व्रत - त्यौहार शुभ मुहूर्त

दीपावली 2019 – महालक्ष्मी पूजन शास्त्रोक्त मंत्रो द्वारा और सम्पूर्ण पूजन विधि सामग्री

दीपावली 2019 – Deepawali Date 2019

दिवाली का त्यौहार जब आता है तो साथ में अनेक त्यौहार लेकर आता है। एक और यह जीवन में ज्ञान रुपी प्रकाश को लाने वाला है तो वहीं सुख-समृद्धि की कामना के लिये भी दिवाली से बढ़कर कोई त्यौहार नहीं होता इसलिये इस अवसर पर लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है। दिवाली का त्योहार नजदीक है, कहा जाता है कि इस दिन दीप जलाकर रोशनी करने से मां लक्ष्मी घर में आती है, जिस घर से मां अधिक प्रसन्न होती है, उन्हें कभी भी धन की कमी नहीं होती| अगर ‌दिवाली वाले दिन मां लक्ष्मी को प्रसन्न करना हो तो नीचे लिखी इन 33 सामग्रियों के साथ मां लक्ष्मी के साथ-साथ भगवान विष्‍णु, भगवान गणेश और भगवान कुबेर की भी पूजा करें |

दिवाली कब है – Diwali Kab Hai

  • दीपावली 2019 -27 अक्टूबर, 2019
  • लक्ष्मी पूजा मुहूर्त– 17:57 से 19:53
  • प्रदोष काल– 17:36 से 20:11
  • वृषभ काल– 18:42 से 20:37
  • अमावस्या तिथि आरंभ– 12:23 (27 अक्तूबर)
  • अमावस्या तिथि समाप्त– 09:08 (28 अक्तूबर)

महालक्ष्मी मंत्र – Mahalakshmi Mantra

|| ऊं अपवित्र: पवित्रोवा सर्वावस्थां गतोऽपिवा. : स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं बाह्याभ्यन्तर: || 

इस मंत्र से खुद पर और आसन पर 3-3 बार कुशा और पुष्पादि से छीटें लगाएं |

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महालक्ष्मी पूजन विधि 2019 – Mahalakshmi Pujan Vidhi 

माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिये इस दिन को बहुत ही शुभ माना जाता है। घर में सुख-समृद्धि बने रहे और मां लक्ष्मी स्थिर रहें इसके लिये दिनभर मां लक्ष्मी का उपवास रखने के उपरांत सूर्यास्त के पश्चात प्रदोष काल के दौरान स्थिर लग्न (वृषभ लग्न को स्थिर लग्न माना जाता है) में मां लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिये। लग्न व मुहूर्त का समय स्थान के अनुसार ही देखना चाहिये।

स्कंद पुराण के अनुसार कार्तिक अमावस्या के दिन प्रात: काल स्नान आदि से निवृत्त होकर सभी देवताओं की पूजा करनी चाहिए। इस दिन संभव हो तो दिन में भोजन नहीं करना चाहिए। घर में शाम के समय पूजा घर में लक्ष्मी और गणेश जी की नई मूर्तियों को एक चौकी पर स्वस्तिक बनाकर तथा चावल रखकर स्थापित करना चाहिए। मूर्तियों के सामने एक जल से भरा हुआ कलश रखना चाहिए। इसके बाद मूर्तियों के सामने बैठकर हाथ में जल लेकर शुद्धि मंत्र का उच्चारण करते हुए उसे मूर्ति पर, परिवार के सदस्यों पर और घर में छिड़कना चाहिए।

माता लक्ष्मीजी के पूजन की सामग्री अपने सामर्थ्य के अनुसार होना चाहिए। इसमें लक्ष्मीजी को कुछ वस्तुएँ विशेष प्रिय हैं। उनका उपयोग करने से वे शीघ्र प्रसन्न होती हैं। इनका उपयोग अवश्य करना चाहिए। वस्त्र  में इनका प्रिय वस्त्र लाल-गुलाबी या पीले रंग का रेशमी वस्त्र है।

निचे दी गयी सामग्रियों का प्रयोग करते हुए पूरे विधि- विधान से लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा करनी चाहिए। इनके साथ- साथ देवी सरस्वती, भगवान विष्णु, काली मां और कुबेर देव की भी विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। पूजा करते समय 11 छोटे दीप तथा एक बड़ा दीप जलाना चाहिए।

महालक्ष्मी पूजन सामग्री – Mahalaxmi Puja Samagri

मां लक्ष्मी की पूजा में कलावा, रोली, सिंदूर, एक नारियल, अक्षत, लाल वस्त्र , फूल, पांच सुपारी, लौंग, पान के पत्ते, घी, कलश, कलश के लिए आम का पल्लव, चौकी, समिधा, हवन कुण्ड, हवन सामग्री, कमल गट्टे, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल), फल, बताशे, मिठाईयां, पूजा में बैठने हेतु आसन, हल्दी , अगरबत्ती, कुमकुम, इत्र, दीपक, रूई, आरती की थाली, कुशा, रक्त चंदनद, श्रीखंड चंदन पूजन सामग्री का इस्तेमाल करें |

महालक्ष्मी पूजन के मंत्र – Lakshmi Pujan Mantra

मां लक्ष्मी की पूजा के दौरान इस मंत्र के द्वारा उन्हें रक्तचन्दन समर्पण करना चाहिए-

रक्तचन्दनसम्मिश्रं पारिजातसमुद्भवम् |
मया दत्तं महालक्ष्मि चन्दनं प्रतिगृह्यताम् ||
ॐ महालक्ष्म्यै नमः रक्तचन्दनं समर्पयामि |

मां लक्ष्मी की पूजा के दौरान इस मंत्र के द्वारा उन्हें दुर्वा समर्पण करना चाहिए-

क्षीरसागरसम्भते दूर्वां स्वीकुरू सर्वदा ||
ॐ महालक्ष्म्यै नमः दूर्वां समर्पयामि |

इस मंत्र के द्वारा मां लक्ष्मी को अक्षत समर्पण करना चाहिए-

अक्षताश्च सुरश्रेष्ठ कुंकुमाक्ताः सुशोभिताः |
मया निवेदिता भक्त्या गृहाण परमेश्वरि ||
ॐ महालक्ष्म्यै नमः | अक्षतान समर्पयामि ||

इस मंत्र के द्वारा मां लक्ष्मी को पुष्प माला समर्पण करना चाहिए-

माल्यादीनि सुगन्धीनि मालत्यादीनि वै प्रभो |
ॐ मनसः काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि |
ॐ महालक्ष्म्यै नमः | पुष्पमालां समर्पयामि ||

इस मंत्र के द्वारा मां लक्ष्मी को आभूषण समर्पण करना चाहिए-

त्नकंकणवैदूर्यमुक्ताहाअरादिकानि च |
सुप्रसन्नेन मनसा दत्तानि स्वीकुरूष्व भोः || ॐ
क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम् |
अभूतिमसमृद्धि च सर्वां निर्णुद मे गृहात् || ॐ महालक्ष्म्यै नमः | आभूषण समर्पयामि |

इस मंत्र के द्वारा माता लक्ष्मी को वस्त्र समर्पण करना चाहिए-

दिव्याम्बरं नूतनं हि क्षौमं त्वतिमनोहरम् | दीयमानं मया देवि गृहाण जगदम्बिके ||
ॐ उपैतु मां देवसुखः कीर्तिश्च मणिना सह | प्रादुर्भूतोस्मि राष्ट्रेस्मिन कीर्तिमृद्धि ददातु मे ||

इस मंत्र के द्वारा मां लक्ष्मी को स्नान हेतु घी अर्पित करना चाहिए-

ॐ घृतं घृतपावानः पिबत वसां वसापावानः पिबतान्तरिक्षस्य हविरसि स्वाहा |
दिशः प्रदिश आदिशो विदिश उद्धिशो दिग्भ्यः स्वाहा ||
ॐ महालक्ष्म्यै नमः घृतस्नानं समर्पयामि |

मां लक्ष्मी की पूजा में इस मंत्र के द्वारा उन्हें जल समर्पण करना चाहिए-

मन्दाकिन्याः समानीतैर्हेमाम्भोरूहवासितैः |
स्नानं कुरूष्व देवेशि सलिलैश्च सुगन्धिभिः ||
ॐ महालक्ष्म्यै नमः स्नानं समर्पयामि |

इस मंत्र के द्वारा मां लक्ष्मी को आसन समर्पण करना चाहिए-

तप्तकाश्चनवर्णाभं मुक्तामणिविराजितम् | अमलं कमलं दिव्यमासनं प्रतिगृह्यताम् ||
ॐ अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रमोदिनीम् | श्रियं देवीमुपह्वये श्रीर्मा देवी जुषताम् ||

इस मंत्र के द्वारा मां लक्ष्मी का आवाहन करना चाहिए-

सर्वलोकस्य जननीं सर्वसौख्यप्रदायिनीम |
सर्वदेवमयीमीशां देवीमावाहयाम्यहम् ||
ॐ तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम् |
यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम् ||

प्रेम, सद्भावना और प्रकाश के पर्व दीवाली के शुभावसर पर भक्ति सत्संग टीम की तरफ से आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं और हम कामना करते हैं कि आपका जीवन में खुशिया और ऐश्वर्य हमेश बना रहे।

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