने उसके आने का प्रयोजन पूछा। ब्राह्मण ने कहा कि वह किसी दान की - [भीष्म की प्रतिज्ञा](https://bhaktisatsang.com/bhishma-pratigya-katha/) - भीष्म की प्रतिज्ञा | Bhishma Pratigya एक बार हस्तिनापुर के महाराज प्रतीप गंगा के किनारे तपस्या कररहे थे। उनके रूप सौन्दर्य से मोहित हो कर देवी गंगा उनकी दाहिनीजाँघ पर आकर बैठ गईं। महाराज यह देख कर आश्चर्य में पड़ गयेतब गंगा ने कहा, "हे राजन्! मैं जह्नु ऋषि की पुत्री गंगा हूँ औरआपसे विवाह - [कुंती का त्याग](https://bhaktisatsang.com/kunti-ka-tyag-katha/) - कुंती का त्याग | Kunti Ka Tyag पाण्डव अपनी मां कुंती के साथ इधर से उधर भ्रमण कर रहे थे| वे ब्राह्मणों कावेश धारण किए हुए थे| भिक्षा मांगकर खाते थे और रात में वृक्ष के नीचे सो जायाकरते थे| भाग्य और समय की यह कैसी अद्भुत लीला है| जो पांडव हस्तिनापुरराज्य के भागीदार हैं और जो सारे जगत को अपनी मुट्ठी में करने में समर्थ हैं, उन्हीं को आज भिक्षा पर जीवन-यापन करना पड़ रहा है| दोपहर के बाद का समय था| पांडव अपनी मां कुंती के साथ वन के मार्ग से आगे बढ़ते जा रहे थे| सहसा उन्हें वेदव्यास जी दिखाई पड़े| कुंती दौड़कर वेदव्यास जी के चरणों में गिर पड़ी| उनके चरणों को पकड़कर बिलख-बिलख कर रोने लगी| उसने अपने आंसुओं - [कहानी पाटलिपुत्र की](https://bhaktisatsang.com/story-of-patliputra/) - कहानी पाटलिपुत्र की : Story Of patliputra बहुत समय पहले हरिद्वार के कनखल क्षेत्र में एक दक्षिण भारतीयब्राह्मण रहता था| उसके तीन बेटे थे| युवा होने पर ब्राह्मण ने उन्हेंविद्या प्राप्त करने के लिए राजगृह भेज दिया| जब वे तीनों अपनी शिक्षा पूरी करके घर लौटे तो कुछ ही दिन पश्चात उनके पिता कादेहांत हो - [भाई दूज व्रत कथा](https://bhaktisatsang.com/bhai-dooj-katha/) - भाई दूज व्रत कथा | Bhai Dooj Katha भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह के प्रतीक का पर्व भाई दूज की कथा इस प्रकार से है- भगवान सूर्यदेव की पत्नी का नाम छाया था । उसकी कोख से यमराज तथा यमुना का जन्म हुआ । यमुना अपने भाई यमराज से बडा स्नेह करती थी । - [सच्चा दानवीर](https://bhaktisatsang.com/saccha-danveer/) - सच्चा दानवीर | Saacha danveer एक बार अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण से कहा, 'मैंने आज तक संसार में बड़े भ्राता युधिष्ठिर जितना दानवीर कोई दूसरा नहीं देखा।' श्रीकृष्ण बोले, 'पार्थ, यह तुम्हारा भ्रम है। इस दुनिया में कई दानवीर ऐसे हैं जो बिना सोचे-समझे मूल्यवान से मूल्यवान वस्तु का दान देने से नहीं हिचकते।' श्रीकृष्ण - [संपदा देवी की कथा](https://bhaktisatsang.com/sampada-devi-katha/) - संपदा देवी की कथा | Sampada Dalvi Ki Katha एक समय की बात है। राजा नल अपनी पत्नी दमयंती के साथ बड़े प्रेम से राज्य करता था। होली के अगले दिन एक ब्राह्मणी रानी के पास आई। उसने गले में पीला डोरा बाँधा था। रानी ने उससे डोरे के बारे में पूछा तो वह बोली- - [चाणक्य नीति](https://bhaktisatsang.com/chanakya-neeti/) - चाणक्य नीति | Chankya Niti कौन थे आचार्य चाणक्य भारत के इतिहास में आचार्य चाणक्य का महत्वपूर्ण स्थान है। एक समय जब भारत छोटे-छोटे राज्यों में विभाजित था और विदेशी शासक सिकंदर भारत पर आक्रमण करने के लिए भारतीय सीमा तक आ पहुंचा था, तब चाणक्य ने अपनी नीतियों से भारत की रक्षा की थी। - [करवा चौथ व्रत की कथा](https://bhaktisatsang.com/karwa-chouth-vrat-katha/) - करवा चौथ व्रत की कथा | Karva Chauth Ki Katha करवा चौथ के दिन व्रत कथा पढ़ना अनिवार्य माना गया है। करवा चौथ की कई कथाएं है लेकिन सबका मूल एक ही है। करवा चौथ की कुछ प्रचलित कथा निम्न है- 1. प्रथम कथा महिलाओं के अखंड सौभाग्य का प्रतीक करवा चौथ व्रत की कथा - [शुक्रवार व्रत कथा](https://bhaktisatsang.com/sukravaar-vrat-katha/) - शुक्रवार व्रत कथा | Shukravar Vrat Katha शुक्रवार के दिन मां संतोषी का व्रत-पूजन किया जाता है, जिसकी कथाइस प्रकार से है- एक बुढिय़ा थी, उसके सात बेटे थे। 6 कमाने वाले थेजबकि एक निक्कमा था। बुढिय़ा छहो बेटों की रसोई बनाती, भोजनकराती और उनसे जो कुछ झूठन बचती वह सातवें को दे देती। एकदिन - [रविवार व्रत कथा](https://bhaktisatsang.com/ravivar-vrat-katha/) - रविवार व्रत कथा | Ravivar Vrat Katha सभी मनोकामनाएं पूर्ण करने वाले और जीवन में सुख-समृद्धि लाने वाले रविवार व्रत की कथा इस प्रकार से है- प्राचीन काल में किसी नगर में एक बुढ़िया रहती थी। वह प्रत्येक रविवार को सुबह उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर आंगन को गोबर से लीपकर स्वच्छ करती थी। उसके - [गुरुवार व्रत कथा](https://bhaktisatsang.com/guruvaar-vrat-katha/) - गुरुवार व्रत कथा | Guruvar Vrat Katha बृहस्पतिवार के दिन विष्णु जी की पूजा होती है।यह व्रत करने से बृहस्पतिदेवता प्रसन्न होते हैं। स्त्रियों के लिए यह व्रतफलदायी माना गया है।अग्निपुराण के अनुसारअनुराधा नक्षत्र युक्तगुरुवार से आरंभ करके सात गुरुवार व्रत करने से बृहस्पति ग्रह की पीड़ा से मुक्तिमिलती है। बृहस्पतिवार व्रत कथा: प्राचीन समय की - [अनुसुइया कथा](https://bhaktisatsang.com/anasuya-katha/) - अनुसुइया कथा | Anasuya Katha सती अनुसूईया महर्षि अत्री की पत्नी थी। जो अपने पतिव्रता धर्म के कारण सुविख्यात थी। एक दिन देव ऋषि नारद जी बारी-बारी से विष्णुजी, शिव जी और ब्रह्मा जी की अनुपस्थिति में विष्णु लोक, शिवलोक तथा ब्रह्मलोक पहुंचे। वहां जाकर उन्होंने लक्ष्मी जी, पार्वती जी और सावित्री जी के सामने - [पवनपुत्र मकरध्वज की कथा](https://bhaktisatsang.com/pawanputra-makardhvaj-katha/) - पवनपुत्र मकरध्वज की कथा : Pawan putra makardhvaj पवनपुत्र हनुमान बाल-ब्रह्मचारी थे। लेकिन मकरध्वज को उनकापुत्र कहा जाता है। यह कथा उसी मकरध्वज की है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार, लंका जलाते समय आग की तपिशके कारण हनुमानजी को बहुत पसीना आ रहा था। इसलिए लंकादहन के बाद जब उन्होंने अपनी पूँछ में लगी आग को - [जब टूटा शनिदेव का अंहकार(पिप्पलाद की कथा)](https://bhaktisatsang.com/shani-ahamkar-pipalaad/) - शनिदेव का अंहकार(पिप्पलाद की कथा) | Shani Aahamkar (Pipalaad Story) त्रेतायुग में एक बार बारिश के अभाव से अकाल पड़ा। तब कौशिक मुनि परिवार के लालन-पालन के लिए अपना गृहस्थान छोड़कर अन्यत्र जाने के लिए अपनी पत्नी और पुत्रों के साथ चल दिए। फिर भी परिवार का भरण-पोषण कठिन होने पर दु:खी होकर उन्होनें अपने - [अर्जुन का अहंकार](https://bhaktisatsang.com/arjun-ka-ahamkar/) - अर्जुन का अहंकार | Arjun Ka Ahamkar एक बार अर्जुन को अहंकार हो गया कि वही भगवान के सबसे बड़े भक्त हैं। उनकी इस भावना को श्रीकृष्ण ने समझ लिया। एक दिन वह अर्जुन को अपने साथ घुमाने ले गए। रास्ते में उनकी मुलाकात एक गरीब ब्राह्मण से हुई। उसका व्यवहार थोड़ा विचित्र था। वह - [भगवान परशुराम द्वारा २१ बार क्षत्रियो का संहार](https://bhaktisatsang.com/parsuram-dwara-kshtriyo-ka-samhar/) - भगवान परशुराम द्वारा २१ बार क्षत्रियो का संहार | Parsuram Dwara Kshtriyo ka Samhar भगवान परशुराम को भगवन विष्णु का छठवां अवतार माना जाता हैं। भगवान परशुराम के बारे में यह प्रसिद्ध है कि उन्होंने तत्कालीन अत्याचारी और निरंकुश क्षत्रियों का 21 बार संहार किया। लेकिन क्या आप जानते हैं भगवान परशुराम ने आखिर ऐसा - [राधा-कृष्ण विवाह](https://bhaktisatsang.com/radha-krishna-vivah/) - राधा-कृष्ण विवाह |Radha Krishna Vivah हम में से बहुत से लोग यही जानते हैं कि राधाजी श्रीकृष्ण की प्रेयसी थीं परन्तु इनका विवाह नहीं हुआ था। श्रीकृष्ण के गुरू गर्गाचार्य जी द्वारा रचित "गर्ग संहिता" में यह वर्णन है कि राधा-कृष्ण का विवाह हुआ था। एक बार नन्द बाबा कृष्ण जी को गोद में लिए - [कुबेर का अहंकार](https://bhaktisatsang.com/kuber-ka-ahamkar/) - कुबेर का अहंकार | Kuber Ka Ahamkar यह एक पौराणिक कथा है। कुबेर तीनों लोकों में सबसे धनी थे एकदिन उन्होंने सोचा कि हमारे पास इतनी संपत्ति है, लेकिन कम हीलोगों को इसकी जानकारी है। इसलिए उन्होंने अपनी संपत्ति काप्रदर्शन करने के लिए एक भव्य भोज का आयोजन करने की बातसोची। उस में तीनों लोकों - [भक्त और भगवान](https://bhaktisatsang.com/bhakt-and-bhagwan/) - भक्त और भगवान | Bhakt and Bhagwan तीनों लोकों में राधा की स्तुति से देवर्षि नारद खीझ गए थे। उनकी शिकायत थीकि वह तो कृष्ण से अथाह प्रेम करते हैं फिर उनका नाम कोई क्यों नहीं लेता, हरभक्त ‘राधे-राधे’ क्यों करता रहता है। वह अपनी यह व्यथा लेकर श्रीकृष्ण के पासपहुंचे। नारदजी ने देखा कि - [गणेशजी की पौराणिक कथा](https://bhaktisatsang.com/ganesh-katha/) - गणेशजी की पौराणिक कथा | Ganesh Katha पौराणिक कथा-1 : एक समय जब माता पार्वती मानसरोवर में स्नान कर रही थी तब उन्होंने स्नान स्थल पर कोई आ न सके इस हेतु अपनी माया से गणेश को जन्म देकर 'बाल गणेश' को पहरा देने के लिए नियुक्त कर दिया। इसी दौरान भगवान शिव उधर आ - [शस्त्र और शास्त्र के महारथी – परशुराम](https://bhaktisatsang.com/parshuram-katha-hindi/) - शस्त्र और शास्त्र के महारथी – परशुराम | Parshuram Ki Katha मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम जिनका सादर नमन करते हों, उन शस्त्रधारी और शास्त्रज्ञ भगवान परशुराम की महिमा का वर्णन शब्दों की सीमा में संभव नहीं। वे योग, वेद और नीति में निष्णात थे, तंत्रकर्म तथा ब्रह्मास्त्र समेत विभिन्न दिव्यास्त्रों के संचालन में भी पारंगत थे, - [एकदंत कैसे कहलाए गणेशजी](https://bhaktisatsang.com/ekdanth-ganesh/) - एकदंत कैसे कहलाए गणेशजी | Ekdant Ganesh महाभारत विश्व का सबसे बड़ा महाकाव्य है। इसमें एक लाख से ज्यादा श्लोक हैं। महर्षि वेद व्यास के मुताबिक यह केवल राजा-रानियों की कहानी नहीं बल्कि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की कथा है। इस ग्रंथ को लिखने के पीछे भी रोचक कथा है। कहा जाता है कि - [नारायण व गजराज की कथा](https://bhaktisatsang.com/narayan-and-gajraj/) - नारायण व गजराज की कथा | Narayan And Gajraj क्षीरसागर से कौन परिचित नहीं ? माना जाता है कि इसमें भगवान विष्णु शेषनाग की शय्या पर शयन करते हैं। यह पूरा सागर पानी से नहीं शुद्ध दूध से भरा रहता है। यह भी माना जाता है कि भगवान विष्णु अपनी पत्नी लक्ष्मी के साथ क्षीर - [भगवान विष्णु जी और नारद मुनि जी](https://bhaktisatsang.com/vishnu-and-narad/) - भगवान विष्णु जी और नारद मुनि जी | Vishnu and Narad एक बार नारद मुनि जी ने भगवान विष्णु जी से पुछा, हे भगवन आप का इस समय सब से प्रिया भगत कोन है?, अब विष्णु तो भगवान है, सो झट से समझ गये अपने भगत नराद मुनि की बात, ओर मुस्कुरा कर वोले ! - [ध्रुवतारे की कथा](https://bhaktisatsang.com/dhruvatara-katha/) - ध्रुवतारे की कथा | Dhruvtara Khatha राजा उत्तानपाद ब्रह्माजी के मानस पुत्र स्वयंभू मनु के पुत्र थे। उनकी सनीति एवं सुरुचि नामक दो पत्नियाँ थीं। उन्हें सुनीति से ध्रुव एवं सुरुचि से उत्तम नामक पुत्र प्राप्त हुए। वे दोनों राजकुमारों से समान प्रेम करते थे। यद्यपि सुनीति ध्रुव के साथ-साथ उत्तम को भी अपना पुत्र - [नृसिंह जयंती व्रतकथा](https://bhaktisatsang.com/narsimha-jayanti-vrat-katha/) - नृसिंह जयंती व्रतकथा | Narsmiha Vrat Khatha हिन्दू पंचांग के अनुसारनृसिंह जयंती का व्रतवैशाख माह के शुक्ल पक्षकी चतुर्थी तिथि को मनायाजाता है| पुराणों में वर्णितकथाओं के अनुसार इसीपावन दिवस को भक्तप्रहलाद की रक्षा करने केलिए भगवान विष्णु ने नृसिंह रूप में अवतार लिया था| जिस कारणवश यह दिन भगवान नृसिंह के जयंती रूप में बड़े ही धूमधाम और हर्सोल्लास के साथ मनाया जाता है| भगवान नृसिंह जयंती की व्रत कथा इस प्रकार से है- कथानुसार अपने भाई की मृत्यु का बदला लेने के लिए राक्षसराज हिरण्यकशिपु ने कठिन तपस्या करके ब्रह्माजी - [गंगा जन्म की कथा - 1](https://bhaktisatsang.com/ganga-janam-katha-1/) - गंगा जन्म की कथा - 1 | Ganga Janam Katha ऋषि विश्वामित्र ने इस प्रकार कथा सुनाना आरम्भ किया, "पर्वतराज हिमालय की अत्यंत रूपवती, लावण्यमयी एवं सर्वगुण सम्पन्न दो कन्याएँ थीं। सुमेरु पर्वत की पुत्री मैना इन कन्याओं की माता थीं। हिमालय की बड़ी पुत्री का नाम गंगा तथा छोटी पुत्री का नाम उमा - [गंगा जन्म की कथा - 2](https://bhaktisatsang.com/ganga-janam-katha-2/) - गंगा जन्म की कथा - 2 | Ganga Janam Katha "जब महाराज सगर को बहुत दिनों तक अपने पुत्रों कीसूचना नहीं मिली तो उन्होंने अपने तेजस्वी पौत्रअंशुमान को अपने पुत्रों तथा घोड़े का पता लगाने केलिये आदेश दिया। वीर अंशुमान शस्त्रास्त्रों सेसुसज्जित होकर उसी मार्ग से पाताल की ओर चल पड़ाजिसे उसके चाचाओं ने बनाया - [पार्वती की युक्ति से दूर हुआ सूखा](https://bhaktisatsang.com/parvati-ki-yukti/) - पार्वती की युक्ति | Parvati Ki Yukti एक बार शिवजी और मां पार्वती भ्रमण पर निकले। उस काल में पृथ्वी पर घोर सूखा पड़ा था। चारों ओर हाहाकार मचा हुआ था। पीने को पानी तक जुटाने में लोगों को कड़ी मेहनत करना पड़ रही थी। ऐसे में शिव-पार्वती भ्रमण कर रहे थे। मां पार्वती से - 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