व्रत - त्यौहार शुभ मुहूर्त

भाई दूज 2019: जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पौराणिक कथा

भाई दूज 2019 – Bhai Dooj 2019

29 अक्टूबर 2019 कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के लिये भाई दूज 2019 का पर्व बडी धूमधाम से मनाया जायेगा, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और स्नेह का प्रतीक ये त्योहार भैया दूज दिवाली के अगले दिन या दूसरे दिन मनाया जाता है, ये त्योहार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को मनाया जाता है. इस दिन बहनें अपनी भाइयों के रोली और अक्षत से तिलक करके उनके उज्जवल भविष्य की कामना करती हैं, रक्षा बंधन की तरह ही भैया दूज का भी अपना ही महत्व है, इसे भाई बहन के प्यार और त्याग के त्योहार के रूप में मनाया जाता है. हिंदू कैलेंडर के मुताबिक भैया दूज कार्तिक के महीने में मनाया जाता है |

भाई दूज पूजा विधि – Bhai Dooj Puja Vidhi

  • भैया दूज के दिन बहनें आसन पर चावल के घोल से चौक बनाएं.
  • रोली, चांडाल, चावल, घी का दिया, मिष्ठान से थाल सजाएं
  • कद्दू के फूल, सुपारी, मुद्रा हाथों पर रख कर धीरे-धीरे हाथों पर पानी छोड़ें.
  • भाई के माथे पर तिलक लगाएं
  • भाई, बहन के लिए कुछ उपहार दें
  • भाई की लंबी उम्र की कामना करें
  • इसके बाद बहन भाई के मस्तक पर तिलक लगाकर कलावा बांधे और भाई के मुंह में मिठाई, मिश्री और माखन लगाएं

भाई दूज (यम द्वितीय) 2019

वर्ष 2019 में भाई दूज 29 अक्टूबर 2019,  मंगलवार को मनाई जाएगी।

भैया दूज 2019 शुभ मुहूर्त

  • भाई दूज तिथि – मंगलवार, 29 अक्टूबर 2019
  • भाई दूज तिलक मुहूर्त – 13:11 से 15:23 बजे तक (29 अक्टूबर 2019)
  • द्वितीय तिथि प्रारंभ – 21:07 बजे से (29 अक्टूबर 2019 )
  • द्वितीय तिथि समाप्त – 21:20 बजे तक (30 अक्टूबर 2019 )

भैया दूज पौराणिक कथा 

भगवान सूर्यदेव और उनकी पत्नी छाया से यमराज तथा यमुना का जन्म हुआ था। यमुना और यमराज में बहुत स्नेह था| मृत्युदेव यमदेव सदैव प्राण हरने में ही व्यस्त रहते है| उधर यमुना भाई यमराज को निरंतर अपने घर आने आने का निमंत्रण देती रहती थी| एक दिन कार्तिक शुक्ल की द्वितीय तिथि पर यमुना ने यमराज को अपने घर आने के लिए वचनबद्ध कर दिया |

चूंकि यमराज मृत्युदेव है इसलिए वे इस बात से भली भांति अवगत थे कि उन्हें कोई कभी भी अपने घर आने का निमंत्रण नहीं देगा| और यमुना उतने स्नेह, सद्भावना से उन्हें बुला रही है| यमराज ने सोचा कि उन्हें अपनी बहन के प्रति यह धर्म निभाना ही है| यमराज को अपने घर आते देख यमुना अत्यंत प्रसन्न हुई| उन्होंने स्नानादि कर पूजन किया और भाई के समक्ष व्यंजन परोस दिए| यमुना के इस आतिथ्य सत्कार से प्रसन्न होकर यमराज ने अपनी बहन से वर मांगने के लिए कहा |

यमुना ने यमराज से कहा कि वह प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि में उनके घर आया करे| साथ ही उन्होंने यह कहा कि उनकी तरह कोई भी बहन इस दिन यदि अपने भाई का विधिपूर्वक तिलक करे, तो उसे यमराज यानि मृत्यु का भय ना हो| यमराज ने मुस्कराते हुए तथास्तु कहा और यमुना को वरदान देकर यमलोक लौट आये| तब से लेकर आजतक हिन्दू धर्म में यह परंपरा चली आ रही है |

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